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Archive for the ‘Church’ Category

परमधर्मपीठीय सर्दिनी प्रांतीय सेमिनरी के छात्रों को संत पापा का संदेश

In Church on February 17, 2018 at 2:32 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 17 फरवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार, 17 फरवरी को वाटिकन स्थित क्लेमेनटीन सभागार में, परमधर्मपीठीय सर्दिनी प्रांतीय सेमिनरी की स्थापना की नब्बेवीँ सालगिरह पर वहाँ के प्रशिक्षकों एवं गुरूकुल छात्रों से मुलाकात की।

सेमिनरी की स्थापना इताली काथलिक धर्माध्यक्षों द्वारा संत पापा पीयुस ग्यारहवें की मांग पर की गयी है ताकि खासकर, इटली के मध्य-दक्षिण एवं द्वीपों से पुरोहिताई की तैयारी करने वाले गुरूकुल छात्रों को मदद मिल सके।

संत पापा ने उन्हें सम्बोधित कर कहा, “इस अवसर पर ईश्वर की स्तुति करने में मैं आप लोगों के साथ शामिल होना चाहता हूँ जिन्होंने इन वर्षों में अपनी कृपा से कई पुरोहितों के जीवन को येसु के पवित्र हृदय को समर्पित, इस शिक्षण संस्थान द्वारा प्रशिक्षित किया है। इसने स्थानीय कलीसिया एवं विश्व व्यापी कलीसिया की सेवा हेतु कई समर्पित पुरोहितों को प्रदान किया है। उन्होंने ने कामना की कि यह यादगारी बुलाहट के प्रेरितिक देखभाल को नयी प्रेरणा प्रदान करे।”

संत पापा ने गुरूकुल छात्रों को सम्बोधित कर कहा, “प्रिय गुरूकुल छात्रो, आप एक पुरोहित के रूप में, भविष्य में, प्रभु की दाखबारी में काम करने हेतु तैयारी कर रहे हैं। पुरोहित जो मिलकर काम करना जानता है, चाहे वह अलग धर्मप्रांत ही क्यों न हो, खासकर, सर्दीनिया प्रांत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि आप विश्वास में सुदृढ़ बने रहें एवं ख्रीस्तीय धार्मिक परम्पराओं का पालन करें। यह इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि मानसिक संकीर्णता की स्थिति में विभिन्न धर्मप्रांतीय समुदायों के बीच संबंध पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।”

संत पापा ने ग़रीबों का विशेष ख्याल करने का आग्रह करते हुए कहा कि भौतिक एवं आध्यात्मिक गरीबी पर ध्यान देना हमेशा आवश्यक है और आज यह अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि पुरोहित, ग़रीबों का विशेष ख्याल रखें, उनका साथ दें तथा सादगी की जीवन शैली अपनाएँ ताकि उसके द्वारा लोग कलीसिया को अपना पहला घर समझ सकें। संत पापा ने उन्हें प्रोत्साहन दिया कि वे प्रशासक नहीं बल्कि लोगों के पुरोहित बनने हेतु एक सेवक के रूप में अपने को तैयार करें। उन्होंने कहा कि उन्हें ईश्वर के व्यक्ति बनना है जो शांत और पारदर्शी जीवन व्यतीत करता, अतीत की पुरानी यादों के लिए उदास नहीं होता, बल्कि कलीसिया के स्वस्थ परम्पराओं के अनुरूप आगे देख पाने के लिए सक्षम होता है।

संत पापा ने प्रशिक्षण के इस काल में गुरूकुल छात्रों को शुभकामनाएं दीं कि वे प्रभु की उस कृपा के प्रति हमेशा सचेत रहें जिसको प्रभु ने सब कुछ त्याग कर उनका अनुसरण करने का आह्वान करते हुए प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि उनपर सर्दीनिया की कलीसिया की आशा है। प्रशिक्षण की इस यात्रा में वे आनन्द, दृढ़ता एवं गंभीरता से आगे बढ़ें ताकि प्रेरितिक जीवन को अपना सकें जो आज सुसमाचार प्रचार की मांग का उत्तर दे सके तथा ख्रीस्त उसकी कलीसिया, अपनी बुलाहट एवं मिशन के प्रति वफादार रह सकें।

