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Archive for the ‘Church’ Category

विश्वास और आशा पर संत पिता की धर्मशिक्षा

In Church on March 29, 2017 at 3:30 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार, 29 मार्च 2017 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस के प्रांगण में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को अपनी धर्मशिक्षा माला के दौरान संबोधित करते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात

संत पौलुस रोमियों के नाम लिखित अपने प्रेरितक पत्र में अब्राहम का जिक्र करते हैं जो न केवल विश्वास वरन आशा के भी पिता है, उनके संदर्भ में हमारे लिए पुनरुत्थान और जीवन का संदेश दिया जाता है।

संत पौलुस लिखते हैं, “अब्राहम ने ईश्वर पर विश्वास किया जो मृतकों को पुनर्जीवित करता है और जो नहीं है उसे भी अस्तित्व में लाता हैं।” (रोमि.4.17) वे आगे लिखते हैं, “यद्यपि वह जानते थे कि मेरा शरीर अशक्त हो गया है-उनकी अवस्था लगभग एक सौ वर्ष की थी और सारा बाँझ थी।” (रोमि.4.19) संत पापा ने कहा हम भी अपने जीवन में इसी विश्वास को जीने हेतु बुलाये गये हैं। ईश्वर जो अपने को अब्राहम के लिए बचाने वाले ईश्वर के रुप में व्यक्त करते हैं,वे हमारे जीवन के निराशा भरे क्षणों में आते और मृत्यु से हमें ऊपर उठाते हुए जीवन प्रदान करते हैं। अब्राहम के वृतांत में सारी चीज़ें ईश्वर के लिए एक संगीत के समान हो जाती हैं जो स्वतंत्र करते और सारी चीजों को उन्हें देते हैं, सारी चीज़ें भविष्यवाणी की तरह हो जाती हैं। ये सारी चीजें हमारे जीवन में भी होती हैं जहाँ हम येसु के पास्का रहस्य पर विश्वास करते और उसकी यादगारी मानते हैं। ईश्वर ने अपने पुत्र को मृतकों में से पुनर्जीवित किया है (रोमि. 4.24) जिससे हम उनके द्वारा मृत्यु से जीवन में प्रवेश कर सकें। अब्राहम सचमुच में बहुत से राष्ट्रों के पिता कहलाते हैं क्योंकि ईश्वर ने उनके द्वारा राष्ट्रों को स्थापित किया और उन्हें अपने बेटे में पाप और मृत्यु से बचाया है।                                                                                      संत पौलुस हमारे लिए यहाँ विश्वास और भरोसे की घनिष्ठता को स्पष्ट करना चाहते हैं। वे हमें कहते हैं कि अब्राहम ने निराशाजनक परिस्थिति में भी आशा रखकर विश्वास किया। हमारा विश्वास हमारी तर्क, पूर्वानुमान और मानव आश्वासन पर आधारित नहीं होता है वरन यह उस समय परिलक्षित होता है जब हम हताश और निराशाजनक परिस्थिति से हो कर गुजर रहे होते हैं जैसा कि अब्राहम के साथ हुआ। वह बूढ़ा हो चला था और उसकी पत्नी बाँझ थी। संत पापा ने कहा कि  हमारी आशा की सुदृढ़ता हमारे विश्वास में निहित है। यह हमारे शब्दों पर आधारित नहीं हैं लेकिन यह ईश्वर के वचनों पर है। अतः हम सभी अब्राहम के जीवन का अनुसरण करने हेतु बुलाये जाते हैं जो अपने को जीवन दाता ईश्वर को हाथों में सौंप देते हैं। “उसे पक्का विश्वास था कि ईश्वर ने जिस बात की प्रतिज्ञा की है वह उसके पूरा करने में समर्थ हैं।” (रोमि.4.21) अब्राहम के जीवन में हम एक ओर विरोधाभास की स्थिति तो दूसरी ओर उनकी आशा की पराकाष्ठा को देखते हैं। आशा जो मानवीय सोच और दृष्टिकोणों से असंभव और अनिश्चित लगती है लेकिन यह ईश्वर की प्रतिज्ञा में सबल बना रहती है। यह हमारा ध्यान पुनरुत्थान और जीवन की ओर करती है।

संत पापा ने भक्त समुदाय का आहृवान करते हुए कहा कि आज हम ईश्वर से इस कृपा हेतु निवेदन करें कि हम अपनी सुरक्षा और शक्ति पर नहीं वरन अब्राहम की संतान की भाँति उनकी प्रतिज्ञा के अनुरूप आशा पर अटल बने रहें। ऐसा करने से ही हमारे जीवन में ईश्वर की ज्योति का उदय होता है जिन्होंने अपने बेटे को मृतकों में से पुनर्जीवित किया है, जो हमें भी विश्वास के कारण उनके साथ एक बनना चाहते हैं।

इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्म शिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन करते हुए कहा, मैं अंग्रजी बोलने वाले तीर्थयात्रियों और विश्वासियों विशेष कर इंग्लैण्ड, स्कॉटलैण्ड, फिनलैण्ड, नार्व, फिलिपीन्स और संयुक्त राज्य अमेरीका के आये आप सभों का अभिवादन करता हूँ। संत पापा ने विशेष रूप से ब्रिटेन के ऑल-पाटी संसदीय समुदाय के कार्यों की सराहना करते हुए वाटिकन में उनका स्वागत किया। और अंत में उन्होंने सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को चालीसा काल की शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

 


(Dilip Sanjay Ekka)

संत पापा फ्राँसिस ने इराकी लोगों के लिए प्रार्थना की अपील को दुहराया

In Church on March 29, 2017 at 3:08 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 29 मार्च, 2017 (सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने इराक के लोगों के लिए प्रार्थना की मांग की है और मोसुल में एक जरूरी एवं महत्वपूर्ण दायित्व के रूप में नागरिक सुरक्षा बलों की पूरी संलग्नता की अपील की है।

संत पापा ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अंत में संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में उपस्थित इराकी पर्यवेक्षी बोर्ड के एक प्रतिनिधिमंडल से अपील की। अंतरधार्मिक दल के साथ अंतरधार्मिक वार्ता हेतु बनी परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल जॉन-लूईस पियेर्रे तौरान भी उपस्थित थे

संत पापा ने कहा, ″ ईराक देश की संपन्नता उसकी एकता में अनेकता, संघ में शक्ति और सद्भाव में समृद्धि के इस मोसाइक में निहित है।″ उन्होंने अंतर-धार्मिक सद्भाव की ओर प्रयासों को प्रोत्साहित किया ।

संत पापा ने कहा,″ मैं आप सभी को प्रार्थना करने के लिए आमंत्रित करता हूँ कि इराक में विभिन्न जातियों और धार्मिक समुदायों के बीच शांति, एकता, सुलह और सद्भाव में समृद्धि कायम हो सके।″

उन्होंने कहा, ″मेरा ध्यान पश्चिमी मोसुल के लोगों की ओर जाता है जो युद्ध में फँसे हैं और जिन्हें सुरक्षा की खोज में अपना स्थान छोड़ने हेतु मज़बूर होना पड़ रहा है। मैं अपनी प्रार्थना और आध्यात्मिक सामीप्य द्वारा उनकी पीड़ा में सहभागी हूँ और मैं नागरिक सुरक्षा बलों से पुनः अपील करता हूँ कि वे पूरी शक्ति से लोगों की सुरक्षा करें।″


(Margaret Sumita Minj)

बार्सिलोना में यूरोपीय संगोष्ठी प्रतिभागियों के लिए संत पापा फ्राँसिस का संदेश

In Church on March 29, 2017 at 3:07 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 29 मार्च, 2017 (सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने युवाओं को बढ़ावा देने हेतु यूरोपीय संगोष्ठी में भाग लेने वालों के लिए संदेश भेजा है जो 28 से 31 मार्च तक बार्सिलोना में ″ख्रीस्त के बुलावे का स्वेच्छापूर्वक जवाब देने हेतु युवाओं को बढ़ावा″ विषय पर यूरोपीय धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की परिषद द्वारा आयोजित की गई है।

संत पापा के नाम वाटकिन राज्य के सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन ने बार्सिलोना के महाधर्माध्यक्ष य़ुआन होसे ओमेला को संबोधित करते हुए संदेश में लिखा कि संत पापा बार्सिलोना के महाधर्माध्यक्ष युआन होसे ओमेला और युवाओं को बढ़ावा देने हेतु यूरोपीय संगोष्ठी में भाग लेने वालों का अभिवादन करते हैं। संत पापा उन्हें समसमाचार प्रचार की चुनौतियों पर विचार वमर्श करने के लिए युवाओं को साथ देने हेतु प्रोत्साहित करते हैं जिससे कि मसीही परिवार के सदस्य के रुप में युवा संवाद और मुलाकात के माध्यम से सभी क्षेत्र में सुसमाचार के आनंद के वाहक बन सकें।


(Margaret Sumita Minj)

परिवारों की 9वीं विश्व सभा के लिए संत पापा के पत्र को पेश करने हेतु प्रेस सम्मेलन

In Church on March 29, 2017 at 3:05 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार 29 मार्च, 2017 (सेदोक) : वाटिकन प्रेस ने सभी पत्रकारों को सूचित किया है कि गुरुवार, 30 मार्च 2017 को 11.00 बजे वाटिकन के विया देल्ला कोंचिलियाज्योने -54 के प्रेस कमरे में परिवारों की 9वीं विश्व सभा के लिए संत पापा के पत्र को पेश करने हेतु एक प्रेस सम्मेलन का आयोजन किया है।

परिवारों की 9वीं विश्व सभा 21 से 26 अगस्त 2018 को आयरलैंड के डबलिन में आयोजन किया जाएगा जिसकी विषय वस्तु है,‘परिवार का सुसमाचार : दुनिया के लिए खुशी’। परिवार एवं लोकधर्मियों की प्रेरिताई हेतु बनी परमधर्मपीठीय धर्मसंध के अध्यक्ष कार्डिनल केविन जोसेफ फार्रेल और डबलिन के महाधर्माध्यक्ष डायर्मायूड मार्टिन संत पापा के पत्र को पेश करेंगे। संत पापा का पत्र गुरुवार, 30 मार्च को 10.30 से पत्रकारों के लिए उपलब्ध होगा।


(Margaret Sumita Minj)

कर्नाटक काथलिक संगठन द्वारा कैदियों की प्रेरिताई हेतु स्वयंसेवकों के लिए अपील

In Church on March 29, 2017 at 3:04 pm

 

बैंगलोर, बुधवार 29 मार्च, 2017 (एशिया न्यूज) : ″हम आपको कैदियों की प्रेरिताई हेतु एक वर्ष के लिए स्वयंसेवक या हमारे समुदाय में पूर्णकालिक नौकरी के लिए आमंत्रित करते हैं।″ उक्त आमंत्रण भारत में कैदियों के लिए प्रेरिताई (पीएमआई) के कर्नाटक काथलिक संगठन द्वारा दी गई है जो पिछले 30 वर्षों से भारत के विभिन्न कारावासों में कैदियों को राहत पहुँचाने में संलग्न है।

इस संघ के राष्ट्रीय समन्वयक फादर सेबास्टियन वाडकुम्पदान ने कहा, ″ पूरे देश के 382 बंदी गृह में करीब 4 लाख लोग प्यार, आशा और मदद के बिना पड़े हुए हैं। पीएमआई कैदियों के पुनर्वास हेतु कोर्स का आयोजन करती है जिसमें उन्हें अंतरिक और अपने बात व्यवहारों में सुधार लाने का मौका मिलता है।

इस आमंत्रण की पहल पिछले वर्ष करुणा की जुबली में दया के कार्यों के तहत एक घटना से हुई। बीते वर्ष दिल्ली के तिहाड़ जेल में पवित्र बृहस्तपतिवार की धर्म विधि समारोह के दौरान फरीदाबाद के महाधर्माध्यक्ष कुरियाकोस ने 12 कैदियों के पैर धोये। धर्मविधि समाप्त होने के बाद एक कैदी वेदी के सामने आकर महाधर्माध्यक्ष से आग्रह किया, ″स्वामी जी, क्या आप मेरे पैर भी धो सकते है? ″

कैदी का अनुरोध महाधर्माध्यक्ष और वहाँ उपस्थित लोगों को आश्चर्य में डाल दिया था। पीएमआई के अध्यक्ष मोन्सिन्योर रेमीजियुस ने कहा,″ हमें 13वे कैदी की खोज में जाना चाहिए जो हमारी मदद और समर्थन को स्वीकार करने के लिए तैयार है।″

भारत के कैदियों के लिए प्रेरिताई (पीएमआई) के इच्छुक लोगों का पंजीकरण खुला है और 21 अप्रैल को समाप्त होगा। तथा उनके लिए 8 से 23 मई तक प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है।

इस प्रेरिताई के लिए जो दान देना चाहते हैं वे निम्न पते पर भेज सकते हैं।

Prison Ministry India, IFSC SIBL 0000416, Ac. No. 0416053000001419, South Indian Bank, Branch Koramangala, Bangalore-34, Pan AAATP No. 7433J.


(Margaret Sumita Minj)

25 हजार लोग शांति हेतु चालीसा पैदल तीर्थयात्रा में शामिल हुए

In Church on March 29, 2017 at 3:02 pm

मुम्बई, बुधवार 29 मार्च, 2017 (वी आर सेदोक) : मुम्बई में चालीसा की वार्षिक पैदल तीर्थयात्रा में करीब 25 हजार लोगों ने भाग लिया। जिनमें काथलिकों, अन्य ख्रीस्तीय समुदायों और अन्य धर्मावलम्बी भी शामिल हुए थे। मुम्बई के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ग्रेसियस ओसवाल्ड के नेतृत्व में रातभर की पैदल तीर्थयात्रा में बड़ी संख्या में पुरोहितों, धर्मसंघियों और लोकधर्मियों ने भाग लिया। शनिवार 25 मार्च रात को मुम्बई के क्रोस मैदान से तीर्थयात्रा शुरु होकर 20 किलोमीटर की यात्रा तय करके रविवार सुबह माऊट मेरी महागिरजाघर में पवित्र ख्रीस्तयाग समारोह के साथ सम्पन्न हुआ।

तीर्थयात्रा के शुरु में कार्डिनल ग्रेसियस ने माता मरिया की मथ्यस्ता से मुम्बई वासियों और पूरे भारतवासियों के लिए प्रार्थना की जिससे कि सभी ख्रीस्तीय सद्भाव और शांति में अपने विश्वास को जी सकें।

तीर्थयात्रा में 50 प्रतिशत संख्या लड़के लड़कियों की थी जो गोराल,  उत्तान,  वसाई, अगासी,  कोरलाई, रोहा आदि सुदूर गावों और महाराष्ट्र के उपनगरों से आये थे। कार्डिनल ग्रेसियस ने युवाओं के लिए विशेष प्रार्थना की, ″मरिया प्रज्ञा का सिहासन हमारे युवा लोगों का मार्गदर्शन कीजिए। उन्हें देश और कलीसिया की सेवा हेतु आगे बढ़ने में मदद कीजिए। हम युवाओं के लिए प्रार्थना करते हैं कि वे अपने विश्वास में दृढ़ बने रहें तथा उन्हें अपने बुलाहट को पहचानने की कृपा मिले।″  कार्डिनल ग्रेसियस के आशीर्वाद के साथ तीर्थयात्रा शुरू हुई।

कई अनुप्राणदाताओं की अगुवाई में प्रार्थना करते और गाना गाते हुए पैदल तीर्थयात्रियों ने 7 घंटे की यात्रा तय की। तीर्थ यात्रा के आयोजकों में से एक फ़ेलिक्‍स सेक्वेरा ने एशिया न्यूज को बताया कि जुलूस में मरिया शांति का महारानी,  क्रूस ढोते हुए येसु,  मरिया दुखियों की माता और तीर्थयात्रा के संरक्षक संत जोसेफ की प्रतिमाओं को फूलों और रोशनी से सजाया गय़ा था

मरिया सेवा संघ के अध्यक्ष और तीर्थयात्रा के मुख्य आयोजक फ्राँसिस फर्नानडीस ने एशिया न्यूज को बताया कि चालीसा काल में प्रतिवर्ष मार्च महीने में तीर्थयात्रा का आयोजन किया जाता है। सर्वप्रथम मरिया वर्ष के अवसर पर 1988 में कुछ भक्त समुदाय द्वारा चालीसा काल में शांति के लिए तीर्थयात्रा की गई। उसी के बाद से प्रतिवर्ष प्रतिभागियों की संख्या बढती जा रही है। इस पद यात्रा में सभी मजहब और किसी भी धर्म के लोग भक्तिपूर्वक भाग लेते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

नाइजीरिया: ख्रीस्तीयों के व्यवस्थित विलोपन से कलीसिया चिंतित है

In Church on March 29, 2017 at 3:00 pm

केफानचेन, बुधवार 29 मार्च, 2017 (वी आर सेदोक) : नाइजीरिया के केफानचेन धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष जोसेफ बागोबीरी ने देश के उत्तरी भाग में ख्रीस्तीय धर्म के व्यवस्थित विलोपन का मुकाबला करने के लिए सभी ख्रीस्तीय संप्रदायों को एक प्रभावी तालमेल बनाने का आहृवान किया है।

नाइजीरियन काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के एक प्रतिनिधिमंडल ने केफानचेन में धर्माध्यक्ष जोसेफ बागोबीरी से मुलाकात की और सहानुभूति प्रकट करते हुए कहा कि वे काथलिक विश्वासियों, दक्षिणी कटूना के ख्रीस्तीय समुदायों और हाल ही में फुलानी मवेशी चरवाहों पर हुए अत्याचार से अत्यंत दुःखी हैं जिसमें हजारों ख्रीस्तीयों की मौत हुई और लाखों नायरों की संपत्ति का विनाश हुआ।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व धर्माध्यक्षीय समिति के अध्यक्ष और जोस महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष इग्नासियुस ने किया। उनके साथ नाइजीरिया के काथलिक सचिवालय के महासचिव फादर राल्फ माडू, सचिवालय के उप-महासचिव फादर जकारिया सामयूमी, सचिवालय के सामाजिक संचार निदेशक फादर क्रिस एन. भी थे।

धर्माध्यक्ष बागोबीरी ने कहा, ″ चूंकि हमारे पास सरकार नहीं है जो हमारी दुर्दशा में मदद करे। अतः हमारे कष्टों को हमने सीधे ईश्वर के पास पहुँचाई है। सिर्फ वे ही हमारी वर्तमान स्थिति से हमें बचा सकते हैं। हमारी आशा उन्हीं में है और हमारी आशा बेकार नहीं होगी क्योंकि हमें पता है वे हमारी कठिनाईयों को जानते हैं। जिसप्रकार उन्होंने इस्राएल के लोगों को मिस्रियों के चंगुल से बाहर निकाला उसी प्रकार वे हमें भी बाहर निकालेंगे।″

धर्माध्यक्ष बागोबीरी ने खुलासा किया कि उत्तरी नाइजीरिया में ख्रीस्तीय धर्म के अस्तित्व के लिए चुनौतियां संरचनात्मक अन्यायों पर आधारित हैं जो संस्थागत बन गए हैं विशेषकर दक्षिणी कटूना में। अतः उन्होंने हिमायत की कि धर्मसतावट के समय विश्वासियों को अपने विश्वास में मजबूत रहने के लिए कलीसिया कुछ नये तरीकों को विकसित करे।

उन्होंने कहा, ″हमारी प्रार्थना है कि प्रभु हमें शक्ति और मार्ग प्रदर्शन करेंगें जिससे कि निरंतर हमलों और उत्पीड़न के बावजूद ख्रीस्तीय धर्म जीवित रह सके।”

धर्माध्यक्ष बागोबीरी की बातों को सुनकर महाधर्माध्यक्ष इग्नासियुस ने कहा, ″ सबसे पहले, हमें लगातार सरकार की व्यवस्था में अंतर्निहित संरचनात्मक अन्यायों को सामने लाना होगा और बारंबार इस बात की चर्चा करनी होगी।”

दूसरी बात कि हमें हमारे अधिकारों के लिए संवैधानिक साधनों का उपयोग करना होगा। इसलिए हमें अदालत में जाना बहुत जरुरी है हमें उन मानवाधिकार वकीलों से मदद लेना है जो न्याय के प्रति सहानुभूति रखते हैं इसमें कलीसिया को ही नहीं वरन पूरे देश के नागरिकों को सम्मिलित करना होगा।″


(Margaret Sumita Minj)

परमाणु हथियारों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन को संत पापा का संदेश

In Church on March 28, 2017 at 3:13 pm

 

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 28 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 28 मार्च को “परमाणु हथियारों के निषेध हेतु कानूनी रूप से बाध्यकारी साधन की बातचीत करने के लिए, उनके पूर्ण उन्मूलन की ओर बढ़ने″ हेतु संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन को, एक संदेश प्रेषित किया जिसकी सभा 27 से 31 मार्च तक न्यूयॉर्क में जारी है।

संत पापा के संदेश को वाटिकन के उप-विदेश सचिव कार्डिनल अंतोनियो कामिलेरी ने सम्मेलन में प्रस्तुत किया।

संदेश में कहा गया कि जैसा कि पहले के सम्मेलन में कहा गया था कि शांति हर झगड़े का समाधान एवं देशों के बीच मित्रवत् संबंध के विकास का आधार है। नीति और कानून जो आपसी विनाश के भय पर आधारित है और संभवता पूरे मानव जाति के विनाश पर, वह संयुक्त राष्ट्र की मनोभावना के बिलकुल विपरीत है। अतः हमें अप्रसार संधि को पूरी तरह लागू करते हुए बिना परमाणु हथियारों के विश्व के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए।

उन्होंने शांति और सुरक्षा के खतरों पर नजर रखने की सलाह दी जो खासकर, आतंकवाद एवं परमाणु हथियारों द्वारा बलिष्ठ होता है।

उन्होंने इस बात को भी उजागर किया कि शांति एवं स्थिरता गलत सुरक्षा पर आधारित नहीं होनी चाहिए, आपसी विनाश के भय पर अथवा मात्र सत्ता के एक संतुलन को बनाए रखने के लिए नहीं  बल्कि न्याय, समग्र मानव विकास, मानव के मौलिक अधिकारों के सम्मान, सृष्टि की सुरक्षा, सभी को सार्वजनिक जीवन में भाग लेने के अवसर, लोगों के बीच आपसी विश्वास, शांतिपूर्ण संस्थानों का समर्थन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की सुविधा, वार्ता एवं एकात्मता पर निर्मित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पृष्ठभूमि पर परमाणु हथियारों का पूर्ण उन्मूलन आवश्यक है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि सम्मेलन में परमाणु हथियारों के बिना एक दुनिया की दिशा में निर्णायक कदम उठाया जाएगा। हालांकि, यह एक जटिल और लंबी अवधि का लक्ष्य है किन्तु यह हमारी पहुँच से बाहर भी नहीं है।


(Usha Tirkey)

आलस्य एक बड़ा पाप

In Church on March 28, 2017 at 2:59 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 28 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि येसु में विश्वास करने का अर्थ है जीवन को वैसा ही स्वीकार करना जैसा वह वास्तव में है तथा उसे आनन्द के साथ एवं बिना शिकायत किये स्वीकार करना, उसे आलस के बदसूरत पाप रूपी लकवा से दूर रखना।

वाटिकन के प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में मंगलवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा ने आज के सुसमाचार पाठ पर चिंतन किया जहाँ येसु एक लकवाग्रस्त व्यक्ति को चंगा करते हैं।

एक व्यक्ति 38 साल से बीमार था तथा येरूसालेम में बेथेस्दा नामक एक कुंड के किनारे पड़ा रहता था। उसके अगल-बगल कई रोगी थे। कहा जाता था कि प्रभु का दूत समय समय पर कुंड में उतरकर पानी हिला देता था पानी के लहराने के बाद जो सबस पहले कुंड में उतरता था चाहे वह किसी भी रोग से पीड़ित क्यों न हो चंगा हो जाता था। येसु ने उस व्यक्ति को देखकर कहा, ″क्या तुम चंगा होना चाहते हो?″

संत पापा ने कहा, ″यह कितना सुखद है येसु हमसे सदा यही प्रश्न करते हैं, क्या तुम चंगा होना चाहते हो? क्या तुम खुश रहना चाहते हो? क्या तुम अपने जीवन का विकास करना चाहते हो?   क्या तुम पवित्र आत्मा से भर जाना चाहते हो? क्या तुम ठीक होना चाहते हो? येसु के प्रश्न पर कुंड के पास उपस्थित सभी रोगियों ने हाँ में जवाब दिया होगा किन्तु केवल इसी व्यक्ति ने कहा कि मेरे पास कोई नहीं है जो मुझे जलाशय में उतार दे। मेरे उतरने से पहले ही मुझसे पहले कोई न कोई उसमें उतर जाता है। संत पापा ने कहा कि यह उत्तर एक शिकायत थी, प्रभु मुझे देखिये मेरा जीवन कितना बदसूरत और गलत है। सभी आगे जा सकते हैं, चंगाई पा सकते हैं किन्तु मैं 38 सालों तक कोशिश ही कर रहा हूँ।

संत पापा ने कहा कि यह व्यक्ति उस पेड़ के समान है जो नदी के किनारे लगाया गया था जिसका जिक्र हम बाईबिल के स्तोत्र ग्रंथ में पाते हैं किन्तु इसकी जड़ें सूख गयी थीं वे पानी तक नहीं पहुँच पातीं थीं और न ही स्वस्थ जल ग्रहण कर सकती थीं।

संत पापा ने कहा कि यह मनोभाव निश्चय ही शिकायत का मनोभव है जिसमें दूसरे जो अपने से पहले जाते देख दोषी माना जाता है। यह एक कुरूप पाप है, आलस्य का पाप है।

यह व्यक्ति लकवा के कारण अधिक नहीं किन्तु आलस्य के कारण बीमार था। वह निरुत्साह का जीवन जी रहा था। उसके जीने का कोई उद्देश्य नहीं था। वह आनन्द की अनुभूति को खो चुका था। संत पापा ने कहा कि यह पाप है एक गंभीर बीमारी है। ऐसे लोग भले ही आराम से जीते हुए दिखाई देते हैं किन्तु उनके अंदर बहुत अधिक कड़वाहट है।

दूसरी ओर येसु रोगी व्यक्ति को नहीं फटकारते किन्तु कहते हैं- उठो और अपनी चारपाई उठाकर चलो।

संत पापा ने कहा कि प्रभु आज हम प्रत्येक से कह रहे हैं उठो, अपना जीवन जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार करो, चाहे वह सुन्दर हो अथवा कुरूप, उसे लेकर आगे बढ़ो।

उन्होंने विश्वासियों से प्रश्न किया, ″क्या आप ठीक हो जाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु कहते हैं जो लोग प्यासे हैं पानी के पास आयें, मुफ्त में पानी प्राप्त कर आनन्द से अपनी प्यास बुझायें और जब हम येसु को जवाब देंगे, जी हाँ, प्रभु मैं चंगा होना चाहता हूँ मुझे उठने में सहायता दीजिए, तब हमें मालूम होगा कि मुक्ति का आनन्द क्या है।


(Usha Tirkey)

पुण्य सप्ताह एवं पास्का के अवसर पर संत पापा के कार्यक्रमों की सूची

In Church on March 28, 2017 at 2:57 pm

 

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 28 मार्च 2017 (वीआर सेदोक): वाटिकन ने पुण्य सप्ताह एवं पास्का के अवसर पर संत पापा फ्राँसिस के कार्यक्रमों की विस्तृत सूची प्रकाशित कर दी है।

धर्मविधि हेतु परमधर्मपीठीय कार्यालय से मंगलवार को निर्गत एक सूचना पत्र में कहा गया है कि 9 अप्रैल खजूर रविवार को, संत पेत्रुस महागिरजाघर में संत पापा जैतून एवं खजूर की डालियों के साथ शोभायात्रा का नेतृत्व करेंगे जो प्रातः 10 बजे आरम्भ होगा। उसके बाद वे समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे। खजूर रविवार को 32वाँ विश्व युवा दिवस भी मनाया जाएगा, जिसकी विषयवस्तु है, ″प्रभु ने मेरे लिए महान कार्य किये हैं।″

पुण्य बृहस्पतिवार 13 अप्रैल को प्रातः 9.30 बजे वे संत पेत्रुस महागिरजाघर में कारिज्मा मिस्सा का अनुष्ठान करेंगे जिसमें वे पवित्र तेलों पर आशीष प्रदान करेंगे।

पुण्य शुक्रवार 14 अप्रैल को संत पापा प्रभु के दुखभोग की धर्मविधि को संत पेत्रुस महागिरजाघर में संध्या 5 बजे सम्पन्न करेंगे। उसी दिन संध्या 9.15 बजे रोम स्थित ऐतिहासिक स्थल कोलोसेयुम में परम्परागत क्रूस रास्ता की प्रार्थना का संचालन करेंगे और अंत में विश्वासियों को आशीष प्रदान करेंगे।

पुण्य शनिवार 15 अप्रैल को वे संध्या 8.30 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर में पास्का जागरण मिस्सा अर्पित करेंगे। जहाँ वे नई अग्नि को आशीष देंगे तथा मोमबत्ती का जुलूस करेंगे। पवित्र मिस्सा के दौरान बपतिस्मा संस्कार प्रदान करेंगे।

अंततः पास्का रविवार 16 अप्रैल को 10.00 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में संत पापा प्रभु के पुनरूत्थान के अवसर पर समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे एवं उरबी एत ओरबी संदेश के साथ महागिरजाघर की बालकनी से आशीर्वाद प्रदान करेंगे।

 


(Usha Tirkey)

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