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संत पापा ने दिया चार लोकधर्मियों की धन्य घोषणा को अनुमोदन

In Church on July 5, 2018 at 1:36 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 5 जुलाई 2018 (रेई)˸ सन्त पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार, पाँच जुलाई को कार्डिनल आन्जेलो आमातो के नेतृत्व में परमधर्मपीठीय सन्त प्रकरण परिषद द्वारा धन्य घोषणा के लिये प्रस्तावित आज्ञप्तियों को अनुमोदन दे दिया।

इनमें प्रमुख हैं, ईश सेवक पियेत्रो दी विताले, एक लोकधर्मी। उनका जन्म 14 दिसम्बर 1916 को, इटली के सिसिलिया स्थित कास्त्रोनोवो में तथा मृत्यु 29 जनवरी 1940 को हुआ था।

ईश सेवक जोर्ज ला पिरा, एक लोकधर्मी। जन्म, इटली के पोत्सोल्लो में 9 जनवरी 1904 में तथा मृत्यु 5 नवम्बर 1977 को फ्लोरेंस में हुआ था।

ईश सेवक अल्लेसिया गोंजालेज बार्रोस वाई गोंजालेज़, एक लोकधर्मी। जन्म 7 मार्च 1971 को स्पने के मडरिड में तथा मृत्यु 5 दिसम्बर 1985 को स्पेन के पम्पलोना में हुआ।

ईश सेवक कारलो अकूतिस, एक लोकधर्मी। जन्म 3 मई 1991 को लंदन में तथा मृत्यु 12 अकटूबर 2006 को इटली में हुआ था।


(Usha Tirkey)

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संत पापा करेंगे प्रवासियों के लिए ख्रीस्तयाग का अनुष्ठान

In Church on July 5, 2018 at 1:34 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 5 जुलाई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस शुक्रवार 6 जुलाई को पूर्वाहन 11 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर में आप्रवासियों के लिए ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे।

वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक एवं वाटिकन प्रवक्ता ग्रेक बर्क ने 4 जुलाई को एक प्रेस विज्ञाप्ति जारी कर कहा, “ख्रीस्तयाग संत पापा फ्राँसिस की लम्पेदूसा यात्रा की पाँचवीं सालगिराह (8 जुलाई 2013) की स्मृति में आयोजित की गयी है। यह मृतकों, जीवित बचे लोगों एवं उनकी मदद करने वाले लोगों के लिए प्रार्थना का अवसर होगा।”

उम्मीद की जा रही है कि ख्रीस्तयाग समारोह में आप्रवासी एवं उनकी मदद करने वाले करीब 200 लोग भाग लेंगे। समारोह में भाग लेने के लिए टिकट की व्यवस्था है जो उन्हें मुफ्त में प्रदान की जायेगी।


(Usha Tirkey)

संत पापा ने यूक्रेन के ग्रीक काथलिक कलीसिया के शीर्ष से मुलाकात की

In Church on July 5, 2018 at 1:31 pm


वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 5 जुलाई 18 (वाटिकन न्यूज)˸ संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के प्रेरितिक आवास संत मर्था में महाधर्माध्यक्ष स्वियातोसलाव शेवकूक से मुलाकात की।

संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 3 जुलाई को यूक्रेन के ग्रीक काथलिक कलीसिया (यूजीसीसी) के शीर्ष, महाधर्माध्यक्ष स्वियातोसलाव शेवकूक से रूस-यूक्रेन में ख्रीस्तीय धर्म के पदार्पण की 1030वीं वर्षगाँठ के अवसर पर मुलाकात की।

मुलाकात के दौरान महाधर्माध्यक्ष ने यूजीसीसी की अन्य कलीसियाओं के साथ संबंध की ओर ध्यान आकृष्ट किया, जिन्होंने संत वोलोडिमर द्वारा बपतिस्मा प्राप्त किया है।” यूक्रेन में ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के बारे बतलाते हुए उन्होंने विभाजन की दुःखद वास्तविकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर दिया कि यद्यपि यूजीसीसी विभाजन से ऊपर उठने के प्रयास को सकारात्मक नजरिये से देखता है तथापि इस तरह के मामलों को ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के लिए आंतरिक मानता है, अतः वह इस तरह के प्रयासों में कभी हस्तक्षेप नहीं करता और न ही भाग लेता है।

उन्होंने बतलाया कि कलीसिया में ख्रीस्त की एकता लाने के लिए यूजीसीसी एक पद्धति को अपनाता है और वह पद्धति है “यूनियाटिस्म”। उन्होंने गौर किया कि पूर्वी काथलिक कलीसियाएँ एकता की ओर अग्रसर होने के लिए कोई साधन नहीं हैं बल्कि वे स्वयं ख्रीस्त की कलीसिया के जीवित सदस्य हैं जिन्हें अस्तित्व में रहने एवं मिशन तथा सुसमाचार प्रचार के कार्य में भाग लेने का अधिकार है।

