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जीवन में येसु से प्रथम मुलाकात की याद का महत्व

In Church on June 7, 2018 at 4:12 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्वतिवार, 7 जून 18 (रेई)˸ वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में बृहस्पतिवार 7 जून को, ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि ख्रीस्तीय जीवन में आगे जाने के लिए हमें येसु से प्रथम मुलाकात को याद करना चाहिए।

संत पापा ने कहा, “ख्रीस्तीय यादगारी जीवन के नमक के समान है, वह पीछे मुड़ना है ताकि आगे बढ़ सकें। हमें उस पल की याद करनी चाहिए जिसमें येसु के साथ हमारी पहली मुलाकात हुई थी। हम उन लोगों की भी याद करें जिन्होंने हमें विश्वास को हस्तांतरित किया था तथा प्रेम के नियम की याद जिसको ईश्वर ने हमारे हृदयों में डाल दिया है।”

प्रवचन में संत पापा ने संत पौलुस द्वारा तिमोथी को लिखे पत्र से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जिसमें कहा गया है, “ईसा मसीह को याद करें।”

संत पापा ने कहा, “हमें येसु से मुलाकात की याद में पीछे जाना है ताकि हम बल प्राप्त कर सकें और आगे बढ़ सकें। ख्रीस्तीय स्मृति हमेशा ख्रीस्त के साथ एक मुलाकात है।”

उन्होंने कहा कि चूँकि ख्रीस्तीय स्मृति एक नमक के समान है उसके बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते। जब हम स्मृति को भूलने वाले ख्रीस्तीयों को पाते हैं तब हम देख सकते हैं कि उन्होंने ख्रीस्तीय जीवन का मिठास खो दिया है तथा वे दस आज्ञाओं का पालन तो करते हैं किन्तु येसु से मुलाकात के बिना। संत पापा ने कहा कि हमें जीवन में येसु से मुलाकात आवश्य करनी चाहिए।

संत पापा ने तीन परिस्थितियाँ बतलायीं जिनमें हम येसु से मुलाकात कर सकते हैं-

पहली मुलाकात हम अपने पूर्वजों एवं आज्ञाओं में करते हैं। इब्रानियों को लिखे पत्र में कहा गया है कि “मन-परिवर्तन के बाद उन आरम्भिक दिनों की याद करें, जब आप अत्यन्त उत्साही थे।” संत पापा ने कहा कि हम प्रत्येक के लिए एक ऐसा पल रहा है जिसमें हमने येसु से मुलाकात की है और हो सकता है कि हमने एक से अधिक बार येसु से मुलाकात की हो, जिसमें येसु ने हमें अपने आपको प्रकट किया। उन्होंने कहा कि हम उन क्षणों को न भूलें, बल्कि पीछे मुड़कर उनकी याद करें जिसमें हमने येसु से मुलाकात की थी क्योंकि इसके द्वारा हमें प्रेरणा मिलती है।

हम प्रत्येक के जीवन में ऐसा ही होता है जब हम येसु ख्रीस्त से मुलाकात करते हैं तो हमारा जीवन बदल जाता है, तब प्रभु हमें अपनी बुलाहट को प्रकट करते हैं। हमारी कठिनाईयों की घड़ी में जब प्रभु हमसे मुलाकात करते हैं तब हम उसे अपने हृदय में याद करते हैं। संत पापा ने उन अवसरों पर चिंतन करने का निमंत्रण देते हुए कहा कि वे हमारी ख्रीस्तीय यात्रा के स्रोत हैं ऐसा स्रोत जो हमें शक्ति प्रदान करते हैं।

येसु के साथ दूसरी मुलाकात की घड़ी हो सकती है पूर्वजों की याद, जिन्हें इब्रानियों के पत्र में कहा गया है, “तुम्हारे नेता जिन्होंने तुम्हें शिक्षा दी है।”

