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अंतर-धार्मिक संबंधों को मजबूत करने हेतु वाटिकन क्रिकेट टीम की ब्रिटेन यात्रा

In Church on July 2, 2018 at 3:37 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 2 जुलाई 2018 (वाटिकन न्यूज) : वाटिकन की क्रिकेट टीम मंगलवार को अंतर-धार्मिक संबंधों को मजबूत करने के लिए ब्रिटेन के चौथे दौर की यात्रा करेगी। यह टीम, आधिकारिक तौर पर ‘संत पीटर क्रिकेट क्लब’ से जाना जाता है। इसे  2013 में स्थापित किया गया था और यह रोम में याजकीय अध्ययन कर रहे गुरुकुल के छात्रों से बना है।

यह संस्कृति हेतु गठित परमधर्मपीठीय  परिषद के अनुपालन के तहत संचालित है और क्रिकेट के प्रति साझा प्यार के माध्यम से पारस्परिक और अंतर-धार्मिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए इसे स्थापित किया गया था।

‘आस्था की किरण’ यात्रा

टीम अपनी 12 दिवसीय ‘आस्था की किरण’ यात्रा इंग्लैंड के उत्तर से शुरू करेगी। टीम शुरुआती मैच प्रतिष्ठित जेसुइट स्टोनहर्स्ट कॉलेज के साथ खेलेगी।

6 जुलाई को, वाटिकन ग्यारह लंदन जाएंगे जहां कैंटरबरी की महाधर्माध्यक्ष के सदस्यों की टीम में शामिल होंगे और प्रसिद्ध लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान में वे मुस्लिम, सिख, हिंदू, बौद्ध और यहूदी खिलाड़ियों से बनी एक अंतर-धार्मिक टीम के खिलाफ खेलेंगे।

वे विंडसोर कास्टेल में कॉमनवेल्थ XI, रॉयल हाउसहोल्ट क्रिकेट क्लब और संसद सदस्यों की टीम के खिलाफ मैच खेलेंगे। 8 जुलाई को वे एक युवा अपराधियों के जेलखाने का दौरा करेंगे। वहाँ पवित्र यूखारिस्तीय समारोह में भाग लेंगे और एक मैच भी खेलेंगे।

साथ ही वाटिकन टीम लंदन मस्जिद, एक सिख गुरुद्वारा, एक हिंदू मंदिर और एक यहूदी सभास्थल का दौरा कर पारस्परिक संबंधों को मजबूत करने और समकालीन समाज में विश्वास की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करेंगे।

 


(Margaret Sumita Minj)

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संत पापा द्वारा निकारागुआ, सीरिया और अफ्रीका में शांति की अपील

In Church on July 2, 2018 at 3:35 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 2 जुलाई 2018 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 1 जुलाई को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में देश-विदेश से आये तीर्थयात्रियों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। इसके उपरांत संत पापा ने विश्व के विभिन्न देशों में शांति हेतु विश्वासियों से प्रार्थना की अपील की।

निकारगुआ

संत पापा फ्राँसिस ने “निकारागुआ के प्यारे लोगों” के लिए प्रार्थना की और कहा कि वे “निकारागुआ के धर्माध्यक्षों और कई लोगों के प्रयासों और सद्भावना में शामिल होना चाहते हैं जो जनतंत्र के मार्ग पर चल रहे राष्ट्रीय वार्ता की प्रक्रिया में मध्यस्थ और गवाहों के रूप में कार्य कर रहे हैं।”

निकारागुआ के उप-राष्ट्रपति ने इस हफ्ते संवाद और शांति के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं विपक्षी समूहों की हिंसा की निंदा करते हैं जिनके कारण हाल के महीनों में देश की कार्यविधि वस्तुतः ठप पड़ गई है तथा प्रदर्शनकारियों और पुलिस बलों के बीच घातक संघर्ष हुए हैं।

देश के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने शांति वार्ता तालिका में लौटने के लिए पक्षों से आग्रह किया है।

