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Archive for the ‘Church’ Category

दस आज्ञाएं, मानव और ईश्वर के बीच का विधान

In Church on June 20, 2018 at 2:18 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 13 मई 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को संहिता की आज्ञा पर अपनी धर्मशिक्षा माला को आगे बढ़ाते हुए  कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

हमने पिछले बुधवार को एक नई धर्मशिक्षा माला चक्र की शुरूआत की जो संहिता की आज्ञाओं पर आधारित है। हमने इस बात पर चिंतन किया कि येसु ख्रीस्त संहिता की आज्ञाओं को रद्द करने नहीं बल्कि पूरा करने आते हैं। हमें अपने जीवन में इस तथ्य को सदैव समझने की जरूरत है।

धर्मग्रंथ में संहिता की आज्ञाएं अपने लिए नहीं हैं लेकिन यह एक दूसरे के साथ हमारे संबंध को स्थापित करने हेतु हैं यह ईश्वर और लोगों के बीच का विधान है। हम इसे निर्गमन ग्रंथ के अध्याय 20 के पद 1 में पाते हैं,“ईश्वर ने मूसा से यह सब कहा।”

संत पापा ने कहा कि हम धर्मग्रंथ को किसी अन्यों किताबों की तरह देखते हैं लेकिन यह अपने में सधारण पुस्तिका नहीं है। हम इस पद में इसे “आज्ञाओं” के रुप में जिक्र किया हुआ नहीं पाते हैं वरन ये “बातों” के रुप वर्णित हैं। यहूदियों की रीति के अनुसार यह सदैव “दस आज्ञाओं” के रुप में देखी जाती थी जिसका अर्थ संहिता में निर्धारित नियम था। धर्मग्रंथ में ये क्यों “दस बातों” के रुप में प्रयुक्त किये गये हैं और “दस नियमों” के रुप में नहींॽ

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि एक आज्ञा और एक बात में क्या अंतर हैॽ ”आज्ञा को हम एक निर्देश के रुप में पाते हैं जिस में वार्ता का अभाव रहता है। दूसरी ओर एक बात में हम आवश्यक रुप से एक संबंध को पाते हैं जो वार्ता हेतु खुली रहती है। पिता ईश्वर अपने शब्दों के द्वारा सृष्टि की संरचना करते हैं और उनका पुत्र शब्द के रुप में शरीरधारण करता है। प्रेम को हम शब्दों में पिरोता हुआ पाते हैं और उसी भांति हम शिक्षा या सहयोग को भी देखते हैं। दो व्यक्ति जो आपस में प्रेम नहीं करते तो वे अपने में वार्ता, अपने विचारों का आदान-प्रदान नहीं कर सकते हैं। संत पापा ने कहा कि जब कोई अपने हृदय की बातों को व्यक्त करता है तो वह अपने उदासीपन से बाहर निकलता है।

वही दूसरी ओर एक आज्ञा में हमें किसी के द्वारा निर्देश को पाते हैं। एक वार्ता में हम अपने जीवन के द्वारा एक सच्चाई को व्यक्त करते हैं। एक दूसरे को प्रेम करने वाले अपनी वार्ता के द्वारा अपनी बातों को एक-दूसरे की समझ और भलाई हेतु व्यक्त करते हैं। हमारे लिए यह बेहतर है कि हम अपने विचारों को वस्तुओं के रूप नहीं वरन सीधे तौर से आपसी वार्ता में एक दूसरे के लिए व्यक्त करते हैं।(प्रेरितिक उद्बोधन एभन्जली गौदियुम, 142)

शुरू से ही शैतान नर और नारी को फुसलाने की कोशिश करते हुए यह कहता है कि ईश्वर ने तुम्हें अच्छे और बुरे के ज्ञान वृक्ष का फल खाने हेतु इसलिए मना किया है जिससे तुम उनके अधीन बने रहो। संत पापा ने कहा कि हमारे लिए यह एक चुनौती है कि हम ईश्वर के दिये हुए प्रथम नियम का अनुपालन करते हुए कैसे अपने पिता के प्रेम में संयुक्त रहते हैं जो अपने बच्चों की चिंता करते हुए उन्होंने बुराई से बचाने की चाह रखते हैं। सबसे दुर्भाग्य की बात हम यह देखते हैं कि कैसे सांप कई तरह के झूठ बोलते हुए हेवा को फुसलाता, उसमें ईर्ष्या के भाव उत्पन्न करता और उसे ईश्वर की बराबरी हेतु बहकाता है। (उत्पति. 2.16-17.3. 4-5)

