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पवित्र आत्मा सुसमाचार की घोषणा का “नायक” है, संत पापा फ्राँसिस

In Church on June 11, 2018 at 2:47 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 11 जून 2018 (रेई) : सुसमाचार प्रचार में तीन मौलिक आयाम हैं : घोषणा, सेवा और पुरस्कार। संत पापा फ्राँसिस ने अपने निवास संत मार्था के प्रार्थनालय में पवित्र यूखरिस्त समारोह के दौरान अपने प्रवचन में इसे रेखांकित किया।

व्यवसायी विकल्प दिल को नहीं बदलते हैं

संत पापा ने दैनिक पाठ के आधार पर अपने चिंतन को व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “पवित्र आत्मा सुसमाचार की घोषणा का “नायक” है, यह कुछ विचारों के सरल “प्रचार” या “प्रसारण” का प्रतिनिधित्व नहीं करती है, लेकिन यह एक गतिशील आंदोलन है जो “दिल बदलने” में सक्षम है।” पवित्र आत्मा के इस काम के लिए हम धन्यवाद देते हैं।” उन्होंने कहा,” हमने अच्छी तरह से बनाई गई, योजनाएं देखी हैं, ” लेकिन वे सुसमाचार प्रचार के साधन नहीं है, क्योंकि वे खुद में हा समाप्त हो जाती हैं, ये “दिल को बदलने में असमर्थ” है। “यह एक व्यवसायी दृष्टिकोण नहीं है। येसु हमें व्यवसायी दृष्टिकोण के साथ नहीं भेजते है परंतु वे हमें पवित्र आत्मा के साहस के साथ भेजते हैं। सुसमाचार प्रचार का असली साहस मानवीय जिद्दीपन नहीं है परंतु वह आत्मा है जो हमें साहस देती है और हमें आगे ले जाती है।”

कलीसिया में हमें अपनी सेवा करानी नहीं, अपितु दूसरों की सेवा करनी चाहिए।

सुसमाचार प्रचार के दूसरे आयाम सेवा पर ध्यान केंद्रित कराते हुए संत पापा ने कहा, सेवा “छोटी चीजों में भी” पेश किया जाता है। उन्होंने कहा, वास्तव में, जो कलीसिया या समाज में करियर बनाने के बाद सेवा कराना चाहते हैं: “कलीसिया में सेवा कराना – यह एक संकेत है कि हम नहीं जानते कि सुसमाचार प्रचार क्या है”, “जो आदेश देते हैं उसे यह जानना चाहिए कि सेवा कैसे की जाती है।”

“हम अच्छी चीजों की घोषणा कर सकते हैं लेकिन सेवा के बिना यह घोषणा नहीं है।क्योंकि आत्मा न केवल आपको ईश्वर की सच्चाई और जीवन की घोषणा करने के लिए आगे ले जाती है, बल्कि भाइयों और बहनों की सेवा करने के लिए भी आपको प्रेरित करती है। छोटी चीजों में भी उनकी सेवा दिखती है। जब आप सुसमाचार प्रचारक, दूसरों की सेवा करने के बदले खुद की सेवा करते और दूसरों से सेवा कराते हैं तो यह दुःख की बात है और यह बहुत ही खराब है।

सुसमाचार प्रचार का पुरस्कार

अंत में संत पापा ने सुसमाचार प्रचार का तीसरे आयाम पुरस्कार पर ध्यान केंद्रित कराते हुए कहा कि कोई भी खुद को अपनी योग्यता के लिए धन्यवाद नहीं दे सकता है। ईश्वर हमें याद दिलाता है कि “आपको मुफ्त में प्राप्त हुआ है अतः आप भी मुफ्त में बाटें।”


(Margaret Sumita Minj)

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पवित्र आत्मा हमें शक्ति प्रदान करता है, संत पापा फ्राँसिस

In Church on June 11, 2018 at 2:44 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार 11 जून 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 11 जून को ट्वीट प्रेषित कर सभी ख्रीस्तीयों को पवित्र जीवन बिताने के लिए अपने दैनिक जीवन में पवित आत्मा की शक्ति का एहसास कर उनकी ही प्रेरणा से जीवन बिताने हेतु प्रेरित किया।