सीरिया

संत पापा ने सीरिया की गंभीर स्थिति का वर्णन किया, विशेष रूप से, दारा प्रांत में हाल में हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा, “पिछले दिनों में सैन्य कार्रवाई ने स्कूलों और अस्पतालों में भी बमबारी की है” और हजारों नए शरणार्थियों को अपने घरों से भागने के लिए मजबूर किया।

उन्होंने कहा, “मेरी प्रार्थनाओं के साथ, मैं अपनी अपील को नवीनीकृत करता हूँ ताकि इतने ज्यादे लोग, जो वर्षों से हिंसा और पीड़ा से प्रभावित हुए है,उन्हें और दुख सहने से बचाया जा सके।”

इथियोपिया और एरित्रिया में शांति वार्ता

संत पापा ने कहा, “कई संघर्षों के बीच, मैं एक पहल को उजागर करना चाहता हूँ जिसे ऐतिहासिक रूप में वर्णित किया जा सकता है और यह अच्छी खबर है। 20 वर्षों के बाद इन दिनों इथियोपिया और एरित्रिया की सरकारें शांति की बात कर रही हैं।”

दोनों देश, जो एक ही संस्कृति, भाषा और इतिहास को साझा करते हैं, 1998 से ही दुश्मन बन गये हैं जब वे एक सीमावर्ती शहर पर युद्ध करने गए थे। दो वर्षों के बाद दोनों पक्षों द्वारा एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, लेकिन अगले 16 वर्षों तक न तो किसी पक्ष ने इसका पालन किया। हालांकि, अचानक इथियोपिया के नए प्रधानमंत्री अबी अहमद ने, इस हफ्ते दोनों देशों के बीच शत्रुता को समाप्त करने और शांति के मार्ग को आगे बढ़ाने के तरीके को पूरा करने का वादा किया।

संत पापा फ्राँसिस ने आशा व्यक्त की कि यह पहल “अफ्रीका के इन दो देशों और पूरे अफ्रीकी महाद्वीप के लिए आशा की किरण” होगी।

गुफा में फंसे थाई लड़कों के लिए प्रार्थनाएं

इतना कहने के बाद संत पापा ने उन युवाओं के समूह को याद किया जो थाईलैंड में भूमिगत गुफा में फंस गए हैं और उन्होने कहा कि वे उनके लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

बचाव करने वाले खोजकर्ता और उनके फुटबॉल कोच, 12 से 16 वर्ष की आयु के 12 लड़कों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। बाढ़ वाले गुफा परिसर में पानी के स्तर को कम करने के लिए भारी पंपों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे डाइवर्स मार्ग के साथ गाइड रस्सियों और ऑक्सीजन टैंक रख सकते हैं।

रविवार के प्रयास ने आठ दिनों से उत्तरी थाईलैंड में गुफा परिसर में गायब होने वाले समूह तक पहुंचने के बड़े प्रयास में कई दिनों में पहली महत्वपूर्ण प्रगति को चिन्हित किया। गुफा में बढ़ते बाढ़ के पानी ने खोज-और-बचाव अभियान को रोक दिया था।


(Margaret Sumita Minj)

येसु के हृदय में कोई भी अनाहूत प्रवेष्टा नहीं है, संत पापा

In Church on July 2, 2018 at 3:33 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार, 2 जुलाई 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में रविवार 1 जुलाई को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

इस रविवार का सुसमाचार पाठ (मार. 5,21-43) येसु द्वारा किये गये दो चमत्कारों को प्रस्तुत करता है और उन्हें जीवन की ओर विजयी यात्रा के रूप में वर्णित करता है।