महाधर्माध्यक्ष ने बतलाया कि मुलाकात में संत पापा ने यूजीसीसी के शहीदों के लिए उन्हें धन्यवाद दिया जिन्हें ख्रीस्तीय विश्वास एवं साक्ष्य के कारण शहीद होना पड़ा और जिन्होंने प्रेरित संत पेत्रुस के उतराधिकारी के विशेष मिशन ख्रीस्तीय एकता के लिए अपनी सेवाएँ अर्पित की थी। संत पापा ने स्वीकार किया कि यूजीसीसी के विरूद्ध “यूनियाटिस्म” का कोई भी आरोप निराधार है। वाटिकन प्रेस वक्तव्य के अनुसार संत पापा ने यूक्रेन के प्रति भी अपना आध्यात्मिक सामीप्य प्रदान किया जो अपने इतिहास में एक दुखद दौर से होकर गुजर रहा है।

मुलाकात में, एक अन्य खास मुद्दे पर बात की गयी। वह मुद्दा है पोलैंड-यूक्रेन मेल- मिलाप। संत पापा ने आगामी ख्रीस्तीय एकता सभा जो बारी में होने वाली है उसमें भाग लेने पर जोर दिया। महाधर्माध्यक्ष स्वियातोसलाव ने अगले साल यूरोप में पूर्वी काथलिक धर्माध्यक्षों की सभा हेतु प्रस्ताव रखा।


(Usha Tirkey)

कलीसिया द्वारा “ऑर्डर ऑफ वर्जिंन” पर पुनःविचार

In Church on July 5, 2018 at 1:29 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 5 जुलाई 2018 (वाटिकन न्यूज)˸ धर्मसंघी एवं धर्मसमाजियों की प्रेरिताई के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ ने प्राचीन धर्मसंघ “ऑर्डर ऑफ वर्जिंस” के पुनःप्रवर्तन की 50वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में “एक्लेसिये स्पोनसाए इमागो” (कलीसिया एक दूल्हिन का प्रतीक) शीर्षक पर एक दिशानिर्देश प्रकाशित किया है।

प्राचीन धर्मसंघ “ऑर्डर ऑफ वर्जिंस” का, संत पापा पौल षष्ठम द्वारा पुनःप्रवर्तन का सन् 2020 ई. में 50 साल पूरा होगा। समर्पित कुँवारियों की संख्या इस समय करीब 5,000 है तथा वे विश्व के विभिन्न हिस्सों में रहते हैं। समर्पित जीवन को प्रोत्साहन देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल जॉ ब्राज़ दी अविज ने कहा कि नया निर्देश एक्लेसिए स्पोनसाये इमागो पहला दस्तावेज है जिसके द्वारा इस तरह के समर्पित जीवन के अनुशासन को सम्बोधित किया गया है। यह पुनःजागृत बुलाहट में रूचि दिखाने की प्रतिक्रिया है और यह कलीसिया के जीवन में इसके स्थान, आवश्यक आत्म आवलोकन एवं प्रशिक्षण पर प्रकाश डालता है।

इतिहास

दस्तावेज का विमोचन करते हुए धर्मसंघी एवं धर्मसमाजियों की प्रेरिताई के लिए गठित परमधर्मपीठीय परिषद के सचिव महाधर्माध्यक्ष जोश रोड्रिगस कारबाल्लो ने ऑर्डर ऑफ वर्जिंस के इतिहास का साराँश प्रस्तुत किया। धर्मसंघ की उत्पति नारियों के उस सुसमाचारी साक्ष्य से हुई है जिन्होंने प्रभु का अनुसरण करने के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया।

यह कलीसिया की संरचना में इस तरह स्थापित था कि इसे धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, उपयाजकों एवं कुवाँरियों के समान ऑर्डर का दर्जा दिया गया। बाद में, मध्ययुग में इसे मठवास में विलय कर दिया गया।

संत पापा पौल षष्ठम ने सन् 1970 ई. में ऑर्डर ऑफ वर्जिंस को बहाल कर कलीसिया को जीवन का वह रूप दिया जो उसे ख्रीस्त की दुल्हिन के रूप में उसी के स्वभाव का प्रतिबिंब प्रदान करता है।

महाधर्माध्यक्ष कारबाल्लो ने कहा कि एक्लेसिए स्पोनसाये इमागो के निर्माण में धर्माध्यक्षों, समर्पित कुँवारियोँ और विशेषज्ञों का सहयोग है। इस प्रकार के समर्पित जीवन की समृद्धि एवं विशिष्ठता पर प्रकाश डालने के लिए प्रत्येक ने अपना योगदान दिया है।

ऑर्डर ऑफ वर्जिन क्या है?

