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2019 में संत पापा की पनामा यात्रा

In Church on July 10, 2018 at 3:48 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 10 जुलाई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस आगामी विश्व युवा दिवस के अवसर पर 23 से 27 जनवरी 2019 को पनामा जायेंगे।

वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक एवं वाटिकन प्रवक्ता ग्रेग बर्क ने 9 जुलाई को एक प्रेस विज्ञाप्ति जारी कर इस बात की पुष्टि देते हुए कहा, “आगामी विश्व युवा दिवस के अवसर पर, जिसे पनामा में मनाया जाएगा तथा पनामा की सरकार एवं वहाँ के धर्माध्यक्षों के निमंत्रण को स्वीकार करते हुए, संत पापा फ्राँसिस 23 से 27 जनवरी 2019 को पनामा की यात्रा करेंगे।”

यह तीसरा विश्व युवा दिवस होगा जहाँ संत पापा फ्राँसिस भाग लेंगे। उन्होंने 2013 में ब्राजील में हुए विश्व युवा दिवस में पहली बार भाग लिया था, उसके बाद दूसरी बार वे पोलैंड में 2016 में भी भाग ले चुके हैं।

विश्व युवा दिवस क्या है?

विश्व युवा दिवस (डब्ल्यू वाई डी) युवाओं का एक ऐसा सम्मेलन है जिसमें विश्वभर के युवा संत पापा से मुलाकात करते हैं। साधारणतः इसे हर तीन साल में आयोजित किया जाता है। यह अवसर युवाओं को विश्वव्यापी कलीसिया के अंग होने तथा येसु ख्रीस्त में अपने विश्वास को एक-दूसरे के साथ बांटने का मौका देता है।

पनामा के राष्ट्रपति जुवान कार्लोस वारेला ने विश्व युवा दिवस में भाग लेने की संत पापा की आधिकारिक घोषणा पर सोमवार को एक ट्वीट प्रेषित कर कहा, कि “वे पनामा के लोगों के साथ आनन्दित एवं उत्साहित हैं।”

संत पापा का नामांकन

सोमवार को संत पापा फ्राँसिस की, विश्व युवा दिवस में भाग लेने की आधिकारिक घोषणा की गयी किन्तु इससे पहले 11 फरवरी 2018 को देवदूत प्रार्थना के दौरान उन्होंने डब्ल्यू वाई डी में ऑन लाईन पंजीकरण कर, इस अवसर के लिए नामांकन की शुरूआत की थी।

उन्होंने टाबलेट पर नामांकन जारी करते हुए कहा था, “अब मैं विश्व युवा दिवस के तीर्थयात्री के रूप में नामांकित हूं” तथा उन्होंने विश्व के सभी युवाओं को निमंत्रण दिया था कि “वे कृपा एवं भाईचारा के इस अवसर को विश्वास एवं उत्साह से मनाने हेतु अपने दलों के साथ पनामा पधारें।”

विश्व युवा दिवस के लिए संत पापा का संदेश

संत पापा ने 2019 के लिए मार्च 2017 को एक विडीयो संदेश प्रकाशित कर युवाओं को निमंत्रण दिया था कि जब वे उस अवसर की ओर तीर्थयात्रा में आगे बढ़ रहे हैं, अपनी नजर धन्य कुँवारी मरियम की ओर उठायें।

उन्होंने कहा, “मरियम घर पर रूकी नहीं रही क्योंकि वह सोफे पर बैठकर टीवी देखने वाली युवती (कोच आलू) नहीं थी जो आराम एवं सुरक्षा की खोज करती है जहाँ उसे कोई परेशान न करे। वह विश्वास द्वारा प्रेरित थी क्योंकि विश्वास ही उनके सम्पूर्ण जीवन का केंद्रविन्दु था।


(Usha Tirkey)

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कार्डिनल तौरान का अंतिम संस्कार

In Church on July 10, 2018 at 3:46 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 10 जुलाई 2018 (रेई)˸ स्वर्गीय कार्डिनल जॉ लुईस तौरान का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार 12 जुलाई को पूर्वाहन 10.45 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर में सम्पन्न किया जाएगा।

संत पापा के धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्था करने वाली परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष मोनसिन्योर क्वीदो मरिनी ने सूचना जारी करते हुए कहा कि अंतिम संस्कार हेतु ख्रीस्तयाग का अनुष्ठान कार्डिनल मंडल के डीन कार्डिनल सोदानो, अन्य कार्डिनलों, महाधर्माध्यक्षों एवं धर्माध्यक्षों के साथ करेंगे।

यूखरिस्त समारोह के अंत में संत पापा फ्राँसिस अंतिम संस्कार की धर्मविधि पूरी करेंगे।