प्रथम चमत्कार का वर्णन करते हुए सुसमाचार लेखक संत मारकुस सभागृह के अधिकारी जैरूस के बारे बतलाता है कि उसने येसु के पास आया तथा येसु से आग्रह किया कि वे उसके घर आयें क्योंकि उसकी बारह साल की बेटी मरने पर थी। येसु उसके आग्रह को स्वीकार कर, उसके साथ हो लिये किन्तु रास्ते पर उन्हें सूचना मिली कि लड़की मर चुकी है। संत पापा ने कहा कि हम यहाँ लड़की के पिताजी की स्थिति की कल्पना कर सकते हैं किन्तु येसु उससे कहते हैं, ”डरिए नहीं। बस, विश्वास कीजिए।” (पद 36) येसु ने पेत्रुस, याकूब और याकूब के भाई योहन के सिवा किसी को भी अपने साथ आने नहीं दिया। जब वे सभागृह के अधिकारी के यहाँ पहूँचे, तो ईसा ने देखा कि कोलाहल मचा हुआ है और लोग विलाप कर रहे हैं। उन्होंने भीतर जा कर लोगों से कहा, ”यह कोलाहल, यह विलाप क्यों? लड़की मरी नहीं, सो रही है।” इस पर वे उनकी हँसी उड़ाते रहे। ईसा ने सब को बाहर कर दिया और वह लड़की के माता-पिता और अपने साथियों के साथ उस जगह आये, जहाँ लड़की पड़ी हुई थी। लड़की का हाथ पकड़ कर उससे कहा, ‘तालिथा कुम”। इसका अर्थ है- ओ लड़की! मैं तुम से कहता हूँ, उठो। लड़की उसी क्षण उठ खड़ी हुई और चलने-फिरने लगी, क्योंकि वह बारह बरस की थी। लोग बड़े अचम्भे में पड़ गये।” (मार.5,38-42)

संत पापा ने कहा कि चमत्कार की इस कहानी के अंदर संत मारकुस ने दूसरी कहानी को डाला है, रक्त स्राव से पीड़ित महिला की चंगाई की कहानी, जिसे येसु का स्पर्श करते ही चंगाई मिल गयी थी। (पद 27).

संत पापा ने कहा कि यहाँ प्रभावित करने वाली बात ये है कि उस महिला का विश्वास आकर्षित करता है। वह ईश्वरीय मुक्तिदायी शक्ति को चुरा लेती है जिसके कारण येसु महसूस करते हैं कि उनसे शक्ति निकली है वे जानने का प्रयास करते हैं कि किसने ऐसा किया। इस पर एक महिला शर्माती हुई उनके सामने आती है तथा स्वीकार करती है कि उसी ने कपड़े छूवे थे। तब येसु कहते हैं, तुम्हारे विश्वास ने तुम्हारा उद्धार किया है। (पद. 34)

इन दो अन्तःपाशी कहानियों का एक ही केंद्र है विश्वास तथा येसु को जीवन के स्रोत के रुप में प्रस्तुत करना। एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो उन लोगों को जिन्हें उन पर पूर्ण विश्वास है, जीवन प्रदान करते हैं। वे दो पात्र, लड़की के पिता एवं बीमार महिला, येसु के शिष्य नहीं थे किन्तु उनके विश्वासपूर्ण मांगों को पूरा किया गया। उन दोनों को येसु पर विश्वास था इस बात से हम समझते हैं कि हरेक व्यक्ति के लिए प्रभु के दिल में जगह है अतः किसी को यह महसूस नहीं करना चाहिए कि वह बाहर से घुसने का प्रयास कर रहा है, अथवा अपमानित व्यक्ति है या उसे कोई अधिकार नहीं है। येसु के हृदय तक पहुँचने के लिए दो चीजों की आवश्यकता होती है, चंगा किये जाने की आवश्यकता महसूस करना तथा अपने आप को उन्हें समर्पित कर देना।

