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संवैधानिक मूल्यों को पढ़ाने के लिए मॉड्यूल जारी

In Church on June 13, 2018 at 3:41 pm

नई दिल्ली, बुधवार 13 जून 2018 (मैटर्स इंडिया) : 11 जून को भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के शिक्षा और संस्कृति कार्यालय ने कलीसिया-प्रबंधित स्कूलों में भारतीय संविधान के प्रस्ताव को पढ़ाने के लिए 9-पेज का एक मॉड्यूल जारी किया।

कार्यालय के राष्ट्रीय सचिव सेल्सियन फादर जोस मणिपादम ने कहा, “वास्तव में शिक्षा और संस्कृति के लिए सीबीसीआई कार्यालय शिक्षा संस्थानों को सच्चे देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और देश के लिए प्यार को बढ़ावा देने के लिए छात्रों को संवैधानिक मूल्यों को पढ़ाने हेतु निर्देशित कर रहा है।”  उन्होंने धर्माध्यक्षों और देश के काथलिक शैक्षिक संस्थानों के प्रमुखों के बीच मॉड्यूल प्रसारित किया है।

यह कदम युवा पीढ़ी को संवैधानिक मूल्यों को पढ़ाने में मदद करने के लिए कलीसिया के प्रयासों का हिस्सा है।

केरल में महाधर्माध्यक्ष द्वारा काथलिक स्कूलों को संविधान सिखाने की आवश्यकता पर बल दिया गया था। इसी के दो दिन बाद मॉड्यूल प्रसारित किया गया है। काथलिक धर्माध्यक्षीय काउंसिल के अध्यक्ष त्रिवेंद्रम के महाधर्माध्यक्ष मारिया कालिस्ट सोसा पाक्यम ने कहा, “संविधान द्वारा निर्धारित किए गए धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को सुनिश्चित करने के लिए हर किसी को सक्रिय रूप से काम करना चाहिए।”

फादर मणिपादम ने कहा कि युवाओं में संविधान के मूल्यों को लागू करने में मदद के लिए कई धर्माध्यक्षों ने अनुरोध किया था, इससे प्रोत्साहित होकर कार्यालय ने यह पहल की।

सल्सियन धर्मसंघ के परिपत्र में “भारतीय संविधान को पढ़ाने की पाठ योजना” और “मेरा भारत संकल्प” को जोड़ दिया गया है। फादर मणिपादम ने सुझाव दिया कि सच्चे देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में असेंबली के दौरान संविधान के संकल्प को दोहराई जाएगी।

प्रस्तावना पर मॉड्यूल 2016 में दक्षिण एशिया के जेसुइट एजुकेशनल एसोसिएशन के सचिव फादर सनी जैकब ने तैयार किया था, जिसे शैक्षिक वर्ष (जुलाई-नवंबर) के पहले भाग में अपने स्कूलों में पढ़ाया जाएगा। यह चार चरणों में 85-शब्द प्रस्तावना का विस्तृत अध्ययन मार्गदर्शित करता है।

पहले चरण में, छात्रों को प्रस्तावना याद रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, इसे एक महीने के लिए असेंबली में उपयोग करते हैं, प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ते हैं और माध्यमिक कक्षाओं में भाषण तैयार करते हैं।

दूसरा चरण प्रस्तावना के महत्व पर जोर दिया जाता है और सामूहिक गतिविधियों, चर्चाओं, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं, निबंध लेखन और पोस्टर प्रतियोगिता के रूप में सुझाव देता है।

तीसरे चरण का केंद्र है, अधिनियमित शब्द, “हम भारत के लोग”। यह छात्रों को विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से विविधता में एकता दिखाने के लिए छोटे नाटकों को मंचित करना है। यह विभाजन की जांच करने के लिए “हम महसूस कर रहे हैं” या “हम भारतीयों” के महत्व का अभ्यास करना है। इस चरण में, सीनियर छात्रों को जूनियर छात्रों से इस मुद्दे पर बात करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

चौथे चरण में, छात्रों को प्रस्तावना में प्रमुख शब्दों: संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणराज्य से परिचित कराना। संविधान बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता का वादा करता है। मॉड्यूल चाहता है कि सीनियर छात्र इसकी समीक्षा करें कि देश ने इन आदर्शों को कितना उपल्बध किया है और इसकी प्राप्ति में कौन कौन सी बाधायें हैं।

 


(Margaret Sumita Minj)

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