संदेश में उन्होंने लिखा,“हमें अपने रोजमर्रा के जीवन में पवित्रता प्राप्त करने के लिए पवित्र आत्मा हमें शक्ति प्रदान करता है।”


(Margaret Sumita Minj)

ईर्ष्या, मिथ्या आरोप हेतु प्रेरित करता है, संत पापा

In Church on June 11, 2018 at 2:42 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार, 11 जून 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 10 जून को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया देवदूत प्रार्थना का पूर्व उन्होंने विश्वासियों के सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

“इस रविवार का सुसमाचार पाठ (मार. 3,20-35) दो तरह की गलतफहमियों को प्रस्तुत करता है जिनका सामना येसु को करना पड़ा, शास्त्रीयों एवं अपने ही परिवार वालों से।

पहली गलतफहमी- शास्त्रियों ने पवित्र धर्मग्रंथ का अध्ययन किया था और वे उसकी व्याख्या हेतु नियुक्त किये गये थे। उन में से कुछ येरूसालेम से गलीलिया भेजे गये थे, जहाँ से येसु की प्रसिद्धि फैल रही थी। वे लोगों की आंखों में उन्हें बदनाम करने के लिए, बकवादियों का दल बनाने, दूसरे को बदनाम करने, अधिकार को हटाने का काम करने लगे, जो अत्यन्त खराब बात थी। वे इसी काम के लिए भेजे गये थे और वे एक खास एवं खतरनाक आरोप के साथ वहाँ पहुँचे, ”उसे बेलजेबुल सिद्ध है” और ”वह नरकदूतों के नायक की सहायता से नरकदूतों को निकालता है”। (पद.22) अर्थात् वे कहना चाहते थे कि नरकदूतों के नायक ने उन्हें भेजा है जो यह कहने के समान था कि वे भूतग्रस्त हैं। येसु रोगियों को चंगा कर रहे थे जबकि वे लोगों को यह विश्वास कराना चाहते थे कि येसु ईश्वर की आत्मा से ऐसा नहीं कर रहे थे। वे बोलना चाह रहे थे कि येसु जो कर रहे थे वह बुराई के प्रभाव और शैतान की शक्ति से कर रहे थे। येसु इसका दृढ़ और स्पष्ट शब्दों में खंडन करते हैं क्योंकि शास्त्री शायद बिना जाने, ईश्वर के प्रेम को इनकार करने और ईश निंदा करने के गंभीर पाप में गिर रहे थे, जो इस समय येसु के कार्यों में व्याप्त था। ईश निंदा पवित्र आत्मा के विरूद्ध पाप है जो एकमात्र अक्षम्य पाप है जैसा कि येसु कहते हैं क्योंकि यह एक बंद हृदय के रूप में  येसु के कार्यों में प्रकट ईश्वर की करूणा के लिए द्वार नहीं खोलता। लेकिन इस घटना में एक चेतावनी है जो हम सभी के लिए लाभदायक हो सकती है। वास्तव में, कई बार ऐसा होता है कि भलाई के बदले एक प्रबल ईर्ष्या के कारण और किसी व्यक्ति के अच्छे कार्यों के लिए, उसपर झूठा आरोप लगाया जाता है, यहाँ एक असली घातक जहर है जो पूर्व नियोजित तरीके से, एक-दूसरे की प्रतिष्ठा को नष्ट करना चाहता है।

संत पापा ने कहा कि ईश्वर हमें इस खतरनाक प्रलोभन से मुक्त करे। यदि हम अपने अंतःकरण की जांच करते हैं और महसूस करते हैं कि यह बुरा घास हमारे अंदर उग रहा है तब उसके बढ़ने एवं दुष्ट प्रभाव डालने से पहले ही हम पापस्वीकार करने जाएँ क्योंकि यह लाइलाज है। संत पापा ने कहा कि इससे सावधान रहें, क्योंकि यह परिवारों, मित्रों, समुदायों और यहां तक कि समाज को भी नष्ट कर सकता है।

