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शीर्ष तेल एवं गैस अधिकारियों से संत पापा की अपील

In Church on June 9, 2018 at 2:32 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 9 जून 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 9 जून को वाटिकन स्थित क्लेमेंटीन सभागार में “ऊर्जा पारगमन एवं आमगृह की देखभाल” पर एक सम्मेलन के 50 प्रतिभागियों से मुलाकात की।

उन्हें सम्बोधित करते हुए संत पापा ने कहा, “यह एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है कि आप, ऊर्जा के क्षेत्र में निर्णय, पहलों और निवेश को प्रभावित करते हैं।”

संत पापा ने कहा कि “सभ्यता ऊर्जा की मांग करता है किन्तु ऊर्जा का प्रयोग सभ्यता को नष्ट करने के लिए नहीं होना चाहिए।”

दो दिवसीय सम्मेलन शनिवार को समाप्त हुआ जिसका आयोजन वाटिकन की विज्ञान संबंधी परमधर्मपीठीय समिति द्वारा नोट्र डम विश्वविद्यालय के तत्वधान में किया गया था।

सम्मेलन में एक्सनमोबिल, एनी, बीपी, रोयल डच शेल एक्वीनोर और पेमेक्स जैसे अग्रणी तेल और गैस कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

अपने भाषण में संत पापा ने उनसे कहा कि जलवायु परिवर्तन नवयुगीन चुनौती थी और कहा कि विश्व को ऊर्जा मिश्रित प्रदूषण से बाहर आने की आवश्यकता है, गरीबी को दूर करना है एवं सामाजिक न्याय को प्रोत्साहन देना है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक समाज में सूचना के बड़े पैमाने पर आंदोलन, व्यक्ति एवं चीजों के लिए उर्जा आपूर्ति की बड़ी आवश्यकता है और साथ ही वे इस बात को भी इंगित किया कि विश्व में करीब एक बिलियन लोगों के लिए बिजली का अभाव है।

संत पापा ने कहा कि पृथ्वी पर हरेक व्यक्ति के लिए ऊर्जा की आपूर्ति इस तरह किया जाना चाहिए कि वह पर्यावरण में असंतुलन उत्पन्न न करे, जिसके कारण क्षरण अथवा प्रदूषण बढ़ें एवं वर्तमान और भविष्य में हमारे मानव परिवार को किसी तरह की हानि न पहुँचे।

संत पापा ने अपने संदेश के अंत में प्रेरितिक विश्व पत्र लौदातो सी का हवाला देते हुए निमंत्रण दिया, “खोने का समय नहीं रह गया है। हमने पृथ्वी को एक वाटिका की तरह प्रभु से प्राप्त किया है। आइये, हम इसे एक उजाड़ प्रदेश की तरह आने वाली पीढ़ी को न सौंप दें।”

 


(Usha Tirkey)

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संत एवं धन्य घोषणा हेतु प्रस्तावित आज्ञप्तियों को संत पापा का अनुमोदन

In Church on June 9, 2018 at 2:31 pm


वाटिकन सिटी, शनिवार, 9 जून 2018 (रेई)˸ सन्त पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार, 8 जून को कार्डिनल आन्जेलो आमातो के नेतृत्व में परमधर्मपीठीय सन्त प्रकरण परिषद द्वारा सन्त एवं धन्य घोषणा के लिये 7 प्रस्तावित आज्ञप्तियों को अनुमोदन दे दिया।

उनके नाम इस प्रकार हैं-

धन्य नूनत्सियो सुलप्रीत्सियो, लोकधर्मी, जन्म इटली में, 13 अप्रैल 1817 को एवं मृत्यु 5 मई 1836 को।

प्रभु सेविका काब्रेरा अरियास की मरियम के निष्कलंक गर्भागमन की अरमिदा, विधवा, लोकधर्मी एवं परिवार की माता। जन्म मेक्सिको में 8 दिसम्बर 1862 को तथा मृत्यु 3 मार्च 1937 को।

प्रभु सेवक ग्वादालूपे की माता मरियम की लैदाजूरी तथा हेरेदिया फेर्नांडिज़, लोकधर्मी, पवित्र क्रूस एवं ओपुस देई के प्रिलेचर। जन्म स्पेन में 12 दिसम्बर 1916 को तथा मृत्यु 16 जुलाई 1975 को।

