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अफ्रीका और यूरोप के धर्माध्यक्षों के लिए संत पापा का संदेश

In Charity on February 17, 2012 at 9:17 am
  • जोसेफ कलम बाड़ा

वाटिकन सिटी 16 फरवरी 2012 (सेदोक, वी आर वर्ल्ड) अफ्रीका और यूरोप के धर्माध्यक्षीय सम्मेंलनों की समिति की 13 फरवरी से आरम्भ 5 दिवसीय दूसरी विचार गोष्ठी जो “सुसमाचार आज: अफ्रीका और यूरोप के बीच एकता और मेषपालीय सहयोग” (“Evangelization today: communinon and pastoral collaboration between Africa and Europe”)  शीर्षक से रोम में सम्पन्न हो रही है। संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने इस विचारगोष्ठी के प्रतिभागी कार्डिनलों और धर्माध्यक्षों को गुरूवार 16 फरवरी को वाटिकन स्थित कलेमेंतीन सभागार में सम्बोधित किया।

उन्होंने यूरोपीय धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों की समिति के अध्यक्ष कार्डिनल पीटर एरदो और अफ्रीका तथा मडागास्कर के धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों की समिति के अध्यक्ष कार्डिनल पोलिकार्प पेंगो को उनके हार्दिक उदबोधन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि सन् 2004 में आयोजित पहली विचारगोष्ठी के बाद से परस्पर सामुदायिकता और मेषपालीय सहयोग के लिए किये जा रहे अध्ययन दिवसों का प्रसार करने के काम से जुड़े सब लोगों को वे धन्यवाद देते हैं।

संत पापा ने कहा कि इन वर्षों में दोंनों महादेशों के कलीसियाई समुदायों के मध्य मैत्री और सहयोग पूर्ण संबंध से मिले आध्यात्मिक फलों के लिए वे ईश्वर को धन्यवाद देते हैं।

सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि भिन्न होने पर भी धर्माध्यक्षों ने प्रभु येसु और और उनके सुसमाचार की उदघोषणा के कार्य़ में भाईचारे की भावना का प्रदर्शन किया है।

उन्होंने कहा कि यूरोप की कलीसिया के लिए अफ्रीका की कलीसिया के साथ साक्षात्कार होना आशा और आनन्द से पूर्ण कृपा का कारण है। दूसरी ओर अनेक कठिनाईयों और शांति तथा मेलमिलाप की जरूरत के मध्य भी अफ्रीका की कलीसिया ती जीवंतता तथा अपने विश्वास को दूसरों के साथ बांटने के लिए इच्छुक है।

संत पापा ने कहा कि अफ्रीका में कलीसिया के सामने विश्वास और परोपकार के मध्य लिंक पर ध्यान देना जरूरी है जो एक दूसरे को आलोकित करते हैं। संत पापा ने सुसमाचार और अपने प्रेरितिक पत्र पोरता फिदेई से कथन को उद्धृत करते हुए कहा कि ख्रीस्त का प्रेम दिलों को भर देता है तथा सुसमाचार प्रचार को गति प्रदान करता है।

 उन्होंने धर्माध्यक्षों के सामने प्रस्तुत वर्तमान चुनौतियों को देखते हुए कहा कि धार्मिक उदासीनता, अस्पष्ट धार्मिकता,सत्य और निरंतरता से जुड़े सवालों का सामना नहीं कर सकते हैं। यूरोप और अफ्रीका में भी धार्मिक उदासीनता बहुधा ईसाई धर्म के विरूद्ध है।

उन्होंने कहा कि सुसमाचार प्रचार के सामने अन्य चुनौती सुखवाद है जिसने दैनिक जीवन, परिवार तथा जीवन के अस्तित्व संबंधी मूल्यों को ही प्रभावित कर दिया है। अश्लील साहित्य तथा वेश्यावृत्ति का प्रसार गंभीर सामाजिक अशांति के लक्षण हैं।

संत पापा ने इन चुनौतियों के मध्य धर्माध्यक्षों को प्रोत्साहन दिया कि वे इन मुददों के प्रति सचेत रहें जो उनकी प्रेरितिक जिम्मेदारी के सामने चुनौती प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने धर्माध्यक्षों को निराश नहीं होने तथा अपने समर्पण और आशा का नवीनीकरण करने को कहा क्योंकि ख्रीस्त सदैव हमारे साथ हैं। इसके साथ ही उन्होंने परिवार के महत्व को रेखांकित करते हुए परिवार प्रेरिताई पर विशेष ध्यान देने को कहा।

परिवार में जो कि रीति रिवाजों और परम्पराओं तथा विश्वास से जुडे धार्मिक अनुष्ठानों को धारण करता है यह बुलाहटों के विकसित होने के लिए सबसे उपयुक्त वातावरण देता है।

