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Archive for the ‘Audience’ Category

Pope shocked and saddened by deaths in U.S and Zanzibar

In Audience, Church on July 24, 2012 at 8:09 am

http://youtu.be/2R9DbVqR1e0

देवदूत संदेश प्रार्थना में संत पापा का संदेश

In Audience, Church on March 13, 2012 at 9:03 am

जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 12 मार्च 2012 (सेदोक, एशिया न्यूज) संत पापा बेनेडिरक्ट 16 वें ने रविवार 11 मार्च को संत पेत्रुस बासिलिका के प्रांगण में देश विदेश से आये हजारों तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ करने से पूर्व सम्बोधित किया। उन्होंने इताली भाषा में सम्बोधित करते हुए कहा-

अतिप्रिय भाईयो और बहनो, चालीसाकाल के तीसरे रविवार के लिए सुसमाचार पाठ में येरूसालेम स्थित मंदिर से जानवरों की ब्रिक्री करनेवालों तथा सर्राफों के निष्कासन के प्रसंग का वर्णन है। वस्तुतः सभी सुसमाचार लेखकों ने इस प्रसंग का वर्णन किया है जो पास्का पर्व के निकट घटित हुआ था तथा लोगों और उनके शिष्यों पर गंभीर असर हुआ।

येसु के इस कदम की हम कैसी व्याख्या करें। पहला यह देखें कि इस कृत्य ने सार्वजनिक व्यवस्था पर कोई दबाव नहीं बनाया लेकिन इसे नबूवती कृत्य के रूप में देखा गया वस्तुतः नबी, ईश्वर के नाम में बहुधा दुरूपयोगों की निन्दा करते हैं तथा यदा कदा सांकेतिक कृत्यों से प्रकट करते हैं।

समस्या यदि कोई थी तो उनका प्राधिकार। इसलिए यहूदी येसु से पूछते हैं कि आप हमें कौन सा चमत्कार दिखा सकते हैं जिससे हम जानें कि आपको ऐसा करने का अधिकार है। हमें दिखायें कि कौन वास्तव में ईश्वर की ओर से करता है।

मंदिर से सर्राफों के निष्कासन की व्याख्या राजनैतिक क्रांति के रूप में देखी गयी, येसु को भी यहूदी राष्ट्रवादी (जेलटस) के अभियान की पंक्ति में रखा गया।

यहूदी राष्ट्रवादी वस्तुतः ईश्वर के विधान के लिए उत्साही थे तथा इसे लागू करने के लिए हिंसा का उपयोग करने को तैयार थे। येसु के समय में मुक्तिदाता या मसीहा के आने की प्रतीक्षा थी जो इस्राएल को रोमी शासन से मुक्त करायेगा। लेकिन येसु ने उनकी इस आशा को पूरा नहीं कर उन्हें निराश किया।

उनके कुछ शिष्य और यहाँ तक कि यूदस इस्कारियोति ने उनके साथ विश्वासघात किया। वस्तुतः येसु की हिंसक व्यक्ति के समान व्याख्या करना असंभव है, हिंसा ईश्वर के राज्य के विपरीत है यह ख्रीस्तविरोधी का साधन है। हिंसा कदापि मानवता की सहायता नहीं करती लेकिन उसे अमानवीय ही बनाती है।

मंदिर से बिक्री करनेवाले और सर्राफों के निष्कासन के कृत्य को देखते हुए येसु के शब्दों को सुनें- यह सब यहाँ से हटा ले जाओ। मेरे पिता के घर को बाजार मत बनाओ।

शिष्यों को धर्मग्रंथ का यह कथन याद आया- तेरे घर का उत्साह मुझे खा जायेगा। यह भजन शत्रुओं की नफरत के कारण अत्यधिक खतरेवाली परिस्थिति में सहायता के लिए करूण पुकार है। वह परिस्थिति जिसे येसु अपने दु-खभोग के समय अनुभव करेंगे। पिता और उनके घर के लिए उत्साह ने येसु को क्रूस तक लिया- उनका उत्साह है जो कि उन्हें अपने प्रथम पुरूष के रूप में अदा किया न कि वैसा व्यक्ति जो हिंसा के द्वारा ईश्वर की सेवा करना चाहता है।