मानव अपने को दुविधा की स्थिति में पाता है, कि क्या ईश्वर उसके ऊपर चीजों को थोपते हैं या उसकी प्रेम भरी चिंता करते हैंॽ क्या उनकी आज्ञाएं हमारे लिए नियम मात्रा हैं या वे हमारे लिए शब्द हैंॽ संत पापा ने कहा, “ईश्वर पिता हैं या मालिक।”ॽ क्या हम अपने में दास हैं या संतानॽ यह हमारा आंतरिक और बाह्य संघर्ष है जिसका एहसास हम सदा अपने जीवन में करते हैं। हमें हजारों बार अपने जीवन में एक दास और एक संतान की मानसिकता के बीच चुनाव करना पड़ता है।

पवित्र आत्मा हमें ईश्वर की संतान बनाता है, यह येसु ख्रीस्त की आत्मा है। गुलामों की आत्मा नियम को अपने में सिर्फ एक दमनकारी रुप में धारण करता और दो विपरीत परिणाम उत्पन्न करता है, यह या तो जीवन को नियमों के अनुपालन हेतु देखता या उनका घोर तिरस्कार करता है। हमारा ख्रीस्त जीवन आत्मा से प्रेरित नियमों के अनुपालन में हमें जीवन प्रदान करता है। येसु ख्रीस्त हमारे लिए पिता के पुत्र स्वरुप जीवन देने को आते हैं न कि हमें दोषी ठहराने को।

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि यह हमारे जीवन के द्वारा परिलक्षित होता है कि हम एक ख्रीस्तीय के रुप में किस तरह का जीवन यापन करते हैं एक संतान के रुप में या एक दास के रुप में। उन्होंने कहा कि हम जीवन में इस बात को याद करते हैं कि माता-पिता ने हमारे जीवन में नियमों को शिक्षकों की भांति किस तरह से पालन करना सिखलाया है।

दुनिया को आज विधिपरायणता की नहीं वरन सेवा की जरुरत है। इसे ख्रीस्तियों की आवश्यकता है जिसका हृदय संतानों का है।

इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की। उन्होंने धर्मशिक्षा माला के अंत में करतब दिखलाने वालों का शुक्रिया अदा करते हुए विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वास का अभिवादन किया।

उन्होंने कहा कि जून के महीने में हम पवित्रतम येसु के हृदय की आराधना करते हैं। येसु का कृपालु हृदय, जीवन की कठिन परिस्थितियों में रहने पर भी हमें बिना किसी चीज की माँग या चाह किये उनके शर्तहीन प्रेम को प्रसारित करने हेतु प्रेरित करता है। संत पापा ने सबों से निवेदन करते हुए कहा कि आप मेरे लिए, मेरे सहयोगियों के लिए और सभी पुरोहितों के लिए प्रार्थना करें जिससे हम ख्रीस्त के बुलावे के प्रति निष्ठावान बने रहें।

इतना कहने के बाद उन्होंने सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासी समुदाय के साथ हे पिता हमारे प्रार्थना का पाठ किया और सबों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।


(Dilip Sanjay Ekka)

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आमदर्शन हेतु आये बीमारों को संत पापा का अभिवादन

In Church on June 20, 2018 at 2:16 pm

रोम, बुधवार 20 जून 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह हेतु संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण जाने से पहले संत पापा पॉल छठे सभागार में बीमार लोगों के विभिन्न समूहों से मिले और विशेष रूप से एसएलए रोगियों के एक समूह से मुलाकात की, जो 21 जून को विश्व एस.एल.ए दिवस मना रहे हैं।

एमीट्रोफिक पार्श्व स्क्लेरोसिस (एसएलए) दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जो मुख्य रूप से तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) को स्वैच्छिक मांसपेशी की गतिशीलता को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होता है। स्वैच्छिक मांसपेशियां चबाने, चलने और बात करने जैसी गतिविधियों का उत्पादन करती हैं। यह रोग प्रगतिशील है, जिसका अर्थ है कि समय के साथ लक्षण खराब हो जाते हैं। वर्तमान में, एसएलए के लिए कोई इलाज नहीं है और बीमारी की प्रगति को रोकने के लिए कोई प्रभावी उपचार नहीं है।

