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परिपूर्ण जीवन की चाह

In Church on June 13, 2018 at 3:45 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 13 मई 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को संहिता की आज्ञा पर अपनी धर्मशिक्षा देते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

आज हम एक नये विषयवस्तु पर अपनी धर्मशिक्षा माला की शुरुआत करेंगे जो कि संहिता की शिक्षा पर आधारित है। इस संदर्भ में हमें अपने को धर्मग्रंथ की उस परिस्थिति से अवगत करने की जरूरत है जहाँ एक युवक येसु के पास आ कर घुटने टेकते हुए यह सवाल करता है कि अनंत जीवन की प्राप्ति हेतु उसे क्या करना चाहिए। (मकु. 10.17-21) संत पापा ने कहा कि इस सवाल के परिपेक्ष में हम अपने जीवन की सारी चुनौतियों को पाते हैं, सम्पूर्ण, अनंत जीवन की चाह, उसे कैसे प्राप्त किया जा सकता हैॽ वहां जाने हेतु कौन-सा रास्ता हैॽ एक सच्चा जीवन जीने की चाह, जिसकी खोज हेतु आज कितने ही युवक अपने को भटकता हुआ पाते और जीवन की क्षणभंगुर चीजों का शिकार हो जाते हैं।

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि बुहत से ऐसे हैं जो अपने को इससे दूर रखने की सोच लेते हैं  क्योंकि वे इसे अपने जीवन में खतरनाक पाते हैं। मैं युवाओं से कहना चाहूँगा कि हमारे जीवन में सबसे बड़ा शत्रु हमारी जटिल कठिनाइयाँ नहीं हैं चाहे वे कितनी भी गंभीर और नाटकीय क्यों न हो वरन हमारे जीवन का सबसे बड़ा बैरी जीवन के प्रति हमारी अनुकूलनता है जहाँ हम अपने में विनम्रता या सौम्यता के बदले कायरता और चलता है के मनोभावों को अपना लेते हैं। धन्य पियेर जोर्जियो फ्रस्ती कहते हैं कि हमें अपने जीवन को विश्वास और भरोसे में मजबूती से जीने की जरूरत है न कि जीवन में घसीट-घसीट कर चलने की। हमें आज के युवाओं के लिए ईश्वर पिता से प्रार्थना करने की जरूरत है कि वे उन्हें अपनी साकरात्मक उत्तेजना से भर दें जिससे वे अपने जीवन को अच्छा और सुन्दर बनाये बिना अपने में संतुष्ट न रहें। संत पापा ने कहा कि यदि युवाओं में जीवन को सुन्दर बनाने की भूखा न हो तो मानवता किस ओर अग्रसर होगीॽ

सुसमाचार में उस युवा के द्वारा पूछा गया सवाल हम सबों के जीवन का एक अंग ह।, हम अपने जीवन की सुन्दरता, अनंत जीवन को कैसे प्राप्त सकते हैंॽ येसु इसका उत्तर देते हुए युवा से कहते हैं, “तुम्हें संहिता की आज्ञाओं का ज्ञान है। इस प्रकार वे संहिता में निहित दस आज्ञाओं का जिक्र करते हैं। युवा के सवाल से हमें पता चलता है कि उसमें सम्पूर्ण जीवन का अभाव है। वह येसु को उत्तर में कहता है,“मैंने अपने युवाकाल से ही इन सारी बातों का अनुपालन किया है।”

संत पापा फ्रांसिस ने कहा, “आप युवावास्था से प्रौढता को कैसे प्राप्त करते हैंॽ” जब हम अपनी खाम्मियों को स्वीकार करना शुरु करते हैं। हम अपने में तब व्यस्क होते हैं जब हम अपने जीवन में “किसी बात की कमी” का एहसास करते हैं। उस युवा के येसु विचार करने हेतु विवश करते हैं कि उसके द्वारा किये गये कार्य अपने में प्रर्याप्त नहीं हैं।

स्त्री और पुरूष के रुप में मानव जीवन कितना सुन्दर है। हमारा जीवन कितना मूल्यवान है। लेकिन इसके बावजूद मानवीय इतिहास की सच्चाई यही है कि हमने अपने जीवन की खाम्मियों को अब तक नहीं स्वीकारा है।

येसु सुसमाचार में हमें अपना संदेश देते हुए कहते हैं,“यह न समझो कि मैं संहिता अथवा नबियों के लेखों को रद्द करने आया हूँ। मैं उन्हें रद्द करने नहीं बल्कि पूरा करने आया हूँ।” (मत्ती. 5.17) येसु दुनिया में अपने आने की बात को हमें बतलाते हैं। उस युवक को अपने आप से बाहर निकलने की जरूरत थी जो उसे अपने कार्यों और अपने जीवन को अपने लिए नहीं वरन ख्रीस्त के मनोभवानुसरण जीने की मांग करता था। येसु उसे करीब से देखते और अपना अनुसरण करने हेतु निमंत्रण देते हैं यह कहते हुए, “तुम में एक बात की कमी है, जाओ, अपना सब कुछ बेच कर गरीबों को दे दो, और स्वर्ग में तुम्हारे लिए पूंजी रखी रहेगी। तब आकर मेरा अनुसरण करो।” (माकु. 10. 21) संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि हममें से कौन अपने जीवन में असली और नकली के बीच चुनाव कर सकता हैॽ यह हमारे लिए एक चुनौती है। आप अपने जीवन में असली बातों का चुनाव करें, नकली का नहीं। येसु हमें नकली नहीं वरन असल जीवन का दान, सच्चा प्रेम और सच्चा धन प्रदान करते हैं। युवा अपने विश्वास में कैसे सच्चे जीवन का चुनाव कर सकते हैं यदि हम उन्हें वास्तविक जीवन को नहीं दिखलाते, यदि वे हमें जीवन की दुविधा भरी स्थिति में पड़ा हुआ पाते हैं। संत इग्नासियुस इसे अपने जीवन में “मैजिस” और अधिक, बेहतर की संज्ञा देते हैं। यह अपने में एक तरह की आग है, किसी कार्य को करने का जोश, जो हमें अपनी निद्रा की स्थिति में झकझोर देता है।”

हमें अपने जीवन की सच्चाई से शुरू करने की आवश्यकता है जो हमें अपने “जीवन की कमी” के पार ले जायेगी। हमें अपने जीवन में साधारण चीजों का परिक्षण करें जो हमें असाधरण चीजें को पूरा करने हेतु मदद करेगा।

संत पापा ने कहा इस धर्मशिक्षा में हम मूसा के द्वारा ख्रीस्तियों के लिए निर्धारित दो पाट्टियों को देखेंते हैं जिसे येसु अपने हाथों में पकड़ते, जो हमें युवावास्था के मोह से स्वर्ग राज्य के धन की ओर ले चलती है, जहाँ हम येसु का अनुसरण करते हैं। हम संहिता की दोनों आज्ञाओं में पिता स्वर्ग के द्वार को हमारे लिए खुलते हैं क्योंकि येसु ख्रीस्त जो उसमें से हो कर गुजरे हैं हमें सच्चे जीवन की ओर ले चलते हैं। यह उनका जीवन है जो हमें उनके पुत्र-पुत्रियाँ बनाता है।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासी समुदाय का अभिवादन किया।

उन्होंने विशेष रुप से युवाओं, बुजुर्गों, बीमारों और नव विवाहितों की याद की।  संत पापा ने कहा कि हम आज पादुआ से संत अन्तोनी, कलीसिया के आचार्य की याद करते हैं जो गरीबों के संरक्षक संत हैं। वे हमें निष्ठा और उदारतापूर्ण प्रेम की शिक्षा देते हैं। अपने पड़ोसियों को उनकी तरह प्रेम करने से हम अपने आस-पड़ोस में असहाय लोगों को नहीं पाते जो हमें अपने जीवन की कठिन परिस्थिति में मजबूत बने रहने को मदद करती है।

इतना कहने के बाद संत पापा ने सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के साथ हे हमारे पिता प्रार्थना का पाठ किया और सबों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।


(Dilip Sanjay Ekka)

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विश्व कप राष्ट्रों के बीच एकजुटता और शांति को बढ़ावा दे, संत पापा फ्राँसिस