संत पापा ने दूसरी गलतफहमी के बारे बतलाते हुए कहा, आज का सुसमाचार पाठ एक-दूसरी प्रकार की गलतफहमी को भी प्रकट करता है, येसु के रिश्तेदार जो उनसे भिन्न सोच रखते थे। वे चिंतित थे क्योंकि उनके लिए येसु का जीवन एक पागलपन के समान था। (पद.21) वास्तव में, वे लोगों के लिए इतने उदार थे, सबसे बढ़कर बीमारों एवं पापियों के लिए कि उनके पास खाने-पीने का भी समय नहीं था। येसु ऐसे ही थे, उनके लिए लोगों की सेवा करने, उनकी मदद करने, उन्हें शिक्षा देने एवं बीमारों को चंगा करने के द्वारा उन्हें प्राथमिकता देना सबसे बढ़कर था। अतः उनके परिवार वालों ने उन्हें नाजरेथ में अपना घर ले जाने का निश्चय किया। वे उस स्थान पर आये जहाँ येसु शिक्षा दे रहे थे और उन्होंने उन्हें बुला भेजा। लोग उनके पास गये और उन्होंने उन से कहा, ”देखिए, आपकी माता और आपके भाई-बहनें, बाहर हैं। वे आप को खोज रहे हैं।”

ईसा ने उत्तर दिया, ‘कौन है मेरी माता, कौन हैं मेरे भाई?” उन्होंने अपने चारों ओर बैठे हुए लोगों पर दृष्टि दौड़ायी और कहा, ”ये हैं मेरी माता और मेरे भाई। जो ईश्वर की इच्छा पूरी करता है, वही है मेरा भाई, मेरी बहन और मेरी माता।”(पद.33-34)

इस प्रकार, येसु ने एक नये परिवार का निर्माण किया, जो प्रकृति पर नहीं किन्तु उनके विश्वास और प्रेम पर आधारित थी जो उनके प्रेम में पवित्र आत्मा द्वारा हमें एकता के सूत्र में बांध देता है।

जो लोग येसु की शिक्षा को स्वीकार करते हैं वे ईश्वर के पुत्र-पुत्रियाँ हैं और आपस में भाई-बहन। येसु के वचनों को स्वीकार करना, हमें येसु के परिवार में आपस में भाई- बहन बनाता है। इसके विपरीत जब हम दूसरों की निंदा करते और उनके सम्मान को ठेस पहुँचाते हैं तब हम शैतान के परिवार के सदस्य बन जाते हैं।

संत पापा ने यहाँ स्पष्ट किया कि येसु का यह उत्तर उनकी माता एवं परिवार का अपमान नहीं था। निश्चय ही, मरियम के लिए यह एक बड़ी पहचान थी क्योंकि वे एक पूर्ण शिष्य थीं जिन्होंने ईश्वर की इच्छा को सब कुछ में पूरा किया था। संत पापा ने प्रार्थना की कि कुँवारी मरियम हमें येसु के साथ जीने, उनमें तथा कलीसिया में क्रियाशील पवित्र आत्मा के कार्यों को पहचानने तथा विश्व को नये जीवन में नवीकृत करने में मदद करे।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने कोरिया की याद करते हुए उनके लिए प्रार्थना की अपील की कि सिंगापुर में जो वार्ता होने वाली है उसके द्वारा सकारात्मक पथ को बल मिले ताकि कोरियाई प्रायद्वीप एवं विश्व का भविष्य शांतिमय हो सके। उन्होंने इस मतलब के लिए विश्वासियों के साथ प्राणाम मरियम प्रार्थना का पाठ किया।