प्रभु सेवक एनरिको अंजेली कारलेत्ती, ला रिओजा के धर्माध्यक्ष, गाब्रिएला जुसेप्पे रूजेरो लुंग्वेविल्ली, धर्मप्रांतीय पुरोहित, दियो मुरियास के कारलो, फ्रायर माईनर धर्मसमाज के पुरोहित, वेनचेसलास पेदेरनेरा, लोकधर्मी एवं परिवार के पिता जो सन् 1976 में विश्वास के कारण अर्जेंटीना में मृत्यु के शिकार हुए थे।


(Usha Tirkey)

ईश्वर का प्रेम केवल शब्दों में नहीं किन्तु ठोस कार्य से प्रकट होता है

In Church on June 9, 2018 at 2:29 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 9 जून 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ ईश्वर का प्रेम असीम है। इन्हीं शब्दों पर संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार को येसु के पवित्र हृदय महापर्व के उपलक्ष्य में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में चिंतन केंद्रित किया।

प्रवचन में उन्होंने कहा कि ईश्वर की महानता छोटी चीजों एवं कोमलता में प्रकट होती है। “ऐसा नहीं है कि हम पहले ईश्वर को प्यार करते हैं बल्कि इसके ठीक विपरीत, सबसे पहले वे हमें प्यार करते हैं।”

संत पापा ने कहा कि नबी बादाम के फूल का उदाहरण देते हैं जो इसका प्रतीक है क्योंकि यह बसंत ऋतु में सबसे पहले खिलता है। उन्होंने कहा, “ईश्वर उसी तरह हैं जो हमेशा आगे रहते हैं। वे पहले से हमारा इंतजार करते हैं और हमें मदद देते हैं।” फिर भी उनके प्रेम को समझना आसान नहीं है जैसा कि धर्मविधिक पाठ में बतलाया गया है जहाँ संत पौलुस गैरयहूदियों के बीच सुसमाचार के प्रचार को ख्रीस्त का बड़ा धन मानते हैं।

संत पापा ने कहा कि यह एक ऐसा प्रेम है जिसे समझा नहीं जा सकता। प्रेम जो हर ज्ञान को विस्मित करता है। यह हरेक को आश्चर्य चकित कर देता है। ईश्वर का प्रेम महान है। कवि इसे तट के बिना एक अथाह समुद्र के रूप में प्रकट करते हैं। इस प्रेम को समझने की आवश्यकता है क्योंकि हम इसे प्राप्त करते हैं।

संत पापा ने कहा कि पूरे मुक्ति इतिहास में प्रभु ने हमारे प्रति अपने प्रेम को प्रकट किया। वे एक महान गुरू हैं।

नबी होसिया कहते हैं कि ईश्वर अपने प्रेम को शक्ति द्वारा प्रकट नहीं करते बल्कि प्रेम द्वारा प्रकट करते हैं, अपने लोगों को चलने की शिक्षा देते, उन्हें अपनी बाहों में लेते तथा उनकी देखभाल करते हैं।

ईश्वर किस तरह अपने प्रेम को प्रकट करते हैं? क्या वे इसे महान कार्यों में प्रकट करते हैं? नहीं, उन्होंने अपने को छोटा बनाया, कोमलता एवं अच्छाई का मनोभाव धारण कर अपने को दीन बनाया। वे अपने बच्चों के पास आये और अपने सामीप्य द्वारा उन्होंने प्रेम की महानता को प्रकट किया।

अंत में ईश्वर ने अपने पुत्र को भेजा जिन्होंने शरीर धारण किया और अपने को मृत्यु तक विनम्र बनाया। यही ईश्वर के प्रेम का रहस्य है उनकी महानता सबसे छोटी दीनता में प्रकट हुई। यही ख्रीस्तीयता को समझने में मदद देता है।

एक ख्रीस्तीय में किस तरह का मनोभाव होना चाहिए इसकी शिक्षा देते हुए येसु कहते हैं, कि हम ईश्वर के कार्य को अपने छोटे-छोटे कार्यों के माध्यम से आगे बढ़ायें अर्थात् भूखों को खिलाने, प्यासों को पिलाने, बीमारों को देखने जाने एवं कैदियों से मुलाकात करने के द्वारा उसे जारी रखें।

संत पापा ने कहा कि दया के कार्य प्रेम के पथ को प्रशस्त करते हैं जिसको येसु ने ईश्वर के प्रति बड़े प्रेम से पूरा करने की शिक्षा हमें दी है, केवल शब्दों से नहीं किन्तु अपने ठोस कार्यों द्वारा।

उन्होंने कहा कि प्रेम प्रकट करने के लिए हमें बड़ी-बड़ी वार्ताएँ करने की आवश्यकता नहीं है बल्कि जो लोग येसु एवं पिता ईश्वर के लिए छोटे छोटे कार्यों को करना जानते हैं वे ही उनके कार्यों को पूरा करते हैं। संत पापा ने कहा कि करुणा के हमारे कार्य उनके प्रेम को जारी रखते हैं।