ख्रीस्तयाग में सह-अनुष्ठाता के रूप में भाग लेने के इच्छुक महाधर्माध्यक्षों एवं धर्माध्यक्षों से अनुरोध की गयी है कि वे सुबह 10.15 बजे वाटिकन महागिरजाघर के साक्रेस्टी में आकर अपने साथ लाये हुए पवित्र परिधानों को धारण करेंगे।

कार्डिनल जॉ लुईस तौरान अंतरधार्मिक वार्ता हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष थे जिनका निधन बृहस्पतिवार 5 जुलाई को वाटिकन में हुआ। संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने 21 अक्टूबर 2003 में उन्हें कार्डिनल नियुक्त किया था। वे अंतरधार्मिक वार्ता के माध्यम से विश्व में शांति को प्रोत्साहन देने के अथक प्रयास के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। उन्होंने 13 मार्च 2013 को संत पेत्रुस महागिरजाघर के पोर्टिको से संत पापा फ्राँसिस की घोषणा की थी।स्वर्गीय कार्डिनल जॉ लुईस तौरान का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार 12 जुलाई को पूर्वाहन 10.45 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर में सम्पन्न किया जाएगा।


(Usha Tirkey)

बेहतर भविष्य के लिए युद्धों से बच्चों की रक्षा आवश्यक, औजा

In Church on July 10, 2018 at 3:45 pm

अमरीका के लिए वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक एवं प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष बार्नादितो औजा ने 9 जुलाई को, “आज बच्चों की रक्षा कल संघर्षों को रोकेगी” पर सुरक्षा परिषद के खुले विवाद में सभा को सम्बोधित किया।

महाधर्माध्यक्ष औजा ने कहा, “बच्चे ही हैं जो हर युद्ध एवं संघर्ष में सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। सशस्त्र संघर्ष में पहले से फंस गए बच्चों को बचाने और उनके पुनर्वास के लिए कार्य करने में कभी देर नहीं होती। संघर्ष से प्रभावित लोगों के साथ हम किस तरह पेश आते हैं वह न केवल उनके भविष्य के लिए किन्तु विश्व के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन लोगों को सशस्त्र संघर्ष में फंसने के खतरे से बचाने के लिए हमें कार्य करना होगा। हम इस पीढ़ी के बच्चों को वर्तमान की गंभीर जोखिमों में खोने नहीं दे सकते।

संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव का रिपोर्ट, दुनियाभर में सशस्त्र संघर्षों में बच्चों के खिलाफ उल्लंघन और दुर्व्यवहार के चौंकाने वाले पैमाने और गंभीरता का विवरण देता है। यह दिल दहलाने वाली बात है कि बच्चों को मार डाला जाता और उन्हें मानव बम के रूप में उपयोग किया जाता है।

उन्होंने कहा, हालांकि हम सुरक्षा परिषद के एजेंडे पर सभी संघर्षों का हल करने में सक्षम नहीं हो सकते, तथापि हम उन बच्चों की सुरक्षा में बेहतरी अवश्य कर सकते हैं जो विनाशकारी परिणामों का सामना कर रहे हैं। इसके लिए बच्चों और सशस्त्र संघर्ष का एजेंडा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह हमें बच्चों के खिलाफ सभी उल्लंघनों और दुर्व्यवहारों को रोकने के लिए उपकरण प्रदान करता है और यह सुनिश्चित करने के लिए भी कि अपराधियों को उत्तरदायी माना जा सके। इस परिषद और वास्तव में, पूरे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के भीतर, इस मुद्दे पर और इसे पूरी तरह कार्यान्वित करने के लिए हमें हर संभव प्रयास करना चाहिए।

महाधर्माध्यक्ष ने बच्चों को सशस्त्र संघर्ष में फंसने के खतरे से बचाने के लिए तीन प्रमुख उपाय बतलाये।

उन्होंने कहा कि हमारी पहली जिम्मेदारी है बच्चों पर हो रहे हमलों को रोकने हेतु कार्य करना, उदाहरण के लिए बाल सैनिकों की संख्या को कम करना, यौन शोषण हेतु गुलामी पर रोक लगाना, बच्चों के विरूद्ध सामूहिक अपहरण एवं हिंसा के कृत्यों पर अंकुश लगाना।

दूसरी जिम्मेदारी है जो बच्चे सशस्त्र बलों या सशस्त्र समूहों से जुड़े थे उनके प्रभावी पुनर्मिलन को प्राथमिकता देना। सशस्त्र संघर्ष में पकड़े गए बच्चों जो सशस्त्र बल के साथ ही क्यों न हों उन्हें पीड़ितों के रूप में देखा जाना चाहिए। उन बच्चों के सफल पुनर्वास और पुनर्मिलन में न केवल उनका हित है बल्कि पूरे समाज का हित है।

तीसरी जिम्मेदारी है कि सशस्त्र बलों के शिकार बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। अच्छी शिक्षा, यह सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आज संघर्षों से पीड़ित कल के संघर्षों को रोकने और शांति बनाने के लिए काम करेंगे।

उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य को ध्यान में रखकर काथलिक कलीसिया कई संघर्षपूर्ण इलाकों में शिक्षा एवं पुनार्वास के माध्यम से हिंसा से शिकार बच्चे बच्चियों की देखभाल करने का प्रयास कर रही है।


(Usha Tirkey)

पश्चिमी देशों को उदासीन नहीं होना चाहिए, कार्डिनल साको

In Church on July 10, 2018 at 3:43 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 10 जुलाई 2018 (जेनित)˸ ईराक के खलदेई काथलिक कलीसिया के प्राधिधर्माध्यक्ष कार्डिनल लुईस रफाएल प्रथम साको ने 7 जुलाई को ख्रीस्तीय एकता मिलन समारोह में अपील की कि पश्चिम को उदासीन नहीं हो जाना चाहिए।

संत पापा फ्राँसिस ने 7 जुलाई को मध्यपूर्व में शांति बहाल हेतु विभिन्न ख्रीस्तीय धर्म गुरूओं के साथ प्रार्थना एवं चिंतन में भाग लेने हेतु बारी की यात्रा की थी।

कार्डिनल ने जेनित के पत्रकारों से ख्रीस्तीय एकता प्रार्थना सभा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “मैं सर्वप्रथम कहना चाहूंगा कि वहाँ विभिन्न कलीसियाओं के धर्मगुरूओं एवं प्रतिनिधियों के बीच एकता दिखाई पड़ी। यह एकता तब एक हकीकत बन गयी थी जब सभी धर्मगुरू एक ही बस में सवार थे और लोग “एकता, एकता” का नारा लगा रहे थे।” उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ, मानो कि वे सभी संत पेत्रुस की नाव पर सवार थे। उन्होंने कहा कि यह सभा अपने आपमें ही एक संदेश है, पूरे विश्व के लिए और खासकर, उन विश्वासियों के लिए जो पीड़ित हैं। उन्होंने विश्वासियों से कहा, “हम आपके करीब हैं हम आपकी चिंता करते हैं। हम सभी आपकी सेवा में हैं।”

संत पापा ने बारी में अपने संदेश में सभी धर्मगुरूओं की बुलाहट पर जोर देते हुए कहा था कि हम एक चरवाहे के रूप में लोगों को मानवीय एवं आध्यात्मिक सामीप्य प्रदान करें।

मध्यपूर्व की समस्याओं एवं ख्रीस्तीयों के पलायन पर बातें करते हुए आपको लज्जा का अनुभव नहीं हुआ?

इस सवला के उत्तर में कार्डिनल ने कहा कि उन्होंने वहाँ सब कुछ पर बातें कीं खासकर, कलीसिया के निर्माण, उसकी कठिनाईयों एवं पीड़ाओं पर। कलीसिया जो प्रार्थना करती है वह विश्वास्त है वह आशा करती है किन्तु वह लोगों की सेवा में भी समर्पित है। उन्होंने कहा कि उसी प्रकार वे भी आशा से पूर्ण हूँ तथा उसी शक्ति के साथ वापस जा रहा हूँ।

आप ईराक में अपने विश्वासियों को क्या बतलायेंगे?

कार्डिनल साको- मैं उन्हें सभा एवं कलीसियाओं के धर्मगुरूओं के बीच एकता के बारे बतलाऊँगा। मुझे अब पूरा यकीन हो गया है कि हम विश्वास में एक हैं। सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधताएँ अवश्य हैं जो कि सामान्य है क्योंकि सुसमाचार का संदेश विभिन्न संस्कृतियों के संस्कृतिकरण के द्वारा डाला गया है। किन्तु मूल रूप से हम सभी एक हैं। कार्डिनल ने कहा कि वे उन्हें बतलायेंगे कि वे उनके करीब हैं उनकी सेवा में समर्पित हैं चाहे उन्हें शहादत ही झेलना क्यों न पड़े।

क्या आपको आज मध्यपूर्व की कलीसिया के भविष्य पर अधिक विश्वास है?

कार्डिनल साको- मुझे विश्वास है कि वहाँ सुसमाचार का भविष्य है। समस्याएँ हैं किन्तु सुसमाचार नमक एवं दीपक की तरह है जैसा कि येसु ने कहा है। छोटी कलीसिया ही सही किन्तु इसका प्रभाव एवं शक्ति संख्या पर निर्भर नहीं करती किन्तु इसके साक्ष्य पर निर्भर करती है। लोगों के विश्वास की दृढ़ता का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “आप कल्पना कर सकते हैं कि एक ही रात में करीब 120,000 लोग अपना सब कुछ छोड़कर घर से भाग जाते हैं। वे विश्वासी हैं जिनके प्रति पश्चिमी देशों को उदासीन नहीं होना चाहिए।”


(Usha Tirkey)

कश्मीर में बाढ़ पीड़ितों की सहायता में कारितास

In Church on July 10, 2018 at 3:42 pm

श्रीनगर, मंगलवार, 10 जुलाई 2018 (ऊकान)˸ काथलिक उदारता संगठन कारितास की भारतीय शाखा कारितास इंडिया 2014 के बाढ़ से पीड़ित किसानों की मदद कर रहा है।

कश्मीरी किसान गुलाम नबी तांत्ररी को अच्छी तरह याद किया कि 2014 के बाढ़ ने किस तरह उनकी बेटी के विवाह के उसके सारे सपने धो डाला थे, और जिसने उसे पूरी तरह पंगु बना दिया था।

71 वर्षीय गुलाम नबी ने उकान्यूज को बतलाया कि भारत की परम्परा के अनुसार दहेज देने हेतु वह अपने फसल की बैंकिग कर रहा था किन्तु सितम्बर में आये विनाशकारी बाढ़ ने उसके स्वप्न को पूरी तरह धो डाला।

उसने कहा, “मेरा घर, मेरी जमीन और मेरे मवेशी सभी बह गये। वास्तविक परेशानी तब शुरू हुई जब बाढ़ का पानी कम हो गया और हमने नुकसान का आंकलन किया।” पेशा से सेव की खेती करने वाले गुलाम कश्मीर के पुलवामा जिला में रहते हैं।

उन्होंने कहा, “मैं अपनी बेटी की शादी करने के स्वप्न को असफल होते देख, कई दिनों तक रोता रहा।” उन्होंने कहा कि वह दहेज के लिए एक दशक से पैसा जमा कर रहा था लेकिन यह अभी भी काफी नहीं था।

काथलिक उदारता संगठन कारितास की भारतीय शाखा कारितास इंडिया, तांतरी जैसे कई किसानों की पीड़ा को कम करने का प्रयास कर रहा है। उसने इस वर्ष एक परियोजना की शुरूआत की है जिसके द्वारा उनकी आमदनी को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

परियोजना का उद्देश्य है कृषक समुदाय में उत्साह का संचार करना, जिनमें से कई अपनी जीविका के साधनों को नष्ट होते देखने के कारण निराश हो चुके हैं।

कारितास इंडिया के स्थानीय शाखा के संयोजक अलताफ हुस्साईन ने कहा, “हम किसानों को स्थानीय कृषि विश्वविद्यालयों में वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण प्राप्त करने में मदद करते हैं वे उन्हें और कठिनाई का सामना किए बिना अपने मुनाफे में वृद्धि के बारे में सुझाव और जानकारी देते हैं।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य है उन्हें अधिक उपयोगी खेती के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना। तांतरी के समान बागवानी करने वाले भी इस परियोजना से लाभान्वित हो रहे हैं।

तांतरी ने कहा, “कलीसियाई दल के प्रशिक्षण ने मुझे सेव की नई और बेहतर किस्मों को प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि वे निकट भविष्य में 500,000 रुपये (यूएस $ 7,500) तक वार्षिक आय प्राप्त करने की उम्मीद करते हैं।

कश्मिर में कुल 12.5 मिलियन आबादी में से 80 प्रतिशत किसान हैं तथा कृषि और बागवानी को इसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हड्डी मानी जाती है।

परियोजना से जुड़े स्वयंसेवक बशारात अहमद ने कहा, “हम 2014 की बाढ़ से उनके नुकसान को कम करने में मदद करने और बेहतर उपज के लिए नवीनतम ज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ उनकी मदद करने की उम्मीद रखते हैं।”


(Usha Tirkey)

पड़ोसियों में ख्रीस्त का चेहरा देखें

In Church on July 10, 2018 at 3:40 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 10 जुलाई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 10 जुलाई को एक ट्वीट प्रेषित कर उदार बनने का प्रोत्साहन दिया।

उन्होंने ट्वीट संदेश में लिखा, “आप भी भले समारितानी के समान होंगे जब आप ख्रीस्त के चेहरे को अपने निकट के लोगों में पहचान पायेंगे।”

संत पापा ने अपने ट्वीट में जिस भले समारितानी का जिक्र किया है वह उस दृष्टांत से लिया गया है जिसमें येसु ने एक सच्चे शिष्य का गुण बतलाने के लिए लोगों को बतलाया था। जब वह भला व्यक्ति किसी रास्ते से होकर गुजर रहा था उसने अधमरे व्यक्ति को देखा जिसे डाकूओं ने घायल कर छोड़ दिया था। वह भला व्यक्ति उसे देखकर आगे बढ़ नहीं गया किन्तु दया से द्रवित होकर अनजान होने पर भी उसकी सेवा की और उसे चंगाई पाने में मदद की।


(Usha Tirkey)

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