संत पापा ने गुरूकुल छात्रों को बतलाया कि इस स्कूल में निष्ठावान बनने हेतु उन्हें सबसे पहले प्रार्थना का सहारा लेना चाहिए, विशेषकर, धर्मविधि के माध्यम से। यूखरिस्त में भाग लेकर एवं पवित्र धर्मग्रंथ के पाठ एवं उस पर चिंतन द्वारा ख्रीस्त के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित करना है। संत पापा ने उन्हें इस बात से अवगत कराया कि ख्रीस्त के साथ संबंध के बिना प्रेरिताई में सफल नहीं हो सकते हैं क्योंकि उनके बिना हम कुछ भी नहीं कर सकते।

संत पापा ने गुरूकुल के शिक्षकों एवं अधिकारियों को सम्बोधित कर कहा कि सेमिनरी की इस यात्रा में उनकी भी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। पुरोहिताई के मिशन की मांग को पूरी करने के लिए वे सच्चाई एवं विवेक से काम करने हेतु बुलाये जाते हैं। प्रशिक्षण के इस कठिन काम में वे याजकों के प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने एवं विभिन्न कलीसियाई समुदायों के बीच एकता लाने के लिए प्रेरित किये जाते हैं।

संत पापा ने उन्हें माता मरियम के संरक्षण में समर्पित करते हुए शुभकामनाएं अर्पित की।


(Usha Tirkey)

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संत पापा मारोनाइट याजकों से: अपने लोगों के लिए प्रकाश बनें

In Church on February 17, 2018 at 2:30 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 17 फरवरी 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 16 फरवरी को वाटिकन के सामान्य लोक सभा परिषद में रोम स्थित परमधर्मपीठीय मारोनाइट कॉलेज के पुरोहितों और गुरुकुल के छात्रों का अभिवादन कर कहा कि इन वर्षों के दौरान उन्होंने जो प्रशिक्षण पाया है वह लेबनान और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में प्रेरितिक कार्यों की आधार शिला बनेगी।

संत पापा फ्रांसिस ने उन्हें संत मारॉन के विश्वास और प्रेम के गुणों का अनुकरण करने हेतु आमंत्रित किया, जो आज आध्यात्मिक रुप मे भूखे-प्यासे लोगों के आदर्श हैं।

प्रशिक्षण की अहमियत

अपने संदेश में संत पापा ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अध्ययन के इन वर्षों में अस्थायी और दिखावा की संस्कृति द्वारा अवशोषित होने के जोखिम” से सावधान रहने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि अध्ययन के दौरान उन्हें “दुनियादारी और सांसारिक आकर्षण के प्रति लड़ने और अपने आप को मजबूत बनाने का अवसर मिला है।

संत पापा ने यह भी टिप्पणी की कि इन वर्षों का प्रशिक्षण उनके लिए “रोमन जिम” की तरह है, जहां उन्हें समुदाय में अनुशासित जीवन और अपनी प्रतिभाओं को विकसित करने हेतु ईश्वर और उनके अधिकारी मदद करते हैं।

लेबनान और मध्य-पूर्व

संत पापा फ्राँसिस ने उन्हें इस बात पर ध्यान दिलाया कि जो महाविद्यालय में याजक बनने की तैयारी हेतु अध्ययन करने आये हैं वे इस चुनौतियों और खतरों वाले समय में आशा के साथ जीवन जीने के लिए बुलाये गये हैं। दुर्भाग्य से मध्य पूर्व को अस्थिरता प्रभावित कर रही है ऐसी परिस्थिति में जिन लोगों के साथ वे पुरोहित के रुप में उनकी सेवा करेंगे वे उनसे सांत्वना की आशा करेंगे।

शांति और युवा

संत पापा ने उनके साथ अपनी दो इच्छाओं को साझा किया। पहला है शांति की इच्छा करना

संत जॉन पॉल द्वितीय का हवाला देते हुए, संत पापा फ्राँसिस ने आशा व्यक्त की कि अपने देश लेबनान में ये भावी पुरोहित यह सुनिश्चित करें कि वे अपने देश, अपने क्षेत्र के लोगों के लिए प्रकाश बनकर उनके साथ काम करें। वे शांति का संकेत बनें जो सिर्फ ईश्वर से आती है।

संत पापा ने अपनी दूसरी इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि यह युवा लोगों से संबंधित है। उन्हें युवाओं का साथ बड़े धैर्य और विश्वास के साथ देना होगा। संत पापा ने इस बात पर जोर देते हुए कहा, “युवा लोग, भविष्य की आशा हैं, अतः उनकी प्रेरिताई के लिए वे सबसे गंभीर निवेश हैं।”

अंत, में संत पापा ने इस मरोनाइट समुदाय को लेबनान की माता मरियम और उनके महान संतों की सुरक्षा में समर्पित करते हुए अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा : प्रार्थना हमें अपने और ईश्वर के बारे में सच्चाई के मार्ग पर वापस लाती है

In Church on February 17, 2018 at 2:28 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 17 फरवरी 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 16 फरवरी को वाटिकन के संत क्लेमेंटीन सभागार में प्रो पेत्री सेदे संगठन के सदस्यों से मुलाकात की जो अपने वार्षिक तीर्थयात्रा पर रोम आये हुए हैं।

संत पापा ने बड़े हर्ष के साथ उनका स्वागत कर कहा, प्रो पेत्री सेदे एसोसिएशन के सदस्य, आप सभी संत पेत्रुस की कब्र का दर्शन कर अपने विश्वास की पुष्टि करने और दूसरों की सेवा में समर्पित मिशन में खुद को नवीनीकृत करने के लिए तीर्थ यात्रा पर आए हैं।

आपकी यात्रा चालिसा के शुरुआत में है। यह काथलिक विश्वास और कलीसिया के मिशन पर पुनः ध्यान देने का एक अनुकूल समय है, जिसमें हर बपतिस्मा प्राप्त ख्रीस्तीय को भाग लेना चाहिए। उदासीनता, हिंसा, स्वार्थ और निराशावाद द्वारा चिन्हित दुनिया के अवलोकन के साथ, आज हमें अपने आप से पूछना आवश्यक होगा कि हम अपने दिल में ईश्वर और दूसरों के साथ संबंध में दया की कमी से पीड़ित तो नहीं है? अगर हमारे दिल में दया समाप्त हो गई है तो इस सत्य का सामना करना पड़ेगा और उन उपचारों का उपयोग करना होगा जिसे ईश्वर हमें कलासिया द्वारा देते हैं, प्रार्थना, उपवास और दान देना।

प्रार्थना हमें अपने और ईश्वर के बारे में सत्य के रास्ते पर वापस लाती है। उपवास से हमें बहुत से लोगों से जोड़ती है जो भूख की पीड़ा को सहते हैं और हमारा ध्यान दूसरों की ओर जाता है। दान अपने बच्चों के लाभ के लिए ईश्वर के विधान के साथ सहयोग करने का एक शानदार अवसर है। सत पापा ने कहा, “दान देने की प्रवृति को जीवन में बनाये रखने हेतु आप को प्रेरित करना चाहता हूँ जिसके द्वारा आप जरुरत मंद लोगों की ठोस सहायता करते हैं। आपका कार्य उन्हें भौतिक सहायता देने के अलावा, समाज में उनका स्वागत और सम्मान दिलाना होता है जिसके बिना कोई भी अच्छे भविष्य की आशा नहीं कर सकता है।”

संत पापा ने पुनः उनके उदार कार्यों की सराहना करते हुए उनके लिए और उनके परिजनों के लिए प्रार्थना और प्रोत्साहन की नवीनीकृत किया। वे अपने उदार कार्यों द्वारा कलीसिया के मिशन में सहभागी होते हैं और इस तरह संत पेत्रुस के उतराधिकारी को भी उदार भेंट देते हैं। संत पापा ने उनकी सहायता और आध्यात्मिक निकटता के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

संत पापा ने कहा कि यह तीर्थयात्रा आपको विश्वास को मजबूत करे। संगठन के सभी सदस्यों पर ईश्वर की आशीष हो। संत पापा ने युवाओं के लिए विशेष प्रार्थना करने की अपील की, उनके लिए आने वाले दिनों विशेष धर्मसभा का आयोजन किया जा रहा है कि वे पुरोहित और धर्मसंघीय जीवन के लिए प्रभु के आमंत्रण को स्वीकार कर सकें।


(Margaret Sumita Minj)

मानवीय चाह की गहरी आवाज को सुनने का प्रयत्न करें

In Church on February 17, 2018 at 2:26 pm


वाटिकन सिटी, शनिवार, 17 फरवरी 2018 (वाटिकन न्यूज़): “तृष्णा जिससे चाह उत्पन्न होती है, हमें मानवीय चाह की गहरी आवाज को सुनने का प्रयत्न करना चाहिए जो हमारे हृदय में ईश्वर की खोज है।” उक्त बात फादर जोश तोरेनतीनो मेनदोनका ने वाटिकन न्यूज़ को दिये एक साक्षात्कार में कही।

फादर जोश तोरेनतीनो मेनदोनका, संत पापा फ्राँसिस एवं परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय के कर्मचारियों की आध्यात्मिक साधना का संचालन करेंगे।

भावनात्मक एवं आध्यात्मिक रूप से आध्यात्मिक संचालन हेतु किस तरह तैयारी की जानी चाहिए?

इस सवाल का उत्तर देते हुए फादर जोश ने कहा कि एकान्त में ही ईश्वर हमारे मुख में उपयुक्त शब्द रख देते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने समुदाय के धर्मबंधुओं द्वारा प्रार्थनाओं, पत्रों एवं शुभकामनाओं के माध्यम से पूर्ण समर्थन मिला है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह उनके लिए पहला अवसर है जब वे विश्वव्यापी कलीसिया को सेवा प्रदान करेंगे।

चिंतन की विषय वस्तु “तृष्णा की प्रशंसा” रखी गयी है, क्यों तृष्णा?

फादर ने कहा कि प्यास से बढ़कर क्या है? प्यास के द्वारा चाह प्रवाहित होती है। हमें मानवीय चाह की गहरी आवाज को सुनना चाहिए जो हमारे हृदय में ईश्वर की खोज है। हमारी यह प्यास उस प्यास के समान है जिसका अनुभव येसु ने क्रूस पर से किया था। येसु ने किसी चीज की मांग नहीं की और न ही किसी चीज की शिकायत की किन्तु उन्होंने कहा, “मैं प्यासा हूँ।” इस शब्द में मानव जाति के लिए उनकी योजना है। हमारी प्यास में हमारे लिए अवसर है कि हम उस मानवता की खोज करें जो ईश्वर की योजना के अनुसार है।

उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में विस्मय करने की क्षमता में कमी आ जाती है क्योंकि हम ईश्वर की उस वाणी को सुन नहीं पाते हैं जिसको उन्होंने अब्राहम से कहा था, अपना देश छोड़कर उस देश की ओर प्रस्थान करो जिसे मैं दिखाऊँगा। आश्चर्य इस बात में है कि हम अपने आप से बाहर निकलें। यह एक निमंत्रण है जिसे ईश्वर हर दिन देते हैं।

विदित हो कि संत पापा फ्राँसिस अपने सभी कर्मचारियों के साथ 18 से 23 फरवरी तक, इटली के अरिच्चा आध्यात्मिक साधना केंद्र में चालीसा के अवसर पर आध्यात्मिक साधना में भाग लेंगे।


(Usha Tirkey)

आगामी सिनॉड की तैयारी में युवा

In Church on February 17, 2018 at 2:25 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 17 फरवरी 18 (रेई): विश्वभर से 300 युवा चुने गये हैं जो 2018 के अक्टूबर में होने वाली 15वीं धर्माध्यक्षीय धर्मसभा की तैयारी हेतु रोम आयेंगे। धर्माध्यक्षों के सिनॉड के महासचिव कार्डिनल लोरेंत्सो बालदीसेरी ने शुक्रवार को एक प्रेस सम्मेलन में बतलाया कि इतिहास में यह पहली बार है जब सिनॉड के पूर्व, तैयारी के मकसद से सभा का आयोजन किया गया है। यह सभा 19-24 मार्च को रखा गया है। तैयारी हेतु आयोजित इस सभा में भाग लेने वाले युवाओं का चुनाव विभिन्न धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों, धर्मसमाजों तथा वाटिकन परिषदों द्वारा की गयी हैं। वे विभिन्न जातीय एवं धार्मिक पृष्ठभूमि, जीवन के आयामों और जीवन के अनुभवों के बीच से चुने गये प्रतिनिधि होंगे। प्रतिनिधियों में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो मानव तस्करी के शिकार हुए थे।

उन्होंने बतलाया कि सभा इस बात को निश्चित करने के लिए आयोजित की गयी है कि सिनॉड के प्रतिभागियों की आवाज को सीधा प्राप्त किया जा सके। सभा का रिपोर्ट 25 मार्च को संत पापा को प्रस्तुत किये जायेंगे।

युवाओं की आवाज किस तरह सुनी जा सकती है?

सामाजिक संचार एक प्राथमिक माध्यम है जिसके द्वारा सिनॉड के धर्माध्यक्ष युवाओं को सुनना चाहते हैं। अब तक प्रश्नोत्तर के कुल 2,21,000 प्रत्युत्तर प्राप्त किये जा चुके हैं। फेसबुक के माध्यम से विभिन्न भाषाओं के दलों के साथ सम्पर्क करना भी संभव है।

शुक्रवार को आयोजित प्रेस सम्मेलन में दो युवा प्रतिभागी भी उपस्थित थे। उनमें से एक फिलिप्पो पास्सानतिनो ने सिनॉड में युवाओं को शामिल करने के लिए सामाजिक संचार के प्रयोग को रेखांकित किया। सिनॉड के फेसबुक, ट्वीटर एवं इंस्टग्राम अकाउण्ड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी सलाह और हमारे अंतर्ज्ञान के साथ हमने अन्य युवाओं से बात करने के लिए एक युवा परिप्रेक्ष्य की पेशकश की है। ऑनलाइन उपस्थिति का उद्देश्य पूरे विश्व में हमारे साथियों के साथ बातचीत करना और उनकी भागीदारी को सुविधाजनक बनाना है।

दूसरी युवा प्रतिभागी स्तेल्ला मरिल्लेन निशिमवे ने कहा, “मैं विश्व के सभी युवाओं को निमंत्रण देना चाहूँगी कि वे इस बहुमूल्य अवसर में भाग लें जिसको कलीसिया हमारी आवाज़ों को अधिक दूर तक पहुँचाने हेतु प्रदान कर रही है।”


(Usha Tirkey)

मध्य प्रदेश, पेंटेकोस्टल ख्रीस्तीयों को ‘बलपूर्वक धर्मपरिवर्तन’ के आरोप में 6 महीने जेल की सजा

In Church on February 17, 2018 at 2:23 pm

मुम्बई, शनिवार 17 फरवरी 2018 (रेई) : मध्य प्रदेश न्यायालय ने 13 पेंटेकोस्टल ख्रीस्तीयों को ‘बलपूर्वक धर्मपरिवर्तन’ के आरोप में 6 महीने जेल की सजा सुनायी। आरोपियो में बलू केसू और उनकी पत्नी भुरी भी शामिल हैं वे दोनों अंधे हैं। उनके बचाव वकील कमलेश पाटीदार ने उनके लिए सजा को कम करने की कोशिश की, लेकिन न्यायाधीशों ने नहीं मानी।

भारतीय ख्रीस्तीयों के ग्लोबल काउंसिल (जीसीआईसी) के अध्यक्ष साजन के. जोर्ज ने एशिया न्यूज को कहा कि उन्हें पेंटेकोस्टल आदिवासी ख्रीस्तीयों के लिए अफसोस है जिनमें दो नेत्रहीन भी शामिल हैं। वे हमारे धर्मनिरपेक्ष भारत में किए गए आरोपों के आधार पर उत्पीड़न, धमकी और गिरफ्तारी के शिकार हैं।

आरोपियों को जनवरी 2016 में गिरफ्तार किया गया था। जिनमें सात ख्रीस्तीय दैनिक मजदूर हैं। न्यायालय के मजिस्ट्रेट (भारत के दूसरे स्तर के आपराधिक अदालत) ने धार के जिले में, गांव के कुछ लोगों द्वारा दर्ज शिकायत को स्वीकार किया। लोगों ने पेंटेकोस्टल ख्रीस्तीयों पर धन का लालच देकर आदिवासियों को धर्मपरिवर्तन कराने की कोशिश का आरोप लगाया था।

शिकायत दर्ज करने वाले गोविंद ने पुलिस को बताया कि एक दिन उनके घर में पेंटेकोस्टल आये और कहने लगे कि पहले वे भी भिलाला में भील आदिवासी हिन्दू थे पर वे धर्मपरिवर्तन कर ख्रीस्तीय बन गये। अगर वे भी धर्मपरिवर्तन करें तो वे उनके लिए खाना, दवाई वगैरह देंगे और सरकार से भी खेत लेने के लिए मदद करेंगे।

साजन ने बताया कि मध्य प्रदेश की धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत धर्मपरिवर्तन चाहने वाले व्यक्ति को राज्य प्रशासन से अनुमति प्राप्त करने की आवश्यकता है। मध्य प्रदेश राज्य बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी, राइट विंग हिंदू राष्ट्रवादियों) द्वारा शासित किया जाता है। पेन्टेकोस्टल ख्रीस्तीयों को निर्विवाद आरोपों के साथ गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में आर्थिक लालच का इस्तेमाल किया गया था, जो गलत और निराधार है। यहाँ बहुसंख्यक समूहों का बोलबाला है और अल्पसंख्यक ख्रीस्तीयों पर आरोप लगाया गया है।

साजन ने कहा कि दैनिक मजदूरी करके जीविका चलाने वाले ख्रीस्तीयों द्वारा दूसरों को धन देकर ख्रीस्तीय बनाने की बात कहाँ तक न्यायसंगत हो सकती है। बलपूर्बक धर्मपरिवर्तन का आरोप लगाना ख्रीस्तीयों को उत्पीड़न करने का साधन बन गया है।


(Margaret Sumita Minj)

ख़तरों एवं सम्भावनाओं के प्रति सन्त पापा फ्राँसिस ने पुरोहितों को किया सचेत

In Church on February 16, 2018 at 2:29 pm

रोम, शुक्रवार, 16 फरवरी 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): रोम स्थित सन्त जॉन लातेरान महागिरजाघर में प्रभु येसु के दुखभोग के स्मरणार्थ मनाये जानेवाले चालीसा काल के उपलक्ष्य में पुरोहितों के साथ पारम्परिक मुलाकात के दौरान, गुरुवार को, सन्त पापा फ्राँसिस ने पौरोहित्य जीवन के ख़तरों एवं सम्भावनाओं के प्रति ध्यान आकर्षित कराया।

सन्त पापा फ्रांसिस ने पुरोहितों से कहा कि हर पुरोहित अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि पुरोहित को केवल अपने आस-पड़ोस की परिस्थितियों को ही नहीं देखना चाहिये अपितु पौरोहित्य जीवन को उचित रीति से निभाने के लिये अपने जीवन की शैली का ख़ुद निर्माण करना चाहिये।

इस बात के प्रति उन्होंने ध्यान आकर्षित कराया कि हालांकि पुरोहित को निर्धारित सीमाओं के भीतर रहकर काम करना होता है किन्तु इसके बावजूद उन्हें इन सीमाओं के साथ सम्वाद करते हुए जीवन यापन करना चाहिये।

युवा पुरोहितों को सन्त पापा ने परामर्श दिया कि वे अपने लिये एक मार्गदर्शक चुनें जो उन्हें उनका दिशा निर्देशन कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक काथलिक पुरोहित ब्रहम्चर्य के व्रत में बँधा है किन्तु ब्रहम्चर्य का वरण करने के लिये उसे एक मार्गदर्शक की नितान्त आवश्यकता है जो उसे उसकी उर्वरक अवधि में विवेक प्रदान कर सके।

अधेड़ पुरोहितों से सन्त पापा ने कहा कि वे स्वतः को घर के पिताओं के सदृश समझें जो अपने से छोटों का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि इस आयु में पुरोहितों को अपनी प्रेरिताई के लिये सतत प्रार्थना की ज़रूरत होती है ताकि वे संसार एवं शैतान के प्रलोभन में न पड़ें और अन्यों के लिये आदर्श बन सकें।

वृद्ध पुरोहितों को सम्बोधित कर सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि वृद्धावस्था विवेक एवं प्रज्ञा की अवस्था है और इस अवस्था के पुरोहितों का दायित्व है कि वे हर विश्वासी के प्रति स्वतः को उपलभ्य बनायें तथा सदैव सबकी मदद को तैयार रहें। सन्त पापा ने वृद्ध पुरोहितों के अनुभव से लाभान्वित होने का पुरोहितों को परामर्श दिया तथा वृद्ध पुरोहितों का आह्वान किया कि वे अपने अनुभवों के आधार, विशेष रूप से, युवा पुरोहितों की सहायता करें।


(Juliet Genevive Christopher)

16 फरवरी को सन्त पापा फ्राँसिस ने किया ट्वीट

In Church on February 16, 2018 at 2:26 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 16 फरवरी 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने 16 फरवरी को अपने ट्वीट पर कहा कि ख्रीस्तीय सन्देश सांसारिक धार्मिकता के समक्ष एक चुनौती हैं।

शुक्रवार, 16 फरवरी को प्रकाशित एक ट्वीट सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने लिखा: “प्रभु येसु ख्रीस्त का सन्देश तकलीफ़देह तथा हमें विचलित करता है इसलिये कि यह सांसारिक धार्मिकता को चुनौती देता तथा अन्तःकरणों को जागृत करता है।”


(Juliet Genevive Christopher)

बेनेडिक्ट 16 वें की बीमारी सम्बन्धी अफ़वाहों का वाटिकन ने किया खण्डन

In Church on February 16, 2018 at 2:24 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 16 फरवरी 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन ने उन अफ़वाहों का खण्डन किया है जिनके अनुसार सेवानिवृत्त सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें स्नायु सम्बन्धी अपकर्षक बीमारी से ग्रस्त हैं।

जर्मन मीडिया में यह बात प्रकाशित होने के बाद कि सेवानिवृत्त सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें, पैरालाईज़िग नर्व डिज़ीज़ यानि स्नायु तंत्रिका सम्बन्धित विकार से ग्रस्त हैं वाटिकन ने कहा है कि सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें केवल वृद्धावस्था से सम्बन्धित जोड़ों में दर्द आदि सामान्य शारीरिक विकारों से अधिक किसी भी बीमारी से ग्रस्त नहीं हैं।

गुरुवार को वाटिकन ने कहा कि सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें के स्वास्थ्य को लेकर हाल में मीडिया में प्रकाशित समाचार ग़लत हैं तथा इनका कोई आधार नहीं है।

14 फरवरी को जर्मन टैबलोईड में, सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें के भाई गेओर्ग राटसिंगर के हवाले से, सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें की बीमारी के विषय में एक समाचार प्रकाशित किया गया था जिसमें कहा गया था कि इसी बीमारी के चलते बेनेडिक्ट 16 वें प्रायः वील चेयर का उपयोग करते हैं। वाटिकन का जवाब इसी के प्रत्युत्तर में था।

सेवानिवृत्त सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने हाल में इताली समाचार पत्र कोर्रियेर्रे देल्ला सेरा को लिखे एक पत्र में कहा था कि वे अपने जीवन के अन्तिम चरण में हैं तथा हालांकि उनकी शारीरिक अवस्था जर्जर होती चली जा रही है वे सान्तवना एवं प्रेम से घिरे हैं।

07 फरवरी को प्रकाशित अपने पत्र में बेनेडिक्ट 16 वें ने लिखा था, “शारीरिक शक्ति में मन्द गिरवट के अन्त में मैं इतना ही कह सकता हूँ कि आन्तरिक रूप से मैं अपने अन्तिम धाम की तीर्थयात्रा पर हूँ।” उन्होंने लिखा, “कभी-कभी थका देनेवाली अपनी इस तीर्थयात्रा के अन्तिम चरण में इतने अधिक प्रेम और भलाई से घिरा रहना, जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था, मेरे लिये वास्तव में महान अनुग्रह एवं कृपा का विषय है।”

ग़ौरतलब है कि अपनी सेवानिवृत्ति के काल में सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें कोर्रियेर्रे देला सेरा के पत्रकार मास्सिमो फ्राँको के साथ पत्राचार करते रहे हैं।

नोये पोस्ट नामक जर्मन समाचार पत्र में सन्त पापा बेनेडिक्ट की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति पर प्रकाशित ख़बरों के बावजूद वाटिकन के वकतव्य में कहा गया, “सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें अप्रैल माह में 91 वर्ष के हो जायेंगे और वे किसी भी अन्य सामान्य वयोवृद्ध की तरह वृद्धावस्था का बोझ अनुभव करते हैं।”


(Juliet Genevive Christopher)

वाटिकन में धर्माध्यक्षों की सभा में शामिल होंगे सिक्ख एवं हिन्दू युवा

In Church on February 16, 2018 at 2:19 pm

नई दिल्ली, शुक्रवार, 16 फरवरी 2018 (ऊका समाचार): भारत के काथलिक धर्माध्यक्षों ने सिक्ख एवं हिन्दू सहित पाँच युवाओं का चयन किया है जो वाटिकन में आयोजित आगामी विश्व धर्माध्यक्षीय धर्मसभा की तैयारी हेतु आयोजित प्रारम्भिक बैठक में भाग लेंगे।

वाटिकन में अक्टूबर माह के लिये निर्धारित विश्व धर्माध्यक्षीय धर्मसभा की तैयारी हेतु आयोजित प्रारम्भिक बैठक 18 से 24 मार्च तक जारी रहेगी जिसमें विश्व के विभिन्न राष्ट्रों के 300 युवा भाग ले रहे हैं।

पंजाब के जालन्धर धर्मप्रान्त से इन्दरजीत सिंह उक्त बैठक में सिक्ख धर्म का प्रतिनिधित्व करेंगे जबकि महाराष्ट्र स्थित वसई धर्मप्रान्त से संदीप पाण्डे हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस बैठक में भारतीय काथलिक युवा अभियान के परसीवाल हॉल्ट, पौल जोस एवं शिल्पा भी भाग ले रहे हैं।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के युवा कार्यालय के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष फ्राँको मुलाक्काल ने बताया कि उक्त बैठक में सम्पन्न विचार-विमर्श की रिपोर्ट उन धर्माध्यक्षों के समक्ष प्रस्तुत की जायेगी जो अक्टूबर माह की विश्व धर्माध्यक्षीय धर्मसभा में भाग लेंगे।

सन्त पापा फ्राँसिस ने विश्व धर्माध्यक्षों की 15 वीं आम सभा को युवा लोगों पर केन्द्रित रखा है। यह धर्मसभा 03 से 28 अक्टूबर तक वाटिकन में आयोजित की गई है, इसका विषय हैः “विश्वास, और बुलाहट के विवेक के बीच युवा लोग”।

धर्माध्यक्ष फ्राँको मुलाक्काल ने कहा, “सन्त पापा फ्राँसिस युवाओं की बात सुनने के लिये आतुर हैं ताकि उनके साथ मिलकर आगे बढ़ सकें।”


(Juliet Genevive Christopher)

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