(Usha Tirkey)

वाटिकन द्वारा पान-अमाज़ोनिया सिनॉद का प्रारंभिक दस्तावेज प्रकाशित

In Church on June 9, 2018 at 2:27 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 9 जून 2018 (वीआर,रेई) : वाटिकन प्रेस कार्यालय ने शक्रवार 8 जून को प्रेस कॉनफ्रेंस में पान-अमाज़ोनिया धर्मसभा का प्रारंभिक दस्तावेज प्रकाशित किया। कॉनफ्रेंस में कहा गया कि आने वाले अक्टूबर 2019 में अमेज़ॅन बेसिन में धर्माध्यक्षों की धर्मसभा की तैयारी जोर शोर से हो रही है। धर्मसभा का विषय है : “कलीसिया और एक समग्र पारिस्थितिकी के लिए नये मार्ग”। “अमेज़ोनिया में रहने वाले सभी समुदायों और आदिवासियों को सुनना विश्वव्यापी कलीसिया के लिए महत्वपूर्ण महत्व है।”

दस्तावेज के तीन भाग हैं

प्रथम भाग  अमाजोनिया कलीसिया की पहचान और उनकी परेशानियों को देखना और समझने की कोशिश करना और एक अमाज़ॅनियन चेहरे वाली एक कलीसिया के रुप में पारिस्थितिकीय रूपांतरण की दिशा की ओर आगे बढ़ने हेतु एक निमंत्रण है। यह उन क्षेत्र के धर्माध्यक्षों के लिए सिनॉड से पहले अपने पुरोहितों और पारिस्थितिक चिंताओं को साझा करने के लिए प्रश्नावली भी प्रदान करता है।

कचड़े की संस्कृति

दस्तावेज़ के अनुसार अमाज़ोन वर्षावन “हमारे ग्रह का फेफड़ा और दुनिया में सबसे बड़ी जैव विविधता के क्षेत्रों में से एक है।” इस क्षेत्र को, “लंबे समय तक मानव हस्तक्षेप” और “कचड़े की संस्कृति “के कारण “गहरा संकट” का सामना करना पड़ा है ।

“अमाज़ोन समृद्ध जैव विविधता वाला एक क्षेत्र है; यह बहु-जातीय, बहु-सांस्कृतिक और बहु-धार्मिक क्षेत्र है; यह सभी मानवता का दर्पण है, जहाँ जीवन की रक्षा में, सभी मनुष्यों, राष्ट्रों और कलीसियाओं द्वारा संरचनात्मक और व्यक्तिगत परिवर्तन की आवश्यकता है। ”

अमाज़ोनिया पर ध्यान केंद्रित करके, सिनॉड दुनिया के अन्य बायोम, जैसे कांगो बेसिन, मेसोअमेरिकन जैविक गलियारे और एशिया प्रशांत क्षेत्र के उष्णकटिबंधीय जंगलों के लिए एक पुल बनाने की उम्मीद करता है।

शोषित लोग

दस्तावेज़ क्षेत्र की सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता, विशेष रूप से आदिवासी आबादी के “विशाल आर्थिक हितों” के प्रभाव पर भी चिंतन करता है।

दस्तावेज़ कहता है कि अंधाधुंध पेड़ों की कटाई, जल प्रदूषण, और नशीली दवाओं की तस्करी ने स्थानीय लोगों के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है और बड़ी संख्या में वे शहरी क्षेत्रों में प्रवासन कर रहे हैं जहाँ उनका अक्सर शोषण होता है।

अमाज़ोनिया में कृषि, खनन और पेड़ों की कटाई गतिविधियों की अत्यधिक वृद्धि ने न केवल क्षेत्र के वर्षावन और इसके जल की पारिस्थितिक समृद्धि को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि इसके सामाजिक और सांस्कृतिक संपदा को भी कम किया है। इसने अमाज़ोन बेसिन पर ‘गैर-समावेशी’ शहरों के विकास को मजबूर कर दिया है।

कलीसिया का अमेज़ॅन चेहरा

दस्तावेज कहता है कि  काथालिक कलीसिया को, प्रत्येक क्षेत्र की वास्तविकताओं के अनुसार अपनी पहचान को गहरा बनाने और अपने लोगों के ज्ञान  और अनुभव को सुनकर अपनी आध्यात्मिकता में वृद्धि करना है।