उपभोक्तावादी मानसिकता का इनपर नकारात्मक असर पड़ सकता है इसलिए पुरोहिताई और धर्मसमाजी जीवन के लिए बुलाहटों का प्रसार करने के लिए विशिष्ट ध्यान देने की जरूरत है।

 उन्होंने कहा कि यूरोप और अफ्रीका में उदार युवाओं की जरूरत है जो अपने भविष्य का उत्तरदायित्व जिम्मेदारीपूर्वक ले सकें तथा संस्थानों के मन में भी हो कि इन युवाओं में भविष्य निहित है तथा यथासंभव उपाय किये जायें कि उनका पथ अनिश्चिचतता और अंधकारमय न हो।

संत पापा ने सांस्कृतिक पहलू के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कलीसिया यथार्थ संस्कृति के हर रूप का सम्मान कर प्रसार करती है जो ईशवचन की समृद्धि को तथा ख्रीस्त के पास्काई रहस्य से मिलनेवाली कृपा को अर्पित करती है। इसके साथ ही संत पापा ने कहा कि इस विचारगोष्ठी ने धर्माध्यक्षों को दोनों महादेशों में कलीसिया के सामने आनेवाली समस्याओं पर चिंतन करने का अवसर दिया है।

समस्याएँ कम नहीं हो तथा यदा कदा सार्थक हैं लेकिन इसके साथ ही प्रमाण हैं कि कलीसिया जीवित है, बढ़ रही है तथा सुसमाचार प्रचार के मिशन को जारी रखने से डरती नहीं है।

साहेल क्षेत्र की निर्धनता को दूर करने के लिए संत पापा का आग्रह

In Charity on February 10, 2012 at 9:41 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 10 फरवरी 2012 (वी आर वर्ल्ड ) जोन पौल द्वितीय साहेल फाउंडेशन विश्व के निर्धनतम क्षेत्रों में सहायता पहुँचाने के लिए काम करता है। इन्में शामिल है अफ्रीका के देश- चाड, गाम्बिया, बुरकीना फासो, केप वेरदे, गिनिया बिसाऊ, माली, माउरितानिया, नाईजर और सेनेगल। इस फाउंडेशन की स्थापना संत पापा जोन पौल द्वितीय ने 1980 में अफ्रीका की अपनी पहली यात्रा के बाद किया था।

इसकी प्रशासक समिति में साहेल क्षेत्र के नौ देशों के धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के प्रतिनिधि धर्माध्यक्ष तथा जर्मनी और इताली धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने फाउंडेशन के सदस्यों को शुक्रवार को सम्बोधित करते हुए रेखांकित किया कि खाद्य संसाधनों में सार्थक गिरावट होने, वर्षा न होने से सुखे की स्थिति और मरूस्थलीय क्षेत्र का दायरा निरंतर बढ़ने से साहेल क्षेत्र में पुनः खतरा उत्पन्न हुआ है।

उन्होंने घोर गरीबी की अवस्था में जीवन जी रहे इस क्षेत्र के लोगों की सहायता करने के लिए गंभीर उपाय करने का अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया। संत पापा ने कलीसियाई निकायों के प्रयासों और कार्य़ों का समर्थन देकर उन्हे उत्साहित किया जो जरूतमंदों की सहायता कर रहे हैं तथा कैसे जोन पौल द्वितीय साहेल फाउंडेशन विशिष्ट रूप से पोप की उपस्थिति का संकेत है जैसा कि उन्होंने कहा था ” हमारे अफ्रीकी बंधु जो साहेल में निवास करते हैं।”

संत पापा ने कहा कि इस फाउंडेशन का अस्तित्व उनके पूर्वाधिकारी की मानवता को दर्शाता है। इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि परोपकार के काम प्रार्थना से संयुक्त हों ताकि अपनी पूर्ण प्रभावशीलता को प्राप्त करें। जिन देशों में इस्लाम धर्म है और जहाँ साहेल फाउंडेशन के कार्य सम्पन्न होते हैं संत पापा ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि यहाँ मुसलमान समुदाय के साथ इसका अच्छा संबंध है तथा साक्ष्य देता है कि ख्रीस्त जीवित हैं और उनका प्रेम धर्म, जाति और संस्कृति की सीमाओं से परे है।

फाउंडेशन की भावी चुनौतियों और समर्पण के बारे में संत पापा ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि यह स्वयं को नवीकृत कर मजबूत करता रहे तथा परमधर्मपीठीय समिति कोर उन्नुम की सहायता से यह महत्वपूर्ण है कि परोपकार तथा उदारता का केन्द्र ख्रीस्तीय प्रशिक्षण और शिक्षण रहे। संत पापा ने कहा कि अब अफ्रीका को शुभ समाचार का घर तथा कलीसिया के लिए आशा का महादेश के रूप में देखा जा रहा है।

http://www.radiovaticana.org/in1/index.asp

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