इसके उपरांत उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि आज फ्राँस के अगेन में निष्कलंक गर्भागमन की धर्मबहन मेरी की धन्य घोषणा हुई जो 18वीं एवं 19वीं शताब्दी के बीच रहीं। उन्होंने निष्कलंक मरियम की पुत्रियों के धर्मसंघ की स्थापना की जो मरियानिष्ठ कहलाता है। हम उनके इस पुत्री के लिए प्रभु की स्तुति करते हैं। जिन्होंने उनके लिए तथा भाई-बहनों की सेवा के लिए अपना जीवन अर्पित किया।

तदुपरांत संत पापा ने देश-विदेश से एकत्रित सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा, “मैं रोम तथा विभिन्न जगहों से आये तीर्थ यात्रियों का अभिवादन करता हूँ जो पल्ली दलों, परिवारों और संगठनों के सदस्य हैं। खासकर, मैं उन विश्वासियों का अभिवादन करता हूँ जो स्पेन के मुर्चा, पम्पलोना और लोग्रोनो एवं इटली के नेपल्स से आये हैं, मेस्त्रीनों एवं लेगन्यो के पर्वत आरोही दल।”

अंत में संत पापा ने प्रार्थना का आग्रह करते हुए सभी को शुभ रविवार की मंगल- कामनाएँ अर्पित की।


(Usha Tirkey)

अमेरिका और उत्तरी कोरिया शिखर सम्मेलन हेतु संत पापा की अपील

In Church on June 11, 2018 at 2:41 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार 11 जून 2018 (रेई) :  संयुक्त राज्य अमेरिका और उत्तरी कोरिया के नेताओं के बीच सिंगापुर में मंगलवार के शिखर सम्मेलन के पूर्व संत पापा फ्राँसिस ने कोरियाई प्रायद्वीप और दुनिया भर में शांतिपूर्ण भविष्य के लिए प्रार्थना की।

संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 10 जून को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में हजारों की संख्या में उपस्थित देश विदेश से आये तीर्थयात्रियों ओर विश्वासियों के साथ देवदूत की प्रार्तना का पाठ करने के पश्चात “प्रिय कोरियाई लोगों” के लिए अपनी प्रार्थनाओं को नवीनीकृत किया।

उन्होंने प्रार्थना की कि संयुक्त राज्य अमेरिका और उत्तरी कोरिया के नेताओं के बीच आगामी शिखर सम्मेलन “कोरियाई प्रायद्वीप और दुनिया भर में शांति के भविष्य को आश्वस्त करने के लिए सकारात्मक मार्ग के विकास में योगदान दे सकता है।”

संत पापा ने मंगलवार, 12 जून को सिंगापुर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तरी कोरियाई नेता किम जोंग यून के बीच निर्धारित एक बैठक का जिक्र किया।

संत पापा फ्राँसिस ने उत्तरी कोरियाई नेता और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच पहली बैठक के लिए प्रार्थना करने के लिए दुनिया भर के सभी लोगों को आमंत्रित किया।

उन्होंने कहा, “आइये,हम एक साथ कोरिया की रानी, ​​हमारी माता का आह्वान करें कि वे इन वार्ता का मार्गदर्शन करें।”

और इतना कहकर संत पापा ने ‘प्रणाम मरिया’ प्रार्थना की अगुवाई की।

अमेरिकी राष्ट्रपति और उत्तरी कोरियाई नेता दोनों ही रविवार को सिंगापुर पहुंचे। वे शिखर सम्मेलन से पहले सिंगापुर के प्रधान मंत्री ली हसीन लूंग के साथ अलग-अलग मिलेंगे।


(Margaret Sumita Minj)

युवा तीर्थयात्रियों को संत पापा ने फोन कर संदेश दिया

In Church on June 11, 2018 at 2:39 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार 11 जून 2018 (रेई) : शनिवार 9 जून को माचेराता-लोरेटो नाइट मार्च में भाग लेने वाले इटली के युवा तीर्थयात्रियों के साथ एक टेलीफोन वार्तालाप में, संत पापा फ्राँसिस ने उनसे सच्ची खुशी का आनंद लेने का आग्रह किया जो दूसरों को प्यार करते और दूसरों का प्यार स्वीकार करते हैं।

“जीवन एक सफर है। हमेशा आगे बढ़ें, अपने लिए और दूसरों के लिए खुशी की तलाश करें।” यह संत पापा फ्रांसिस का संदेश उन युवाओं के लिए था जो माचेराता-लोरेटो नाइट मार्च तीर्थयात्रा में भाग लेने वाले युवा लोगों के लिए शनिवार की शाम को आयोजित किया गया था।

इस घटना में हजारों युवा तीर्थयात्रियों ने इटली के “ले मारके” क्षेत्र में पहाड़ी रास्ते से होते हुए रात में ‘माचेराता’ से ‘लोरेटो का घर’ तक 28 किलोमीटर तय की।

‘आप जीवन में अभी रुक नहीं सकते’

संत पापा ने कहा, “आप लोग बहादुर युवा हैं जो जीवन के रास्ते में आगे बढ़ रहे हैं … यह एक अच्छा संकेत है। क्योंकि जीवन में कोई भी खड़ा नहीं रह सकता … क्योंकि एक युवा व्यक्ति जो अभी ही खड़ा है वह 20 वर्ष की उम्र में ही रिटायर जैसा है और यह बुरी बात है। उन्होंने कहा “युवाओ, अगर आपको अच्छी तरह से जीना है, तो बाहर निकलो और अपने जीवन को फलदायी बनाओ।”

‘खुशी प्यार करने और प्यार स्वीकार करने में है’

संत पापा फ्राँसिस ने कहा, “खुशी”, “सुपरमार्केट में आप जो कुछ खरीदते हैं वह नहीं है। खुशी केवल प्यार से आती है और खुद को प्यार करने देती है, यानी दूसरों से प्यार का अनुभव कराती है। लड़ाई-झगड़े आपको खुशी नहीं देती है; शत्रुता आपको खुश नहीं देती हैं; दूसरों की शिकायत करना आपको खुशी नहीं देती।” “एक दूसरे के लिए प्यार और सेवा खुशी का मार्ग है।”

संत पापा ने उन्हें “हमेशा आगे बढ़ने, क्षितिज को देखने, जीवन में एक समय में एक कदम उठाने के लिए आमंत्रित किया।” वे अपने स्कूली जीवन के लिए धन्यवाद दें।

वार्षिक मारचेराता-लोरेटो नाइट मार्च फादर जॉनकारलो वेचेरिक्का द्वारा 1978 में शुरू किया गया। वर्तमान में वे  फबियानो-मातेलिका धर्मप्रांत के सेवानिवृत धर्माध्यक्ष हैं। उन्होंने इस तीर्थयात्रा को इटली के युवाओं के स्कूली जीवन के अंत में लोरेटो की माता मरियम को विशेष रुप से धन्यवाद देने के लिए शुरू किया था।


(Margaret Sumita Minj)

बच्चों से अपने पहले शिक्षकों को याद रखने का आग्रह

In Church on June 11, 2018 at 2:37 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 11 जून 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 9 जून को 500 से अधिक स्कूली बच्चों से मुलाकात की जो मिलान और रोम के उपनगरों से “ट्रेनो देई बाम्बिनी” (बच्चों की ट्रेन) में आए थे।

“पहले शिक्षकों को कभी न भूलें, स्कूल को कभी न भूलें, क्योंकि वे आपकी संस्कृति की जड़ों हैं। और अपने शिक्षकों और स्कूलों को याद रखने से आपको जीवन में सफलता हासिल करने में मदद मिलेगी।”

संत पापा फ्रांसिस ने रोम और मिलान के उपनगरों से आये विभिन्न धर्मों के 500 से अधिक बच्चों को शनिवार को उपदेश दिया, जो इतालवी “ट्रेनो देई बाम्बिनी”अर्थात “बच्चों की ट्रेन” नामक एक पहल में उनसे मिलने आए थे। ।

“ट्रेनो देई बाम्बिनी”

