Vatican Radio HIndi

Archive for June 6th, 2018|Daily archive page

पवित्र आत्मा में कलीसिया का विकास

In Church on June 6, 2018 at 3:47 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 02 मई 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को दृढ़ीकरण संस्कार पर अपनी धर्मशिक्षा देते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

दृढ़ीकरण संस्कार पर अपना चिंतन जारी रखते हुए आज हम पवित्र आत्मा के कृपादानों की चर्चा करेंगे जो हमें जीवन में सुदृढ़ होने हेतु मदद करता है जिसके फलस्वरूप हम दूसरों के लिए एक उपहार बनते हैं। पवित्र आत्मा की कृपा द्वारा “मैं” की सोच “हम” में परिणत होता है जो हमारी सामुदायिकता के साथ-साथ समाज की भलाई को दिखलाती है जहाँ हम एक साथ रहते हैं।

संत पापा ने कहा कि दृढ़ीकरण संस्कार के द्वारा हम कलीसिया के रहस्यात्मक शरीर में और अधिक गहराई से संयुक्त होते हैं। संसार में कलीसिया का प्रेरितिक कार्य इस भांति हमारे जीवन के द्वारा पूरा होता है। हमें कलीसिया को एक सजीव शरीर के रुप में देखना चाहिए न कि एक अमूर्त और दूर की सच्चाई स्वरुप, जो विश्वासियों के द्वारा बनती है जिन्हें हम अपने जीवन में जानते और जिनके साथ हम चलते हैं। दृढ़ीकरण संस्कार हमें विश्वव्यापी कलीसिया के साथ संयुक्त करता है जो सारी दुनिया में फैली हुई है लेकिन यह एक स्थानीय विशेष कलीसिया में क्रियाशील है जिसके मुख्य अधिकारी धर्माध्यक्ष हैं जो प्रेरितों के उत्तराधिकारी हैं।

संत पापा ने कहा यही कारण है दृढ़ीकरण संस्कार के मुख्य अनुष्ठाता धर्माध्यक्ष होते हैं। वास्तव में लातीनी कलीसिया में इस संस्कार का अनुष्ठान साधरणतः धर्माध्यक्ष के द्वारा होता है जहाँ वे दीक्षार्थियों को इस बात की याद दिलाते हैं कि “वे कलीसिया के साथ और अधिक निकटता से जुड़ते तथा उसके प्रेरितिक उत्पत्ति और येसु मसीह के प्रेरितिक कार्यों का साक्ष्य देने हेतु प्रेषित किये जाते हैं।”

यह कलीसियाई दीक्षांत धर्मविधि के अंतिम भाग में मिलने वाली शांति के चिन्ह से भांलि-भांति निरुपित होती है। वास्तव में, धर्माध्यक्ष हर एक दीक्षार्थी को कहते हैं, “ख्रीस्त की शांति आप के साथ हो।” संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि यह हमें पास्का की संध्या, मुक्तिदाता येसु ख्रीस्त के द्वारा चेलों को किये गये संबोधन की याद दिलाती है जो उन्हें पवित्र आत्मा से परिपूर्ण कर देता है।(यो.20.19-23) यह वाक्य हमारे लिए उस चिन्ह को उदीप्त करता है जहाँ कलीसिया धर्माध्यक्ष और विश्वासियों को एकता के सूत्र में पिरोती है। धर्माध्यक्ष से शांति को प्राप्त करना दीक्षार्थियों को कलीसिया के अन्दर और बाहर बाधाओं की उपस्थिति में भी बिना थके शांति स्थापना हेतु कार्य करने को प्रेरित करता है। शांति को प्राप्त करना हमें पल्लियों में शांति को बढ़ावा देने, दूसरों के साथ एकता में बने रहने और सबों के साथ भ्रातृत्व पूर्ण व्यवहार करने को समर्पित करता है। ईश्वर की शांति को ग्रहण करना हमें उनके साथ सहयोग करने हेतु समर्पित करता है जो हमसे अलग हैं इस भांति हम अपने में इस बात को अनुभव करते हैं कि ख्रीस्तीय समुदाय अलग-अलग होते हुए भी अपने में पूरक और धनी है। पवित्र आत्मा अपने में सृजनहार हैं। उनकी कृपा हमारे जीवन को स्वरसंगति प्रदान करती है न कि एकस्वरता। हम सभी जो उनकी मुहर से अंकित किये गये हैं वे हमें अपने कार्यों को आगे बढ़ाने हेतु प्रेरित करते हैं।