वस्तुतः येसु अपने प्राधिकार के प्रमाण रूप में जो चिह्न देते हैं वह उनकी अपनी मृत्यु और पुनरूत्थान है। इस मंदिर को ढा दो और मैं इसे तीन दिनों के अन्दर फिर खड़ा कर दूँगा।

संत योहन लिखते हैं- ईसा तो अपने शरीर रूपी मंदिर के विषय में कह रहे थे। येसु के पुनरूत्थान के साथ ही एक नया पंथ, प्यार के सम्प्रदाय और एक नयी कलीसिया जो स्वयं ख्रीस्त हैं का आरम्भ हुआ। पुनर्जीवित ख्रीस्त, जिनके द्वारा हर विश्वासी आत्मा और सत्य में पिता ईश्वर की आराधना कर सकता है।

प्रिय मित्रो, पवित्र आत्मा ने कुँवारी माता मरिया के गर्भ में इस नये मंदिर का निर्माण करना आरम्भ किया है। हम उनकी मध्यस्थता से प्रार्थना करें कि हर ईसाई इस आध्यात्मिक घर का पत्थर बने।

इतना कहने के बाद संत पापा ने देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ किया और सबको अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

देवदूत संदेश प्रार्थना में संत पापा का संदेश

In Audience on March 6, 2012 at 7:05 am

जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 5 मार्च 2012 (सेदोक, एशिया न्यूज) संत पापा बेनेडिरक्ट 16 वें ने रविवार 4 मार्च को संत पेत्रुस बासिलिका के प्रांगण में देश विदेश से आये लगभग 20 हज़ार तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ करने से पूर्व सम्बोधित किया। उन्होंने इताली भाषा में सम्बोधित करते हुए कहा-

अतिप्रिय भाईयो और बहनो, चालीसाकाल का यह दूसरा रविवार, येसु के रूपान्तरण का रविवार है। वस्तुतः चालीसाकाल की यात्रा में पूजनधर्मविधि मरूभूमि में येसु का अनुसरण करने तथा प्रलोभनों पर विजय पाने के लिए हमें आमंत्रित करते हुए सुझाव देती है कि हम पर्वत के ऊपर जायें अर्थात् प्रार्थना के पर्वत पर उनके साथ जायें तथा उनके मानवीय चेहरे में ईश्वर के महिमामय प्रकाश पर मनन चिंतन करें। Read the rest of this entry »

बुधवारीय-आमदर्शन समारोह में संत पापा का संदेश

In Audience on February 16, 2012 at 8:55 am
  • जस्टिन तिर्की,ये.स.

 वाटिकन सिटी, 15 फरवरी, 2012 (सेदोक, वी.आर) बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने वाटिकन स्थिति संत पौल षष्टम् सभागार में देश-विदेश से एकत्रित हज़ारों तीर्थयात्रियों को विभिन्न भाषाओं में सम्बोधित किया।

उन्होंने अंग्रेजी भाषा में कहा-मेरे अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, आज की धर्मशिक्षामाला में ‘प्रार्थना’ विषय पर चिन्तन जारी रखते हुए हम येसु के उन अंतिम दिव्य वचनों पर चिन्तन करें जिन्हें येसु ने क्रूस पर से कहीं थी।

क्रूस पर टंगे येसु ने पिता ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा था, “हे पिता उन्हें क्षमा कर क्योंकि वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं।”(लूकस,23:34)।

क्रूसित करने वालों के लिये प्रार्थना करते हुए येसु इस बात को दिखलाते हैं कि उनका क्षमनीय प्रेम पाप में लिप्त मानवता के लिये अपार है।

क्रूस में टंगे भले डाकू को येसु ने कहा था, “तुम आज ही मेरे साथ स्वर्ग में होगे (लूकस,23:43) जो यह दिखाता है वे निश्चिय ही पुरस्कृत करेंगे जो पश्चात्ताप करते और ये सु पर अपना भरोसा करते हैं।