संत पापा ने उनका अभिवादन कर उनकी उपस्थिति के लिए धन्यवाद दिया। संत पापा ने कहा, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण जाने से पहले मैं आपलोगों से मुलाकात करना चाहता था। आप यहाँ आराम से बड़े पर्दे में आमदर्शन समारोह को देख सकते और मेरे संदेश को सुन सकते हैं। पर्दे के जरिए हम सब एक दूसरे से जुड़े रहेंगे। संत पापा ने उनकी उपस्थिति के लिए पुनः धन्यवाद दिया। उन्हें अपनी प्रार्थना में याद करने का आश्वासन दिया तथा अपने लिए भी प्रार्थना करने का आग्रह किया।

संत पापा ने सभी को एक साथ माता मरिया के पास प्रार्थना करने हेतु आमंत्रित किया। उन्होंने कहा,“ आइये हम एक साथ माता मरियम के पास प्रार्थना करें” और सभी ने प्रणाम मरियम प्रार्थना का पाठ किया।  अंत में संत पापा ने उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया और संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण की ओर प्रस्थान किये।


(Margaret Sumita Minj)

गरीबों और शरणार्थियों में येसु से मुलाकात

In Church on June 20, 2018 at 2:15 pm


वाटिकन सिटी, बुधवार 20 जून 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 20 जून विश्व शरणार्थी दिवस के अवसर पर दो ट्वीट प्रेषित कर विश्व के सभी लोगों को शरणार्थियों और जरुरतमंद पड़ोसियों की मदद करने की प्रेरणा दी।

संदेश में उन्होंने लिखा, “हम गरीब, परित्यक्त और शरणार्थियों में येसु से मुलाकात करते हैं। अपने जरूरत मंद पड़ोसियों का स्वागत करने और मदद करने से कभी पीछे न हटें।”

दूसरे संदेश में संत पापा ने लिखा, “एक व्यक्ति की गरिमा उनके नागरिक होने, प्रवासी या शरणार्थी होने पर निर्भर नहीं करती है। युद्ध और गरीबी से भागने वाले किसी के जीवन को बचाना ही मानवता का कार्य है।”

आशा, विश्वास और भाईचारा : ये वे शब्द हैं जिसे संत पापा फ्राँसिस ने परमधर्माध्यक्षीय कार्यकाल की  शुरुआत से ही अक्सर शरणार्थियों के लिए दोहराया है। विश्व शरणार्थी दिवस दुनिया में 66 मिलियन से अधिक लोगों को न भूलने के लए मनाया जाता है, जिन्हें युद्ध, हिंसा और दुःख से बचने के लिए अपने देश छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है।

स्वागत, रक्षा, बढ़ावा और संघटित करना

प्रवासियों और शरणार्थियों के विश्व दिवस 2018 के संदेश में संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि “अजनबी जो हमारे दरवाजे पर दस्तक देते हैं उनके माध्यम से हम येसु के साथ मुलाकात करते हैं।” संत पापा ने संदेश में शरणार्थियों का स्वागत करने, परिवार के पुनर्मिलन को प्रोत्साहित करने, प्रवासियों और शरणार्थियों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा के लिए कार्यों के संरक्षण और  समाज में शरणार्थियों के एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया।

विदित हो कि यह दिवस प्रत्येक वर्ष 20 जून को उन लोगों के साहस, शक्ति और संकल्प के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है, जिन्हें प्रताड़ना, संघर्ष और हिंसा की चुनौतियों के कारण अपना देश छोड़कर बाहर भागने को मजबूर होना पड़ता है। शरणार्थियों की दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित करने और शरणार्थी समस्याओं को हल करने के लिए ही यह दिवस मनाया जाता है।

दिसंबर 2000 में संयुक्त राष्ट्र ने अफ्रीका शरणार्थी दिवस यानी 20 जून को प्रतिवर्ष विश्व शरणार्थी दिवस मनाने का निर्णय लिया। वर्ष 2001 से प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा 20 जून को विश्व शरणार्थी दिवस मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था यू.एन.एच.सी.आर. शरणार्थी लोगों की सहायता करती है।


(Margaret Sumita Minj)

विश्व शरणार्थी दिवस : संघर्षों के कारण दुनिया में 30 मिलियन विस्थापित बच्चे

In Church on June 20, 2018 at 2:13 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 20 जून 2018 (रेई) : बुधवार 20 जून विश्व शरणार्थी दिवस के अवसर पर वाटिकन प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार युद्ध और संघर्षों के कारण दुनिया में 30 मिलियन विस्थापित बच्चे हैं।

विश्व शरणार्थी दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र बालकोष (यूनिसेफ) याद करता है कि आज संघर्ष के कारण जबरन विस्थापित हुए लगभग 30 मिलियन बच्चे हैं। इन कमजोर बच्चों को सुरक्षा और आवश्यक सेवाएँ देने की आवश्यकता है ताकि वे सुरक्षित रह सकें और लंबे समय तक उनके कल्याण सुनिश्चित करने के लिए टिकाऊ समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