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि हम सभी दृढ़ीकरण संस्कार एक मर्तबा ग्रहण करते हैं लेकिन आध्यात्मिकता का आयाम पवित्रता में सुदृढ़ होता रहता है। हम सुसमाचार के मनमोहक संदेश से प्रेरित हो कर अपने पवित्र जीवन द्वारा इसकी  खुशबू को सर्वत्र फैलाने में नहीं थकते हैं। “हम पवित्र आत्मा की शक्ति से जो हममें निवास क्रियाशील रहती है अपने घमंड, सुस्तीपन और स्वार्थ जैसी कमजोरियों से मुक्ति दिलाती है।”

संत पापा ने कहा “हममें से कोई भी सिर्फ अपने लिए दृढ़ीकारण संस्कार ग्रहण नहीं करता लेकिन हम इसके द्वारा दूसरों के साथ आध्यात्मिक जीवन में विकास करते हैं। केवल इस भांति हम अपने को खोलते और अपने से बाहर निकलते हुए दूसरों के संग मिलते हैं। यह सच्चे रुप में हमारा विकास करता है। ईश्वर से मिले उपहारों को हम अपने जीवन में दूसरों के साथ बांटने के लिए बुलाये जाते हैं न कि डर कर अपने में छुपाये रखते जैसा की अशर्फियों के दृटांत में हम सुनते हैं। (मत्ती. 25. 14-30) “हमें पवित्र आत्मा की शक्ति की जरुरत है जिससे हम अपने में भयभीत और हिसाब-किताब करने वाले न रहें जो कि केवल सुरक्षित सीमाओं के अन्दर चलने को अभ्यस्त होते हैं। उन्होंने कहा, “हम इस तथ्य को याद करें कि जो अपने में बंद रहता वह अंत में खराब हो जाता और बदबू देता है मैं आप से निवेदन करता हूँ कि आप पवित्र आत्मा को अपने में कैद न रखें, उनके द्वारा आने वाली शक्ति आप को स्वतंत्रता से विचरन करने में मदद करे जिससे आप ईश्वरीय प्रेममय जीवन को अपने भाई-बहनों के साथ बांट सकें।” पवित्र आत्मा हमें अपने प्रेरितिक कार्यों को करने हेतु साहस प्रदान करें जिससे हम अपने कर्मों और वचनों के द्वारा सुसमाचार का प्रचार अपने जीवन में आने वाले के बीच कर सकें।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासी समुदाय का अभिवादन किया।

उन्होंने कहा कि हम इस शुक्रवार को येसु ख्रीस्त के अति पवित्र हृदय का महोत्सव मनायेंगे। मैं आप से आग्रह करता हूँ कि आप जून के इस पूरे महीने में येसु के पवित्र हृदय से विनय करें और अपने पुरोहितों को अपनी प्रेमपूर्ण निकटता द्वारा सहायता करें जिससे वे येसु ख्रीस्त के हृदय, करूणामय प्रेम की निशानी बन सकें।

उन्होंने विशेष रुप से युवाओं, बुजुर्गों, बीमारों और नव विवाहितों की याद करते हुए कहा कि आप येसु ख्रीस्त के पवित्र हृदय से अपने लिए आध्यात्मिक भोजन और पेय प्राप्त करें जिससे आप उनके दिव्य प्रेम से पोषित ईश्वरीय प्रजा बने रहें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के साथ हे हमारे पिता प्रार्थना का पाठ किया और सबों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

 


(Dilip Sanjay Ekka)

Advertisements

संत पापा के जून महीने की प्रार्थना का मतलब : ‘समावेशी सामाजिक नेटवर्क के लिए’

In Church on June 6, 2018 at 3:46 pm

वाटिकन सिटी,बुधवार 6 जून 2018 (रेई) : संत पापा फ्रांसिस ने मंगलवार 5 जून को जून महीने के लिए अपनी प्रार्थना के मतलब के साथ एक वीडियो संदेश जारी किया, जो इस महीने “समावेशी और सम्मानजनक सामाजिक नेटवर्क के लिए” है।

जून 2018 के महीने के लिए अपनी प्रार्थना के मतलब में, संत पापा फ्राँसिस ने कहा: “आइए हम एक साथ प्रार्थना करें कि सामाजिक नेटवर्क उस समावेश के लिए काम कर सके जो दूसरों को उनके मतभेदों का सम्मान करते हैं।”