संत पापा ने कहा, “विश्वास को हमने किसी ईमेल द्वारा प्राप्त नहीं किया है किन्तु उन स्त्री पुरूषों द्वारा प्राप्त किया है जिन्हें विश्वास को हमारे लिए हस्तंतरित किया है इब्रानियों के पत्र में उनके बारे कहा गया है, उन्हें देखो वे असंख्य साक्षी हैं और वे उनसे बल प्राप्त करते हैं। उन्होंने शहादत प्राप्त की है।”

संत पापा ने स्मरण दिलाया कि जब जीवन का जल कम पड़ने लगते तो यह आवश्यक है कि हम स्रोत के पास जाएँ तथा आगे बढ़ने की शक्ति पुनः प्राप्त करें। हम अपने आप से पूछ सकते हैं, क्या मैं अपने पूर्वजों और नेताओं की याद करता हूँ। क्या मैं एक ऐसा व्यक्ति हूँ जिसकी जड़ें मजबूत हैं? अथवा क्या मैं केवल वर्तमान में जी रहा हूँ? यदि ऐसा है तो हम तुरन्त ईश्वर से कृपा मांगे कि हम अपने मूल की ओर लौट सकें, जिन्होंने विश्वास को हमारे लिए प्रदान किया है।

अंततः संत पापा ने प्रेम की आज्ञा पर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि संत मारकुस के अनुसार पहली आज्ञा है, “इस्राएल सुनो, प्रभु ही हमारा ईश्वर है।”

उन्होंने कहा कि आज्ञा प्रेम का चिन्ह है जिसको प्रभु ने हमारे लिए दिया है क्योंकि उन्होंने हमें रास्ता दिखलाया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार हम गलत रास्ते पर जाने से बच सकते हैं। आज्ञा को टालना अथवा उसे एक नियम मात्र के रूप में देखना नहीं चाहिए क्योंकि यह प्रेम का नियम है जिसे प्रभु ने हमारे हृदयों में डाला है।

संत पापा ने प्रश्न किया कि क्या हम आज्ञाओं के प्रति निष्ठावान हैं? उसे याद करते और क्या हम दुहराते हैं? कई बार ख्रीस्तीयों और यहाँ तक कि समर्पित लोगों को भी  प्रभु की दस आज्ञाओं को दुहराना मुश्किल हो जाता है।

संत पापा ने कहा कि येसु ख्रीस्त को याद करने का अर्थ है जीवन के उन क्षणों पर गौर करना जिनमें हमने प्रभु से मुलाकात की थी, कठिनाइयों की घड़ी में, पुर्वजों में और नियमों में। याद करना केवल पीछे मुड़कर देखना नहीं है बल्कि आगे की ओर बढ़ना भी है। स्मृति एवं आशा एक साथ आगे बढ़ते हैं। वे एक-दूसरे के पूरक हैं। हम येसु ख्रीस्त की याद करें जो हमारे बीच आये, हमारे लिए कीमत चुकाये तथा वे पुनः आयेंगे। वे स्मृति एवं आशा के ईश्वर हैं। वे स्मृति एवं आशा दोनों में मदद करते हैं।

संत पापा ने विश्वासियों से आग्रह किया कि वे कुछ क्षण रूक कर, इस बात पर चिंतन करें कि वह याद कैसी है जिसमें मैंने प्रभु से मुलाकात की थी, मेरे पुर्वजों की याद एवं नियमों की याद। मेरी आशा कैसा है मैं किस पर आशा करता हूँ।

प्रभु हमें याद करने एवं आशा बनाये रखने में मदद करे।


(Usha Tirkey)

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शांति हेतु प्रार्थना का आह्वान

In Church on June 7, 2018 at 4:10 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 7 जून 2018 (रेई)˸ “आप जहाँ कहीं भी हों 8 जून को 1.00 बजे सिर झुका कर शांति हेतु प्रार्थना करें।”