मृत्यु के पूर्व येसु ने चिल्ला कर कहा था, “पिता, आपके हाथों में मैं अपनी आत्मा को सौंप देता हूँ।”(23:46) जिसके द्वारा उन्होंने यह दिखलाया कि वे पिता की इच्छा के प्रति वे समर्पित है।

 येसु की यह प्रार्थना इस बात को स्पष्ट करती है कि येसु का पिता ईश्वर के साथ कितना गहरा संबंध रहा और इसी संबंध ने उसके प्रार्थनामय जीवन को मजबूत किया था।

क्रूस पर से ही येसु हमें बैरियों को क्षमा देना, प्रेम करन और पश्चात्ताप के लिये प्रार्थना करना सिखाते हैं । वे इस बात को भी बतलाते हैं कि हम पूरे जीवन में आने वाले दुःखों को पूरी आस्था से पिता ईश्वर के हाथों में तब तक सौंपते रहें जब तक तक एक दिन वे स्वर्ग में हमारा आलिंगन न कर लें।

 इतना कहकर संत पापा ने अपना संदेश समाप्त किया।

उन्होंने इंगलैंड, आयरलैंड, नॉर्वे, अमेरिका और टोरोन्तो से आये तीर्थयात्रियों, पोन्टिफिकल नॉर्थ अमेरिकन कॉलेज तथा स्कॉटलैंड के विद्यार्थियो, उपस्थित लोगों एवं उनके परिवार के सभी सदस्यों पर प्रभु की कृपा, प्रेम और शांति की कामना करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

 http://www.radiovaticana.org/in1/index.asp

 

Angelus Message of Pope & News

In Audience on February 14, 2012 at 10:55 am

देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा का संदेश

http://media01.vatiradio.va/podcast/feed/hindi_130212.mp3

देवदूत संदेश प्रार्थना से पूर्व संत पापा का संदेश

In Audience on February 14, 2012 at 7:07 am
  • जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 13 फरवरी 2012 (सेदोक, एशिया न्यूज ) संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने रविवार 12 फरवरी को संत पेत्रुस बासिलिका के प्रांगण में देश विदेश से आये तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ करने से पूर्व सम्बोधित किया।

उन्होंने इताली भाषा में सम्बोधित करते हुए कहा – अतिप्रिय भाईयो और बहनो, पिछले रविवार को हमने देखा कि येसु अपने सार्वजनिक जीवन में अनेक बीमार लोगों को चंगा किये, वे मानव जीवन के लिए ईश्वर की इच्छा को प्रकट करते तथा बहुतायत में जीवन देते हैं।

इस रविवार के सुसमाचार में येसु हमें दिखाते हैं कि बीमारी जो तात्कालीन समय में सबसे गंभीर बीमारी समझी जाती थी व्यक्ति को अशुद्ध बनाती तथा सामाजिक संबंधों से अलग कर देती थी। हम कुष्ठ रोग के बारे में कह रहे हैं।

एक विशेष संहिता थी जिसके तहत याजक को अधिकार था कि वे कुष्ठ रोगी के बारे में घोषणा कर उसे अशुद्ध करार देते थे और याजक को ही अधिकार था कि रोग मुक्त होने पर मरीज के चंगा होने की घोषणा करें तथा सामान्य जीवन में उसके पुर्नवास के लिए स्वीकृति प्रदान करें।

जब येसु गलीलिया के गाँवों में उपदेश दे रहे थे तो एक कुष्ठ रोगी उसके पास आया और कहा- यदि आप चाहते हैं तो मुझे शुद्ध कर सकते हैं।

येसु इस व्यक्ति के संपर्क से परहेज नहीं करते हैं वस्तुतः उसकी परिस्थिति में आंतरिक रूप से शामिल होकर अपना हाथ बढाकर उसका स्पर्श करते हैं – संहिता के द्वारा लागू किये गये प्रतिबंध पर विजय प्राप्त करते हुए कहते हैं- मैं यही चाहता हूँ-शुद्ध हो जाओ।