अभिभावकों के बिना अकेले चलने वाले शरणार्थी और प्रवासी बच्चों की वैश्विक संख्या भी अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच गई है, जो 2010 और 2015 के बीच का लगभग 5 गुना बढ़ गई है। 2015 के बीच लगभग 80 देशों में कम से कम 300,000 माता पिता से बिछूड़े और अनाथ बच्चे पंजीकृत हैं और 2010-2011 की तुलना में 2016, में  66,000 अकेले चलने वाले बच्चों की संख्या शायद अधिक है। ये बच्चे तस्करी, शोषण, हिंसा और दुर्व्यवहार के अधिक जोखिम के संपर्क में आते हैं। ये बच्चे विश्व स्तर पर तस्करी पीड़ितों के लगभग 28% का प्रतिनिधित्व करते हैं।

शरणार्थियों के समर्थन में एक व्यापक कार्य योजना पर चल रही चर्चाओं में से, यूनिसेफ ने दुनिया के सबसे कमजोर बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और कल्याण की गारंटी के लिए अपने प्रयासों को दोगुणा बढ़ाने के लिए विश्व के नेताओं से मांग की – जिनमें से कई संघर्ष, हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के कारण विस्थापित हैं।

विश्व शरणार्थी दिवस पर, यूनिसेफ के आपातकालीन कार्यक्रम के निदेशक मैनुअल फॉन्टेन ने कहा, ” बच्चों को हर दिन सामना करने वाले खतरों और चुनौतियों को याद रखना महत्वपूर्ण है।” “प्रवासन के लिए बाध्य किये गये बच्चे – शरणार्थी, शरण तलाशने वाले या आंतरिक रूप से विस्थापित लोग – अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम का सामना करते हैं, साथ ही बड़ी बाधाएं जो उन्हें बढ़ने के लिए आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं को भी सीमित कर देती हैं। इन बच्चों को आशा, अवसर और सुरक्षा की आवश्यकता होती है। हम सदस्य देशों से इन बच्चों के अधिकारों और महत्वाकांक्षाओं की गारंटी के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं को नवीनीकृत करने का अनुरोध करते हैं।”


(Margaret Sumita Minj)

कार्ड जेनारी : सीरिया में भयंकर मानवतावादी आपदा

In Church on June 20, 2018 at 2:12 pm

रोम, बुधवार 20 जून 2018 (वीआर,रेई)  : सीरिया के प्रेरितिक राजदूत कार्डिनल जेनारी ने विश्व शरणार्थी दिवस के अवसर पर परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में सीरिया की स्थिति से अवगत कराया।

कार्डिनल जेनारी ने कहा जब भी वे सीरिया के बारे सोचते हैं तो उनके मानसपटल में दो छवियां उभरती है। एक है संत पेत्रुसमहागिरजा घर के द्वार के पास का माइकेल अंजेलो द्वारा निर्मित (पियेता) माता मरियम की गोद में मृत येसु की प्रतिमा है। जब वे उसे देखते हैं तो उसे लगता है कि “सीरिया अपने हजारों मृत और घायल बच्चों को अपनी गोद में पकड़े हुए है” और दूसरी छवि है भले सामारी का दृष्टांत: “सीरिया पर लुटेरों ने हमला किया और वहाँ के लाखों लोगों को अधमरा सड़क के किनारे छोड़कर चले गए।”

महिलाएं और बच्चे

कार्डिनल जेनारी ने कहा कि यह सीरिया की सात वर्षों के युद्ध में फंसे महिलाओं और बच्चों की कहानी है। उन्होंने कहा कि अधिकांश को इस संघर्ष के लिए बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी, जो सरकार के विरोध के साथ शुरु हुई थी पैदा हुए हैं और आज इस जमीन पर दुनिया की सबसे खतरनाक पांच सेनाएँ पहुंच गई हैं। कार्डिनल जेनारी ने विश्व शरणार्थी दिवस के अवसर पर सेंट्रो अस्टाल्ली द्वारा आयोजित बैठक के दौरान बताया पूर्वी अलेप्पो के सड़क पर में बिना किसी के अभिभावक के दो हजार से छः हजार बच्चे रहते हैं, और ऐसा भी होता है कि वे भूख और ठंड से मर जाते हैं। दूसरी ओर, महिलाओं को नौ बच्चों को भी रखना पड़ता है, क्योंकि उनके पति या तो युद्ध में मर गए हैं या गायब हो गए हैं।

12 मिलियन लोग अपने घरों से बाहर

कार्डिनल जेनारी ने कहा कि दुनिया के शरणार्थियों में एक चौथाई सिरियन हैं। कुल मिलाकर, 12 मिलियन लोगों ने देश छोड़ दिया है या विस्थापित हो गये हैं। उनका सपना है कि वे एक दिन अपने देश, अपने घर वापस लौटें।


(Margaret Sumita Minj)

बाढ़ राहत कार्य में कलीसिया की सहभागिता

In Church on June 20, 2018 at 2:10 pm

नई दिल्ली, बुधवार 20 जून 2018 (उकान) : पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ और भूस्खलन से पिछले हफ्ते कम से कम 23 लोगों के मरने का दावा करने के बाद हजारों लोगों को कलीसिया की एजेंसियों से सहायता मिल रही हैं।

सबसे खराब प्रभावित गांव असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा राज्यों में हैं, जहां मानसून बारिश के चलते बाढ़ के पानी में कई घर गिर गये और खेतों की फसल पानी में डूब गई है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन ने सड़कों को काट दिया है, जबकि नदियों का पानी खतरे के स्तर से उपर बह रही हैं, जिससे सैकड़ों गांव पानी में डूब गये हैं।

मिजोरम में ऐजोल धर्मप्रांत के समाज सेवा संस्थान के निदेशक फादर लॉरेंस केनेडी ने कहा, “स्थिति बहुत गंभीर है क्योंकि हम भूस्खलन के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में सक्षम नहीं हैं।”

फादर लॉरेंस ने 19 जून को उका समाचार को बताया कि बारिश दो दिनों तक रुक गई थी। कलीसिया के अधिकारी और स्वयंसेवक पैदल गांवों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि ज्यादातर सड़कें खराब हालत में हैं और वाहनों के आवागमन की अनुमति नहीं है।

अधिकारियों का हवाला देते हुए मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि चार राज्यों में बाढ़ से संबंधित दुर्घटनाओं में कम से कम 23 लोग मारे गए हैं, जहां लगभग 500 राहत शिविरों में लगभग 500,000 लोग रह रहे हैं। कम से कम 700 गांव पानी के नीचे हैं।

असम राज्य आपदा प्राधिकरण प्रबंधक ने कहा कि राज्य में कम से कम 448,000 लोग प्रभावित हुए हैं, जहां ब्रह्मपुत्र नदी का पानी कुछ स्थानों पर खतरे के निशान से उपर बह रहा है। असम में 213 राहत शिविर हैं।

त्रिपुरा के आपदा प्रबंधन नियंत्रण केंद्र ने कहा कि 200 राहत शिविरों में 6,500 परिवारों के करीब 15,000 लोग हैं।

फादर केनेडी ने कहा कि कलीसिया के स्वयंसेवक चिकित्सा सहायता प्रदान कर रहे हैं जबकि अर्धसैनिक बल  फंसे लोगों को बचाने में लगे हुए हैं।

कारितास इंडिया में आपदा प्रबंधन अधिकारी प्रियंका समंथा पिंटो ने उका समाचार को बताया कि  साफ पानी और स्वच्छता सुविधाओं की सबसे ज्यादा कमी है क्योंकि हाथ पंप और कुएं सब पानी में डूबे हैं।

उन्होंने कहा कि जल स्रोत दूषित हो गए हैं और सुरक्षित पेयजल के स्रोतों का उपयोग करना मुश्किल है।

पिंटो ने कहा, “प्रभावित समुदायों का स्वास्थ्य गंभीर खतरे में है क्योंकि बाढ़ के चलते दस्त, बुखार और त्वचा में संक्रमण के कुछ मामले सामने आए हैं।”

त्रिपुरा में, कारितास सात गांवों में भोजन, कपड़े, बर्तन, पेयजल और स्वच्छता वस्तुओं को उपलब्ध करा रहा है।

मणिपुर में इम्फाल के महाधर्माध्यक्ष डोमिनिक लुमन ने कहा कि उनके क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है और पल्लियाँ प्रभावित लोगों की देखभाल कर रही हैं।

“चूंकि पल्लियाँ स्थिति को संभालने में सक्षम हैं, इसलिए हम धर्मप्रांत स्तर पर प्रक्रिया में शामिल नहीं हैं, लेकिन हम मदद करने के लिए तैयार हैं।”

असम राज्य में गुवाहाटी महाधर्मप्रांत में महाधर्माध्यक्ष जॉन मुलाचाइरा ने उका समाचार को बताया कि सरकार अपना काम बखूबी से कर रही है लेकिन आवश्यक होने पर कलीसिया भी मदद करने के लिए तैयार है।


(Margaret Sumita Minj)

ऑस्ट्रेलियाई धर्मबहन अभी तक मनिला में

In Church on June 20, 2018 at 2:08 pm

मनिला, बुधवार 20 जून 2018 (उकान) : एक शीर्ष सरकारी अधिकारी के मुताबिक फिलीपीन के अधिकारियों ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी धर्मबहन देश छोड़ने का आदेश दिया है। इस हफ्ते न्याय विभाग से  मिसनरी वीसा प्राप्त करने के बावजूद उसे देश से बाहर निकाले जाने का खतरा है।

फिलीपीन न्याय विभाग ने आदेश दिया कि धर्मबहन पेट्रीसिया फॉक्स के मिशनरी वीज़ा को लौटा दिया जाए, लेकिन निर्वासन मामला अभी भी सिर पर मंडरा रहा है।

फिलीपींस के न्याय विभाग ने फैसला किया कि 27 साल तक देश में काम कर रही धर्मबहन पेट्रीसिया फॉक्स को आप्रावासन अधिकारियों द्वारा जब्त घोषित किए जाने के बाद उसे मिशनरी वीजा वापस दे देना चाहिए।

विभाग ने 18 जून को इमिग्रेशन ब्यूरो “शून्य और व्यर्थ” द्वारा धर्मबहन के वीज़ा को जब्त करने की घोषणा की क्योंकि इसे जब्त करने का कोई कानूनी आधार नहीं था।

इसमें कहा गया है कि धर्मबहन फॉक्स “मिशनरी के रूप में अपने कर्तव्यों को पूरा करना जारी रख सकती है” जब तक कि वीज़ा सितंबर में समाप्त नहीं हो जाता है या जब तक उसकी निर्वासन कार्यवाही में “अंतिम प्रस्ताव तक नहीं पहुंच जाता।”

राष्ट्रपति रॉड्रिगो ड्यूटेटे के प्रवक्ता ने कहा कि 71 वर्षीय धर्मबहन “अभी तक खतरे में है” और कभी भी निर्वासन मामले का सामना करना पड़ सकता है।

ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी धर्मबहन को 16 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया गया था और देश छोड़ने के आदेश से पहले रातोंरात हिरासत में लिया गया था।

बाद में इमिग्रेशन ब्यूरो ने “पक्षपातपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों” के तहत 23 अप्रैल को धर्मबहन फॉक्स के मिशनरी वीज़ा को रद्द कर दिया।

ब्यूरो ने धर्मबहन के विदेशी प्रमाण पत्र के पंजीकरण को “निष्क्रिय” भी किया।

राष्ट्रपति के प्रवक्ता हैरी रोक ने कहा कि न्याय विभाग ने निर्वासन कार्यवाही के प्रति पूर्वाग्रह के बिना। केवल धर्मबहन फॉक्स के वीजा की वैधता को बरकरार रखा है।

रोक ने कहा,”निर्वासन कार्यवाही का मुद्दा यह है कि क्या वह राजनीतिक गतिविधियों में शामिल थी?”

राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से धर्मबहन फॉक्स की आलोचना की है, जिन्हें उन्होंने कहा था कि देश में रहने वाले किसी विदेशी को फिलीपीन सरकार को अपमान करने का कोई अधिकार नहीं था।

मिशनरी काम जारी है

न्यायमूर्ति विभाग ने अपना निर्णय लेने के कुछ ही समय बाद मनिला में एक सभा में संवाददाताओं से कहा, “मैं एक मिशनरी के रूप में काम करना जारी रखूंगी क्योंकि यह मेरे मिशन की अभिव्यक्ति है।”

उन्होंने कहा कि गरीब समुदायों के साथ उनका काम “कलीसिया का जनादेश” है।

उसने कहा, ” मिशनरी काम करना यह कलीसिया की शिक्षा है। मैं वैसे भी कुछ भी गलत नहीं कर रही हूँ।”

सिस्टर फॉक्स ने कहा कि न्याय विभाग के फैसले “सदमे के रूप में आए” क्योंकि वे “सबसे खराब खबर का इन्तजार कर रही थीं।”

सिस्टर फॉक्स ने कहा कि वे सितंबर में समाप्त होने से पहले अपने मिशनरी वीज़ा को नवीनीकृत करने के लिए आवेदन करेंगी।

ऑस्ट्रेलियाई धर्मबहन, सियोन की माता मरियम की अंतर्राष्ट्रीय धर्मसमाज की एक क्षेत्रीय सुपीरियर हैं। अप्रैल में मिंडानाओ में कथित मानवाधिकारों के दुरुपयोग का पता लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय तथ्य-खोज मिशन में उनकी भागीदारी के बाद एक “अवांछनीय विदेशी” का दाग लग गया था।


(Margaret Sumita Minj)

ख्रीस्तीय अपने दुश्मनों से प्रेम करते एवं उनके लिए प्रार्थना करते हैं

In Church on June 19, 2018 at 4:08 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 19 जून 2018 (रेई)˸ “अपने शत्रुओं से प्रेम करो और अपने अत्याचारियों के लिए प्रार्थना करो। यही एक रहस्य है जिसके द्वारा ख्रीस्तीय पिता के समान पूर्ण बन सकते हैं।” यह बात संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार को वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

उन्होंने कहा कि जो लोग हमें नष्ट करना चाहते हैं उन्हें क्षमा देना, उनके लिए प्रार्थना करना एवं उनसे प्रेम करना येसु का आदेश है।

संत मती रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा कि मानवीय दुर्बलताओं के बीच हमें पिता के उदाहरणों पर चलना है जो सभी से प्रेम करते हैं और चुनौती देते हैं कि ख्रीस्तीय अपने शत्रुओं से लिए प्रार्थना करें एवं उनके प्रेम हेतु अपने को समर्पित करें।

हम क्षमा करते हैं ताकि हम भी क्षमा किये जाएँ

संत पापा ने कहा कि हमें अपने बैरियों को क्षमा करना है जिसको हम “हे हमारे पिता” की प्रार्थना में दुहराते हैं, “हमें क्षमा कर जैसे हम भी अपने अपराधियों को क्षमा करते हैं।” यह एक शर्त है जो कि आसान नहीं है, हमें उन लोगों के लिए प्रार्थना करना है जो हमें तकलीफ देते हैं।

संत पापा ने कहा, “उन लोगों के लिए प्रार्थना करना जो हमें नष्ट करना चाहते हैं ताकि ईश्वर उन्हें आशीष प्रदान करे, इसे समझना सचमुच कठिन है। पिछली शताब्दी में रूसी ख्रीस्तीयों को सिर्फ ख्रीस्तीय होने के कारण साईबेरिया भेजा गया ताकि वे ठढं से मर जाएँ। जिनमें से कई लोगों ने अपने शत्रुओं के लिए प्रार्थना की। संत पापा ने ओस्विच एवं अन्य नजरबंद शिविरों की याद दिलाते हुए कहा कि वहाँ बंद कैदियों ने भी नाजियों के लिए प्रार्थना की।

येसु एवं शहीदों के तर्क से सीखें

संत पापा ने कहा कि येसु का यह तर्क कठिन है। वे क्रूस पर से अपने मारने वालों के लिए इस प्रकार प्रार्थना करते हैं, “पिता उन्हें क्षमा कर क्योंकि वे नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं।” संत स्तेफन ने भी शहादत के पूर्व ऐसा ही किया था।

संत पापा ने कहा किन्तु हममें और उनमें कितना अंतर है। हम छोटी चीजों के लिए भी क्षमा नहीं कर सकते हैं। जब परिवारों में पति और पत्नी, सास और बहु के बीच झगड़ा हो जाता है तो वे एक-दूसरे को माफ नहीं कर सकते हैं। बाप और बेटे के बीच भी एक-दूसरे को माफ करना मुश्किल हो जाता है जबकि हमें उन लोगों को क्षमा करना है जो हमें मार डालना चाहते हैं। उन्हें न केवल क्षमा करना किन्तु उनके लिए प्रार्थना करना और उनसे प्रेम करना है, जिसे हम केवल ईश्वर की कृपा से कर सकते हैं।

पिता के समान पूर्ण बनने की कृपा के लिए प्रार्थना करें

संत पापा ने सलाह दी कि हम ख्रीस्तीय रहस्य को समझने एवं पिता के समान पूर्ण बनने की कृपा के लिए प्रार्थना करें जो अच्छे और बुरे सभी लोगों को अच्छी चीजें प्रदान करते हैं।

संत पापा ने उन लोगों की याद करने को कहा जिन्होंने हमें दुःख दिया है अथवा हानि पहुँचायी है। उन्होंने उनके लिए इस प्रकार प्रार्थना करने का परामर्श दिया “प्रभु उन्हें आशीष दे तथा मुझे उन्हें प्यार करना सिखा।”