क्यारा संतमियेरो द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञाप्ति में कहा गया है कि इस्राएल के राष्ट्रपति सिमोन पेरेस, फिलीस्तीन के राष्ट्रपति महम्मूद अब्बास (अब्बू मजेन) एवं कुस्तुनतुनिया के प्राधिधर्माध्यक्ष बर्थोलोमियो के वाटिकन में 8 जून 2014 को, संत पापा फ्राँसिस द्वारा आयोजित शांति हेतु प्रार्थना सभा में भाग लेने की चौथीं वर्षगाँठ पर, संत पापा ने सभी विश्वासियों से शांति के लिए प्रार्थना करने का आह्वान किया है।

संत पापा के इस आह्वान का प्रत्युत्तर देते हुए काथलिक अक्शन के अंतरराष्ट्रीय मंच, काथलिक महिलाओं के संघ, इताली काथलिक अक्शन, अर्जेंटीना काथलिक अक्शन तथा अर्जेंटीना के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के न्याय एवं शांति विभाग ने अपने सदस्यों से अपील की है कि वे इस प्रार्थना में भाग लें एवं संघर्ष विराम के लिए प्रार्थना करें जिसके कारण विश्वभर में बहुत अधिक रक्तपात हो रहा है।

युवाओं की प्रेरिताई से जुड़े विभिन्न काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों एवं अंतरराष्ट्रीय लोकधर्मी संगठनों के करीब 250 प्रतिनिधि 6 से 10 जून तक पनामा में 2019 में होने वाले विश्व युवा दिवस की तैयारी हेतु एक सभा में भाग ले रहे हैं, वे भी संत पापा के इस आह्वान के अनुसार एक मिनट तक अपना सिर झुक कर शांति हेतु मौन प्रार्थना मे भाग लेंगे। इसके साथ ही इटली, अर्जेंटीना, कोरिया, चीन एवं बेलजियम के विभिन्न दलों ने शांति प्रार्थना में भाग लेने का आह्वान किया है।

रोम के विया कोनचिलात्सियोने1 में इताली काथलिक प्रमुख कार्यालय के सामने एवं अर्जेंटीना के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के कार्यालय के सामने 1.00 से 3.00 बजे तक शांति मंच, विभिन्न संगठनों के साथ शांति एवं मानव अधिकार के सम्मान पर चर्चा करेंगे।

संत पापा फ्राँसिस ने इस प्रार्थना के बारे 7 जून 2017 को आमदर्शन समारोह में कहा था कि “ख्रीस्तीयों, यहूदियों एवं मुसलमानों के लिए शांति हेतु प्रार्थना की बड़ी आवश्यकता है।”

संत पापा फ्राँसिस के आह्वान के प्रत्युत्तर में “शांति के लिए एक मिनट” को प्रोत्साहन देने वाले संगठनों ने 7 जुलाई को बारी में मध्य पूर्व की नाटकीय स्थिति के मद्देनजर प्रार्थना एवं चिंतन की तैयारी हेतु अनवरत प्रार्थना का आश्वासन दिया है।


(Usha Tirkey)

बारी में संत पापा की प्रेरितिक यात्रा का कार्यक्रम

In Church on June 7, 2018 at 4:06 pm


वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 7 जून 18 (रेई)˸ वाटिकन ने 7 जुलाई को बारी में संत पापा फ्राँसिस की एक दिवसीय प्रेरितिक यात्रा के कार्यक्रम को प्रकाशित कर दिया है।

प्रकाशित कार्यक्रम के अनुसार संत पापा फ्राँसिस प्रातः 7.00 बजे  वाटिकन से हेलीकॉप्ट द्वारा प्रस्थान करेंगे।

8.15  बजे  बारी के कोलोमबो ख्रीस्तोफोरो प्राँगण में संत पापा का आगमन एवं उनका स्वागत। तत्पश्चात कार द्वारा संत निकोला महागिरजाघर के लिए प्रस्थान, इसी बीच प्राधिधर्माध्यक्षों का महारिजाघर में आगमन।