संस्कृति हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति दवारा इतालवी रेलवे के सहयोग से “ट्रेनो देई बाम्बिनी” का आयोजन किया गया था। इसमें काथलिक, ओर्थोडोक्स, मुस्लिम, बौद्ध, अन्य धर्मों के और कोई भी धर्म न मानने वाले बच्चे भी शामिल थे। इस साल “ट्रेनो देई बाम्बिनी” का 6 वां संस्करण का विषय “फ्रेंडली सिटी” है, जिसका उद्देश्य उन शहरों के उन उपनगरों का पुनर्विकास करना है जहां बच्चों को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

इतालवी रेलवे के लाल टोपी और सफेद टी-शर्टों पहने हुए संत पापा से मुलाकात करने पहुँचे बच्चे वहुत ही आकर्षक लग रहे थे। संत पापा ने बच्चों के लिए कोई भाषण तैयार नहीं किया था पर बच्चों द्वारा पूछे सवालों का जवाब दिया।

बच्चों द्वारा अपने स्कूल और शिक्षकों के बारे बूछे जाने पर  संत पापा ने अपने प्रारंभिक शिक्षकों को याद की  विशेष रूप से स्टेला को याद किया, जिन्होंने उसे पहले और तीसरे क्लास में पढ़ाया था। संत पापा ने कहा कि वे शुरु से ही उसके साथ संपर्क बनाये रखे थे। बाद में जब वे धर्माध्यक्ष थे तो भी उसकी बीमारी में और 94 वर्ष की उम्र में उसकी मृत्यु तक उसकी सहायता की थी।

संत पापा फ्राँसिस ने बच्चों द्वारा दिये गए उपहारों की बहुत सराहना की और कहा, “यह महत्वपूर्ण है क्योंकि आपने इसे बनाने में अपने हाथ, अपने दिल और अपने दिमाग का इस्तेमाल किया है।” “और जब बुद्धि,दिल और हाथों से जो कुछ बनाया जाता है वह मनुष्य का अपना और विशेष होता है।

एक बार पुनः संत पापा ने उन्हें अपने स्कूल और अपने पहले शिक्षकों को न भूलने के महत्व की याद दिलाई,जो हमेशा उनकी जड़ों को बनाए रखकर जीवन को सफल बनाने में मदद करेगी।


(Margaret Sumita Minj)

निकारागुआ में येसु समाजियों द्वारा शांतिपूर्ण संकल्प का मांग

In Church on June 11, 2018 at 2:36 pm


निकारगुआ, सोमवार 11 जून 2018 (वीआर,रेई) : निकारागुआ के राजनीतिक तनाव और हिंसा के माहौल में मध्य अमेरिका के येसु समाजी राजनीतिक संकट के लिए एक शांतिपूर्ण वार्ता के प्रस्ताव की मांग रहे हैं।

शनिवार को जारी एक बयान में, निकारागुआ में येसु समाजियों ने पुष्टि की है कि संकट का शांतिपूर्ण परिणाम जनसंख्या की सर्वसम्मति इच्छा है, जो लोकतंत्र, स्वतंत्रता और न्याय का दावा कर रहे हैं।

येसु समाजियों का कहना है कि निकारागुआ में ऐसी संवैधानिक और नैतिक मांग का समर्थन करने के लिए 100 से अधिक लोग मारे गए हैं। वे इस बात से आश्वस्त है कि राष्ट्र को कट्टरतावाद, अधिक रक्तपात और अधिक संघर्ष से बचाने के लिए अभी भी समय है। वे उन लोगों से आग्रह करते है जो शांति चाहते हैं वे युद्ध न करें और जो लोग हिंसा नहीं चाहते हैं वे हमला और किसी तरह का दुर्व्यवहार न करें।

येसु समाजियों का कहना है कि धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा आयोजित गोल मेज वार्ता में शामिल होने और मानवाधिकारों का बचाव करने में छात्रों का समर्थन करने के कारण सेंट्रल अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ निकारागुआ के रेक्टर फादर जोसे अल्बेर्टो इडियाक्ज एस.जे. का जीवन खतरे में है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, संयुक्त राष्ट्र संघ, यूरोपीय संसदों, दुनिया के सभी जेसुइट विश्वविद्यालयों, प्रत्येक कलीसिया और मानव गरिमा की रक्षा में लगे सभी लोगों से अपील करते हुए बयान का अंत किया गया। यह देश में एक शांतिपूर्ण और बातचीत के संकल्प का दृढ़ता से समर्थन करता है।