उस संकेत और येसु के शब्दों में ही मुक्ति का इतिहास है इसमें ईश्वर की इच्छा निहित है चंगा करने, बुराई से शुद्ध करने में जो कि हमें विकृत करती तथा हमारे संबंध को नष्ट करती है।

येसु के हाथ और कुष्ठ रोगी के उस स्पर्श ने सब बाधाओं को गिरा दिया जो ईश्वर और मनुष्य की अशुद्धियों के मध्य, पवित्र और अपवित्र के मध्य है।

येसु बुराई और इसकी नकारात्मक शक्तियों से इंकार किये बिना ही हमें दिखाते हैं कि ईश्वर का प्रेम किसी भी प्रकार की बुराई से यहाँ तक कि सबसे अधिक संक्रामक और भयानक बीमारी से भी अधिक शक्तिशाली है। येसु ने अपने ऊपर हमारी कमजोरियों को ले लिया, कुष्ठ रोगी बने ताकि हम शुद्ध हों।

इस सुसमाचार पर एक विस्मयकारी टिप्पणी है असीसी के संत फ्रांसिस के अस्तित्व संबंधी अनुभव में जिसे वे अपने साक्ष्य के शुरू में वर्णित करते हैं-प्रभु ने मुझे बंधु फ्रांसिस को इस प्रकार से तपस्या करने का रास्ता दिया-जब मैं पाप में था कुष्ठ रोगियों को देखना मुझे बहुत कड़ुवा महसूस हुआ और प्रभु स्वयं मुझे उनके मध्य ले चले और मैंने उनके प्रति दया दिखायी। जब मैं उनको छोड़ा तब जो कड़ुवा प्रतीत होता था वह आत्मा और शरीर की मधुरता में बदल गया था।

उसके बाद मैं कुछ समय के लिए रूका और इस संसार से प्रस्थान किया। वे कुष्ठ रोगी जो फ्रांसिस से मिले और जब वे पाप में थे कहते हैं येसु उपस्थित थे और जब फ्रांसिस उन्में से एक के पास पहुँचे और अपनी वीभत्स प्रतिक्रिया पर विजय पाकर, कुष्ठ रोगी को गले लगाया ।

येसु ने उसे उसकी कुष्ठ बीमारी अर्थात उसके घमंड से चंगा किया और उसे ईश्वर के प्रेम में परिवर्तित कर दिया जो ख्रीस्त की विजय है, यह हमारी गहन चंगाई है और नये जीवन में हमारा पुनरूत्थान है।

प्रिय मित्रो, हम प्रार्थना में कुँवारी माता मरिया की ओर मुखातिब हों जिनका समारोही स्मरण हमने लूर्द में उनके दर्शन देने की स्मृति में कल किया। संत बेर्नादेत्त को कुँवारी माता मरियम ने समयातीत संदेश दिया- प्रार्थना और तपस्या करने का बुलावा।

येसु अपनी माता के द्वारा हमेशा हमारे पास आते हैं ताकि हमें शरीर और आत्मा की सब बीमारियों से मुक्त कर सकें। हम उनका स्पर्श करें और शुद्ध हों तथा अपने भाईयों के प्रति उदारता दिखायें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ किया और सबको अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

बुधवारीय-आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पापा का संदेश

In Audience on February 9, 2012 at 7:28 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

वाटिकन सिटी, 8 फरवरी, 2012 (सेदोक, वी.आर) बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने वाटिकन स्थिति संत पौल षष्टम् सभागार में देश-विदेश से एकत्रित हज़ारों तीर्थयात्रियों को विभिन्न भाषाओं में सम्बोधित किया।

उन्होंने अंग्रेजी भाषा में कहा – मेरे अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, आज की धर्मशिक्षामाला में ‘प्रार्थना’ विषय पर चिन्तन जारी रखते हुए हम उस पुकार पर चिन्तन करें जिसे येसु ने क्रूस पर से की थी।

क्रूस पर टंगे येसु ने कहा था, “मेरे प्रभु ! मेरे ईश्वर ! तूने मुझे क्यों त्याग दिया है?” येसु ने उस वेदना की अभिव्यक्ति उस समय की जब उन्होंने तीन घंटों तक गेतसेमानी बारी में असहाय कष्ट झेला और दुनिया में अंधकार छाया हुआ था।