प्रत्येक महीने के लिए प्रार्थना का विवरण देने वाला एक वीडियो संदेश जारी करना संत पापा फ्राँसिस की परंपरा बनती जा रही है। संत पापा का संदेश निम्नलिखित है:

इंटरनेट ईश्वर का उपहार है, लेकिन यह भी एक बड़ी ज़िम्मेदारी है।

संचार प्रौद्योगिकी, इसके स्थान, इसके उपकरणों ने इतने सारे लोगों के लिए क्षितिज का विस्तार किया है, एक फैल गया है।

यह मुलाकात और एकजुटता के लिए अत्यधिक संभावनाएं प्रदान करता है।

डिजिटल नेटवर्क अलगाव का स्थान नहीं हो सकता। यह मानव समृद्धि का एक ठोस जगह हो सकता है।

आइए हम एक साथ प्रार्थना करें कि सोशल नेटवर्क्स उस समावेश की दिशा में काम करे जो दूसरों को उनके मतभेदों का सम्मान करता है।

संत पापा की विश्वव्यापी प्ररिताई  प्रार्थना को नेटवर्क ने मानवता के सामने आने वाली चुनौतियों के संबंध में विश्वव्यापी प्रसार में सहायता करने के लिए “संत पापा का वीडियो” की पहल को विकसित किया।

 


(Margaret Sumita Minj)

“जो प्रार्थना करता है उसे मुक्ति मिलती है”: संत पापा फ्राँसिस की प्रस्तावना

In Church on June 6, 2018 at 3:43 pm


वाटिकन सिटी, बुधवार 6 जून 2018 (रेई) : “मेल-मिलाप का संस्कार के दौरान किसी को अपने पापों से शर्मिंदा नहीं होना चाहिए।”  संत पापा फ्राँसिस ने डॉन जॉकोमो तन्तार्डिनी द्वारा लिखी “30 जोरनी” अर्थात “30 दिन” पत्रिका की पुस्तिका के छठे संस्करण के लिए प्रस्तावना लिखी।

“इसलिए आइये, प्रभु येसु । मेरे पास आइये, मेरी तलाश कीजिए, मुझे ढूँढिये, मुझे अपनी बाहों में भर लीजिये, मुझे अपने पास बुलाइये”। संत पापा फ्राँसिस ने 2001 में डॉन जॉकोमो तन्तार्डिनी द्वारा लिखी गई “कि प्रेगा सी सालवा” अर्थात “जो प्रार्थना करता है उसे मुक्ति मिलती है” : पुस्तिका के छठे संस्करण की प्रस्तावना में संत अम्ब्रोजो की इस प्रार्थना को याद किया, “ख्रीस्तीय परंपरा की सरल प्रार्थनाओं को इकट्ठा करना जो एक अच्छा पापस्वीकार करने में मददगार है।”

ईश्वर ही पहल करते है – संत पापा लिखते हैं, “2012 में डॉन तन्तार्डिनी की मृत्यु  हुई वे हमें बाल सुलभ हृदय की याद दिलाते हैं। कि उनकी पुस्तिका “ईश्वर ही पहल करते है,उनके बिना हम कुछ भी नहीं कर सकते” का अनुवाद अनेक भाषाओं में की गई  और पत्रिका “30 जोरनी” द्वारा प्रकाशित की गई। उनकी पुस्तिका दुनिया के कई काथलिक मिशन केन्द्रों में हुँच गई है। ,

शर्म एक कृपा है – पुस्तिका के उद्देश्यों में से एक के दवारा संत पापा खुद को याद करते हैं और सुझाव देते है कि “हमें अच्छा पापस्वीकार किस तरह से करना है।” अपने किये पापों की शर्मिंदगी से शर्मिंदा हुए बिना, अपने विवेक के आत्म-परीश्रण से लेकर अपने दवारा किये गये पापों के लिए ईमानदारी से दुखित होना “…” क्योंकि शर्म भी एक कृपा है अगर यह हमें क्षमा मांगने के लिए प्रेरित करती है।”

