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अकेलापन का अनुभव करने वाले पुरोहितों को मदद मिले,संत पापा

In Church on July 4, 2018 at 2:49 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 4 जुलाई 2018 (वाटिकन न्यूज) : विश्व प्रार्थना नेटवर्क द्वारा प्रसारित जुलाई महीने के लिए संत पापा फ्राँसिस का वीडियो संदेश पुरोहितों की थकान पर केंद्रित है। संत पापा पुरोहितों के लिए प्रार्थना करने को कहते हैं : “हम एक साथ प्रार्थना करें क्योंकि जो पुरोहित कठिनाई में जीवन बिताते है और अपने प्रेरितिक कार्यों में अकेलापन का अनुभव करते हैं वे ईश्वर से सांत्वना और अपने भाइयों के साथ दोस्ती और अपनापन महसूस कर सकें।”

लोग अपने चरवाहों से प्यार करते हैं

संत पापा ने कहा “पुरोहित, अपने गुणों और कमियों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवा देते हैं और इतनी सारी चुनौतियों का सामना करते हुए वे निराशा में नहीं रह सकते, इन क्षणों में यह याद रखना अच्छा है कि लोग अपने पुरोहितों से प्यार करते हैं, उन्हें उनकी आवश्यकता होती है और उनपर वे भरोसा करते हैं।”


(Margaret Sumita Minj)

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संत पापा जलवायु संकट को हल करने के लिए ‘नैतिक बल’, अल गोरे

In Church on July 4, 2018 at 2:47 pm


वाटिकन सिटी, बुधवार 4 जुलाई 2018 (वाटिकन न्यूज) : नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और पूर्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति, अल गोरे, पर्यावरण के दुनिया के सबसे प्रमुख रक्षकों में से एक हैं। उनकी 2007 की वृत्तचित्र फिल्म, “एक असुविधाजनक सत्य”, ने ऑस्कर जीता और उनकी जलवायु रियलिटी प्रोजेक्ट ने हाल ही में बर्लिन में एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन की मेजबानी की।

वेटिकन न्यूज के साथ इस विशेष साक्षात्कार में, अल गोरे ने पोप फ्रांसिस के प्रेरितिक उदबोधन, “लाउदातो सी” की प्रशंसा की और “स्थिरता क्रांति” की मांग की।

वे पर्यावरण संरक्षण के लिए दुनिया के सबसे मजबूत आवाज हैं। इस “हरे रंग की लड़ाई” में उनके जुनून के बारे बूछे जाने पर उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि जीवन का उद्देश्य ईश्वर की महिमा करना है और यदि हम ईश्वर की सृष्टि की उपेक्षा और विनाश करते हैं, तो यह हमारे जीवन जीने के तरीके के साथ बेहद असंगत है। इसके अलावा, जलवायु संकट अब मानवता के अस्तित्व की सबसे बड़ी चुनौती है और दुनिया के जीवविज्ञानी के मुताबिक, केवल मानवता ही नहीं है जो जोखिम में है परंतु इस धरती को साझा करने वाली सभी जीवित प्रजातियों में से आधा हिस्सा इस शताब्दी के दौरान विलुप्त होने का खतरा है। ईश्वर ने जब नूह को अपने जहाज में हर प्रजातियों के जोड़े को इकट्ठा करने के निर्देश दिया जिससे कि उन्हें अपने साथ जीवित रख सके, तो मेरा मानना है कि निर्देश भी हमारे लिए है।

वर्तमान में, हम 110 मिलियन टन गर्मी-फंसे हुए मानव निर्मित ग्लोबल वार्मिंग प्रदूषण के लिए खुले सीवर के रूप में हमारे ग्रह के आस-पास के वातावरण के पतले खोल का उपयोग कर रहे हैं। उस अतिरिक्त गर्मी ऊर्जा के परिणाम स्पष्ट हैं: मजबूत तूफान, अधिक विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन, गहरे और लंबे सूखे, फसल विफलताओं, कई क्षेत्रों में पानी की कमी, जंगल की आग को मजबूत करना, बीमारी फैलाना, बर्फ पिघलना, और समुद्र स्तर की वृद्धि – विश्व महासागर के अम्लीकरण में वृद्धि इत्यादि।