बाईबल में अंधेरा का उपयोग उभयभावी अर्थात् दो विपरीत मूल्यों या गुणों को धारण करने वाले के रूप में होता रहा है। एक ओर अंधकार बुरी शक्ति का प्रतीक है तो दूसरी तरफ़ यह ईश्वर की रहस्यात्मक उपस्थिति का प्रतीक भी।

जिस प्रकार बादलों से ढँक जाने के बाद नबी मूसा को ईश्वर के दर्शन हुए वैसा ही कलवरी में अँधकार छा जाने के बाद येसु के साथ हुआ।.

कलवरी पहाड़ में यद्यपि पिता ईश्वर अनुपस्थित-सा लगते हैं बहुत ही चमत्कारिक रूप से उनकी आँखें अपने पुत्र येसु के क्रूस पर होने वाले बलिदान पर टिकी हुई हैं।

इस संदर्भ में येसु की वेदना भरी पुकार में इस बात को समझना उचित होगा कि यह कोई निराशा की अभिव्यक्ति नहीं है। ठीक इसके विपरीत भजन स्तोत्र 23 की पहली पंक्ति में जो बात कही गयी है वह पूरे स्तोत्र का सार है।

स्तोत्र में इस्राएल जाति ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने विश्वास को प्रकट किया है।

इस्राएल जाति ने कहा, “ईश्वर हमारे साथ सदा बना रहता है, वह हमारी सुनता और हमारे निवेदनों का उत्तर देता है।”

मरते हुए येसु की यह प्रार्थना हमें इस बात के लिये प्रेरित करती है कि हम पूरे विश्वास के साथ उन भाई-बहनों के लिये प्रार्थना करें जो पीड़ित हैं ताकि वे लोग भी जान सकें कि ईश्वर किसी को कभी नहीं छोड़ता है।

इतना कहकर संत पापा ने अपना संदेश समाप्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों के लिये विशेष प्रार्थना करते हुए कहा कि येसु मसीह उन्हें अंधकार में प्रज्ञा और प्रेम का वरदान प्रदान करें ताकि व अपने विश्वास में सुदृढ़ बनें।

उन्होंने इंगलैंड, आयरलैंड, अमेरिका तथा देश-विदेश से आये तीर्थयात्रियों, विद्यार्थियों, उपस्थित लोगों एवं उनके परिवार के सभी सदस्यों पर प्रभु की कृपा, प्रेम और शांति की कामना करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

http://www.radiovaticana.org/in1/index.asp

 

बुधवारीय आमदर्शन समारोह में संत पापा का संदेश

In Audience on May 13, 2011 at 12:25 pm

स्टिन तिर्की, ये.स.

रोम, 11 मई, 2011 (सेदोक, वीआर) बुधवारीय आमदर्शन समारोह में संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने संत पेत्रुस
महागिरजाघर के प्रांगण में एकत्रित हज़ारों तीर्थयात्रियों को विभिन्न भाषाओं में
सम्बोधित किया।

उन्होंने अंग्रेजी भाषा में कहा-  मेरे अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, हम आज धर्मशिक्षामाला में
प्रार्थना के बारे में चिन्तन करना जारी रखेंगे। प्रार्थना आम लोगों के जीवन का
अभिन्न हिस्सा रहा है।

आज नास्तिकवाद और तर्क को आधार बना कर ईश्वर को जीवन में उचित स्थान नहीं दिया जाना हमें इस बात
के लिये संकेत कर रही है कि हमारी धार्मिक भावना को जगाये जाने की आवश्यकता है।

हमें इस बात को भी स्वीकार करने की आवश्यकता है कि मानव का जीवन सिर्फ़ सांसारिक और मानव तक ही
सीमित नहीं है।

मानव ईश्वर का प्रतिरूप है और उसके दिल में ईश्वर को पाने की इच्छा प्रबल है।  और मानव इस बात को भी जानता है कि उसमें ईश्वर
से बात करने की क्षमता है।