संत पापा ने प्रश्न किया कि क्या हम चंगा किये जाने की आवश्यकता महसूस करते हैं, किसी पाप अथवा किसी समस्या से? क्या हम उस आवाज को सुनते हैं जो कहता है, क्या आप येसु में विश्वास करते हो? चंगा किये जाने के लिए ये दो चीजें आवश्यक हैं, उनके हृदय तक पहुँचना एवं उन पर भरोसा रखते हुए चंगा किये जाने की आवश्यकता महसूस करना। येसु ऐसे लोगों की खोज हेतु भीड़ में जाते तथा उन्हें गुमनाम होने से बचाते हैं। जीने से नहीं डरने एवं हिम्मत रखने हेतु मुक्त करते हैं। इसके लिए वे अपनी नजर एवं शब्द का प्रयोग करते हैं जो उन्हें बहुत अधिक दुःख एवं पीड़ा के रास्ते पर ले चलता है। हम भी उन शब्दों को सीखने एवं उनका उच्चरण करने के लिए बुलाये जाते हैं जो मुक्त करता तथा दृष्टि जो पुनः जीवन देता है जो जीने की चाह रखते हैं।

संत पापा ने कहा कि सुसमाचार के इस पृष्ठ में विश्वास तथा नया जीवन का विषय जिसे सभी को प्रदान करने येसु आये। उस घर में प्रवेश करते हुए जहाँ लड़की मरी पड़ी थी उन्होंने उन सबको बाहर कर दिया जो उत्तेजित थे और विलाप कर रहे थे और उन्होंने कहा कि लड़की मरी नहीं है सो रही है। संत पापा ने कहा, “येसु प्रभु हैं और उनके लिए शारीरिक मृत्यु निद्रा के समान है अतः इसमें निराश होने की कोई बात नहीं है” किन्तु एक दूसरी तरह की मृत्यु है जिससे डरना चाहिए वह है बुराई द्वारा हृदय का कठोर हो जाना। उन्होंने कहा, “जी हाँ हमें उससे डरना चाहिए, जब हम महसूस करते हैं कि हमारा हृदय कठोर हो गया है, एक ममी (शव) बन गया है तो हमें इससे डरना चाहिए क्योंकि यह हृदय की मृत्यु है। किन्तु पाप एवं ममी बना हृदय भी येसु के लिए अंतिम शब्द नहीं है क्योंकि उन्होंने हमारे लिए पिता के असीम दया को लाया है। जिसके कारण हम यदि गिर भी जाएँ तौभी उनकी कोमल एवं ऊँची आवाज, हम तक पहुँच सकती है। मैं कहता हूँ उठो, यह सुनना अत्यन्त सुखद है जिसके द्वारा येसु हम प्रत्येक को सम्बोधित करते हैं, मैं कहता हूँ खड़े हो जाओ, आगे बढ़ो, हिम्मत रखो, उठो।

संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना की कि धन्य कुँवारी मरियम विश्वास एवं प्रेम की यात्रा में हमारा साथ दे तथा हम उनकी ममतामय मध्यस्थता द्वारा हमारे उन भाई बहनों के लिए प्रार्थना करें जो शारीरिक एवं आध्यात्मिक रूप से पीड़ित हैं।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने विभिन्न लोगों के लिए प्रार्थना का आह्वान किया।

उन्होंने बारी में अपनी प्रेरितिक यात्रा का स्मरण दिलाते हुए कहा, “अगली बार मैं कई कलीसियाओं के धर्मगुरूओं एवं मध्य पूर्व के कई ख्रीस्तीय समुदायों के साथ बारी जा रहा हूँ। हम वहाँ उस क्षेत्र की नाटकीय स्थिति पर एक दिवसीय प्रार्थना एवं चिंतन में भाग लेंगे, जहाँ अभी भी हमारे कई भाई बहनें विश्वास के कारण दुःख झेल रहे हैं। हम वहाँ एक आवाज में कहेंगे, ”तुझ में शान्ति बनी रहे”। (स्तोत्र, 122:8) संत पापा ने इस यात्रा की सफलता हेतु सभी से प्रार्थना का आग्रह किया।