ईश्वर हमारी खुशी चाहते हैं – संत पापा लिखते हैं, “पश्चाताप का संकेत ईश्वर के लिए पर्याप्त है पापस्वीकार पीठिका में हमें अपने पापों को दीन मन से बतलाना चाहिए, ईश्वर हमारे पापों का लेखा नहीं लेते। उनके लिए तो अपने किये पापों के प्रति दुखित होना ही काफी है ईश्वर हमारी आत्मा को यातना नहीं देना चाहते, वे हमें गले लगाना चाहते हैं। वे हमारी खुशी चाहते हैं।”

दया धैर्य के साथ इंतजार करती है – अक्सर डॉन तांतार्डिनी यह कहा करते थे कि “जो लोग अच्छी तरह पापस्वीकार करते हैं वे पवित्र हो जाते हैं”, सब कुछ ईश्वर के हाथों में है। “ईश्वर धैर्यपूर्वक अपने उड़ाव बेटे की वापसी का इंतजार करते हैं। वास्तव में वे इस बात की उम्मीद करते हैं, कि उसका प्रेम और कोमलता उसके दिल को छूवे और उसमें वापस लौटने की इच्छा जागृत हो और वह फिर से चलना शुरू करने में सक्षम हो।”


(Margaret Sumita Minj)

संयुक्त राष्ट्र का गर्भनिरोधक अभियान ‘रोहिंग्या शरणार्थियों’ का सम्मान करने में असफल

In Church on June 6, 2018 at 3:41 pm

ढाका, बुधवार, 6 जून, 2018 (सीएनए) : “संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाले अभियान ने बांग्लादेश के शिविरों में रोहिंग्या शरणार्थियों को गर्भनिरोधक प्रदान करके पहले से ही कमजोर समुदाय के विचारों का सम्मान करने में असफल रहा।” एक मानवाधिकार समूह ने कहा

वर्ल्ड यूथ एलायंस के निदेशक नदजा वोल्फ ने कहा, “मैं गहराई से चिंतित हूं, लेकिन आश्चर्यचकित नहीं हूं कि मानवाधिकार समूह जो मानव व्यक्ति की गरिमा को बढ़ावा देता है, यूएनएफपीए पहले से ही पीड़ित समुदाय के गहरे मूल्य को उनके लक्ष्यों में बाधा के रूप में देखता है।”

वोल्फ ने सीएनए से कहा, “रोहिंग्या महिलाओं के स्वास्थ्य देखभाल की जरुरत है जो उनके मूल्यों को कम करने के बजाय उनकी जरूरतों और सम्मानों को पूरा करती है।”

रोहिंग्या मुस्लिम जातीय समूह हैं जो बर्मा के राखीन राज्य में रहते हैं। अपने देश में सरकारी सेना और सुरक्षा बलों की हिंसा का सामना करते हुए, 660,000 से अधिक शरण के लिए पड़ोसी राज्य बांग्लादेश चले आये और वर्तमान में शिविरों में रह रहे हैं।

17 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या निधि (यूएनएफपीए) और बांग्लादेश परिवार नियोजन निदेशालय ने रोहिंग्या शरणार्थियों को लघु और दीर्घकालिक गर्भनिरोधक, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और रिकॉर्ड रखने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। अभियान शिविरों में शरणार्थियों के साथ-साथ गोलियों और कंडोम जैसे जन्म नियंत्रण के अन्य तरीकों के लिए 8,600 प्रत्यारोपण और 600 अन्य आईयूडी भी पेश कर रहा है।

हालांकि, कई शरणार्थियों ने जन्म नियंत्रण के लिए अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक आपत्तियां जताईं।

बांग्लादेश और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने गर्भनिरोधक अभियान को बढ़ावा देने के लिए कहा कि वे रोहिंग्या महिलाओं को गर्भनिरोधक स्वीकार करने के लिए समझाने के प्रयास में दाईयों, स्वयंसेवकों और चिकित्सकों की भर्ती कर रहे हैं।

बांग्लादेश के परिवार नियोजन अधिकारी काजी मुस्तफा सरवार ने कहा,” हम उन आठ भाषा अनुवादकों की भर्ती करने की योजना बना रहे हैं जो उन्हें [गर्भनिरोधक के बारे में] मनाने के लिए परामर्श प्रदान कर सकते हैं।”

सरवार ने कहा, “यह हमारी मुख्य चुनौती है, क्योंकि हमने अभी तक उन्हें आश्वस्त नहीं किया है,” उन्होंने कहा कि जब हमारे कर्मचारियों ने कंडोम दिया तो कई रोहिंग्या महिलाओं ने फेंक दिया, “हालांकि अन्य ने शॉर्ट-एक्टिंग इंजेक्शन योग्य गर्भ निरोधकों को स्वीकार किया है।