(Usha Tirkey)

ग्वाटेमाला के ज्वालामुखी विस्फोट पीड़ितों की मदद करेंगे संत पापा

In Church on June 19, 2018 at 4:06 pm


वाटिकन सिटी, मंगलवार, 19 जून 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ग्वाटेमाला में ज्वालामुखी से पीड़ित लोगों की मदद हेतु अनुदान करेंगे।

वाटिकन प्रेस कार्यालय द्वारा जारी एक विज्ञाप्ति में कहा गया है कि संत पापा फ्राँसिस वाटिकन के समग्र मानव विकास सेवा विभाग द्वारा ग्वाटेमाला में राहत कार्य में मदद देने हेतु 1 लाख डॉलर अनुदान करेंगे।

ग्वाटेमाला की राजधानी से करीब 40 किलोमीटर दूर फ्यूएगो ज्वालामुखी में 3 जून को विस्फोट हुआ था। जिसकी चपेट में आकर 62 लोगों की मौत हुई है। ज्वालामुखी विस्फोट के कारण 1.7 मिलियन लोग प्रभावित हुए थे और करीब 13 हजार लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था।

अनुदान की राशि प्रेरितिक राजदूत के माध्यम से सबसे अधिक प्रभावित धर्मप्रांतों को प्रेषित कर, पीड़ित लोगों की मदद की जाएगी।

प्रेस विज्ञाप्ति में कहा गया है कि अनुदान के साथ-साथ ग्वाटेमाला के प्यारे लोगों के लिए पूरी काथलिक कलीसिया की ओर से प्रार्थना भी अर्पित की जाएगी।


(Usha Tirkey)

मानवाधिकारों की प्राप्ति हेतु शांति महत्वपूर्ण

In Church on June 19, 2018 at 4:04 pm

संयुक्त राष्ट्रसंघ, 19 जून 2018 (वाटिकन न्यूज)˸ संयुक्त राष्ट्र के लिए वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष इवान युरकोविच ने 14 जून को, शांति के अधिकार पर जेनेवा में आयोजित एक कार्याशाला को सम्बोधित किया।

उन्होंने कहा, “चूंकि शांति प्राप्त करने का अधिकार सभी को है सभी राष्ट्रों को एक सतत शांति का मार्ग खोजने के लिए अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारी को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए जो “सक्रिय, सहभागिता प्रक्रिया में शामिल न्याय का फल है जहां संवाद को प्रोत्साहित किया जाता है और पारस्परिक समझदारी और सहयोग की भावना द्वारा संघर्ष का समाधान किया जाता है … “।

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि यह मानव अधिकार है जिसे जीवन के अधिकार और धर्म तथा विश्वास की आजादी के साथ, मानव अधिकारों की सुरक्षा और प्रचार की पूरी प्रणाली के मूल के रूप में देखा जाना चाहिए। शांति का अधिकार तथा शांति को प्रोत्साहन, सभी मानवाधिकारों को प्राप्त करने के लिए वास्तव में एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है।”

महाधर्माध्यक्ष युरकोविच ने कहा कि परमधर्मपीठ ने हमेशा बहुपक्षीय कूटनीति को उन प्रमुख स्थानों में से एक के रूप में प्रोत्साहित किया है जहां राष्ट्रों ने “सत्य, न्याय, सहर्ष सहयोग और स्वतंत्रता के निर्देशों के अनुसार” संबंधों को सुसंगत बनाने की कोशिश की है।”

शांति एवं विकास को एक-दूसरे का पूरक बतलाते हुए परमधर्मपीठ के प्रतिनिधि ने संत पापा पौल षष्ठम का हवाला देते हुए कहा, शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है, “और” शांति का नया नाम विकास है।” उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को 2030 के एजेंदे में शांति हेतु सतत् विकास लक्ष्य के रूप में रखा गया है। जिसमें कहा गया है कि शांति के बिना सतत् विकास संभव नहीं है और न ही सतत् विकास के बिना शांति संभव है।

उन्होंने कहा कि इस विकास में प्रत्येक मानव व्यक्ति को अपने प्राकृतिक गतिशीलता में एकीकृत रूप से सम्मानित करने, गर्भधारण से लेकर प्राकृतिक मौत तक, उसके साथ सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों, जिसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता शामिल है, मानव प्रकृति में अंकित नैतिक नियम को खोजने और पहचानने के लिए बुलाया जाता है।


(Usha Tirkey)

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