8.30  बजे संत निकोला महागिरजाघर के सामने संत पापा फ्राँसिस द्वारा प्राधिधर्माध्यक्षों का स्वागत तथा उनसे व्यक्तिगत मुलाकात। उसके बाद संत पापा दोमिनिकन धर्मबंधुओं का अभिवादन करेंगे।

8.45  बजे संत पापा फ्राँसिस एवं प्राधिधर्माध्यक्षों का संत निकोलास के अवशेष को श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु महागिरजाघर के तहखाना में प्रवेश एवं दीप प्रज्वलन।

9.15  बजे संत पापा फ्राँसिस एवं प्राधिधर्माध्यक्षों का संत निकोला महिगिरजाघर से बाहर निकलना तथा बारी के लुंगोमारे स्थित रोतोन्दा पहुँचना।

9.30  बजे बारी के लुंगोमारे में प्रार्थना सभा।

10.30  बजे सामुहिक प्रार्थना सभा के उपरांत संत पापा एवं प्राधिधर्माध्यक्ष बस द्वारा संत निकोला महागिरजाघर लौटेंगे।

11.00  बजे संत निकोला महागिरजाघर में वार्ता।

1.30  बजे धर्माध्यक्षीय आवास में दोपहर का भोजन।

3.30  बजे संत पापा का प्राधिधर्माध्यक्षों से विदाई।

4.00  बजे हेलीकॉप्टर पर सवार होने के पूर्व संत पापा अधिकारियों के प्रति उनके स्वागत के लिए आभार प्रकट करेंगे।

5.15 बजे प्रेरितिक यात्रा का कार्यक्रम समाप्त कर वे वाटिकन वापस लौटेंगे।


(Usha Tirkey)

सृष्टि एक उपहार है, सम्पति नहीं

In Church on June 7, 2018 at 4:05 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 7 जून 18 (वाटिकन न्यूज़)˸ एक अदभुत समुद्र “स्त्री, पुरूष एवं बच्चों के लिए एक कब्रस्थान” बन गया है। उक्त बात संत पापा फ्राँसिस ने भूमध्यसागर की ओर इशारा करते हुए अपने संदेश में कही है।

एथेंस में 5 जून को पर्यावरण की रक्षा पर एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में प्राधिधर्माध्यक्ष बरथोलोमियो प्रथम एवं अन्य प्रतिभागियों को सम्बोधित कर संत पापा ने एक संदेश प्रेषित किया। अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की विषयवस्तु है सृष्टि की देखभाल : “एक हरियाली अटिका के लिए: ग्रह को संरक्षित करना और अपने लोगों की रक्षा करना”।

समग्र मानव विकास के लिए गठित परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल पीटर टर्कसन ने संत पापा के संदेश को संगोष्ठी में पढ़कर सुनाया।

विस्थापितों एवं शरणार्थियों की चिंता

संत पापा के संदेश में लेसबोस में उनकी यात्रा का सजीव चित्रण किया है जिसको उन्होंने प्राधिधर्माध्यक्ष बरथोलोमियो प्रथम तथा परमाध्यक्ष हेरोनेमोस द्वितीय के साथ विस्थापितों एवं शरणार्थियों के प्रति साक्षा सहानुभूति प्रकट करने के लिए की थी। संदेश में उन्होंने कहा है कि वे इस विचार से अत्यन्त प्रभावित हैं कि एक सुन्दर समुद्र, स्त्री, पुरुषों एवं बच्चों के लिए कब्रस्थान बन गया है जो अपने देश के अमानवीय परिस्थितियों से भागना चाहते थे जबकि ग्रीक लोगों की उदारता, मानवता, ख्रीस्तीय मूल्य तथा उनके प्रयासों ने अपने आर्थिक संकट के बावजूद उन्हें अपने तटों पर आश्रय दिया है।