कुछ शरणार्थियों ने कहा है कि वे चाहते थे कि बड़े परिवार शिविरों में जीवित रहने के लिए मददगार हैं, जबकि अन्यों ने जन्म नियंत्रण पर धार्मिक आपत्तियों की बात उठाई। अन्य मानते हैं कि अल्पकालिक गर्भनिरोधक स्वीकार्य है, लेकिन वे किसी भी दीर्घकालिक उपकरणों को स्वीकार नहां करेंगी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बांग्लादेश में 2018 में लगभग 100,000 रोहिंग्या बच्चों के पैदा होने की उम्मीद है।

पूर्व न्यायाधीश कंधमाल न्यायिक प्रणाली में न्यायिक विफलता देखते हैं

In Church on June 6, 2018 at 3:39 pm

कोची, बुधवार 6 जून 2018 (उकान) : सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सीरियक जोसेफ ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के लिए कारावास में बंद के सात ख्रीस्तीयों की अपील की सुनवाई में अनावश्क देरी की पुष्टि की है, जिसके चलते 2008 में ओडिशा के कंधमाल जिले में खून और तबाही हुई थी।

“यह (देरी) न्यायिक प्रणाली की विफलता है। न्यायिक प्रक्रिया में, कई कारणों से अपील में देरी हो सकती है। लेकिन इस मामले में इसे लंबित रखने के लिए कोई (तकनीकी) कारण नहीं हैं। ऐसा लगता है कि जानबूझकर देरी हो रही है, शायद यह एक उपयुक्त न्यायाधीश के सामने लाया गया है।” न्यायमूर्ति जोसेफ ने टिप्पणी की।

न्यायमूर्ति जोसेफ 4 जून को कोच्चि में पत्रकार एंटो अककारा का मलयालम पुस्तक ‘निरपाधिकल थडवाड़ायिल’ का अंग्रेजी अनुवाद (इन्नोसेंट इम्प्रिससन्ड) अर्थात (निरपराध कैदी) के विमोचन के अवसर पर   बोल रहे थे।  पत्रकार एंटो अककारा ने खोजी पुस्तक ‘हू किल्ड स्वामी लक्ष्मणानंद’ भी लिखा है।

न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा, “लेखक ने चौंकाने वाले तथ्यों सामने लाया है कि यहां मानसिक रूप से अस्वस्थ अशिक्षित भी जेल में है। पुस्तक में लाए गए सबूत कंधमाल में न्याय की उपहासात्मक रचना का खुलासा करते हैं।”

न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा कि “साहस के साथ एकत्रित किये गये चौंकाने वाले साक्ष्य प्रस्तुत करने वाली  यह पुस्तक भारत में जांच पत्रकारिता में एक मील का पत्थर है। मुख्यधारा की मीडिया ने कंधमाल को “दबाव, आग्रह या उत्पीड़न के डर के कारण” अनदेखा कर दिया है।

केरल उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी के शमसुद्दीन ने सभा को बताया कि “कंधमाल वह काम है जिसे हम फासीवाद कहते हैं।”

न्यायमूर्ति शमसुद्दीन ने विस्तार से बताया कि कथित तौर पर बेटीकोला के काथलिक पल्ली द्वारा जन्माष्टमी रात पर स्वामी को मारने के लिए झूठा प्रस्ताव, निर्दोष ख्रस्तीयों के दोष को सुनिश्चित करने के लिए सुनवाई अदालत में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया था।

न्यायमूर्ति शमसुद्दीन ने बताया, दोषी करार करने के बाद, “उसी अधिकारी ने पूछताछ आयोग (न्यायमूर्ति ए एस नायडू) को बताया कि प्रस्ताव जाली था। फिर भी निर्दोषों की अपील स्थगित कर दी गई। यह चौंकाने वाली बात है।”


(Margaret Sumita Minj)

मसीह से प्रेम करना दिल का मनोभाव है, संत पापा फ्राँसिस

In Church on June 6, 2018 at 3:37 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 6 जून 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 6 जून को ट्वीट प्रेषित कर सभी ख्रीस्तीयों को येसु मसीह के प्रेम में अपने को समर्पित करने की प्रेरणा दी।