अतः यहां वास्तव में कोई विकल्प नहीं है। हमें जलवायु संकट को हल करना है। जैसा कि संत पापा फ्रांसिस ने कहा है, “यदि हम सृष्टि को नष्ट करते हैं, तो सृष्टि हमें नष्ट कर देगी।”

मैं संकट के समाधान में योगदान देने के प्रयासों में अपने हर औंस ऊर्जा को डालने में सक्षम होने के लिए भाग्यशाली रहा हूँ और मैं दुनिया के लाखों कार्यकर्ताओं और नेताओं से प्रेरित हूँ जो स्वच्छ ऊर्जा विकास के लिए स्थिरता अंदोलन चला रहे हैं। इन कार्यकर्ताओं और नेताओं से असली जुनून और शक्ति मुझे मिलती है।

संत पापा फ्राँसिस का नेतृत्व दुनिया भर में हम सभी के लिए एक प्रेरणा रहा है, खासकर जब जलवायु संकट को हल करने के लिए अपनी बातों को सामने रखते और बार बार याद दिलाते हैं। मैं उनकी नैतिक शक्ति की स्पष्टता के लिए आभारी हूँ। वे हमारे बीच सबसे कमजोर लोगों के बारे में सबसे शक्तिशाली तरीके से भी बोलते है और यह समझने में मदद करते है कि जलवायु संकट से कैसे विशिष्ट रूप से गरीब प्रभावित होते हैं, विशेष रूप से, उनका प्रेरितिक उदबोधन “लाउदातो सी”।  पेरिस समझौते से पहले जलवायु संकट को संबोधित करने के लिए प्रतिबद्ध करने के लिए दुनिया की अगुवाई में काथलिक कलीसिया ने एक महत्वपूर्ण कदम चिह्नित किया है।


(Margaret Sumita Minj)

अमेरिकी धर्माध्यक्ष : आप्रवासन संकट में ‘कोई दुर्जन’ नहीं है

In Church on July 4, 2018 at 2:45 pm


वाटिकन सिटी, बुधवार 4 जुलाई 2018 (वाटिकन न्यूज) : अमेरिकी धर्माध्यक्षों की एक टीम ने मेक्सिको की सीमा पर अमेरिका में प्रवेश करने वाले प्रवासियों को सेवाएं प्रदान करने वाले कर्मियों के केंद्रों और संरचनाओं का दो दिनों तक दौरा किया। सोमवार को उन्होंने काथलिक चारिटी के रियो ग्रांडे वाल्ले के मानवतावादी सहायता केंद्र की यात्रा की। अगले दिन उन्होंने बच्चों के लिए सरकार संचालित पुनर्वास केंद्र, ‘कासा पाद्रे’ सेंटर का दौरा किया। वहां उन्होंने करीब 250 बच्चों से मुलाकात की और उनके साथ पवित्र यूखारिस्त समारोह मनाया। बाद में उन्होंने एक ऐसे केंद्र का दौरा किया जहां प्रवासियों के प्रवेश करने के लिए कागजी कार्यवाही शुरु की जाती है।

‘कोई दुर्जन’ नहीं

अमेरिकी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल डैनियल डिनार्डो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह प्रेरितिक दौरा था। दो दिनों का दौरा अच्छा और कभी-कभी दर्दनाक भी था। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें चुनौतियां मिली हैं, उन्हें हर साइट पर लोगों का सहयोग मिला और सभी कर्मचारी उदार और सहायक थे।