सृष्टि एक उपहार है, हमारी सम्पति नहीं

संत पापा ने कहा है कि उन्होंने उस यात्रा के द्वारा इन दिनों की संगोष्ठी के महत्व को अधिक अच्छी तरह समझा है कि भंगुरता केवल विश्व के सबसे कमजोर लोगों का घर नहीं है जैसा कि प्रवासियों और शरणार्थियों की स्थिति दिखलाता है। संत पापा लिखते हैं कि वास्तव में, हम भावी पीढी के नष्ट होने के लिए भी संकट उत्पन्न कर रहे हैं।

अतः संत पापा आह्वान करते हैं कि पर्यावरणीय संकट के सामने हम गंभीरता पूर्वक आत्मजाँच करें कि हम किस प्रकार के विश्व को अपने बाद आने वाली पीढ़ी के लिए हस्तांतरित करना चाहते हैं, हमारे उन बच्चों के लिए जो बढ़ रहे हैं? सृष्टि जो एक वरदान है, एक साक्षा उपहार है न कि कोई निजी सम्पति जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के अधिकार को पहचाना जाना चाहिए।

काथलिक एवं ऑर्थोडॉक्स सृष्टि की देखभाल के लिए एक साथ

1 सितम्बर को मनाये जाने वाले “सृष्टि हेतु विश्व प्रार्थना दिवस” के संदेश का स्मरण दिलाते हुए संत पापा ने इस बात पर बल दिया है कि सृष्टि की देखभाल करने की जिम्मेदारी सभी भली इच्छा रखने वालों को चुनौती देता है तथा सभी ख्रीस्तीयों को निमंत्रण देता है कि वे पर्यावरणीय संकट के आध्यात्मिक मूल को पहचानें तथा उसका ठोस उत्तर देने में अपना सहयोग दें।

सृष्टि के लिए वार्षिक विश्व प्रार्थना दिवस इस दिशा में एक कदम है जो हमारी आम चिंता को व्यक्त करती है तथा इस जटिल समस्या का सामना करने के लिए एकजुट होने हेतु प्रेरित करती है।

संत पापा ने लिखा कि यह उनका दृढ़ मकसद है कि काथलिक कलीसिया प्राधिधर्माध्यक्ष बरथोलोमियो प्रथम एवं ख्रीस्तीय एकता समिति के साथ कार्य करना जारी रखेगा। उनकी आशा है कि काथलिक एवं ऑर्थोडॉक्स अन्य ख्रीस्तीय समुदायों के साथ तथा सभी भली इच्छा रखने वाले लोगों के साथ सक्रिय रूप से, एक सतत् और अभिन्न विकास रूप में सृष्टि की देखभाल कर सकेंगे।


(Usha Tirkey)

फादर गुस्तावो की 90वीं जन्मदिवस पर संत पापा की शुभकामनाएँ

In Church on June 7, 2018 at 4:03 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 7 जून 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने पेरू के ईशशास्त्री पुरोहित गुस्तावो गुतिएर्रेज़ को 90वीं जन्मदिवस की बधाइयाँ दी हैं।

फादर गुस्तावो गुतिएर्रेज़ 8 जून को 90 वर्ष के होंगे। संत पापा ने एक पत्र में उन्हें शुभकामनाएँ एवं प्रार्थनाएँ अर्पित की हैं।

ईशशास्त्र एवं गरीबों पर ध्यान

28 मई को निर्गत पत्र में संत पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्तीय धर्मसमाजियों को फादर गुस्तावो की ईशशास्त्र के क्षेत्र में सेवा तथा गरीबों एवं समाज से बहिष्कृत लोगों के प्रति उनके प्रेम को रेखांकित किया है तथा उनके जीवन के इस विशेष पड़ाव पर उन्हें अपनी प्रार्थना का आश्वासन दिया है।