In Church on June 13, 2018 at 3:44 pm


वाटिकन सिटी, बुधवार 13 जून 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 13 जून को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में देश विदेश से आये तीर्थयात्रियों और विश्वासियों के साथ बुधवारीय धर्मशिक्षा को साक्षा किया। इसके उपरांत संत पापा ने रुस में होने वाले विश्व कप के खिलाड़ियों और आयोजकों को अपनी शुभकामनायें दी।

संत पापा ने कहा,“कल रूस में विश्व कप शुरु हो जाएगा। मैं खिलाड़ियों और आयोजकों को अपनी सौहार्दपूर्ण बधाई भेजना चाहता हूँ, साथ ही उन लोगों को भी बधाई देना चाहता हूँ सामाजिक संचार के साधनों से इस घटना से जुड़े रहकर खेल का आनंद लेंगे।”

संत पापा ने कहा,“यह महत्वपूर्ण खेल का आयोजन विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के बीच मिलन, संवाद और बंधुता का अवसर बने और राष्ट्रों के बीच एकजुटता और शांति को बढ़ावा मिले।”

“2018 फीफा विश्व कप रूस” 14 जून से 15 जुलाई तक होने वाला है। चैंपियनशिप का उद्घाटन करने वाला मेजबान रूस के लिए ये आयोजन काफ़ी मायने रखता है क्योंकि हर चार साल पर होने वाले विश्व कप फुटबॉल पर सारी दुनिया की निगाह लगी होती है।


(Margaret Sumita Minj)

सिंगापुर शिखर सम्मेलन वास्तव में ऐतिहासिक, प्रेरितिक राजदूत

In Church on June 13, 2018 at 3:43 pm


सेयोल, बुधवार 13 जून 2018 (वीआर,रेई) : कोरिया के प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष अल्फ्रेड जुएरेब ने  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तरी कोरियाई नेता किम जोंग-अन के बीच शिखर सम्मेलन के नतीजे पर टिप्पणी की।

कोरिया और मंगोलिया के प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष अल्फ्रेड जुएरेब ने अमेरिका और उत्तरी कोरिया के नेताओं के बीच मंगलवार के “ऐतिहासिक” शिखर सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा कि कलीसिया में “आशा और आत्मविश्वास” है लेकिन चेतावनी है कि हम लंबी प्रक्रिया की शुरुआत में हैं।

लंबी और कठिन मार्ग

वाटिकन न्यूज़ के साथ एक साक्षात्कार में सियोल से बात करते हुए महाधर्माध्यक्ष जुएरेब ने कहा कि कोरियाई लोग और स्थानीय कलीसिया उत्सुकतापूर्वक “इन सचमुच ऐतिहासिक घटनाओं” का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तरी कोरियाई नेता किम जोंग-अन के बीच शिखर सम्मेलन को शांति को ओर “एक लंबी और कठिन मार्ग की शुरुआत में एक महत्वपूर्ण पृष्ठ को चिह्नित करना” कहा। महाधर्माध्यक्ष जुएरेब ने कहा, “हम आशावादी हैं क्योंकि यह शुरुआत बहुत सकारात्मक थी, बहुत अच्छी थी” और हम “आग और क्रोध” और “उत्तरी कोरिया का पूर्ण विनाश” जैसे शब्दों के उलझन से उपर उठकर शांति की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

शांति के लिए नोवेना

महाधर्माध्यक्ष जुएरेब ने कहा कि कोरिया की कलीसिया ने इन घटनाओं को “महान विश्वास के साथ” लिया है। सियोल में काथलिक महागिरजाघर में हर मंगलवार को शांति और सुलह के लिए विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोरिया के काथलिक धर्माध्यक्षों ने कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति, सुलह और एकता के लिए प्रार्थना करने के लिए 17 से 25 जून तक एक नोवेना का प्रस्ताव दिया है।

महाधर्माध्यक्ष जुएरेब ने कहा कि इस ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन और इसके द्वारा मेलमिलाप के उपयुक्त वातावरण में कलीसिया उत्तर कोरिया के सुसमाचार प्रचार के लिए प्रार्थना करती है।

उन्होंने कहा, “परमधर्मपीठ बातचीत और सुलह के पक्ष में किसी भी पहल के लिए अपना समर्थन देने की इच्छा रखती है ताकि येसु मसीह के सुसमाचार को उत्तर कोरिया में लाया जा सके।”


(Margaret Sumita Minj)

संवैधानिक मूल्यों को पढ़ाने के लिए मॉड्यूल जारी

In Church on June 13, 2018 at 3:41 pm

नई दिल्ली, बुधवार 13 जून 2018 (मैटर्स इंडिया) : 11 जून को भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के शिक्षा और संस्कृति कार्यालय ने कलीसिया-प्रबंधित स्कूलों में भारतीय संविधान के प्रस्ताव को पढ़ाने के लिए 9-पेज का एक मॉड्यूल जारी किया।

कार्यालय के राष्ट्रीय सचिव सेल्सियन फादर जोस मणिपादम ने कहा, “वास्तव में शिक्षा और संस्कृति के लिए सीबीसीआई कार्यालय शिक्षा संस्थानों को सच्चे देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और देश के लिए प्यार को बढ़ावा देने के लिए छात्रों को संवैधानिक मूल्यों को पढ़ाने हेतु निर्देशित कर रहा है।”  उन्होंने धर्माध्यक्षों और देश के काथलिक शैक्षिक संस्थानों के प्रमुखों के बीच मॉड्यूल प्रसारित किया है।

यह कदम युवा पीढ़ी को संवैधानिक मूल्यों को पढ़ाने में मदद करने के लिए कलीसिया के प्रयासों का हिस्सा है।

केरल में महाधर्माध्यक्ष द्वारा काथलिक स्कूलों को संविधान सिखाने की आवश्यकता पर बल दिया गया था। इसी के दो दिन बाद मॉड्यूल प्रसारित किया गया है। काथलिक धर्माध्यक्षीय काउंसिल के अध्यक्ष त्रिवेंद्रम के महाधर्माध्यक्ष मारिया कालिस्ट सोसा पाक्यम ने कहा, “संविधान द्वारा निर्धारित किए गए धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को सुनिश्चित करने के लिए हर किसी को सक्रिय रूप से काम करना चाहिए।”

फादर मणिपादम ने कहा कि युवाओं में संविधान के मूल्यों को लागू करने में मदद के लिए कई धर्माध्यक्षों ने अनुरोध किया था, इससे प्रोत्साहित होकर कार्यालय ने यह पहल की।

सल्सियन धर्मसंघ के परिपत्र में “भारतीय संविधान को पढ़ाने की पाठ योजना” और “मेरा भारत संकल्प” को जोड़ दिया गया है। फादर मणिपादम ने सुझाव दिया कि सच्चे देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में असेंबली के दौरान संविधान के संकल्प को दोहराई जाएगी।

प्रस्तावना पर मॉड्यूल 2016 में दक्षिण एशिया के जेसुइट एजुकेशनल एसोसिएशन के सचिव फादर सनी जैकब ने तैयार किया था, जिसे शैक्षिक वर्ष (जुलाई-नवंबर) के पहले भाग में अपने स्कूलों में पढ़ाया जाएगा। यह चार चरणों में 85-शब्द प्रस्तावना का विस्तृत अध्ययन मार्गदर्शित करता है।

पहले चरण में, छात्रों को प्रस्तावना याद रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, इसे एक महीने के लिए असेंबली में उपयोग करते हैं, प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ते हैं और माध्यमिक कक्षाओं में भाषण तैयार करते हैं।

दूसरा चरण प्रस्तावना के महत्व पर जोर दिया जाता है और सामूहिक गतिविधियों, चर्चाओं, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं, निबंध लेखन और पोस्टर प्रतियोगिता के रूप में सुझाव देता है।

तीसरे चरण का केंद्र है, अधिनियमित शब्द, “हम भारत के लोग”। यह छात्रों को विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से विविधता में एकता दिखाने के लिए छोटे नाटकों को मंचित करना है। यह विभाजन की जांच करने के लिए “हम महसूस कर रहे हैं” या “हम भारतीयों” के महत्व का अभ्यास करना है। इस चरण में, सीनियर छात्रों को जूनियर छात्रों से इस मुद्दे पर बात करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

चौथे चरण में, छात्रों को प्रस्तावना में प्रमुख शब्दों: संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणराज्य से परिचित कराना। संविधान बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता का वादा करता है। मॉड्यूल चाहता है कि सीनियर छात्र इसकी समीक्षा करें कि देश ने इन आदर्शों को कितना उपल्बध किया है और इसकी प्राप्ति में कौन कौन सी बाधायें हैं।

 


(Margaret Sumita Minj)

फिलीपीनी कलीसिया ने पुरोहितों की हत्या के खिलाफ आवाज उठाई

In Church on June 13, 2018 at 3:40 pm

मनिला, बुधवार 13 जून 2018 (उकान) : फिलीपींस में काथलिक कलीसिया के नेताओं ने हाल के महीनों में पुरोहितों पर हुए हमलों और हत्याओं के खिलाफ आवाज उठाई।

मनिला के कार्डिनल लुइस एंटोनियो तागले ने कहा, “स्वतंत्रता नकली है” क्योंकि देश में हत्याओं के बावजूद लोग “न्याय के साथ घूम रहे हैं”।

“हम पुनः दोहराते हैं : कि जीवन को नष्ट करना ईश्वर की इच्छा के खिलाफ है। हत्या व्यक्तिगत और सामाजिक समस्याओं का समाधान नहीं है,” अपने स्वतंत्रता दिवस संदेश में कार्डिनल तागले ने कहा था।

फिलीपींस ने 120 वां स्वतंत्रता दिवस मनाया और इसके  दो दिन बाद 12 जून को हत्यारों के काथलिक पुरोहित रिचमोंड विलाफ्लोर निलो को मार डाला।

कार्डिनल तागले ने मनिला महाधर्मप्रांत के काथलिकों से अपील की कि “जीवन के खिलाफ हमारे पापों के लिए ईश्वर की क्षमा मांगें।”

महाधर्माध्यक्ष ने आदेश दिया कि प्रत्येक शाम को आठ बजे गिरजाघर की घंटी बजने पर स्मृति के सम्मान में और मरने वालों के लिए प्रार्थना करें।

लिंगयान-दगूपन के महाधर्माध्यक्ष सुकरात विल्लेगास ने फादर निलो की हत्या की निंदा की।  जिसे धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने पहले ही “अपमानजनक बुराई” के रूप में निंदा की थी।

महाधर्माध्यक्ष सुकरात विल्लेगास ने बयान में कहा, “वे हमारे झुंड को मार रहे हैं। वे हमारे चरवाहों को मार रहे हैं। वे हमारी आस्था को मार रहे हैं। वे हमारे कलीसिया में कहर ला रहे हैं। वे  फिर से ईश्वर को मार रहे हैं जैसा कि उन्होंने कलवारी में किया था।”

उन्होंने काथलिक कलीसिया के उत्पीड़न को रोकने के लिए राष्ट्रपति रोड्रिगो ड्यूटेटे से मांग की क्योंकि  पुरोहितों के खिलाफ जानबूझ कर किये गये हमले और अधिक अपराधों को प्रोत्साहित कर सकते हैं। ”

कलीसिया के नेताओं ने 18 जून को घोषित किया कि फादर निलो की मृत्यु के नौवें दिन, “पुनरावृत्ति दिवस” होगा। इस दिन का पवित्र मिस्सा “ईश्वर के खिलाफ निन्दा के पापों और हमारे पुरोहितों और धर्माध्यक्षों के खिलाफ हत्या करने और प्रताड़ना देने के लिए” और हत्यारों के हृदय परिवर्तन के लिए चढ़ाया जाएगा। ”

पुरोहित की हत्या की जांच को प्राथमिकता

राष्ट्रपति कार्यालय ने फिलीपीन राष्ट्रीय पुलिस को फादर निलो की हत्या की जांच को प्राथमिकता देने का आदेश दिया है।

ज़ारागोज़ा शहर में नुएस्टर्रा सेनोरा डेला निवी गिरजाघर के अंदर पवित्र मिस्सा के दौरान हमलावरों ने फादर निलो को खिड़की से गोली मार दी थी।