स्थानों का दौरा करने के बाद उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि वहाँ कोई ‘कोई दुर्जन’ नहीं है। जिन बच्चों को उनके परिवारों से अलग किया गया था, उनके माता-पिता को फिर से मिलाना होगा। जो पहले ही शुरू हो चुका है …और इसके लिए हमें खुशी है…लेकिन यह निश्चित रूप से अभी तक समाप्त नहीं हुआ है, और जटिलताएं आ सकती हैं, लेकिन जितना जल्दी हो सके बच्चों को अपने परिवार से मिलाना बहुत जरुरी है।

बच्चों को मिलाने की प्राथमिकता

अमेरिकी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के उपाध्यक्ष और लॉस एंजिल्स के महाधर्माध्यक्ष होसे गोमेज़ ने कहा कि उनके लिए बच्चों को अकेला देखना मुश्किल था। “वहां उनके साथ रहना और उनकी मदद करना और उन्हें कुछ आशा देना हमारे लिए एक विशेष अनुग्रह था”। महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि पवित्र मिस्सा के दौरान, उन्होंने ईश्वर की उपस्थिति पर बात की और बच्चों को एक-दूसरे की मदद करने के लिए प्रोत्साहित किया। 2 दिवसीय यात्रा के बाद उनकी प्राथमिक चिंता भी कार्डिनल डिनार्डो की तरह ही थी: “मेरा पहला विचार परिवारों को मिलाने की तात्कालिक आवश्यकता ….इन बच्चों को अपने माता-पिता के साथ मिलाना बहुत महत्वपूर्ण है। ” महाधर्माध्यक्ष ने यह कहकर समाप्त किया कि वे परिवारों के एकीकरण में काथलिक चीरिटी और यूएससीसीबी के प्रयासों को देखकर काफी प्रभावित हुए।


(Margaret Sumita Minj)

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख द्वारा बांग्लादेश में रोहिंग्या शिविरों का दौरा

In Church on July 4, 2018 at 2:43 pm


कुतुपालोंग,बुधवार 4 जुलाई 2018 (उकान) : संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो ग्युटेरेस ने बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों की यात्रा के दौरान अत्याचारों के “अकल्पनीय” घटनाओं को सुना और रोहिंग्यों के खिलाफ “अपराध” के लिए म्यांमार को जिम्मेदार ठहराया।

गुटेरेस ने सताए गए अल्पसंख्यक मुस्लिमों की स्थिति को “मानवतावादी और मानवाधिकारों के दुःस्वप्न” के रूप में वर्णित किया। पिछले साल म्यांमार सेना के हिंसा अभियान से बचने वाले लोगों के अस्थायी आश्रयों के दौरे से पहले संयुक्त राष्ट्र ने जातीय सफाई की तुलना की थी।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने 2 जुलाई को भीड़ वाले शिविरों में रहने वाले शरणार्थियों से बलात्कार और हिंसा की गवाही सुनी, जहां लगभग दस लाख लोग – ज्यादातर रोहिंग्यों ने म्यांमार में हिंसा की लगातार वारदातों की वजह से शरण मांगी है।

“यह शायद मानव अधिकारों के सबसे दुखद, ऐतिहासिक और  व्यवस्थित उल्लंघनों में से एक है,” गुटेरेस ने दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी शिविर कुतुपालोंग में संवाददाताओं से कहा।

“कभी-कभी लोग भूल जाते हैं कि जो हुआ उसके लिए कौन जिम्मेदार है। तो आइए स्पष्ट करें कि जिम्मेदारी कहां है – यह म्यांमार में है। “लेकिन यह सच है कि पूरा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इसे रोकने में सक्षम नहीं था।”

बांग्लादेश में रोहिंग्या के करीब 700,000 लोग हिंसा से बचने के लिए पिछले अगस्त में सीमा पार भाग गए थे।

उन्हें म्यांमार में कई लोगों द्वारा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। राखीन राज्य को अपनी मातृभूमि कहे जाने के बावजूद उन्हें बांग्लादेश से आये अवैध आप्रवासियों का नाम देकर हटा दिया गया था।