दस्तावेज का पहला भाग ऑर्डर ऑफ वर्जिंन्स की बुलाहट और उसके साक्ष्य की छानबीन करता है। यह स्पष्ट करता है कि बुलाहट सर्वप्रथम मरियम के पदचिन्हों पर आधारित है जो ब्रह्मचार्य, निर्धनता एवं आज्ञापालन के जीवन को अपनाता और साथ-साथ प्रार्थना, पश्चाताप और दया के कार्यों के लिए समर्पित है। एक महत्वपूर्ण कारक यह है कि “कुँवारेपन के लिए कारिज्म प्रत्येक समर्पित धर्मबहन के कारिज्म के अनुरूप है जिसमें रचनात्मक स्वतंत्रता है।

ऑर्डर ऑफ वर्जिंस को किस तरह से व्यवस्थित किया गया है

एक्लेसिए स्पोनसाये इमागो के दूसरे भाग में समर्पित कुँवारियों, उनके एकल अथवा परिवारों, दलों या धर्माध्यक्षों द्वारा धर्मप्रांतीय स्तर पर व्यवस्थित जीवन की व्यख्या करता है।

धर्माध्यक्ष कारबाल्लो ने कहा कि “एक खास कलीसिया की पुत्री के रूप में प्रत्येक समर्पित धर्मबहन अपने इतिहास को साझा करती है…इसके आध्यात्मिक उन्नति को सहयोग देती है तथा अपनी क्षमताओं द्वारा इसके मिशन में भाग लेती है। इस प्रकार एकाकी के जीवन के लिए बुलायी गयी एक समर्पित धर्मबहन सामुदायिक जीवन को अपनाती है।

किस प्रकार एक महिला समर्पित कुँवारी बनती है?

महाधर्माध्यक्ष कारबाल्लों ने बतलाया कि दस्तावेज का तीसरा भाग ऑर्डर ऑफ वर्जिंन के आत्मजाँच एवं प्रशिक्षण की व्याख्या करता है। इसमें एक महिला के समर्पित होने के पूर्व एवं बाद में एक धर्माध्यक्ष की भूमिका को रेखांकित करता है।

ऑर्डर ऑफ वर्जिंस की 50वीं वर्षगाँठ

आगामी सन् 2020 ई. में ऑर्डर ऑफ वर्जिंस के बहाल की 50वीं वर्षगाँठ के साथ, महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि उनकी उम्मीद है कि इस प्राचीन समर्पित जीवन शैली पर पुनः विचार के द्वारा पवित्रता के एक सच्चे आकर्षण एवं मांग को प्रस्तुत कर पायेगा।

कार्डिनल डी अविज की उम्मीद है कि वर्षगाँठ समारोह विश्वभर की समर्पित कुँवारियों को रोम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सभा में भाग लेने हेतु एकत्रित करेगा।


(Usha Tirkey)

ईश्वर की आवाज सुनें

In Church on July 5, 2018 at 1:23 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 5 जुलाई 2018 (रेई)˸ हर व्यक्ति के जीवन में ईश्वर की एक विशेष योजना होती है और जब वह उस योजना को पहचानकर उसके अनुसार जीने का प्रयास करता है तब वह अपने जीवन में सफल, शांति और आनन्द का एहसास करता है क्योंकि यही उसके जीवन का लक्ष्य है। उस योजना को पहचानने के लिए हमें ईश्वर की आवाज को पहचानने की आवश्यकता है किन्तु भाग-दौड़ एवं व्यस्तता भरे जीवन में, कई प्रकार की चिंताओं से घिरकर, हम ईश्वर की आवाज को सुन नहीं पाते हैं। ईश्वर की आवाज सुनने के लिए हमें मौन की आवश्यकता है और यह मौन तभी संभव है जब हम सारी चिंताओं को प्रभु को समर्पित कर, प्रार्थना के लिए समय निकालते हैं।

संत पापा ने 5 जुलाई को एक ट्वीट प्रेषित कर ईश्वर की आवाज सुनने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने संदेश में लिखा, “क्या हम अपने हृदय को शांत करना एवं ईश्वर की आवाज सुनना जानते हैं”?

