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Archive for the ‘Environment’ Category

होलिका दहन के लिए वृक्षों को काटे जाने की निन्दा

In Church, Environment on March 9, 2012 at 12:01 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

पटना 8 मार्च 2012 (ऊकान) पटना में येसु धर्मसमाजी पर्यावरणविद फादर रोबर्ट अथिकल ने होली पर्व के अवसर पर होलिका दहन कार्यक्रम के लिए वृक्षों और डालियों को काटे जाने की निन्दा की है।

बिहार की राजधानी पटना स्थित वृक्ष प्रेमी विद्यार्थियों के समूह ” तरूमित्र ” अर्थात वृक्षों के मित्र नामक पर्यावरण संरक्षण समूह के संस्थापक निदेशक ने कहा कि हम लोगों से अपील करते रहे हैं कि वे वृक्षों या उनकी डालियों को नहीं काटें।

बिहार में होली या होलिका दहन अर्थात बुराई पर भलाई की जीत दिखाने वाले अनुष्ठान के लिए बड़ी मात्रा में वृक्षों या डालियों को काटा जाता है। वन कानूनों का उल्लंघन कर जंगलों से वृक्षों या लकड़ियों की कटाई करते हैं तथा वन विभाग और इसके अधिकारी इन घटनाओं को नजरअंदाज करते हैं।

जंगलों और पर्यावरण की रक्षा के लिए समर्पित 58 वर्षीय पुरोहित फादर अथिकल ने कहा कि लोगों के ऐसे व्यवहारों से हरे भरे वृक्षों को गंभीर क्षति पहुंचती है। इस साल सबसे अधिक नुकसान पटना, गया और मुजफ्फरपुर जिसों में हुआ है।

उन्होंने कहा कि वृक्ष न तो पुकार सकते हैं न ही न्याय माँग सकते हैं। हमारे स्वयंसेवी विद्यार्थी लोगों से आग्रह करते रहे हैं कि वृक्षों के बदले में कूड़ा करकट को जलायें। उन्होंने कहा कि लोगों को शिक्षित किये जाने की जरूरत है कि इस पर्व को मनाते समय वृक्षों को लक्ष्य न बनायें।

पर्यावरण कार्यकर्त्ता अशोक घोष ने फादर अथिकल के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि लोगों को वृक्षों या उनकी टहनियों को काटने का अधिकार नहीं है। होलिका दहन के लिए लकड़ियों को जलाया जाना कभी भी हमारी सदियों प्राचीन परम्परा का अंग नहीं रहा है।

होलिका संकेत है जलाने का विशिष्ट रूप से अपशिष्ट या कचरे पदार्थों को जलाने का न कि हरे भरे वृक्षों को। यह सही समय है कि लोग पर्यावरण को बचाने के लिए अपनी मानसिकता बदलें।

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वाटिकन सिटीः वाटिकन द्वारा नियुक्त समिति ने जलवायु परिवर्तन की दी चेतावनी

In Environment on May 12, 2011 at 6:28 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफ़र

वाटिकन सिटी, 11 मई सन् 2011 (एपी): वाटिकन द्वारा नियुक्त वैज्ञानिकों की एक समिति ने जलवायु परिवर्तन पर चेतावनी देते हुए
इस बात के प्रति सचेत कराया है कि पृथ्वी गर्म हो रही है, ग्लेशियर अर्थात
हिमनदियाँ पिघल रही हैं तथा क्षति को कम करने के लिये ठोस उपायों की नितान्त
आवश्यकता है।

 वैज्ञानिकों ने कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन, मीथेन में कटौती तथा अन्य
प्रदूषणकारी तत्वों को तत्काल कम करना अनिवार्य बताया तथा पहाडी हिमनदियों के
बेहतर अवलोकन का आह्वान किया ताकि परिवर्तनों पर नज़र रखी जा सके।

विज्ञान सम्बन्धी परमधर्मपीठीय अकादमी के तत्वाधान में वैज्ञानिकों एवं जलवायु परिवर्तन
विशेषज्ञों की बैठक विगत माह वाटिकन में सम्पन्न हुई थी जिसकी अन्तिम रिपोर्ट पाँच
मई को जारी की गई तथा मंगलवार नौ मई को वाटिकन की वेब साईट पर प्रकाशित की गई।
रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने कहा, “इस तथ्य के प्रति सचेत रहते हुए कि
हम सब एक ही घर में निवास करते हैं, सभी देशों से हम अपील करते हैं कि
वे, बिना विलम्ब, समुदायों एवं पर्यावरण निकायों पर
पड़नेवाले, जलवायु परिवर्तन के कारणों एवं परिणामों को रोकने हेतु
उचित नीतियाँ विकसित कर उन्हें लागू करें।”

रिपोर्ट में कहा गया “हम यह सुनिश्चित करने के लिये प्रतिबद्ध हैं कि इस ग्रह के सभी
निवासियों को अपनी दैनिक रोटी मिले, सांस लेने के लिये स्वच्छ वायु
मिले और पीने के लिये स्वच्छ जल मिले। यदि हम न्याय एवं शांति चाहते हैं तो हमें
उस धरती की रक्षा करनी होगी जिससे हमारी जीविका चलती है।”

वाटिकन के प्रेस प्रवक्ता फादर फेदरीको लोमबारदी ने कहा कि उक्त रिपोर्ट महत्वपूर्ण है तथापि
यह काथलिक कलीसिया की प्रमुख शिक्षाओं का अंग नहीं है तथा स्वतंत्र वैज्ञानिकों के
निष्कर्षों को प्रतिबिम्बित करती है। उन्होंने कहा तथापि उक्त रिपोर्ट एक
महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान है तथा सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें द्वारा उनके
विश्व पत्रों एवं सार्वजनिक बयानों में व्यक्त चिन्ताओं को आवाज़ देती है।

Source: http://www.radiovaticana.org/in1/index.asp

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