विश्व बैंक के प्रमुख श्री जिम योंग किम के साथ संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरेस ने रोहिंग्या शिविरों की पहली यात्रा की। उन्होंने “हत्या और बलात्कार के अकल्पनीय आपबीती घटनाओं” को सुना।

गुटेरेस ने ट्विटर पर लिखा, “संकट के पैमाने और आज मैंने जो पीड़ा देखी है, उसके लिए मैं तैयार नहीं था।”

“मैंने रोहिंग्या शरणार्थियों से उनकी दिल को दहलाने वाली आपबीती घटनाओं को सुना जो हमेशा मेरे साथ रहेंगे।”

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने मई के आरंभ में म्यांमार और राखीन राज्य का दौरा किया, शरणार्थियों से मुलाकात की जिन्होंने म्यांमार की सेना के हाथों मारने वाले हत्याओं, बलात्कार और गांवों का विस्तृत विवरण दिया।

म्यांमार ने संयुक्त राज्य अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा जातीय सफाई के आरोपों का जोरदार खंडन किया है।

बांग्लादेश और म्यांमार रोहिंग्या को वापस लेने के लिए नवंबर में सहमत हुए लेकिन प्रक्रिया बंद हो गई।


(Margaret Sumita Minj)

भारत में नकली खबरें हत्याओं के लिए जिम्मेदार

In Church on July 4, 2018 at 2:41 pm


भोपाल, बुधवार 4 जुलाई 2018 (उकान) : “सोशल मीडिया के माध्यम से नकली खबरों के फैलाव को रोकने के लिए भारत को कड़े कानूनों की जरूरत है। 1जुलाई को महाराष्ट्र के पश्चिमी राज्य में बाल-अपहरणकर्ताओं के संदेह पर पांच लोगों को मार डाला गया।” यह बात काथलिक कलीसिया के एक अधिकारी ने कही।

धूल जिले के एक गांव में उन्हें मार डाला गया था, क्योंकि स्मार्टफोन पर अफवाहें फैली थीं कि बाल तस्करी के गिरोह इस क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे थे।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि हाल के महीनों में नकली खबरों के चलते इसी तरह की घटनाओं में 25 लोगों की मौत हो गई है, जो कुछ इलाकों में बाल तस्करी, लुटेरों और यौन श्रमिकों के सक्रिय होने की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है।

सामाजिक संचार के लिए भारतीय धर्माध्यक्षीय कार्यालय के अध्यक्ष एवं पश्चिम बंगाल के बारूइपुर के धर्माध्यक्ष साल्वाडोर लोबो ने कहा,”यह सभी सीमाओं और औचित्य को पार कर रहा है।”  वे खतरे की जांच करने के लिए एक कड़ा कानून चाहते हैं।

“नकली खबरों की जांच के लिए कुछ कड़े नियमों को स्थापित करने की जरूरत है जो इस तरह की क्रूरता और मृत्यु को अंजाम देती है।”

नवीनतम घटना में मारे गए पांच लोग खानाबदोश जनजाति के सदस्य थे। सभी पीड़ित सैकरी इलाके के रेनपाडा गांव से थे वे साप्ताहिक बाजार में आए थे तभी उनपर हमला किया गया।

उनमें से एक ने एक युवा लड़की से बात करने की कोशिश की और इसपर ग्रामीणों ने संदेह किया कि वे बाल तस्करी के लोग थे।

पुलिस ने दंगों के लिए 35 लोगों को गिरफतार किया है।

तमिलनाडु, असम, त्रिपुरा और तेलंगना राज्यों में नकली खबरों से जुड़ी हत्याओं की सूचना मिली है।

धर्माध्यक्ष लोबो ने उकान्यूज को बताया, “यह एक बहुत ही खतरनाक स्थिति है।” “जब तक सरकार इस खतरे को नियंत्रण करने के लिए आपातकालीन कदम नहीं उठाती, तब तक यह अराजकता पैदा करेगी और कई निर्दोष लोगों की जान चली जाएगी।