फादर निलो तीसरे पुरोहित हैं दूसरे पुरोहित मार्क वेनतुरा की हत्या भी गत्तारान में पवित्र मिस्सा समारोह के बाद हुई थी। जबकि पिछले दिसंबर में फादर मार्सेलिटो पेज़, भी जैन शहर में एक राजनीतिक कैदी की रिहाई की सहायता के कुछ घंटों बाद न्यूवे एसीजा में मारे गए थे।


(Margaret Sumita Minj)

यमन, होदेडा शहर में 300 हजार बच्चे संकट में

In Church on June 13, 2018 at 3:39 pm

न्यूयॉक, बुधवार 13 जून 2018 (रेई) : संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के महानिदेशक सुश्री हेनरीएटा एच. फोर ने सोमवार को न्यूयॉक स्थित मुख्यालय में सभा को संबोधित करते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि वे इन रिपोर्टों से “बेहद चिंतित” थीं कि संयुक्त अरब अमीरात की सेनाएं जो सऊदी नेतृत्व वाली गठबंधन के हिस्से हैं, हौदी विद्रोहियों से जूझ रहे हैं, जो वर्तमान में होदेडा को नियंत्रित करते हैं और शहर को फिर से हासिल करने के लिए एक आक्रामक हमले की योजना बना रहे हैं।

2015 से दोनों पक्षों के बीच संघर्ष बढ़ गया है, जिसमें करीब 11 मिलियन बच्चों सहित 75 फीसदी यमनियों की सहायता की जरूरत है।

सोमवार को, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने न्यूयॉर्क में संवाददाताओं से कहा कि यमन के लिए विशेष दूत मार्टिन ग्रिफिथ्स के सहयोग से यमन संकट पर “गंभीर बातचीत” चल रही हैं और उम्मीद की जाती है कि सैन्य टकराव को रोका जा सकेगा। “मुझे आशा है कि होदेडा को लड़ाई से बचाना संभव होगा।”

संयुक्त राष्ट्र राहत कार्य संगठन के अध्यक्ष मार्क लोकॉक ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा कि “संयुक्त राष्ट्र के दर्जनों कर्मचारी” शहर में मौजूद हैं। “जबकि संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवीय संगठन अपनी मौजूदगी को फिर से व्यवस्थित कर रहे हैं, हमारी योजना, इरादा और आशा वहाँ रहने की है। हमारे पास होदेडा में अभी भी दर्जनों कर्मचारी हैं।”

यूनिसेफ की महानिदेशक सुश्री फोर ने अपने बयान में कहा कि 300,000 बच्चे होदेडा शहर में संकट में पड़े हैं। बढ़ती हिंसा और तेजी से बिगड़ती मानवीय स्थितियां बच्चों के लिए और अधिक खतरनाक स्थितियां पैदा कर रही हैं, जो पहले ही देश में खाद्य असुरक्षा, गंभीर कुपोषण के शिकार हैं। इसके अलावा, “यमन में लाखों बच्चे खाने पीने और अन्य आवश्यक सामानों पर निर्भर करते हैं वे हर दिन बंदरगाह में लेने आते हैं।”

उन्होंने कहा, “ईंधन के बिना,पीने का साफ पानी लोगों तक नहीं पहुँच सकेगा, जिससे गंदा पानी पीने से दस्त और कोलेरा के और भी मामले सामने आएंगे, जो छोटे बच्चों के लिए घातक हो सकते हैं।”

 


(Margaret Sumita Minj)

येसु से मुलाकात करने से कभी न थकें, संत पापा फ्राँसिस

In Church on June 13, 2018 at 3:37 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 13 जून 2018 (रेई) : पवित्र यूखारिस्तीय समारोह में काथलिक विशेष रुप से बाईबल के पाठों से ईश्वर का वचन सुनते और बलि परिवर्तन के बाद येसु का शरीर ग्रहण करते हैं। संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार को द्वीट प्रेषित कर सभी ख्रीस्तीयों को येसु के साथ अपने संबंध मजबूत बनाये रखने की प्रेरणा दी।

संदेश में उन्होंने लिखा,“येसु से प्रार्थना में मुलाकात करने, ईश्वर का वचन सुनने और पवित्र यूखारिस्त में येसु का शरीर ग्रहण करने से कभी न थकें।”


(Margaret Sumita Minj)

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