यह निकारागुआ के उन सभी लोगों के शारीरिक सम्मान की भी मांग करता है, जो शांति और न्याय के लिए काम कर रहे हैं।


(Margaret Sumita Minj)

तमिलनाडु धर्माध्यक्षों द्वारा सरकार को गरीबों पर ध्यान देने हेतु आग्रह

In Church on June 11, 2018 at 2:34 pm


ऊटी, सोमवार 11 जून 2018 (मैटर्स इंडिया) : तमिलनाडु धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (टीएनबीसी) ने सरकार से दक्षिणी भारतीय राज्य में वंचित पारंपरिक व्यावसायिक समूहों की समस्याओं पर ध्यान देने का आग्रह किया है।

टीएनबीसी के सहयोग से श्रमिकों के सीबीसीआई कार्यालय द्वारा 7 और 8 जून को संत थिओदोर सेंटोरियम, कूनूर, ऊटी में आयोजित एक सेमिनार में इस प्रसंग पर बात उठाई गई थी।

नौ काथलिक धर्मप्रांत के 35 से अधिक प्रतिनिधियों और श्रमिकों के लिए काम कर रहे कुछ आंदोलनों ने बड़े पैमाने पर तमिलनाडु के असंगठित श्रमिकों के मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा की।

टीएनबीसी क्षेत्रीय श्रम आयोग के अध्यक्ष, पांडिचेरी और कुड्डालोर के महाधर्माध्यक्ष अंतोनी आनंदाराय ने प्रतिभागियों को गरीब श्रमिकों के पक्ष में रहने और उन्हें उनके लिए आवंटित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठाने, श्रमिकों का सम्मान करने और उन्हें गरिमा देने में मदद के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने याद दिलाया कि महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न पर कानून को उन सभी कलीसिया संस्थानों में लागू किया जाना चाहिए।

महाधर्माध्यक्ष ने थूथुकुडी में स्टरलाइट कॉपर कारखाने में गरीब मजदूरों पर पुलिस अधिकारियों के असभ्य और अमानवीय व्यवहार की निंदा की। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ थूथुकुडी (तुतीकोरिन) में पुलिस हमले के पीड़ितों के लिए दो मिनट का मौन प्रार्थना किया।

सम्मेलन में प्रवासियों और शरणार्थियों के मुद्दों पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने तमिलनाडु के प्रमुख मुद्दों जैसे प्रवासन, असंगठित मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा; राजनीतिक शोषण और ट्रेड यूनियन बनाने की जरूरत आदि पर चर्चा की।

सेमिनार ने प्रतिभागियों को असंगठित श्रमिकों के बीच जागरूकता लाने की दिशा में कदम उठाने में मदद की। तमिलनाडु में असंगठित श्रमिकों को व्यवस्थित करना बहुत जरूरी है।

प्रतिभागियों ने कार्यवाही की एक योजना भी तैयार की जिसमें निदेशकों और कोर टीम के सदस्यों की संवेदनशीलता, आंतरिक संघर्ष और मतभेदों को भंग करना, मानवतावादी चिंताओं के लिए आवाज, सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान देना आदि शामिल है।

धर्मप्रांत बचाव, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए उठाए गए कदमों को लागू करेंगी। सभी वक्ताओं ने संत पापा लियो के 1891 के ऐतिहासिक सामाजिक विश्वपत्र, ‘रेरुम नोवरम’ ‘पूंजी और श्रम पर’ काथालिक कलीसिया के सामाजिक शिक्षण पर जोर दिया और आज भी कलीसिया के पास व्यापार एवं कार्यकर्ताओं के अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में बहुत कुछ कहना है ।


(Margaret Sumita Minj)

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