जून माह में छह लोगों की हत्या हुई। 28 जून को, बच्चों को अपहरण करने की कोशिश के संदेह पर के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा के विभिन्न जिलों में तीन लोगों को मार डाला गया था। 18 जून को उत्तर प्रदेश में गाय सतर्कता की एक भीड़ ने एक मुस्लिम की हत्या कर दी थी। पूर्वी असम में, 8 जून को दो लोगों को झूठी अफवाहों के कारण मार डाला गया था कि वे बच्चों के अपहरणकर्ता थे।

भारतीय धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के पूर्व प्रवक्ता फादर बाबू जोसेफ ने कहा, “यह सोशल मीडिया का सरासर दुरुपयोग है और इसे राज्य को कड़ाई के साथ जांचना चाहिए।”


(Margaret Sumita Minj)

केरल में चार ओर्थोडोक्स पुरोहितों पर बलात्कार की प्राथमिकी दर्ज

In Church on July 4, 2018 at 2:40 pm


तिरुवनंतपुरम, बुधवार 4 जुलाई 2018 (उकान) : केरल पुलिस की अपराध शाखा, कोट्टायम के मुख्यालय मलंकारा ओर्थोडोक्स कलीसिया के कुछ पुरोहितों ने एक महिला के कथित यौन शोषण के मामले की जांच की। मंगलवार को पीड़िता की शिकायत पर चार पुरोहितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

जांच दल का नेतृत्व करने वाले पुलिस महानिरीक्षक एस. श्रीजीथ ने कहा कि आरोपी की संख्या पर स्पष्टीकरण देते हुए चार पुरोहितों को बलात्कार के मामले पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।

“यह सच था कि प्रारंभिक समाचार रिपोर्टों में पांच पुरोहित थे, लेकिन उनकी शिकायत में, उनमें से केवल चार का नाम दिया गया है।”

उन्होंने कहा कि महिला को अब मजिस्ट्रेट के समक्ष एक बयान देने के लिए कहा जाएगा और फिर जांच दल अगले कार्यवाही का फैसला करने के लिए मीटिंग करेगी। श्रीजीथ ने कहा, “फिलहाल, चार की गिरफ्तारी नहीं हो सकती है, क्योंकि औपचारिकताएं और प्रक्रियाएं की जा रही हैं।”

पिछले शुक्रवार को, केरल पुलिस प्रमुख लोकनाथ बेहरा ने पीड़िता के पति द्वारा किए गए आरोपों पर इस मामले में अपराध शाखा की जांच का आदेश दिया, जो मलंकारा ओर्थोडोक्स कलीसिया के सदस्य हैं।

एक ऑनलाइन पोर्टल ने पहली बार पिछले हफ्ते घटना की सूचना दी थी, जिसके बाद, विशेष रूप से सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के ने कलीसिया पर जबरदस्त दबाव डाला, जिसके बाद आंतरिक जांच की घोषणा की गई।

पीड़िता के पति ने कहा है कि एक पुरोहित ने पहली बार अपनी पत्नी का शोषण किया था और वह उसे ब्लैकमेल कर रहा था। जब उसने किसी अन्य पुरोहित से मदद मांगी, तो उसने भी उसे धमकी दी और दूसरे साथी पुरोहित के साथ उसका संपर्क साझा किया और अंत में, वह कम से कम पांच पुरोहितों के दबाव में आई।

महिलाओं के लिए राष्ट्रीय आयोग द्वारा मामले की जांच शुरु करने के बाद केरल पुलिस ने अपनी जांच शुरू की और बेहरा को इस मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया।

एफआईआर पंजीकृत होने के साथ, कलीसिया के आयोग द्वारा चल रही जांच निष्फल हो सकती है।


(Margaret Sumita Minj)

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