संत पापा के इस संदेश को नौ अन्य भाषाओं में प्रेषित किया गया।


(Usha Tirkey)

कंधमाल हिंसा की 10वीं सालगिराह मेल-मिलाप का अवसर

In Church on July 5, 2018 at 1:21 pm

कटक भुनेश्वर, बृहस्पतिवार, 5 जुलाई 2018 (एशियान्यूज)˸ कटक भुनेश्वर के महाधर्माध्यक्ष जॉन बरवा ने सभी लोगों को निमंत्रण दिया है कि वे 25 अगस्त को समारोही ख्रीस्तयाग में भाग लें।

उड़ीसा के कंधमाल जिले में ख्रीस्तीय विरोधी हिंसक आक्रमण का इस वर्ष दसवीं सालगिराह मनाया जाएगा। महाधर्माध्यक्ष बारवा ने कहा कि यह शांति और मेल-मिलाप को सभी लोगों के बीच सुदृढ़ करने का एक अवसर है।

एशियान्यूज से बातें करते हुए उन्होंने कहा कि दस साल पहले जिला में भारत के इतिहास में ख्रीस्तीय विरोधी एक भयावाह हिंसा को अंजाम दिया गया था किन्तु अब ख्रीस्तीय अन्य सभी धर्मों के लोगों के साथ सौहार्द पूर्वक रहते हैं। यही कारण है कि हम इस अवसर को मेल-मिलाप एवं साझा करने तथा शांति एवं कृपा के लिए प्रार्थना और विचार-विमर्श करने के रूप में मनाना चाहते हैं। प्रभु हम प्रत्येक को अपनी आशीष प्रदान करे।

25 अगस्त को उड़ीसा के ख्रीस्तीयों पर किये गये अत्याचार की यादगारी में महाधर्मप्रांत ने “आभार, मेल-मिलाप एवं कृपा” के उद्देश्य से समारोही ख्रीस्तयाग का आयोजन किया है।

महाधर्माध्यक्ष ने बतलाया कि इस सभा के उद्देश्य को बढ़ावा देने के लिए 2 जुलाई को उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक तथा अन्य सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की गयी जहाँ काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेनहास भी उपस्थित थे। महाधर्माध्यक्ष ने मुख्यमंत्री एवं सभी सरकारी अधिकारियों को उनकी सद्इच्छा के लिए उनकी सराहना की तथा कहा कि वे हिंसा, घृणा एवं विभाजन का समर्थन नहीं करते हैं।

अगस्त 2008 को हिन्दु धर्मगुरू सरस्वती लक्ष्मानंदा की हत्या का आरोप लगाकर उनके अनुयायियों ने ख्रीस्तीयों पर भयंकर हिंसक आक्रमण किया था। इस आक्रमण के कारण करीब 56 हजार ख्रीस्तीय घर छोड़कर भागने के लिए मजबूर हो गये थे, 5600 घरों और 415 गाँवों पर आग लगाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया गया था। सरकारी आँकड़ों के अनुसार 38 लोग मारे डाले गये थे तथा दो महिलाओं के साथ बलत्कार किया गया था। कई लोग घायल हो गये थ और अनेक लोग हमेशा के लिए अपंग हो गये। कलीसिया एवं सामाजिक कार्याकर्ताओं की रिपोर्ट अनुसार 300 गिरजाघरों को ध्वस्त किया गया उनके साथ कई कॉन्वेंट, स्कूल, हॉस्टेल और कल्याणकारी संस्थाओं को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। इस घटना में कुल 91 लोगों की मौत हो गयी थी।

महाधर्माध्यक्ष बारवा ने कहा कि अत्याचार के बावजूद हम ईश्वर के प्रति सचमुच आभारी हैं क्योंकि विश्वासियों की संख्या बढ़ रही है और ख्रीस्तीयों का विश्वास मजबूत हो गया है। हम एक साथ भाई-बहन की तरह जीते हैं स्थानीय प्रशासकों के साथ हमारा अच्छा संबंध है। कंधमाल जिला भारत की कलीसिया के विश्वास, आशा एवं धीरज का प्रतीक बन गया है जो शहीदों एवं पीड़ा के शिकार लोगों के बलिदान द्वारा प्रचुर आशीष का पात्र बन गया है।

महाधर्माध्यक्ष बारवा ने कहा कि सरकारी अधिकारियों के साथ मुलाकात सात निर्दोष ख्रीस्तीयों की पीड़ा की याद दिलाने का अवसर भी रहा, जिन्हें 10 सालों तक जेल में रखा गया है। उन्होंने बतलाया कि उन्हें आश्वासन दिया गया कि वे इस मामले का ख्याल रखेंगे और ईश्वर से प्रार्थना करेंगे ताकि वे जल्द ही उन्हें न्याय और शांति प्रदान करें।


(Usha Tirkey)

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