सिनॉड अमेज़ॅन क्षेत्र की कई संस्कृतियों के साथ मिलकर, “कलीसिया के अमेज़ॅनियन चेहरे” के विकास के नए तरीकों की तलाश करेगा। कलीसिया उम्मीद करती है, “इस क्षेत्र में अन्याय की स्थितियों के लिए खिलाफ कार्य कर सकती है, जैसे खनन उद्योगों के नवसंस्कृतिवाद, आधारभूत संरचना परियोजनाएं जो जैव विविधता को नुकसान पहुंचाती हैं, और सांस्कृतिक और आर्थिक मॉडल को विदेशी लोगों के लिए लागू कर करती है।”

“इस प्रकार, स्थानीय वास्तविकताओं और क्षेत्र के अनुभवात्मक सूक्ष्म संरचनाओं की विविधता पर ध्यान केंद्रित करके, कलीसिया और मीडिया द्वारा प्रचारित एकजुट तर्क और एक आर्थिक मॉडल को दृढ़ता से मजबूत करना जो अक्सर अमेज़ॅनियन लोग या उनके क्षेत्र का सम्मान करने से इनकार करती है।”


(Margaret Sumita Minj)

शिलांग हिंसा: ख्रीस्तीय नेताओं ने सांप्रदायिक नजरिये को किया इनकार

In Church on June 9, 2018 at 2:25 pm

गुवाहाटी, शनिवार 9 जून 2018 (मैटर्स इंडिया) : पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न कलीसिया के नेताओं ने हाल में हुए हिंसक घटनाओं के प्रति गहरे दर्द और पीड़ा व्यक्त की है जिसने मेघालय राज्य की राजधानी शिलांग में अशांति फैला दिया है।

यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम और नॉर्थ ईस्ट क्रिश्चियन काउंसिल के प्रमुखों ने गुवाहाटी में 6 जून को स्थिति की समीक्षा करने और शहर में शांति और सद्भाव को बहाल करने के तरीकों की तलाश करने के लिए सभा का आयोजन किया था ।

उन्होंने शिलांग में ख्रीस्तीयों और सिखों के बीच संघर्ष के रूप में घटनाओं को पेश करने के प्रयास में मीडिया और कुछ समूहों से मुलाकात की।

मेघालय उत्तरपूर्वी भारत में तीन ख्रीस्तीय बहुमत वाले राज्यों में से एक है।

यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम की पूर्वोत्तर इकाई के प्रवक्ता एलन ब्रूक्स द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि नेता “लगातार तनाव पर चिंतित हैं जो नकली खबरों के डर, अविश्वास और परिसंचरण के कारण प्रचलित है।”

कलीसिया के नेताओं ने अपने लोगों से प्रार्थना करने और शांति के लिए काम करने का अनुरोध किया है। उन्होंने सभी संबंधित लोगों से अपील की कि वे हिंसा को छोड़ दें और “वार्ता के मार्ग की तलाश करें” ताकि पुरानी हिंसा को जन्म देने वाली पुरानी समस्या के लिए स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान मिल सके।

बैठक में, उत्तर पूर्व भारत के क्रिश्चियन काउंसिल का प्रतिनिधित्व अध्यक्ष माननीय ज़ेल्हो कीओ और उपाध्यक्ष सोलोमोन रोंगपी तथा पूर्वोत्तर भारत के यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम की इकाई के अध्यक्ष बोंगाईगांव के धर्माध्यक्ष थॉमस पुलोपिलिल और सचिव माननीय लालनुंजिरा ने किया था।

इस बीच शिलांग के महाधर्माध्यक्ष डोमिनिक जाला ने भी इनकार किया कि घटनाओं में कोई सांप्रदायिक बातें थी। महाधर्माध्यक्ष डोमिनिक ने 6 जून को मैटर्स इंडिया को बताया, “शिलांग में वर्तमान परेशानी एक घटना से उत्पन्न हुई थी जिसे शुरू में हल किया गया था।”

यह सब कुछ 30 मई को 9:30 बजे शुरू हुआ, जिसमें एक पंजाबी महिला और शिलोंग सड़कों पर चलने वाली मिनी बसों के श्रमिकों के बीच झगड़ा हुआ। सड़क पर एक बस यात्रियों की प्रतीक्षा पार्क की गई थी।  बस स्टैंड डाउनटाउन शिलांग में एक पंजाबी एन्क्लेव “स्वीपर कॉलोनी” के पास था। एक महिला, जो पानी लाने के लिए गई थी, ने आरोप लगाया कि बस ने रास्ता अवरुद्ध कर दिया था।