उसके बाद उन्होंने देश-विदेश से एकत्रित सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्याटकों का अभिवादन किया। उन्होंने खास रूप से पुर्तगाल के विश्वासियों, प्रेरितों की रानी परमधर्मपीठीय विश्वविद्यालय के पुरोहितों, पोलैंड की पश्चताप एवं ख्रीस्तीय उदारता की फ्राँसिसकन धर्म बहनों और ईराक के विश्वासियों का अभिवादन किया।

संत पापा ने पल्ली दलों एवं संगठनों, प्रेरितों की रानी के मिशनरी धर्म बहनों गालियो के युवाओं, पादुवा धर्मप्रांत के युवाओं तथा येसु के परमपावन रक्त के आध्यात्मिक परिवार के सदस्यों का अभिवादन किया जिनके सम्मान में जुलाई महिना को समर्पित किया गया है।

अंत में उन्होंने सभी से प्रार्थना का आग्रह करते हुए उन्हें शुभ रविवार की मंगलकामनाएँ अर्पित की।


(Usha Tirkey)

संत पापा द्वारा बारी की प्रेरितिक यात्रा हेतु प्रार्थना की अपील

In Church on July 2, 2018 at 3:31 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 2 जुलाई 2018 (वाटिकन न्यूज) : “हम एक दिवसीय प्रार्थना में उन भाईयों और बहनों तथा उन क्षेत्रों की परिस्थितियों से संलग्न होंगे और जहां उन्हें विश्वास के कारण दुख सहना पड़ रहा है।” उक्त बात संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 1 जुलाई को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में देश-विदेश से आये तीर्थयात्रियों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ करने के उपरांत कही।

संत पापा ने प्रांगण में उपस्थित विश्वासियों से आने वाले शनिवार 8 जुलाई को अपनी आगामी प्रेरितिक यात्रा बारी के बारे में आगाह किया और उस दिन की सफलता के लिए उनसे प्रार्थना की अपील की। उन्होंने कहा कि वे दक्षिण इटली के शहर बारी की यात्रा करेंगे। वहाँ मध्य पूर्व की कलीसियाओं और विश्वास-आधारित समुदायों के नेताओं के साथ मिलकर एक दिवसीय प्रार्थना में समय बितायेंगे।

उन्होंने कहा, “हम एक आवाज में कहेगे, “शांति आपके साथ रहे।”

संत पापा ने रविवार के ट्वीट में भी सभी को शांति और एकता की इस तीर्थयात्रा के लिए प्रार्थना करने को कहा।

संदेश में उन्होंने लिखा, “मैं आप सभी को प्रार्थना में शामिल होने के लिए अपील करता हूँ जैसा कि मैं शनिवार को बारी की यात्रा कर रहा हूँ, यह लंबे समय से पीड़ित मध्य पूर्व में शांति के लिए प्रार्थना की एक तीर्थ यात्रा है।”


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा द्वारा बोलीविया के राष्ट्रपति का अभिवादन

In Church on July 2, 2018 at 3:30 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 2 जुलाई 2018 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 30 जून को वाटिकन में बोलीविया के राष्ट्रपति इवो मोरालेस से मुलाकात की।

वाटिकन प्रेस कार्यालय ने बैठकों के बाद एक बयान जारी करते हुए कहा, “दोनों के बीच सौहार्दपूर्ण चर्चाओं के दौरान, द्विपक्षीय समझौते के कार्यान्वयन के विशेष संदर्भ के साथ, वाटिकन और बोलीविया के बीच सकारात्मक संबंध विकसित किए गए।  उन्होंने क्षेत्रीय स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया। ”

संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात के राष्ट्रपति मोरालेस ने वाटिकन राज्य के विदेश सचिव महाधर्माध्यक्ष पॉल गल्लाघर के साथ के मुलाकात की।

विदित हो कि संत पापा फ्राँसिस ने जुलाई 2015 में बोलीविया की प्रेरितिक यात्रा की थी।


(Margaret Sumita Minj)