संत थोमस अक्वीनास हमें बताते हैं कि प्रार्थना का अर्थ है दिल का ईश्वर के लिये लालायित
होना अर्थात् दिल की बातों को ईश्वर को बताने की इच्छा रखना। वास्तव में यह इच्छा
ही सबसे बड़ा वरदान है।

प्रार्थना का सीधा संबंध दिल से है जहाँ हम ईश्वर का अनुभव करते हैं। ईश्वर का आमंत्रण और हमारी दुर्बलताओं, कमजोरियों और
पापों से हमें मुक्ति पाने की नम्रता हमें नवीन कर देती  है।

प्रार्थना के समय घुटने टेकना इस बात को दर्शाता है कि हमें ईश्वर की ज़रूरत है। और  हम ईश्वर के वरदानों के प्रति खुले हैं और उनके
साथ एक रहस्यात्मक मित्रता के लिये तैयार हैं।

आइये आज हम दृढ़ संकल्प करें कि हम प्रार्थना के लिये समय निकालेंगे, ईश्वर की आवाज़ को
सुनेंगे और उस ईश्वर के प्रेम में आगे बढ़ेंगे जिन्होंने हमें येसु मसीह को दिया
जो अनन्त प्रेम हैं।

इतना कह कर उन्होंने अपना संदेश समाप्त किया।

उन्होंने भारत इंडोनेशिया, स्वीडेन, नाइजीरिया, जापान, इंगलैंड, कनाडा, अमेरिका, मिशनरी
बेनेदिक्त सिस्टर्स ऑफ टूटजिंग, अन्य तीर्थयात्रियों और उपस्थित लोगों पर
पुनर्जीवित येसु की कृपा पास्का का खुशी और शांति की कामना करते हुए उन्हें अपना
प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

Source:http://www.radiovaticana.org/in1/index.asp

सैकड़ों लोगों की गवाही पोप जोन पौल द्वितीय ने उनके जीवन को बदला, बचाया

In Audience, Church, Church Document, Dialogue, Journey, News, Peace & Justice, Uncategorized, Unity, VR Hindi e-Samachar, Youth on April 29, 2011 at 11:56 pm
संत पापा जोन पौल की कब्र के पास विनती करती हुई धर्मबहनें

जोसेफ कमल बाड़ा

 वाटिकन सिटी, 29 अप्रैल, 2011 (सीएनएस ) सैकड़ों लोग सार्वजनिक रूप से गवाही दे रहे हैं कि पोप जोन पौल द्वितीय ने उनके जीवन को बदल दिया है या उनके जीवन को बचाया है। विभिन्न आयु वर्ग तथा देशों के लोगों ने अपना साक्ष्य वेबसाईट http://www.karol-wojtyla.org को भेजा है।

इस बेवसाइट का संचालन रोम धर्मप्रांत द्वारा किया जाता है जो स्वर्गीय संत पापा की धन्य और संत घोषणा प्रकरण के लिए समर्पित है। 28 अप्रैल तक विभिन्न भाषाओं वाली इस साईट में 400 से अधिक लोगों के साक्ष्यों को प्रकाशित किया गया है कि संत पापा जोन पौल द्वितीय की मध्यस्थता से उनकी प्रार्थनाएं पूरी हुई या वे कलीसिया में वापस आये हैं।

अनेक लोगों ने अपने साक्ष्यों में संत पापा जोन पौल द्वितीय की मध्यस्थता से प्रार्थनाओं या निवेदनों के पूरा होने, जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक सम्पन्न होने या पारिवारिक कठिनाईयों का समाधान होने के लिए धन्यवाद व्यक्त किया है।

पोप की विभिन्न प्रेरितिक यात्राओं के समय उनसे मुलाकात होने या उन्हें देखने से मिले अनुभवों के बारे में अनेक लोगों ने कहा कि उन्होंने पवित्र और करिश्माई व्यक्ति की उपस्थिति का अनुभव पाया।

1 मई को सम्पन्न होनेवाले पोप जोन पौल द्वितीय की धन्य घोषणा समारोह के लिए रोम शहर और वाटिकन परिसर में व्यापक और भव्य तैयारी की

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