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खीस्तीय साक्ष्य है नमक एवं ज्योति बनना, संत पापा

In Church on June 12, 2018 at 3:40 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 12 जून 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने सभी ख्रीस्तीय विश्वासियों को निमंत्रण दिया है कि वे येसु का साक्ष्य देने के लिए नमक एवं ज्योति बनें।

मंगलवार को वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तीय साक्ष्य का अर्थ है दूसरों के लिए आदर्श बनना, न कि सेवा का उद्देश्य सिर्फ आत्म पदोन्नति होना चाहिए।

संत पापा ने कहा, “ख्रीस्तीय विश्वासी, येसु का सरल एवं स्वभाविक साक्ष्य देने के लिए बुलाये जाते हैं जिन्हें दैनिक पवित्रता में बढ़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ख्रीस्तीय साक्ष्य का अर्थ येसु के उदाहरणों पर चलकर, शहादत में अपना जीवन अर्पित करना हो सकता है किन्तु दूसरा रास्ता, सुबह उठने, काम करने और बिस्तर पर जाने के दैनिक कार्यों द्वारा प्रतिदिन हमें येसु के पीछे ले चलता है। यह बहुत छोटी बात लगती है किन्तु चमत्कार छोटे-छोटे कार्यों द्वारा ही सम्पन्न होते हैं।

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तीय साक्ष्य दीनता पर आधारित होनी चाहिए जिसका अर्थ है दूसरों के लिए साधारण नमक एवं ज्योति के समान बनना।

उन्होंने कहा, “हमें दूसरों के लिए नमक एवं ज्योति बनना है क्योंकि नमक अपने आप में स्वाद नहीं देता बल्कि दूसरों के काम आता है। उसी तरह दीपक अपने लिए नहीं जलता किन्तु दूसरों को प्रकाश देता है।” नमक अपनी ख्याति नहीं बढ़ाता है क्योंकि वह अपने आप में महत्वहीन है। वह दूसरों की सेवा के लिए ही निर्मित है जो चीजों को सुरक्षित रखता एवं भोजन का स्वाद बढ़ाता है। यही सरल साक्ष्य है।

संत पापा ने कहा कि दैनिक ख्रीस्तीय साक्ष्य का अर्थ दूसरों के लिए प्रकाश बनना है, उन्हें अंधकार की घड़ियों में मदद पहुँचाना है।

उन्होंने कहा, “प्रभु कहते हैं, कि तुम नमक हो, तुम ज्योति हो। तुम उसे इस तरह प्रकट करो ताकि दूसरे देख सकें एवं ईश्वर की महिमा कर सकें। जब हम भोजन करते, हम नमक की प्रसंशा नहीं करते बल्कि कहते हैं कि यह भोजन स्वादिष्ठ है। जब हम रात में बत्ती जलाते, हम नहीं कहते कि यह प्रकाश अच्छा है बल्कि उसके प्रकाश में हम एक-दूसरे को तथा वस्तुओं को अच्छी तरह देखकर खुश होते हैं। यह ख्रीस्तीय साक्ष्य का सटीक उदाहरण है।”

संत पापा ने चेतावनी दी कि हम उस फरीसी की तरह व्यवहार करने से बचें जिसने अपनी धार्मिकता के लिए ईश्वर को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि हम अपनी योग्यता के मालिक नहीं है। दैनिक पवित्रता का अर्थ है दूसरों के लिए नमक एवं प्रकाश बनना।


(Usha Tirkey)

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ट्रम्प एवं किम ने हाथ मिलाया एवं ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किया

In Church on June 12, 2018 at 3:37 pm

सिंगापुर, मंगलवार, 12 जून 2018 (एशियान्यूज़)˸ अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एवं उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने समस्त विश्व के सामने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किया।

किम जोंग उन ने पत्रकारों से कहा कि “दुनिया अब एक बड़ा बदलाव देखेगी।” ट्रम्प ने भी इसी बात पर जोर देते हुए कहा, “धन्यवाद, यह बेहद शानदार है।”

12 जून को स्थानीय समयानुसार सुबह 9.00 बजे अमरीका के राष्ट्रपति ट्रम्प एवं कोरियाई नेता किम ने हाथ मिलाकर कोरियाई प्रायद्वीप में शांति की नई सम्भवनाओं को खोल दिया। कोरियाई युद्ध के समाप्त होने के बाद, अमरीका के राष्ट्रपति एवं उत्तर कोरिया के नेता के बीच यह मुलाकात 65 वर्षों बाद हुई है।

दोनों नेता जो विगत कुछ वर्षों से एक-दूसरे पर भारी आरोप लगाते तथा पारस्परिक विनाश के खतरे की बात कर रहे थे, सिंगापुर के सैंटोसा द्वीप में स्थित कैपेला होटल में एक-दूसरे का स्वागत किया। उन्होंने दोनों देशों के ध्वजों की पंक्ति के सामने एक दूसरे से हाथ मिलाया। किम ने कहा, “आपसे मुलाकात कर खुशी हुई। ट्रम्प ने कहा, “हमारे बीच एक शानदार बातचीत होने वाली है और मुझे लगता है कि यह मुलाकात ज़बरदस्त रूप से कामयाब रहेगी। यह मेरे लिए बहुत ही सम्मानज़नक है और मुझे इसमें कोई शक़ नहीं कि हमारे बीच बेहतरीन संबंध स्थापित होंगे।”

हस्ताक्षरित समझौते की विषयवस्तु के बारे अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है। यह माना जा रहा है कि उन्हें कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण और उत्तरी कोरिया की स्थिरता और अर्थव्यवस्था का समर्थन करने के लिए एक आम रेखा मिली है।

दोनों नेताओं ने पत्रकारों से कहा कि वे विगत को पीछे छोड़ना चाहते हैं। 39 मिनटों की मुलाकात के बाद दोनों देशों के नेताओं एवं अधिकारियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किया।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जाए इन ने वार्ता के सकारात्मक परिणाम की आशा व्यक्ति की है।

कोरियाई कलीसिया ने इस मुलाकात की तैयारी हेतु नोविना प्रार्थना द्वारा अपना साथ दिया तथा मेल-मिलाप एवं एकता हेतु सम्मेलन का आयोजिन किया।

कोरिया के धर्माध्यक्षों ने विश्वासियों को हर दिन निम्नलिखित प्रार्थनाओं को पूरा करने हेतु प्रेरित किया है- कोरिया के विभाजन से चंगाई, उन परिवारों के लिए जो कोरियाई युद्ध में बिखर गये हैं, जो भाई बहनें उत्तर कोरिया में रहते हैं, उत्तर कोरिया के लोग जो शरणार्थी के रूप में दक्षिण कोरिया में रह रहे हैं, उत्तर एवं दक्षिण दोनों देशों के राजनीतिक नेताओं के लिए, उत्तर में सुसमाचार प्रचार के लिए, दोनों देशों के बीच वार्ता एवं आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए, दोनों के बीच सच्चे मेल-मिलाप के लिए तथा प्रायद्वीप के शांतिपूर्ण पुनर्मिलन के लिए।


(Usha Tirkey)

आयरलैंड में संत पापा की यात्रा का कार्यक्रम

In Church on June 12, 2018 at 3:35 pm


वाटिकन सिटी, मंगलवार, 12 जून 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ 25 और 26 अगस्त को परिवारों की विश्व सभा के अवसर पर, संत पापा फ्राँसिस की दो दिवसीय आयरलैंड यात्रा के कार्यक्रम को वाटिकन ने प्रकाशित कर दिया है।

प्रकाशित कार्यक्रम के अनुसार –

शनिवार 25 अगस्त 2018

08.15 – बजे संत पापा फ्राँसिस रोम के फ्यूमिचिनो हवाई अड्डे से डबलिन के लिए

प्रस्थान करेंगे।

10.30 – डबलिन हवाई अड्डे पर आगमन।

10.45 – अरेयास अन उवाक्तारेन के लिए प्रस्थान।

11:15 – राष्ट्रपति भवन में आगमन एवं स्वागत समारोह।

11:30 – राष्ट्रपति भवन का दौरा।

12:00 – डबलिन दुर्ग के लिए प्रस्थान।

12:10 – डबलिन दुर्ग में आगमन तथा सामाजिक, नागरिक एवं राजनायिक अधिकारियों

से मुलाकात।

15:30 – संत मरिया महागिरजाघर का दर्शन।

16:15 – कपुचिन पुरोहितों के अतिथिशाला (अकोलियेनत्सा) केंद्र के लिए प्रस्थान।

16:30 – अतिथिशाला केंद्र में परिवारों से व्यक्तिगत मुलाकात

19:30 – क्रोक पार्क स्टेडियम में आगमन।

19:45 – क्रोक पार्क स्टेडियम में परिवारों के साथ उत्सव में सहभागी एवं संत पापा

का सम्बोधन।

 रविवार 26 अगस्त 2018

08:40 – नोक हवाई अड्डा के लिए प्रस्थान।

09:20 – नोक हवाई अड्डा पर आगमन एवं तीर्थस्थल के लिए प्रस्थान।

09:45- नोक तीर्थस्थल पर आगमन एवं प्रार्थनालय का दर्शन। तीर्थस्थल के प्राँगण में

देवदूत प्रार्थना का पाठ।

10:45- नोक हवाई अड्डा हेतु प्रस्थान।

11:10 – नोक हवाई अड्डा पर आगमन।

11:15 – डबलिन के लिए प्रस्थान।

11:50 – डबलिन हवाई अड्डे पर आगमन एवं दोपहर का भोजन।

14:30 – फोएनिक्स पार्क में आगमन।

15:00 – फोएनिक्स पार्क में ख्रीस्तयाग। दोमिनिकन धर्मबहनों के कॉन्वेंट में धर्माध्यक्षों

से मुलाकात।

18:30- हवाई अड्डे पर आगमन, विदाई समारोह।

18:45- रोम के लिए प्रस्थान।

23:00- चम्पिनो हवाई अड्डे पर वापसी।


(Usha Tirkey)

अत्याचार की शिकार महिलाओं की आवाज

In Church on June 12, 2018 at 3:33 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 12 जून 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ परमधर्मपीठीय फाऊँडेशन “एड टू दा चर्च इन नीड” ने महिलाओं पर हो रही हिंसा के खिलाफ दुनिया का ध्यान खींचने हेतु एक अपील जारी की है।

इटली तथा विश्व के अधिकतर हिस्सों में पढ़ी जाने वाली पत्रिका “वानिटी फेर” पर उन्होंने कहा है कि असिया, मेरिल, शरोन, उमा एवं कई महिलाओं ने विश्व का ध्यान महिलाओं पर हो रही हिंसा के कलंक की ओर खींचा है।

परमधर्मपीठीय फाऊँडेशन “एड टू दा चर्च इन नीड” द्वारा लिखा खुला पत्र, एक पृष्ठ का है। जिसमें #MeToo पहल के प्रति आभार प्रकट किया गया है जिसके माध्यम से बलात्कार, हिंसा एवं यौन शोषण से पीड़ित महिलाओं की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया है। उन्होंने कहा है कि वे अत्याचार से पीड़ित ख्रीस्तीयों की मदद विश्व के विभिन्न हिस्सों में 70 सालों से करते आ रहे हैं।

रेबेक्का, दलाल एवं सि. मीना ये महिलाओं के तीन चेहरे हैं जिन्हें अपनी धार्मिक आस्था के कारण अत्याचार का शिकार होना पड़ा। उन चेहरों के पीछे हज़ारों लोग छिपे हैं जिन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से अथवा अन्य समाचार पत्रों के माध्यम से प्रकट किये बिना सताया जाता और उनपर हमला किया जाता है।

रेबेक्का 28 वर्षीय एक लड़की है जो नाईजीरिया में रहती है। उसे बोको हराम द्वारा अपहरण किया गया था जिन्होंने उसका बलत्कार किया, उसे दो वर्षों तक कैद में रखा, उसके एक बच्चे को मार डाला तथा बाद में उसे बेच दिया था।

दलाल 21 वर्ष की है जो ईराक में रहती है। उसे आई एस आई एस की हिंसा का सामना करना पड़ा। जब वह 17 साल की थी तभी वह अपहरण कर ली गयी थी तथा एक देह व्यापारी के रूप में नौ माह के अंदर, नौ लोगों को बेच दी गयी थी। उसकी माता एवं बहन अब भी आईएसआईएस के चंगुल में हैं।

सि. मीना भारत में रहती हैं जिनपर हिन्दू चरमपंथियों ने आक्रमण किया था। उन्होंने कहा कि उनके साथ बलत्कार किया गया और उनपर प्रहार किया गया। उन्होंने उसे 5 किलो मीटर तक नग्न शरीर चलने के लिए मजबूर किया और इस बीच लोग उन्हें पीटते रहे। उस दिन खेद की सबसे बड़ी बात ये थी कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही, जो वहाँ उपस्थित होकर भी, उसकी कोई मदद नहीं की।

अपील में कहा गया है कि यह प्रयास अधिक से अधिक दूर तक फैले ताकि उन सभी महिलाओं को प्रकाश में लाया जा सके जिनके लिए बोलने वाला कोई नहीं है। कहा गया है कि एकात्मता द्वारा ही उदासीनता को तोड़ा जा सकता है।


(Usha Tirkey)

नेयोकाटेक्यूमिनल वे को संत पापा का संदेश

In Church on June 12, 2018 at 3:32 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 12 जून 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ संत पापा फ्राँसिस ने 11 जून को बर्लिन में नेयोकाटेक्यूमिनल वे की 40वीं वर्षगाँठ पर एक संदेश प्रेषित कर उन्हें मिशन हेतु बाहर जाने के लिए प्रेरित किया।

9 और 10 जून को बर्लिन में नेयोकाटेक्यूमिनल वे की 40वीं वर्षगाँठ मनायी गयी। समारोह में धन्यवादी ख्रीस्तयाग अर्पित किया गया तथा किको अरग्वेल्लो द्वारा “सफरिंग आफ द इनोसेंट्स” (निर्दोषों की पीड़ा) संगीत को प्रस्तुत किया गया।

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन ने संत पापा की ओर से बर्लिन के महाधर्माध्यक्ष होइनेर कोच को एक तार संदेश प्रेषित किया तथा किको अरग्वेल्लो के संगीत की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा, “यह बाईबिल के शोकगीत से प्रेरित एवं उसी पर आधारित है।” संदेश में कहा गया है कि यह शोकगीत शोवाह के अनेक पीड़ितों की याद दिलाती है। शोवाह की स्मृति एवं इसकी घोर हिंसा कभी भुलाई नहीं जा सकती। संत पापा ने कहा है कि “यह मेल-मिलाप, पारस्परिक समझदारी तथा हमारे बड़े भाई यहूदियों के प्रति प्रेम के हमारे दायित्वों के लिए निरंतर चेतावनी होना चाहिए।”

संदेश के अंत में, संत पापा ने उनके उत्सव में सहभागी होते हुए उनके लिए करुणावान ईश्वर से आशीष की कामना की है।

किको अरग्वेल्लो नेयोकटेक्यूमेलन वे के सह- संस्थापक हैं जो काथलिक कलीसिया का एक बड़ा मिशनरी आंदोलन है। आंदोलन ने 5 मई 2018 को रोम के तोर वेरगाता में अपनी स्थापना का 50वाँ वर्षगाँठ मनाया था।


(Usha Tirkey)

बच्चों को खेलने, पढ़ने एवं शांतिमय वातावरण में बढ़ने का अधिकार

In Church on June 12, 2018 at 3:29 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 12 जून 2018 (रेई)˸ बच्चे परिवार, समाज और देश के भविष्य हैं। वे परिवार को खुशियों भर देते हैं क्योंकि वे निर्दोष, स्नेहिल एवं कोमल होते हैं किन्तु बाल श्रम के द्वारा उनका बचपन छीन लिया जाता है। उन्हें खेलने एवं बढ़ने के अवसर दिये जाने के बजाय, उनसे भारी काम कराया जाता है।

इसी का विरोध करने हेतु संयुक्त राष्ट्रसंघ ने 12 जून को बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस घोषित किया है।

संत पापा फ्राँसिस ने एक ट्वीट प्रेषित कर बाल श्रम के खिलाफ अपना समर्थन प्रकट किया। उन्होंने संदेश में लिखा, “बच्चे खेल सकें, अध्ययन कर सकें एवं शांतिमय वातावरण में विकास कर सकें। धिक्कार, उन लोगों को जो उनके आनन्दमय आशा का गला घोंट देते हैं।”


(Usha Tirkey)

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