कंधमाल पीड़ित महिलाओं ने केरल काथलिक महिलाओं को किया प्रेरित

In Church on July 2, 2018 at 3:27 pm

कंधमाल, सोमवार 2 जुलाई 2018 (मैटर्सइंडिया) : केरल की काथलिक महिलाओं के एक समूह ने कंधमाल में पांच दिन बिताए। उनका कहना था कि ओडिशा की हिंसा में सताए गए ख्रीस्तीयों के विश्वास ने मसीह में उनकी धारणा को और भी गहरा कर दिया।

केरल काथलिक धर्माध्यक्षीय काउंसिल के महिला आयोग का प्रतिनिधित्व करने वाली 11 सदस्यीय टीम के सदस्य सिस्टर जोसिया पद्दीरादाथु ने कहा, “कंधमाल के ख्रीस्तीयों ने आधुनिक भारत में सबसे बुरे धार्मिक उत्पीड़न का सामना करके मसीह में गहराई से विश्वास किया है।” सिस्टर जोसिया मैटर्स इंडिया को बताया, “कंधमाल हिंसा से बचे हुए लोगों की बातों ने मुझे गहराई से छुआ और मुझे झकझोर दिया है।”

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की महिला परिषद का राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत 26 से 30 जून कंधमाल की यात्रा करना था।

परिषद की सचिव सिस्टर तालिशा नादुकुदियिल ने इस यात्रा की व्यवस्था किया था। उन्होंने बताया कि ओडिशा का कंधमाल जिला 2007 और 2008 में ईसाई विरोधी उत्पीड़न का केंद्र था। कम से कम 100 लोग, ज्यादातर ख्रीस्तीय मारे गए थे और 56,000 से अधिक लोगों को बेघर किया गया था। महीनों तक चले गए तबाही में सैकड़ों गिरजाघर और ख्रीस्तीयों के घर भी नष्ट हो गए थे।

सिस्टर नादुकुदियिल ने कहा कि केरल टीम के सदस्यों ने “गहरे विश्वास का अनुभव” और “कंधमाल लोगों के संघर्षों के साथ एकजुटता व्यक्त करने का अवसर” पाया है।

परिषद ने देश के अन्य हिस्सों से इसी तरह की यात्राओं का आयोजन पहली बार किया था।

सिस्टर नदुकुदियिल ने कहा, “हम चाहते हैं कि कंधमाल के लोग विशेष रूप से महिलाएँ और बच्चे कलीसिया द्वारा उनके ल ए चिंता और  देखभाल का अनुभव करें।”

पिछले अप्रैल, सीबीसीआई परिषद ने कंधमाल की महिलाओं को सिलाई मशीन वितरित किया था।.

सिस्टर नादुकुदियाल के अनुसार, हिंसा के दस साल बाद भी कंधमाल की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा,”कुछ क्षेत्रों में गिरजाघर और घरों का अभी तक पुनर्निर्माण नहीं किया गया है और बच्चों के स्कूली शिक्षा की बहुत कम गुंजाइश है। युवाओं को अंधकारमय भविष्य का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं को उनके विस्थापन के बाद कोई काम नहीं है। लोगों ने अपनी भूमि समेत अपनी सारी चीज़ें खो दी हैं। वे अब अपने अस्तित्व के लिए जंगलों पर निर्भर करते हैं। कुछ दैनिक मजदूर बन गए हैं। ”

काथलिक धर्माध्यक्षीय परिषद के महिला आयोग के अध्यक्ष गुड़गांव के धर्माध्यक्ष जेकब बरनाबास के नेतृत्व में 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 2017 में कंधमाल का दौरा किया और इस क्षेत्र के लोगों की मदद करने का फैसला किया था।

महिला परिषद कार्यक्रमों के तहत कंधमाल में स्वयंसेवकों को वहां के बच्चों को ट्यूशन देने के लिए सहायता देना शामिल हैं। छात्रों की देखभाल करने के लिए शिक्षकों को नियुक्त करने की भी योजना है।