जब वह चली गई, तो घर से एक जवान आदमी आया और बस में काम करने वाले को पीटा। एक लड़का घायल हो गया था और उसे अस्पताल ले जाया गया था। उसे प्राथमिक चिकित्सा के बाद  वह वापस चला गया। “इस मामले को शांति के साथ निपटा दिया गया था

बाद में, कुछ लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का इस्तेमाल झूठी खबर फैलाई कि उस लड़के की मृत्यु हो गई थी। एक भीड़ जल्द ही इकट्ठी हुई और स्वीपर कॉलोनी को ले जाना शुरू कर दिया। इस घटना के विरोध में मिनी बस चालक भी मिलकर मिल गए।

महाधर्माध्यक्ष जाला ने कहा कि जिला और राज्य प्रशासन और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित किया। पर स्थिति को देखते हुए कर्फ्यू घोषित किया गया था कि अंततः स्थिति को पूरी तरह से नियंत्रण में लाया गया

मेघालय में एक प्रमुख जनजाति खासी लोग बड़ी संख्या शिलांग क्षेत्र में हैं।

महाधर्माध्यक्ष जाला ने नोट किया कि हिंसा के दौरान किसी के मरने या संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ।


(Margaret Sumita Minj)

रमजान में मुसलमानों के साथ काथलिकों की सहभागिता

In Church on June 9, 2018 at 2:24 pm


जकार्ता, शनिवार 9 जून 2018 (एशिया न्यूज) : इंडोनेशिया में मुस्लिम पवित्र महीने रमजान के दौरान, कई काथलिक पल्लियाँ संवाद और बहुलवाद को बढ़ावा देने वाली पहलों में शामिल हैं।

पुरवाकरो (सेंट्रल जावा) धर्मप्रांत के सेक्रेड हार्ट पल्ली ने कल शाम सैकड़ों मुसलमानों को पल्ली भवन में एक इफ्तर भोजन साझा करने के लिए आमंत्रित किया। पल्ली पुरोहित फरी योहान्स सूरतमान की अध्यक्षता में शाम का भोजन परोसा गया और इस्लामी उपवास तोड़ा गया।

फादर ने एशिया न्यूज को बताया कि “लगभग 300 लोग हमारी पहल में शरीक होने आए,” जिसमें “238 स्वास्थ्य कार्यकर्ता और 46 कम वेतन वाले, जैसे रिक्शा चालक, पार्किंग परिचारक और सुरक्षा गार्ड शामिल थे।”

फादर सूरतमान ने गौर किया कि स्थानीय सरकारी अधिकारी और सशस्त्र बलों के सदस्य भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे, साथ ही साथ “अंतरधार्मिक मंच (एफकेयूबी) और स्थानीय उलेमा परिषद (एमयूआई) के कुछ प्रमुख सज्जन” और  दो सबसे बड़े मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि: नहदलातुल उलामा और मोहम्मदियाह भी उपस्थित थे।”

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले उनकी पल्ली ने करीब दो सौ बच्चों के लिए इफ्तार(भोजन) की व्यवस्था की थी।

पुरवाकरतो के सेवानिवृत  धर्माध्यक्ष जूलियस केमा सुनारका ने, तेगल में काथलिक समुदाय के पहल की प्रशंसा की। धर्माध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर एक संदेश में, पंकसिला राज्य के दार्शनिक और राजनीतिक मंच की रक्षा के लिए राष्ट्रपति जोको विडोडो की महत्वाकांक्षा साझा करने के लिए सेक्रेड हार्ट पल्ली को धन्यवाद दिया।”

धर्माध्यक्ष ने इस क्षेत्र में अन्य पुरोहितों को इस तरह की गतिविधियों का संचालन करने के लिए प्रोत्साहित किया। माता मरिया धर्मसमाज की सुपीरियर सिस्टर मारिया मोनिका एकावती ने नोट किया कि इस तरह के कार्य “वर्तमान सामाजिक समस्याओं के लिए एक उत्कृष्ट प्रतिक्रिया हैं और देश के राष्ट्रीय मूल्यों को संरक्षित करने के लिए उपयोगी हैं।”


(Margaret Sumita Minj)

ममता की धनी माता मरियम

In Church on June 9, 2018 at 2:21 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 9 जून 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 9 जून को माता मरियम के निष्कलंक हृदय के पर्व दिवस पर एक ट्वीट प्रेषित कर माता मरियम की महानता को प्रस्तुत किया।

उन्होंने संदेश में लिखा, “मरियम वही हैं जो ईश्वर अपनी कलीसिया से चाहते हैं, एक प्रेमी एवं विनीत माता, सम्पति की गरीब किन्तु ममता की धनी।”


(Usha Tirkey)

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