सुसमाचारी आनन्द का साक्ष्य

संत पापा ने फादर गुस्तावो को उनके प्रयासों और प्रत्येक व्यक्ति के अंतःकरण की चिंता करने हेतु धन्यवाद दिया है जिसमें गरीबी एवं तिरस्कार के कारण कोई भी उदास न रहे। इस प्रकार उन्होंने प्रार्थना जारी रखते हुए और सुसमाचार के आनन्द का साक्ष्य देते हुए दूसरों को अपनी सेवा प्रदन की है।


(Usha Tirkey)

क्रूस की पुत्रियों के धर्मसंघ को मिली एक भारतीय परमाधिकारिणी

In Church on June 7, 2018 at 4:02 pm

रोम, बृहस्पतिवार, 7 जून 2018 (मैटर्स इंडिया)˸ क्रूस की पुत्रियों के धर्मसंघ ने अपनी पांच सदस्यीय केंद्रीय नेतृत्व टीम में दो भारतीय धर्मबहनों को चुना है।

रोम में 14 से 30 मई तक हुई धर्मसंघीय आमसभा में, सिस्टर पुष्पा एलिश्वा पुराथूर को परमाधिकारिणी चुना गया है। वे दूसरी भारतीय होंगी जिन्हें धर्मसमाज का नेतृत्व करने का भार सौंपा गया है। लीएजे के बाहर रोम में यह पहली आमसभा थी। महासमिति की अन्य सदस्य हैं मुम्बई की सिस्टर भलेरिया मिरांदा, इंगलैंड की सिस्टर मैकलौगहलिन, पाकिस्तान की सिस्टर जीनेट शांगारा और इंगलैंड की सिस्टर मौरिन ओब्रीएन।

परमाधिकारिणी चुने जाने के पूर्व 70 वर्षीय सिस्टर पुराथूर धर्मसमाज की प्रथम महासलाहकारिणी थीं।

क्रूस की पुत्रियों के धर्मसंघ की स्थापना सन् 1833 ई. में धन्य मरिया तेरेसे के द्वारा हुई है। आज यह धर्मसमाज ग्रेटब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, बेल्जियम, ब्राजील, कैमरून, जर्मनी, आयरलैंड, भारत, इटली, नेपाल और पाकिस्तान सहित 11 देशों में सेवारत है।

भारत में इसकी तीन शाखाएँ हैं जो मुम्बई, कलकत्ता और राऊरकेला में स्थित है।

धन्य मरिया तेरेसे ने धर्मसमाज का जो नाम रखा है वह महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस पर लम्बे समय तक चिंतन किया तथा प्रभु के दुखःभोग एवं क्रूसित ख्रीस्त की दया पर मनन-चिंतन द्वारा उन्होंने कोमलता एवं उदार प्रेम को सीखा जिसने उन्हें उनका अनुसरण करने हेतु प्रेरित किया। इस प्रकार उन्होंने त्याग एवं सेवा के दो महत्वपूर्ण मनोभावों को अपनाया जो ख्रीस्तीयता का आधार है।


(Usha Tirkey)

बुराई ख्रीस्तीयों से क्या मांग करती है

In Church on June 7, 2018 at 4:01 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 7 जून 2018 (रेई)˸ बुराई दुनिया में अशांति लाती है। यह लोगों के बीच विभाजन एवं घृणा फैलाती है किन्तु वह ख्रीस्त पर विश्वास करने वालों की शांति नहीं छीन सकती। यह उनके लिए एक आह्वान बन जाती है कि वे और अधिक उत्साह से अपने ख्रीस्तीय विश्वास को जीयें।

संत पापा फ्राँसिस ने 7 जून के ट्वीट संदेश में लिखा, उन लोगों के लिए जो येसु के साथ हैं बुराई एक अह्वान है कि वे और अधिक प्रेम करने के लिए प्रेरित हों।


(Usha Tirkey)

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