केरल महिला परिषद ने विधवाओं को सिलाई-बुनाई सीखने के लिए 100,000 रुपये दान किए जिससे कि वे अपने बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरी कर सकें।

परिषद ने अंबेडकर नगर, रायकिया शहर में महिलाओं को सिलाई ट्रेनिंग दिलाने के लिए सामुदायिक हॉल बनाने का भी वादा किया।


(Margaret Sumita Minj)

धार्मिक नेताओं द्वारा ड्यूटेरटे के साथ बातचीत करने की इच्छा

In Church on July 2, 2018 at 3:26 pm

मनिला, सोमवार 2 जुलाई 2018 (उकान) : कलीसिया के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, फिलीपीन के राष्ट्रपति रोड्रिगो ड्यूटेरटे को देश के धार्मिक नेताओं से व्यक्तिगत रूप से बात करनी चाहिए और प्रतिनिधियों का उपयोग नहीं करना चाहिए।

काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की सार्वजनिक मामलों की समिति के कार्यकारी सचिव फादर जेरोम सिकिलानो ने कहा कि राष्ट्रपति के साथ “सीधा वार्ता” बेहतर होगा।

इस हफ्ते के शुरुआती दिनों में, ड्यूटेरटे ने कलीसियाओं के नेताओं से बात करने के लिए चार व्यक्तियों की एक टीम का नाम दिया, जिससे उनके द्वारा ईश्वर, ख्रीस्तीय धर्म और कलीसिया के खिलाफ किए गए हाल के निंदा-भाषण के विवादों को खत्म किया जा सके।

फादर ने कहा कि बैठक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष, दावाओ के महाधर्माध्यक्ष रोमुलो वल्लेस और ड्यूटेरटे के बीच होनी चाहिए।

राष्ट्रपति जो दावाओ के दक्षिणी फिलीपीन शहर से हैं, ने दावा किया है कि महाधर्माध्यक्ष उनके दोस्त हैं और यहां तक कि उन्होंने ड्यूटेरटे के पोते को भी बपतिस्मा दिया है।

फादर सिकिलानो ने कहा कि राष्ट्रपति के साथ बैठक बेहतर होगा क्योंकि यदि कोई प्रतिनिधि कुछ कहता है तो  ड्यूटेरटे आसानी से अर्थ बदल सकते हैं। “लेकिन अगर बैठक में राष्ट्रपति जो कुछ कहते है … उसकी जिम्मेदारी खुद को लेना होगा।”

28 जून को, फादर सिकिलानो ने काथलिक धर्माध्यक्षों के साथ बात करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक संदेशवाहक पादरी बॉय सयाकॉन से मुलाकात की। पादरी बॉय सयाकॉन ने कहा कि वार्ता का उद्देश्य “कलीसिया को  समझना” और ड्यूटेरटे के घोषणाओं की “सहिष्णुता” तलाशना है।

पादरी सयाकॉन ने कहा, “(राष्ट्रपति) उनके शब्दों से नाराज हैं।”

उन्होंने कहा,”क्योंकि कलीसिया एक क्षमाशील कलीसिया है और ईश्वर क्षमा करने वाले ईश्वर हैं। इन्हीं चीजों पर हम चर्चा करेंगे।”

पादरी सयाकॉन ने फादर सिकिलानो से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा कि ड्यूटेरटे बातचीत में भाग ले सकते है। “बैठक में उपस्थित होने की संभावना बहुत अधिक है।”

पिछले हफ्ते ईश्वर के खिलाफ ड्यूटेरटे की चौंकाने वाली टिप्पणी ने विभिन्न कलीसिया के नेताओं और समूहों को नाराज किया था।

राष्ट्रपति के प्रवक्ता हैरी रोक जूनियर ने हालांकि कहा कि राष्ट्रपति के निंदा-भाषण केवल काथलिक कलीसिया के नेताओं द्वारा उनके खिलाफ की गई आलोचनाओं के जवाब में थे।


(Margaret Sumita Minj)

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