संदेश में उन्होंने लिखा,“मसीह से प्रेम करना क्षणिक भावना मात्र नहीं है। यह दिल का मनोभाव है जो उनकी इच्छानुसार जीवन जीने से प्रकट होता है।”

संत योहन के सुसमाचार में हम पाते हैं,“ जो मेरी आज्ञाएँ जानता है और उसका पालन करता है वही मुझे प्यार करता है।(14,21)


(Margaret Sumita Minj)

आरडीकांगो में यूनिसेफ इबोला जागरूकता अभियान के तहत 300,000 तक पहुंच गई है

In Church on June 6, 2018 at 3:35 pm

जेनेवा, बुधवार 6 जून 2018 (रेई) : संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपात निधि (यूनिसेफ) ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि घातक ईबोला वायरस अफ्रीका में वापस लौट आया है। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के उत्तर-पश्चिम श्रेत्र को इबोला प्रकोप घोषित किया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि एक नर्स की इस बीमारी से मृत्यु हो गई है और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इसके 17 संदिग्ध मामले सामने आये हैं।

संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपात निधि और उसके सहयोगी इबोला प्रकोप जागरूकता अभियान के तहत 300,000 से अधिक लोगों तक पहुंच गए हैं।

आरडीकांगो के स्वास्थ्य मंत्री ओली इलुंगा ने कहा, “यह स्थिति हमें चिंतित करती है और देश में तत्काल ऊर्जावान अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करने वाली प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।” अफ्रीका के डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय निदेशक, डॉ मत्शिदीसो मोतेई ने कहा: “हम जानते हैं कि इस प्रकोप को खत्म करने के लिए व्यापक और समन्वित प्रतिक्रिया की आवश्यकता होगी।”

डब्ल्यूएचओ के अफ्रीका में क्षेत्रीय निदेशक मात्शिदिसो मोइती ने 13 मई को किनशासा का दौरा किया, जहां उन्होंने राष्ट्रीय अधिकारियों और अन्य साझेदारों से इबोला के प्रकोप पर तत्काल लगाम लगाने के लिए त्वरित, प्रभावी और परिस्थिति के अनुकूल कार्रवाई करने पर चर्चा की।

जागरूकता अभियान का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में 800,000 से अधिक लोगों तक पहुंचना है। इस अभियान की गतिविधियों में शामिल हैं : सामुदायिक कार्यकर्ताओं द्वारा व्यक्तिगत रूप से दौरे , विशेष रूप से टैक्सी ड्राइवरों, समुदाय के नेताओं,  गिरजाघरों और जनसंचार के माध्यम से इस आंदोलन को जागरूक करना।

लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में यूनिसेफ के प्रतिनिधि और 2014 – 2015 से पश्चिम अफ्रीका में ईबोला प्रकोप के दौरान यूनिसेफ के समन्वयक जोनफ्रान्को रोटिग्लियानो ने कहा, “इबोला को खत्म करने के लिए सूचना और सामाजिक आंदोलन आवश्यक है। “पश्चिम अफ्रीका में ईबोला प्रकोप के दौरान हमने महसूस किया कि रोग के फैलाव को रोकने और सुरक्षा के तरीके के बारे में जानकारी प्रसारित करने के लिए स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी बहुत आवश्यक है।”

बच्चे इबोला महामारी से बहुत जल्द प्रभावित होते हैं। 10 वायरस से प्रभावित सांदिग्ध दस व्यक्तियो में एक बच्चा है; सैकड़ों बच्चे और उनके परिवार के सदस्य हैं जो रोग से पीड़ित लोगों के संपर्क में हैं और अब उन्हें मनोवैज्ञानिक सहायता की भी आवश्यकता है।

यूनिसेफ और उसके सहयोगियों ने रोकथाम और सुरक्षा उपायों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए 2,500 से अधिक शिक्षकों और 53,000 छात्रों के साथ काम किया है, जबकि 30 युवा “संवाददाताओं” को प्रभावित क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया गया है और अब वे अपने साथियों को बीमारी के फैलने से बचने के लिए उपायों के बारे में सूचित कर रहे हैं।

इबोला प्रकोप की रोकथाम के लिए, सरकार और उसके सहयोगियों ने 1,100 से अधिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों को टीका लगाया है जो वानागता, मंदाका शहर, बिकोरो और इबोको शहर में पीड़ित लोगों के संपर्क में हैं।


(Margaret Sumita Minj)

%d bloggers like this: