Vatican Radio HIndi

Archive for the ‘Church’ Category

संत पापा करेंगे प्रवासियों के लिए ख्रीस्तयाग का अनुष्ठान

In Church on July 5, 2018 at 1:34 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 5 जुलाई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस शुक्रवार 6 जुलाई को पूर्वाहन 11 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर में आप्रवासियों के लिए ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे।

वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक एवं वाटिकन प्रवक्ता ग्रेक बर्क ने 4 जुलाई को एक प्रेस विज्ञाप्ति जारी कर कहा, “ख्रीस्तयाग संत पापा फ्राँसिस की लम्पेदूसा यात्रा की पाँचवीं सालगिराह (8 जुलाई 2013) की स्मृति में आयोजित की गयी है। यह मृतकों, जीवित बचे लोगों एवं उनकी मदद करने वाले लोगों के लिए प्रार्थना का अवसर होगा।”

उम्मीद की जा रही है कि ख्रीस्तयाग समारोह में आप्रवासी एवं उनकी मदद करने वाले करीब 200 लोग भाग लेंगे। समारोह में भाग लेने के लिए टिकट की व्यवस्था है जो उन्हें मुफ्त में प्रदान की जायेगी।


(Usha Tirkey)

संत पापा ने यूक्रेन के ग्रीक काथलिक कलीसिया के शीर्ष से मुलाकात की

In Church on July 5, 2018 at 1:31 pm


वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 5 जुलाई 18 (वाटिकन न्यूज)˸ संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के प्रेरितिक आवास संत मर्था में महाधर्माध्यक्ष स्वियातोसलाव शेवकूक से मुलाकात की।

संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 3 जुलाई को यूक्रेन के ग्रीक काथलिक कलीसिया (यूजीसीसी) के शीर्ष, महाधर्माध्यक्ष स्वियातोसलाव शेवकूक से रूस-यूक्रेन में ख्रीस्तीय धर्म के पदार्पण की 1030वीं वर्षगाँठ के अवसर पर मुलाकात की।

मुलाकात के दौरान महाधर्माध्यक्ष ने यूजीसीसी की अन्य कलीसियाओं के साथ संबंध की ओर ध्यान आकृष्ट किया, जिन्होंने संत वोलोडिमर द्वारा बपतिस्मा प्राप्त किया है।” यूक्रेन में ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के बारे बतलाते हुए उन्होंने विभाजन की दुःखद वास्तविकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर दिया कि यद्यपि यूजीसीसी विभाजन से ऊपर उठने के प्रयास को सकारात्मक नजरिये से देखता है तथापि इस तरह के मामलों को ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के लिए आंतरिक मानता है, अतः वह इस तरह के प्रयासों में कभी हस्तक्षेप नहीं करता और न ही भाग लेता है।

उन्होंने बतलाया कि कलीसिया में ख्रीस्त की एकता लाने के लिए यूजीसीसी एक पद्धति को अपनाता है और वह पद्धति है “यूनियाटिस्म”। उन्होंने गौर किया कि पूर्वी काथलिक कलीसियाएँ एकता की ओर अग्रसर होने के लिए कोई साधन नहीं हैं बल्कि वे स्वयं ख्रीस्त की कलीसिया के जीवित सदस्य हैं जिन्हें अस्तित्व में रहने एवं मिशन तथा सुसमाचार प्रचार के कार्य में भाग लेने का अधिकार है।

महाधर्माध्यक्ष ने बतलाया कि मुलाकात में संत पापा ने यूजीसीसी के शहीदों के लिए उन्हें धन्यवाद दिया जिन्हें ख्रीस्तीय विश्वास एवं साक्ष्य के कारण शहीद होना पड़ा और जिन्होंने प्रेरित संत पेत्रुस के उतराधिकारी के विशेष मिशन ख्रीस्तीय एकता के लिए अपनी सेवाएँ अर्पित की थी। संत पापा ने स्वीकार किया कि यूजीसीसी के विरूद्ध “यूनियाटिस्म” का कोई भी आरोप निराधार है। वाटिकन प्रेस वक्तव्य के अनुसार संत पापा ने यूक्रेन के प्रति भी अपना आध्यात्मिक सामीप्य प्रदान किया जो अपने इतिहास में एक दुखद दौर से होकर गुजर रहा है।

मुलाकात में, एक अन्य खास मुद्दे पर बात की गयी। वह मुद्दा है पोलैंड-यूक्रेन मेल- मिलाप। संत पापा ने आगामी ख्रीस्तीय एकता सभा जो बारी में होने वाली है उसमें भाग लेने पर जोर दिया। महाधर्माध्यक्ष स्वियातोसलाव ने अगले साल यूरोप में पूर्वी काथलिक धर्माध्यक्षों की सभा हेतु प्रस्ताव रखा।


(Usha Tirkey)

कलीसिया द्वारा “ऑर्डर ऑफ वर्जिंन” पर पुनःविचार

In Church on July 5, 2018 at 1:29 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 5 जुलाई 2018 (वाटिकन न्यूज)˸ धर्मसंघी एवं धर्मसमाजियों की प्रेरिताई के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ ने प्राचीन धर्मसंघ “ऑर्डर ऑफ वर्जिंस” के पुनःप्रवर्तन की 50वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में “एक्लेसिये स्पोनसाए इमागो” (कलीसिया एक दूल्हिन का प्रतीक) शीर्षक पर एक दिशानिर्देश प्रकाशित किया है।

प्राचीन धर्मसंघ “ऑर्डर ऑफ वर्जिंस” का, संत पापा पौल षष्ठम द्वारा पुनःप्रवर्तन का सन् 2020 ई. में 50 साल पूरा होगा। समर्पित कुँवारियों की संख्या इस समय करीब 5,000 है तथा वे विश्व के विभिन्न हिस्सों में रहते हैं। समर्पित जीवन को प्रोत्साहन देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल जॉ ब्राज़ दी अविज ने कहा कि नया निर्देश एक्लेसिए स्पोनसाये इमागो पहला दस्तावेज है जिसके द्वारा इस तरह के समर्पित जीवन के अनुशासन को सम्बोधित किया गया है। यह पुनःजागृत बुलाहट में रूचि दिखाने की प्रतिक्रिया है और यह कलीसिया के जीवन में इसके स्थान, आवश्यक आत्म आवलोकन एवं प्रशिक्षण पर प्रकाश डालता है।

इतिहास

दस्तावेज का विमोचन करते हुए धर्मसंघी एवं धर्मसमाजियों की प्रेरिताई के लिए गठित परमधर्मपीठीय परिषद के सचिव महाधर्माध्यक्ष जोश रोड्रिगस कारबाल्लो ने ऑर्डर ऑफ वर्जिंस के इतिहास का साराँश प्रस्तुत किया। धर्मसंघ की उत्पति नारियों के उस सुसमाचारी साक्ष्य से हुई है जिन्होंने प्रभु का अनुसरण करने के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया।

यह कलीसिया की संरचना में इस तरह स्थापित था कि इसे धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, उपयाजकों एवं कुवाँरियों के समान ऑर्डर का दर्जा दिया गया। बाद में, मध्ययुग में इसे मठवास में विलय कर दिया गया।

संत पापा पौल षष्ठम ने सन् 1970 ई. में ऑर्डर ऑफ वर्जिंस को बहाल कर कलीसिया को जीवन का वह रूप दिया जो उसे ख्रीस्त की दुल्हिन के रूप में उसी के स्वभाव का प्रतिबिंब प्रदान करता है।

महाधर्माध्यक्ष कारबाल्लो ने कहा कि एक्लेसिए स्पोनसाये इमागो के निर्माण में धर्माध्यक्षों, समर्पित कुँवारियोँ और विशेषज्ञों का सहयोग है। इस प्रकार के समर्पित जीवन की समृद्धि एवं विशिष्ठता पर प्रकाश डालने के लिए प्रत्येक ने अपना योगदान दिया है।

ऑर्डर ऑफ वर्जिन क्या है?

दस्तावेज का पहला भाग ऑर्डर ऑफ वर्जिंन्स की बुलाहट और उसके साक्ष्य की छानबीन करता है। यह स्पष्ट करता है कि बुलाहट सर्वप्रथम मरियम के पदचिन्हों पर आधारित है जो ब्रह्मचार्य, निर्धनता एवं आज्ञापालन के जीवन को अपनाता और साथ-साथ प्रार्थना, पश्चाताप और दया के कार्यों के लिए समर्पित है। एक महत्वपूर्ण कारक यह है कि “कुँवारेपन के लिए कारिज्म प्रत्येक समर्पित धर्मबहन के कारिज्म के अनुरूप है जिसमें रचनात्मक स्वतंत्रता है।

ऑर्डर ऑफ वर्जिंस को किस तरह से व्यवस्थित किया गया है

एक्लेसिए स्पोनसाये इमागो के दूसरे भाग में समर्पित कुँवारियों, उनके एकल अथवा परिवारों, दलों या धर्माध्यक्षों द्वारा धर्मप्रांतीय स्तर पर व्यवस्थित जीवन की व्यख्या करता है।

धर्माध्यक्ष कारबाल्लो ने कहा कि “एक खास कलीसिया की पुत्री के रूप में प्रत्येक समर्पित धर्मबहन अपने इतिहास को साझा करती है…इसके आध्यात्मिक उन्नति को सहयोग देती है तथा अपनी क्षमताओं द्वारा इसके मिशन में भाग लेती है। इस प्रकार एकाकी के जीवन के लिए बुलायी गयी एक समर्पित धर्मबहन सामुदायिक जीवन को अपनाती है।

किस प्रकार एक महिला समर्पित कुँवारी बनती है?

महाधर्माध्यक्ष कारबाल्लों ने बतलाया कि दस्तावेज का तीसरा भाग ऑर्डर ऑफ वर्जिंन के आत्मजाँच एवं प्रशिक्षण की व्याख्या करता है। इसमें एक महिला के समर्पित होने के पूर्व एवं बाद में एक धर्माध्यक्ष की भूमिका को रेखांकित करता है।

ऑर्डर ऑफ वर्जिंस की 50वीं वर्षगाँठ

आगामी सन् 2020 ई. में ऑर्डर ऑफ वर्जिंस के बहाल की 50वीं वर्षगाँठ के साथ, महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि उनकी उम्मीद है कि इस प्राचीन समर्पित जीवन शैली पर पुनः विचार के द्वारा पवित्रता के एक सच्चे आकर्षण एवं मांग को प्रस्तुत कर पायेगा।

कार्डिनल डी अविज की उम्मीद है कि वर्षगाँठ समारोह विश्वभर की समर्पित कुँवारियों को रोम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सभा में भाग लेने हेतु एकत्रित करेगा।


(Usha Tirkey)

ईश्वर की आवाज सुनें

In Church on July 5, 2018 at 1:23 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 5 जुलाई 2018 (रेई)˸ हर व्यक्ति के जीवन में ईश्वर की एक विशेष योजना होती है और जब वह उस योजना को पहचानकर उसके अनुसार जीने का प्रयास करता है तब वह अपने जीवन में सफल, शांति और आनन्द का एहसास करता है क्योंकि यही उसके जीवन का लक्ष्य है। उस योजना को पहचानने के लिए हमें ईश्वर की आवाज को पहचानने की आवश्यकता है किन्तु भाग-दौड़ एवं व्यस्तता भरे जीवन में, कई प्रकार की चिंताओं से घिरकर, हम ईश्वर की आवाज को सुन नहीं पाते हैं। ईश्वर की आवाज सुनने के लिए हमें मौन की आवश्यकता है और यह मौन तभी संभव है जब हम सारी चिंताओं को प्रभु को समर्पित कर, प्रार्थना के लिए समय निकालते हैं।

संत पापा ने 5 जुलाई को एक ट्वीट प्रेषित कर ईश्वर की आवाज सुनने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने संदेश में लिखा, “क्या हम अपने हृदय को शांत करना एवं ईश्वर की आवाज सुनना जानते हैं”?

संत पापा के इस संदेश को नौ अन्य भाषाओं में प्रेषित किया गया।


(Usha Tirkey)

कंधमाल हिंसा की 10वीं सालगिराह मेल-मिलाप का अवसर

In Church on July 5, 2018 at 1:21 pm

कटक भुनेश्वर, बृहस्पतिवार, 5 जुलाई 2018 (एशियान्यूज)˸ कटक भुनेश्वर के महाधर्माध्यक्ष जॉन बरवा ने सभी लोगों को निमंत्रण दिया है कि वे 25 अगस्त को समारोही ख्रीस्तयाग में भाग लें।

उड़ीसा के कंधमाल जिले में ख्रीस्तीय विरोधी हिंसक आक्रमण का इस वर्ष दसवीं सालगिराह मनाया जाएगा। महाधर्माध्यक्ष बारवा ने कहा कि यह शांति और मेल-मिलाप को सभी लोगों के बीच सुदृढ़ करने का एक अवसर है।

एशियान्यूज से बातें करते हुए उन्होंने कहा कि दस साल पहले जिला में भारत के इतिहास में ख्रीस्तीय विरोधी एक भयावाह हिंसा को अंजाम दिया गया था किन्तु अब ख्रीस्तीय अन्य सभी धर्मों के लोगों के साथ सौहार्द पूर्वक रहते हैं। यही कारण है कि हम इस अवसर को मेल-मिलाप एवं साझा करने तथा शांति एवं कृपा के लिए प्रार्थना और विचार-विमर्श करने के रूप में मनाना चाहते हैं। प्रभु हम प्रत्येक को अपनी आशीष प्रदान करे।

25 अगस्त को उड़ीसा के ख्रीस्तीयों पर किये गये अत्याचार की यादगारी में महाधर्मप्रांत ने “आभार, मेल-मिलाप एवं कृपा” के उद्देश्य से समारोही ख्रीस्तयाग का आयोजन किया है।

महाधर्माध्यक्ष ने बतलाया कि इस सभा के उद्देश्य को बढ़ावा देने के लिए 2 जुलाई को उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक तथा अन्य सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की गयी जहाँ काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेनहास भी उपस्थित थे। महाधर्माध्यक्ष ने मुख्यमंत्री एवं सभी सरकारी अधिकारियों को उनकी सद्इच्छा के लिए उनकी सराहना की तथा कहा कि वे हिंसा, घृणा एवं विभाजन का समर्थन नहीं करते हैं।

अगस्त 2008 को हिन्दु धर्मगुरू सरस्वती लक्ष्मानंदा की हत्या का आरोप लगाकर उनके अनुयायियों ने ख्रीस्तीयों पर भयंकर हिंसक आक्रमण किया था। इस आक्रमण के कारण करीब 56 हजार ख्रीस्तीय घर छोड़कर भागने के लिए मजबूर हो गये थे, 5600 घरों और 415 गाँवों पर आग लगाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया गया था। सरकारी आँकड़ों के अनुसार 38 लोग मारे डाले गये थे तथा दो महिलाओं के साथ बलत्कार किया गया था। कई लोग घायल हो गये थ और अनेक लोग हमेशा के लिए अपंग हो गये। कलीसिया एवं सामाजिक कार्याकर्ताओं की रिपोर्ट अनुसार 300 गिरजाघरों को ध्वस्त किया गया उनके साथ कई कॉन्वेंट, स्कूल, हॉस्टेल और कल्याणकारी संस्थाओं को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। इस घटना में कुल 91 लोगों की मौत हो गयी थी।

महाधर्माध्यक्ष बारवा ने कहा कि अत्याचार के बावजूद हम ईश्वर के प्रति सचमुच आभारी हैं क्योंकि विश्वासियों की संख्या बढ़ रही है और ख्रीस्तीयों का विश्वास मजबूत हो गया है। हम एक साथ भाई-बहन की तरह जीते हैं स्थानीय प्रशासकों के साथ हमारा अच्छा संबंध है। कंधमाल जिला भारत की कलीसिया के विश्वास, आशा एवं धीरज का प्रतीक बन गया है जो शहीदों एवं पीड़ा के शिकार लोगों के बलिदान द्वारा प्रचुर आशीष का पात्र बन गया है।

महाधर्माध्यक्ष बारवा ने कहा कि सरकारी अधिकारियों के साथ मुलाकात सात निर्दोष ख्रीस्तीयों की पीड़ा की याद दिलाने का अवसर भी रहा, जिन्हें 10 सालों तक जेल में रखा गया है। उन्होंने बतलाया कि उन्हें आश्वासन दिया गया कि वे इस मामले का ख्याल रखेंगे और ईश्वर से प्रार्थना करेंगे ताकि वे जल्द ही उन्हें न्याय और शांति प्रदान करें।


(Usha Tirkey)

अकेलापन का अनुभव करने वाले पुरोहितों को मदद मिले,संत पापा

In Church on July 4, 2018 at 2:49 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 4 जुलाई 2018 (वाटिकन न्यूज) : विश्व प्रार्थना नेटवर्क द्वारा प्रसारित जुलाई महीने के लिए संत पापा फ्राँसिस का वीडियो संदेश पुरोहितों की थकान पर केंद्रित है। संत पापा पुरोहितों के लिए प्रार्थना करने को कहते हैं : “हम एक साथ प्रार्थना करें क्योंकि जो पुरोहित कठिनाई में जीवन बिताते है और अपने प्रेरितिक कार्यों में अकेलापन का अनुभव करते हैं वे ईश्वर से सांत्वना और अपने भाइयों के साथ दोस्ती और अपनापन महसूस कर सकें।”

लोग अपने चरवाहों से प्यार करते हैं

संत पापा ने कहा “पुरोहित, अपने गुणों और कमियों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवा देते हैं और इतनी सारी चुनौतियों का सामना करते हुए वे निराशा में नहीं रह सकते, इन क्षणों में यह याद रखना अच्छा है कि लोग अपने पुरोहितों से प्यार करते हैं, उन्हें उनकी आवश्यकता होती है और उनपर वे भरोसा करते हैं।”


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा जलवायु संकट को हल करने के लिए ‘नैतिक बल’, अल गोरे

In Church on July 4, 2018 at 2:47 pm


वाटिकन सिटी, बुधवार 4 जुलाई 2018 (वाटिकन न्यूज) : नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और पूर्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति, अल गोरे, पर्यावरण के दुनिया के सबसे प्रमुख रक्षकों में से एक हैं। उनकी 2007 की वृत्तचित्र फिल्म, “एक असुविधाजनक सत्य”, ने ऑस्कर जीता और उनकी जलवायु रियलिटी प्रोजेक्ट ने हाल ही में बर्लिन में एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन की मेजबानी की।

वेटिकन न्यूज के साथ इस विशेष साक्षात्कार में, अल गोरे ने पोप फ्रांसिस के प्रेरितिक उदबोधन, “लाउदातो सी” की प्रशंसा की और “स्थिरता क्रांति” की मांग की।

वे पर्यावरण संरक्षण के लिए दुनिया के सबसे मजबूत आवाज हैं। इस “हरे रंग की लड़ाई” में उनके जुनून के बारे बूछे जाने पर उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि जीवन का उद्देश्य ईश्वर की महिमा करना है और यदि हम ईश्वर की सृष्टि की उपेक्षा और विनाश करते हैं, तो यह हमारे जीवन जीने के तरीके के साथ बेहद असंगत है। इसके अलावा, जलवायु संकट अब मानवता के अस्तित्व की सबसे बड़ी चुनौती है और दुनिया के जीवविज्ञानी के मुताबिक, केवल मानवता ही नहीं है जो जोखिम में है परंतु इस धरती को साझा करने वाली सभी जीवित प्रजातियों में से आधा हिस्सा इस शताब्दी के दौरान विलुप्त होने का खतरा है। ईश्वर ने जब नूह को अपने जहाज में हर प्रजातियों के जोड़े को इकट्ठा करने के निर्देश दिया जिससे कि उन्हें अपने साथ जीवित रख सके, तो मेरा मानना है कि निर्देश भी हमारे लिए है।

वर्तमान में, हम 110 मिलियन टन गर्मी-फंसे हुए मानव निर्मित ग्लोबल वार्मिंग प्रदूषण के लिए खुले सीवर के रूप में हमारे ग्रह के आस-पास के वातावरण के पतले खोल का उपयोग कर रहे हैं। उस अतिरिक्त गर्मी ऊर्जा के परिणाम स्पष्ट हैं: मजबूत तूफान, अधिक विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन, गहरे और लंबे सूखे, फसल विफलताओं, कई क्षेत्रों में पानी की कमी, जंगल की आग को मजबूत करना, बीमारी फैलाना, बर्फ पिघलना, और समुद्र स्तर की वृद्धि – विश्व महासागर के अम्लीकरण में वृद्धि इत्यादि।

अतः यहां वास्तव में कोई विकल्प नहीं है। हमें जलवायु संकट को हल करना है। जैसा कि संत पापा फ्रांसिस ने कहा है, “यदि हम सृष्टि को नष्ट करते हैं, तो सृष्टि हमें नष्ट कर देगी।”

मैं संकट के समाधान में योगदान देने के प्रयासों में अपने हर औंस ऊर्जा को डालने में सक्षम होने के लिए भाग्यशाली रहा हूँ और मैं दुनिया के लाखों कार्यकर्ताओं और नेताओं से प्रेरित हूँ जो स्वच्छ ऊर्जा विकास के लिए स्थिरता अंदोलन चला रहे हैं। इन कार्यकर्ताओं और नेताओं से असली जुनून और शक्ति मुझे मिलती है।

संत पापा फ्राँसिस का नेतृत्व दुनिया भर में हम सभी के लिए एक प्रेरणा रहा है, खासकर जब जलवायु संकट को हल करने के लिए अपनी बातों को सामने रखते और बार बार याद दिलाते हैं। मैं उनकी नैतिक शक्ति की स्पष्टता के लिए आभारी हूँ। वे हमारे बीच सबसे कमजोर लोगों के बारे में सबसे शक्तिशाली तरीके से भी बोलते है और यह समझने में मदद करते है कि जलवायु संकट से कैसे विशिष्ट रूप से गरीब प्रभावित होते हैं, विशेष रूप से, उनका प्रेरितिक उदबोधन “लाउदातो सी”।  पेरिस समझौते से पहले जलवायु संकट को संबोधित करने के लिए प्रतिबद्ध करने के लिए दुनिया की अगुवाई में काथलिक कलीसिया ने एक महत्वपूर्ण कदम चिह्नित किया है।


(Margaret Sumita Minj)

अमेरिकी धर्माध्यक्ष : आप्रवासन संकट में ‘कोई दुर्जन’ नहीं है

In Church on July 4, 2018 at 2:45 pm


वाटिकन सिटी, बुधवार 4 जुलाई 2018 (वाटिकन न्यूज) : अमेरिकी धर्माध्यक्षों की एक टीम ने मेक्सिको की सीमा पर अमेरिका में प्रवेश करने वाले प्रवासियों को सेवाएं प्रदान करने वाले कर्मियों के केंद्रों और संरचनाओं का दो दिनों तक दौरा किया। सोमवार को उन्होंने काथलिक चारिटी के रियो ग्रांडे वाल्ले के मानवतावादी सहायता केंद्र की यात्रा की। अगले दिन उन्होंने बच्चों के लिए सरकार संचालित पुनर्वास केंद्र, ‘कासा पाद्रे’ सेंटर का दौरा किया। वहां उन्होंने करीब 250 बच्चों से मुलाकात की और उनके साथ पवित्र यूखारिस्त समारोह मनाया। बाद में उन्होंने एक ऐसे केंद्र का दौरा किया जहां प्रवासियों के प्रवेश करने के लिए कागजी कार्यवाही शुरु की जाती है।

‘कोई दुर्जन’ नहीं

अमेरिकी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल डैनियल डिनार्डो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह प्रेरितिक दौरा था। दो दिनों का दौरा अच्छा और कभी-कभी दर्दनाक भी था। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें चुनौतियां मिली हैं, उन्हें हर साइट पर लोगों का सहयोग मिला और सभी कर्मचारी उदार और सहायक थे।

स्थानों का दौरा करने के बाद उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि वहाँ कोई ‘कोई दुर्जन’ नहीं है। जिन बच्चों को उनके परिवारों से अलग किया गया था, उनके माता-पिता को फिर से मिलाना होगा। जो पहले ही शुरू हो चुका है …और इसके लिए हमें खुशी है…लेकिन यह निश्चित रूप से अभी तक समाप्त नहीं हुआ है, और जटिलताएं आ सकती हैं, लेकिन जितना जल्दी हो सके बच्चों को अपने परिवार से मिलाना बहुत जरुरी है।

बच्चों को मिलाने की प्राथमिकता

अमेरिकी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के उपाध्यक्ष और लॉस एंजिल्स के महाधर्माध्यक्ष होसे गोमेज़ ने कहा कि उनके लिए बच्चों को अकेला देखना मुश्किल था। “वहां उनके साथ रहना और उनकी मदद करना और उन्हें कुछ आशा देना हमारे लिए एक विशेष अनुग्रह था”। महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि पवित्र मिस्सा के दौरान, उन्होंने ईश्वर की उपस्थिति पर बात की और बच्चों को एक-दूसरे की मदद करने के लिए प्रोत्साहित किया। 2 दिवसीय यात्रा के बाद उनकी प्राथमिक चिंता भी कार्डिनल डिनार्डो की तरह ही थी: “मेरा पहला विचार परिवारों को मिलाने की तात्कालिक आवश्यकता ….इन बच्चों को अपने माता-पिता के साथ मिलाना बहुत महत्वपूर्ण है। ” महाधर्माध्यक्ष ने यह कहकर समाप्त किया कि वे परिवारों के एकीकरण में काथलिक चीरिटी और यूएससीसीबी के प्रयासों को देखकर काफी प्रभावित हुए।


(Margaret Sumita Minj)

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख द्वारा बांग्लादेश में रोहिंग्या शिविरों का दौरा

In Church on July 4, 2018 at 2:43 pm


कुतुपालोंग,बुधवार 4 जुलाई 2018 (उकान) : संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो ग्युटेरेस ने बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों की यात्रा के दौरान अत्याचारों के “अकल्पनीय” घटनाओं को सुना और रोहिंग्यों के खिलाफ “अपराध” के लिए म्यांमार को जिम्मेदार ठहराया।

गुटेरेस ने सताए गए अल्पसंख्यक मुस्लिमों की स्थिति को “मानवतावादी और मानवाधिकारों के दुःस्वप्न” के रूप में वर्णित किया। पिछले साल म्यांमार सेना के हिंसा अभियान से बचने वाले लोगों के अस्थायी आश्रयों के दौरे से पहले संयुक्त राष्ट्र ने जातीय सफाई की तुलना की थी।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने 2 जुलाई को भीड़ वाले शिविरों में रहने वाले शरणार्थियों से बलात्कार और हिंसा की गवाही सुनी, जहां लगभग दस लाख लोग – ज्यादातर रोहिंग्यों ने म्यांमार में हिंसा की लगातार वारदातों की वजह से शरण मांगी है।

“यह शायद मानव अधिकारों के सबसे दुखद, ऐतिहासिक और  व्यवस्थित उल्लंघनों में से एक है,” गुटेरेस ने दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी शिविर कुतुपालोंग में संवाददाताओं से कहा।

“कभी-कभी लोग भूल जाते हैं कि जो हुआ उसके लिए कौन जिम्मेदार है। तो आइए स्पष्ट करें कि जिम्मेदारी कहां है – यह म्यांमार में है। “लेकिन यह सच है कि पूरा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इसे रोकने में सक्षम नहीं था।”

बांग्लादेश में रोहिंग्या के करीब 700,000 लोग हिंसा से बचने के लिए पिछले अगस्त में सीमा पार भाग गए थे।

उन्हें म्यांमार में कई लोगों द्वारा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। राखीन राज्य को अपनी मातृभूमि कहे जाने के बावजूद उन्हें बांग्लादेश से आये अवैध आप्रवासियों का नाम देकर हटा दिया गया था।

विश्व बैंक के प्रमुख श्री जिम योंग किम के साथ संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरेस ने रोहिंग्या शिविरों की पहली यात्रा की। उन्होंने “हत्या और बलात्कार के अकल्पनीय आपबीती घटनाओं” को सुना।

गुटेरेस ने ट्विटर पर लिखा, “संकट के पैमाने और आज मैंने जो पीड़ा देखी है, उसके लिए मैं तैयार नहीं था।”

“मैंने रोहिंग्या शरणार्थियों से उनकी दिल को दहलाने वाली आपबीती घटनाओं को सुना जो हमेशा मेरे साथ रहेंगे।”

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने मई के आरंभ में म्यांमार और राखीन राज्य का दौरा किया, शरणार्थियों से मुलाकात की जिन्होंने म्यांमार की सेना के हाथों मारने वाले हत्याओं, बलात्कार और गांवों का विस्तृत विवरण दिया।

म्यांमार ने संयुक्त राज्य अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा जातीय सफाई के आरोपों का जोरदार खंडन किया है।

बांग्लादेश और म्यांमार रोहिंग्या को वापस लेने के लिए नवंबर में सहमत हुए लेकिन प्रक्रिया बंद हो गई।


(Margaret Sumita Minj)

भारत में नकली खबरें हत्याओं के लिए जिम्मेदार

In Church on July 4, 2018 at 2:41 pm


भोपाल, बुधवार 4 जुलाई 2018 (उकान) : “सोशल मीडिया के माध्यम से नकली खबरों के फैलाव को रोकने के लिए भारत को कड़े कानूनों की जरूरत है। 1जुलाई को महाराष्ट्र के पश्चिमी राज्य में बाल-अपहरणकर्ताओं के संदेह पर पांच लोगों को मार डाला गया।” यह बात काथलिक कलीसिया के एक अधिकारी ने कही।

धूल जिले के एक गांव में उन्हें मार डाला गया था, क्योंकि स्मार्टफोन पर अफवाहें फैली थीं कि बाल तस्करी के गिरोह इस क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे थे।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि हाल के महीनों में नकली खबरों के चलते इसी तरह की घटनाओं में 25 लोगों की मौत हो गई है, जो कुछ इलाकों में बाल तस्करी, लुटेरों और यौन श्रमिकों के सक्रिय होने की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है।

सामाजिक संचार के लिए भारतीय धर्माध्यक्षीय कार्यालय के अध्यक्ष एवं पश्चिम बंगाल के बारूइपुर के धर्माध्यक्ष साल्वाडोर लोबो ने कहा,”यह सभी सीमाओं और औचित्य को पार कर रहा है।”  वे खतरे की जांच करने के लिए एक कड़ा कानून चाहते हैं।

“नकली खबरों की जांच के लिए कुछ कड़े नियमों को स्थापित करने की जरूरत है जो इस तरह की क्रूरता और मृत्यु को अंजाम देती है।”

नवीनतम घटना में मारे गए पांच लोग खानाबदोश जनजाति के सदस्य थे। सभी पीड़ित सैकरी इलाके के रेनपाडा गांव से थे वे साप्ताहिक बाजार में आए थे तभी उनपर हमला किया गया।

उनमें से एक ने एक युवा लड़की से बात करने की कोशिश की और इसपर ग्रामीणों ने संदेह किया कि वे बाल तस्करी के लोग थे।

पुलिस ने दंगों के लिए 35 लोगों को गिरफतार किया है।

तमिलनाडु, असम, त्रिपुरा और तेलंगना राज्यों में नकली खबरों से जुड़ी हत्याओं की सूचना मिली है।

धर्माध्यक्ष लोबो ने उकान्यूज को बताया, “यह एक बहुत ही खतरनाक स्थिति है।” “जब तक सरकार इस खतरे को नियंत्रण करने के लिए आपातकालीन कदम नहीं उठाती, तब तक यह अराजकता पैदा करेगी और कई निर्दोष लोगों की जान चली जाएगी।

जून माह में छह लोगों की हत्या हुई। 28 जून को, बच्चों को अपहरण करने की कोशिश के संदेह पर के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा के विभिन्न जिलों में तीन लोगों को मार डाला गया था। 18 जून को उत्तर प्रदेश में गाय सतर्कता की एक भीड़ ने एक मुस्लिम की हत्या कर दी थी। पूर्वी असम में, 8 जून को दो लोगों को झूठी अफवाहों के कारण मार डाला गया था कि वे बच्चों के अपहरणकर्ता थे।

भारतीय धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के पूर्व प्रवक्ता फादर बाबू जोसेफ ने कहा, “यह सोशल मीडिया का सरासर दुरुपयोग है और इसे राज्य को कड़ाई के साथ जांचना चाहिए।”


(Margaret Sumita Minj)

%d bloggers like this: