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Archive for the ‘Journey’ Category

सान्तियागो दे क्यूबाः क्यूबा के लिये सन्त पापा ने की प्रार्थना

In Church, Journey on March 28, 2012 at 10:04 pm

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

सान्तियागो दे क्यूबा, 28 मार्च सन् 2012 (सेदोक): क्यूबा के सान्तियागो दे क्यूबा नगर स्थित एल कोब्रे की “वेरजन दे ला कारिदाद” मरियम तीर्थ पर सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने क्यूबा के लोगों के लिये प्रार्थना की।

काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें बुधवार को मेक्सिको तथा क्यूबा में अपनी छः दिवसीय प्रेरितिक यात्रा समाप्त कर रहे हैं।

गुरुवार, 29 मार्च को वे पुनः रोम लौट रहे हैं। ग़ौरतलब है कि रोम तथा क्यूबा में सात घण्टों का समयान्तर है इसीलिये इस रिपोर्ट में हम मंगलवार को सम्पन्न सन्त पापा के कार्यक्रमों के प्रमुख अंशों को श्रोताओं की सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं।

मंगलवार प्रातः सान्तियागो दे क्यूबा स्थित सान बाज़िलियो गुरुकुल के प्रार्थनालय में सन्त पापा ने ख्रीस्तयाग अर्पित किया तथा गुरुकुल के धर्माधिकारियों एवं छात्रों से विदा ले एल कोब्रे की “वेरजन दे ला कारिदाद” मरियम तीर्थ के लिये निकल पड़े।

मरियम तीर्थ के प्रवेश द्वार पर पहुँचते ही 15 बच्चों की एक गायक मण्डली ने सन्त पापा का स्वागत किया। अपनी पापामोबिल पारदर्शी मोटर गाड़ी से सन्त पापा ने तीर्थस्थल के चारों ओर भ्रमण किया तथा यहाँ एकत्र सैकड़ों श्रद्धालुओं को दर्शन दिये।

एल कोब्रे की “वेरजन दे ला कारिदाद” मरियम तीर्थ पर सान्तियागो दे क्यूबा के महाधर्माध्यक्ष दियोनिसियो गारसिया इबानेज़ ने भक्त समुदाय के बीच सन्त पापा का स्वागत किया तथा कहा कि सन्त पापा की उपस्थिति ने लोगों में देश के सुधार हेतु परिवर्तनों की आशा को मज़बूत किया है। क्यूबा तथा उसकी जनता के प्रति सन्त पापा की उत्कंठा के लिये महाधर्माध्यक्ष ने हार्दिक आभार व्यक्त किया।

एल कोब्रे की “वेरजन दे ला कारिदाद” मरियम तीर्थ के महागिरजाघर के भीतर क्यूबा के काथलिक धर्माध्यक्ष तथा सन्त पापा के साथ गये धर्माधिकारी पहले से ही उपस्थित थे।

सन्त पापा के महागिरजाघर में प्रवेश करते ही गायन मंडली के ऑरगन ने “प्रणाम मरिया” गीत की धुन बजाई। सन्त पापा वेदी की ओर आगे बढ़े और फिर मरियम की प्रतिमा के आगे उन्होंने मोमबत्ती जलाई तथा घुटने टेककर कुछ देर मौन प्रार्थना की।

प्रार्थना के बाद सन्त पापा ने महागिरजाघर के झरोखे से प्राँगण में उपस्थित भक्त समुदाय को सम्बोधित किया और कहा कि एल कोब्रे नगर में मरियम की उपस्थिति क्यूबा के सभी नागरिकों के लिये स्वर्ग से प्राप्त वरदान है।

इस अवसर पर उन्होंने विशेष रूप से अफ्रीका से लाये गये गुलामों के वंशजों का स्मरण किया जो क्यूबा की कुल जनसंख्या का तीस प्रतिशत हैं। साथ ही उन्होंने पड़ोसी देश हेयटी के लोगों को भी याद किया जो दो वर्ष पहले आये भूकम्प के परिणामों से अब भी उबर नहीं पाये हैं।

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Pope in Mexico

In Church, Journey on March 28, 2012 at 6:34 am

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पियात्सा माचेओ में आयोजित ख्रीस्तयाग के दौरान संत पापा का प्रवचन

In Church, Journey on March 28, 2012 at 6:17 am

जोसेफ कमल बाड़ा

पियात्सा माचेओ सांतियागो दे क्यूबा 27 मार्च 2012 (सेदोक) संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने 26 मार्च को सांतियागो दे क्यूबा के पियात्सा माचेओ में आयोजित समारोही ख्रीस्तयाग के दौरान प्रवचन करते हुए कहा कि वे ईश्वर को धन्यवाद देते हैं जिन्होंने उन्हें यहाँ आने तथा बहुप्रतीक्षित यात्रा को सम्पन्न करने की अनुमति प्रदान की।

संत पापा ने कहा कि इस देश की प्रेरितिक यात्रा करते समय यह पहला ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए उन्हें खुशी है जो इस भूमि में मरियम प्रतिमा की खोज की 400 वीं वर्षगाँठ के अवसर पर क्यूबा की संरक्षिका अवर लेडी ओफ चारिटी ऑफ एल कोब्रे के सम्मान में मरियम जुबिली के तहत अर्पित की जा रही है। वे जुबिली की तैयारी, विशेष रूप से आध्यात्मिक तैयारी के लिए किये गये बलिदान और समर्पण को नहीं भूल सकते हैं।

इस द्वीप के हर भाग में मरिया प्रतिमा ले जायी गयी और जिस तत्परता से लोगों ने इसका स्वागत किया गया इसने उनके दिल को गहरे रूप से स्पर्श किया है।

क्यूबा के चर्च में इन महत्वपूर्ण घटनाओं का विशेष आकर्षण है क्योंकि आज पूरे विश्व में स्वर्गदूत गाब्रियल द्वारा कुँवारी माता मरियम को प्रभु के जन्म का संदेश दिये जाने का पर्व मनाया गया।

संत पापा ने कहा कि ईशपुत्र का देहधारण करना ईसाई विश्वास का केन्द्रीय रहस्य है और इसमें मरियम को केन्द्रीय स्थान प्राप्त है।

देहधारण के रहस्य पर मनन चिंतन करते हुए हम आश्चर्य कृतज्ञता और प्रेम भाव से भर जाते हैं कि इस दुनिया में आते हुए ईश्वर चाहते हैं कि अपनी एक सृष्टि की स्वतंत्र स्वीकृति पर निर्भर हों। स्वर्गदूत को कुँवारी द्वारा यह जवाब दिये जाने के क्षण से ही देखिए मैं प्रभु की दासी हूँ आपक कथन मुझ में पूरा हो जाये।

पिता ईश्वर के अनन्त शब्द ने मानवीय अस्तित्व धारण किया। यह देखना ह्दय को स्पर्श करता है कि ईश्वर न केवल मानव की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें मानव की जरूरत है। और ईशपुत्र का पार्थिव जीवन के आरम्भ होने में पिता ईश्वर की मुक्तिदायी योजना में ख्रीस्त और मरिया की स्वीकृति है। ईश्वर के प्रति यह आज्ञाकारिता ही दुनिया के द्वार को सत्य और मुक्ति के लिए खोलती है।

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्त के रहस्य में अपनी अद्वितीय भूमिका के द्वारा कुँवारी माता मरियम कलीसिया के लिए माडल और उदाहरण को प्रस्तुत करती है। वे जानते हैं कि क्यूबावासी प्रतिदिन बहुत मेहनत, साहस और आत्म बलिदान द्वारा देश की ठोस परिस्थितियों में काम करते हैं और इतिहास के इस क्षण में कलीसिया अपना सही चेहरा बेहतर तरीके से प्रस्तुत करेगी जो मानवजाति को ईश्वर के समीप लाती है।

संत पापा ने कहा कि इस दुनिया में ईश वचन का प्रसार करने तथा येसु के शरीर द्वारा प्रत्येक जन को पोषण प्रदान करके लिए वे सबको प्रोत्साहन देते हैं।

पास्का पर्व समीप आ रहा है, बिना किसी डर या संदेह के येसु के क्रूस पथ पर चलने के लिए हम मनसूबा बांधें। धैर्य और विश्वासपूर्वक हर विरोध का सामना करें। प्रभु लोगों के उदारतापूर्ण समर्पण के लिए बहुत फल प्रदान करेंगे।

संत पापा ने कहा कि देहधारण का रहस्य जिसमें ईश्वर हमें अपने समीप लाते हैं और हमें हर मानव जीवन की अतुलनीय प्रतिष्ठा को दिखाते हैं।

उन्होंने सृष्टि के आरम्भ से ही विवाह पर आधारित मानव परिवार को समाज की बुनियादी ईकाई और यथार्थ घरेलू चर्च बनने का मिशन सौंपा है। वे दम्पतियो से कलीसिया के लिए ख्रीस्त के प्यार का सच्चा और प्रत्यक्ष चिह्न बनने का आह्वान करते हैं।

क्यूबा को आपकी निष्ठा, एकता और मानव जीवन का स्वागत करने की क्षमता का साक्ष्य की जरूरत है।

संत पापा ने कहा कि अवर लेडी ऑफ चारिटी ऑफ एल कोब्रे की दृष्टि में अपने विश्वास को नवीकृत करने की वे विश्वासियों से अपील करते हैं ताकि वे ख्रीस्त में और ख्रीस्त के लिए जीवन जीयें, शांति, क्षमा और समझदारी के साथ नवीन और खुला समाज बनाने का प्रयास करें जो ईश्वर की भलाई को बेहतर तरीके से प्रतिबिम्बित करता है।

लेओन में आयोजित यूखरिस्तीय समारोह में संत पापा का प्रवचन

In Church, Journey on March 27, 2012 at 9:43 pm

जस्टिन तिर्की, ये.स.

मेरे अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, मुझे खुशी है कि मैं आज आप लोगों के बीच हूँ। मैं आप लोगों का ध्यान आज के भजन स्तोत्र की ओर खींचना चाहता हूँ जिसमें हमने कहा, “हे ईश्वर मेरे ह्रदय को पवित्र बना।” यह हमें आमंत्रित करता है हम पास्का रहस्य अर्थात् येसु के दुःखभोग,मृत्यु और पुनरुत्थान को समझने के लिये अपने को तैयार करें।

स्तोत्र भजन हमें इस बात के लिये भी आमंत्रित करता है कि हम अपने ह्रदय में झाँक कर देखें विशेष करके ऐसे समय में जब मेक्सिको और पूरे लैटिन अमेरिका में दुःख किन्तु आशा का माहौल है।
ईश्वर की चुनी हुई इस्राएली प्रजा में भी पवित्र, ईमानदार, नम्र और ईश्वर को ग्राह्य होने की इच्छा तब तीव्र हो गयी थी जब उसने अपने आपको पाप और बुराइयों के बीच ऐसा फँसा पाया जहाँ से निकल पाना बिल्कुल असंभव था। ऐसे समय में ईश्वर की चुनी हुई प्रजा के समक्ष असहनीय, अंधकारमय आशाविहीन स्थिति से निकलने के लिये ईश्वर की दया पर पूर्ण भरोसा और आशा करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। और ऐसे ही समय में उन्होंने यह अनुभव किया कि ईश्वर की महत्ती दया अपार है जो पापी की मृत्यु नहीं, पर उसका पश्चात्ताप और जीवन चाहती है। (एजेकियेल 33,11) Read the rest of this entry »

लेओनः क्यूबा में सान्तियागो दे क्यूबा तथा हवाना सन्त पापा की यात्रा के पड़ाव

In Church, Journey on March 27, 2012 at 9:43 pm

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

लेओनः 26 मार्च सन् 2012 (सेदोक): मेक्सिको की तीन दिवसीय प्रेरितिक यात्रा सफलतापूर्वक समाप्त कर सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें सोमवार सन्ध्या क्यूबा के लिये रवाना हो रहे हैं। यहाँ सान्तियागो दे क्यूबा तथा हवाना शहरों का दौरा कर 28 मार्च को वे पुनः रोम लौट रहे हैं।

क्यूबा में एक ओर सामान्य जनता सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें के आगमन की आतुरता से प्रतीक्षा कर रही है वहीं दूसरी ओर उनकी इस यात्रा को राजनैतिक रंग भी चढ़ाया जा रहा है।

क्यूबा की एक मात्र साम्यवादी पार्टी द्वारा गठित सरकार ने कभी भी धर्म को अवैध घोषित नहीं किया किन्तु सन् 1959 ई. में फिदेल कास्त्रो के सत्ता में आ जाने के बाद से सैकड़ों पुरोहितों को देश से निष्कासित कर दिया तथा काथलिक स्कूलों में धर्मशिक्षा पर प्रतिबन्ध लगा दिये थे।

धन्य सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय के प्रयासों के परिणामस्वरूप नब्बे के दशक से काथलिक कलीसिया के प्रति सरकार का रुख कुछ नम्र हुआ किन्तु अभी भी तनाव व्याप्त हैं। 14 वर्ष पूर्व सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय ने क्यूबा की यात्रा की थी।

सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें की यह पहली क्यूबा यात्रा है।

येसु के प्रेम से दुनिया बदल जायेगी – संत पापा

In Church, Journey on March 26, 2012 at 10:30 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

मेक्सिको, 25 मार्च, 2012 (सेदोक, वीआर) मेरे प्रिय बच्चो, मैं प्रसन्न हूँ क्योंकि मुझे आप लोगों से मिलने का अवसर मिला है और मैं देख रहा हूँ कि आपकी मुस्कान से यह पूरा सुन्दर प्रांगण भर गया।

मेरे दिल में आपके लिये विशेष प्यार है। और इस क्षण में मैं चाहूँगा कि मेक्सिको के सब बच्चे इस बात को जाने विशेष करके वैसे बच्चे जिन्हें हाल के महीनों में आये अनावृष्टि के कारण दुःख, परित्याग, हिंसा या भूख सहने पड़े थे। इस विश्वासपूर्ण मुलाक़ात की खुशी को आपने अपने गीत व्यक्त किया है इसके लिये आज मैं कृतज्ञ हूँ। आज हमारे दिल में अपार खुशी है, जो महत्त्वपूर्ण है।

ईश्वर चाहते हैं कि हम सदा प्रसन्न रहें। वे हमें जानते हैं और प्यार करते हैँ। यदि हम अपने दिल को येसु के प्रेम से बदलने दें तो हम दुनिया को बदल सकते हैं। यही है सच्ची खुशी का का रहस्य।

आज हम जिस स्थान में खड़े हैं उसे “ला पाचे” या ‘शांति’ के नाम से जाना जाता है यह हमें इस बात की याद दिलाती है कि प्रत्येक व्यक्ति के दिल में एक गहरी चाह हैः वह है – शांति । यह एक वरदान है जो ऊपर से दिया गया है।

पुनर्जीवित येसु ने कहा था, “तुम्हें शांति मिले।”(संत योहन 20:21) इस शब्द को पवित्र यूखरिस्तीय बलिदान में सुनते हैं और आज यही शब्द हमारे बीच गूँज रहा है ताकि हम पूर्ण रूप से बदल जाये और हम उस शांति के प्रचारक बनें जिसके लिये येसु ने अपने प्राण दिये।

येसु मसीह के अनुयायी बुराई का जवाब बुराई से नहीं देते पर वे हमेशा अच्छाई के साधन बनते. क्षमा के संदेशवाहक बनते, आनन्द का प्रचार करते और एकता के सेवक बने रहते हैं। येसु चाहते हैं कि वे हमारे दिल में मित्रता की कहानी लिख दें। आप उन्हीं में बने रहिये और उन्हें अपना सच्चा साथी बनाइये। Read the rest of this entry »

द्वितीय वाटिकन महासभा के आरंभ होने के पचासवें वर्षगाँठ के अवसर पर संत पापा का वीडियो संदेश

In Church, Journey on March 25, 2012 at 7:09 am

जस्टिन तिर्की,ये.स.

मेरे अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, मुझे खुशी है कि आप फ्रांस के धर्माध्यक्षों के आह्वान पर वाटिकन द्वितीय के आरंभ होने के 50वें वर्षगाँठ मनाने के लिये बड़ी संख्या में लूर्दस् में एकत्र हुए हैं । मैं अपनी प्रार्थना के द्वारा मसाबियेले ग्रोटो के पास सम्पन्न हो रह आपके विश्वास की यात्रा में शामिल हूँ।

द्वितीय वाटिकन महासभा हमारे लिये ईश्वरीय कृपा का एक विशेष चिह्न रहा है। यदि हम इसका अध्ययन करें और कलीसिया की परंपरा और शिक्षण के निर्देशन के अन्तर्गत स्वीकार करें तो यह भावी कलीसिया को एक नयी शक्ति प्रदान करेगा।

मैं विश्वास करता हूँ कि यह वर्षगाँठ समारोह फ्रांस और पूरी कलीसिया में आध्यात्मिक और मेषपालीय नवीनीकरण लायेगा।

सचमुच, यह समय हमें यह अवसर प्रदान करता है कि हमें उन विषयों को जाने जिन्हें महासभा के आचार्यों ने हमारे लिये एक अमूल्य धरोहर के रूप में छोड़ दिया है। यह वह समय है जब हम इसका आत्मसात करकें और आज की कलीसिया के लिये उत्तम फल उत्पन्न करें।

नवीनीकरण का यह समय विश्वास के वर्ष का ही एक भाग है जो एक दूसरे रूप में हमारे लिये आया है जिसे मैं पूरी कलीसिया के लिये प्रस्तुत करना चाहता था।

यह हमारे विश्वास को जागृत करे और सुसमाचार के साथ हमारे संबंध को गहरा करे। इसके लिये यह ज़रूरी है कि हम येसु के प्रति खले रहें विशेष करके ईशवचन के प्रति रुचि बढ़ायें ताकि हमारा मन दिल परिवर्तित हो और हम पूरी दुनिया में सम्मानपूर्ण वार्तामय वातावरण में आशा के संदेश की उद्घोषणा कर सकें।

यह एक ऐसा अवसर भी हो जब काथलिक कलीसिया जीवन मजबूत हो और द्वितीय वाटिकन महासभा का अन्तरकलीसियाई एकता सुदृढ़ करने का जो एक महत्त्वपूर्ण लक्ष्य था, वह भी पूर्ण हो।

येसु द्वारा दिये गये दिव्य वचन से प्रेरित हो ख्रीस्तीयों के जीवन कलीसिया के नवीनीकरण का साक्ष्य बने।

प्रिय भाइयो एवं बहनो, लूर्द्स की संत बेर्नादेत्त की नम्रता और अटूट विश्वास तथा पौलिन जारीकोट और फ्रांस के कई अन्य मिशनरियों के समान आप भी येसु के ज्ञान में बढ़ें।

इन संतों ने हमें दिखलाया है कि विश्वास का पहलु व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों है जिसके लिये साक्ष्य और सार्वजनिक समर्पण की आवश्यकता होती है।

आज हम जोन दि आर्क की भी याद करें जिसका उदाहरण हमारे लिये महत्वपूर्ण है जिन्होंने ऐसे समय में सुसमाचार के प्रचार के लिये कार्य किया जब कलीसिया कठिन दौर से गुज़र रही थी।

नये सुसमाचार के लिये विश्वास के आनन्द और उत्साह को फिर से जागृत करने की ज़रूरत है ताकि इसके अर्थ का प्रचार किया जा सके। पूरी कलीसिया को इस बात के लिये आमंत्रित किया जाता है कि वे निर्भीक होकर सबों को येसु के करीब ला सकें।

प्रिय भाइयो एवं बहनो, लूर्द की निष्कलंक कुँवारी मरियम जिसने ईश्वरीय रहस्य को पूर्ण करने में अहम भूमिका अदा की आपके लिये ज्योति का कार्य करे ताकि आप येसु तक पहुँच सकें और अपने विश्वास में सुदृढ़ हो सकें।

अन्त में धर्माध्यक्षो, लूर्दस के तीर्थयात्रियो, धर्मसमाजियो, धर्मबहनो और विश्वासियो को मेरा प्यार भरा अभिवादन।

ग्वानाहुआतो हवाई अडडे पर मेक्सिको के नागरिकों के लिए संत पापा का संबोधन

In Church, Journey on March 25, 2012 at 7:09 am

जोसेफ कमल बाड़ा

लेओन 24 मार्च 2012 ( सेदोक) मेक्सिको के लेओन शहर में ग्वानाहुआतो अंतरराष्ट्रीय हवाई अडडे में आयोजित स्वागत समारोह के दौरान संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने मेक्सिको के राष्ट्रपति, धर्माध्यक्षों, विशिष्ट प्रशासनिक अधिकारियो और गुवानाहुआतो तथा मेक्सिको की प्रिय लोगो को सम्बोधित करते हुए कहा कि यहाँ होने पर वे बहुत आनन्दित हैं।

वे ईश्वर को धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने इस इच्छा को साकार करने की उन्हें अनुमति प्रदान की जो बहुत समय से उनके दिल में थी कि इस महान राष्ट्र की भूमि में ईश प्रजा को विश्वास में सुदृढ़ करें।

संत पापा ने कहा कि मेक्सिको की जनता का स्नेह जो संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी के लिए है और जिसे वे हमेशा अपनी प्रार्थना में याद करते हैं, वह विख्यात है। वे इस बात को यहाँ कहते हैं जिसे उनके पूर्वाधिकारी धन्य जोन पौल द्वितीय अपनी पहली प्रेरितिक यात्रा के समय इस स्थल का दर्शन करना चाहते थे।

यद्यपि वे उस समय नहीं आ सके लेकिन उन्होंने (30 जनवरी 1979) यहाँ के हवाई क्षेत्र से उडान भरते हुए यहाँ के निवासियों के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उत्साह का संदेश भेजा था।

संत पापा ने कहा कि मेक्सिको और लातिनी अमरीका के अधिकाँश देश हाल के वर्षों में अपनी आजादी की दूसरी शताब्दी का समारोह मना रहे हैं। इस महत्वपूर्ण और सार्थक क्षण के लिए ईश्वर को धन्यवाद देने के लिए अनेक धार्मिक समारोहों का आयोजन किया जा रहा है।

ग्वादालुपे की माता मरियम, हमारी स्वर्गीय माता ने इन देशों के निर्माण के लिए अपनी संतान के विश्वास प्रशिक्षण पर दृष्टि रखी है।

संत पापा ने कहा कि वे विश्वास, आशा और प्यार के तीर्थयात्री रूप में यहां आये हैं। वे उन लोगों को विश्वास में सुदृढ़ करना चाहते हैं जो ख्रीस्त में विश्वास करते हैं ताकि वे ईश वचन को सुनकर तथा संस्कारों को ग्रहण कर अपने विश्वास में मजबूत हों और नवीकृत हों। और इस तरह वे अपने विश्वास को दूसरों के साथ बाँटते हुए समाज में खमीर के समान काम करते हुए हर व्यक्ति की प्रतिष्ठा के आधार पर मर्यादापूर्ण और शांतिमय सहअस्तित्व के लिए योगदान देंगे।

संत पापा ने कहा कि इस देश और सम्पूर्ण महाद्वीप के लोगों का आह्वान किया जाता है कि वे ईश्वर पर अपनी आशा को गहन दृढ़ता के साथ जीयें। इसे दिल की मनोवृत्ति और व्यवहारिक समर्पण में परिणत कर बेहतर दुनिया बनाने के लिए एक साथ चलें। आशा और विश्वास के साथ मसीही विश्वासी वस्तुतः सम्पूर्ण कलीसिया अपने मिशन के अपरिहार्य तत्व के रूप में परोपकार को जीती और अभ्यास करती है।

संत पापा ने कहा कि वे इन दिनों में प्रभु से तथा ग्वादालुपे की माता मरिया से सबके लिए प्रार्थना करेंगे ताकि वे अपने विश्वास के प्रति निष्ठावान बने रहें जिसे उन्होंने पाया है। वे विशेष रूप से पुरानी तथा नयी रंजिश, नफरत तथा हर प्रकार की हिंसा के कारण पीड़ा सह रहे लोगों तथा जरूरतमंदों के लिए प्रार्थना करेंगे। वे जानते हैं कि वे ऐसे देश में हैं जिसे अपने आतिथ्य सत्कार पर गर्व है तथा जो हर किसी का स्वागत करता है। वे इसे जानते हैं, देख सकते हैं और अपने दिल में महसूस कर रहे हैं।

संत पापा ने कहा उनकी आशा है कि मातृभूमि से दूर रह रहे अनेक मेक्सिको वासी भी इसी मनोभाव को महसूस करते हैं तथा कोई भी वजह उन्हें इसे भूलने न दे और यह सौहार्द तथा यथार्थ आंतरिक विकास में बढ़े।

पत्रकारों से सन्त पापा ने कहा कलीसिया कोई राजनैतिक सत्ता अथवा पार्टी नहीं

In Church, Journey on March 25, 2012 at 7:08 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

वाटिकन सिटी, 24 मार्च सन् 2012 (सेदोक): रोम से मेक्सिको की यात्रा के दौरान शुक्रवार को पत्रकारों के प्रश्नों का त्तर देते हुए सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने कहा कि कलीसिया न तो कोई राजनैतिक सत्ता है और न ही कोई राजनैतिक पार्टी।

स्पानी उपनिवेशियों से स्वतंत्रता पाने की दूसरी शताब्दी मना रहे लातीनी अमरीका के सन्दर्भ में सन्त पापा ने कहा, “यह स्वभाविक है कि कलीसिया को सदैव स्वतः से यह पूछना चाहिये कि क्या इस विशाल महाद्वीप पर सामाजिक न्याय की बहाली के लिये पर्याप्त प्रयास किये गये जा रहे हैं अथवा नहीं? इसलिये कि कलीसिया कोई राजनैतिक सत्ता अथवा राजनैतिक पार्टी नहीं है अपितु एक नैतिक वास्तविकता तथा नैतिक शक्ति है।”

मेक्सिको और क्यूबा की छः दिवसीय यात्रा करते हुए सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें को कैसा लग रहा था इस सवाल के जवाब में सन्त पापा ने कहा, “यह मेरे लिये हर्ष का विषय है क्योंकि यह उस अभिलाषा का उत्तर है जिसे मैं अपने मन में लम्बे समय से संजोए हुए था।”

अपने हृदय की भावनाओं का वर्णन करते हुए सन्त पापा ने कहा, “द्वितीय वाटिकन महासभा के शब्द मेरे मन में आते हैं: गाओदियुम एत स्पेस, लुकतुस एत आंगोर – आनन्द और आशा किन्तु दुख एवं व्यग्रता भी।” सन्त पापा ने कहा कि वे मेक्सिको एवं क्यूबा के आनन्द में शरीक होते हुए इन राष्ट्रों की कठिनाइयों में भी उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि काथलिक विश्वासियों में आशा का संचार करना तथा बुराई के खिलाफ संघर्ष हेतु उनके संकल्प को मज़बूत करना उनका मिशन है।

मेक्सिको में नशीले पदार्थों की तस्करी तथा मादक पदार्थों सम्बन्धी हिंसा को कम करने के लिये काथलिक कलीसिया की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर सन्त पापा ने कहा, “मेक्सिको के सौन्दर्य से हम भलीभाँति परिचित हैं किन्तु साथ ही मादक पदार्थों सम्बन्धी भारी समस्याओं से भी वाकिफ़ हैं।

निश्चित्त रूप से इसमें काथलिक कलीसिया की बड़ी ज़िम्मेदारी है क्योंकि मेक्सिको के 90 प्रतिशत लोग काथलिक धर्मानुयायी हैं। मानवजाति तथा, विशेष रूप से, युवाओं का विनाश करनेवाली इस बुराई के विरुद्ध संघर्ष को जारी रखने के लिये हम कृतसंकल्प हैं।”

सन्त पापा ने कहा कि इस कार्य में सबसे पहला कार्य लोगों में ईश प्रेम की चेतना जाग्रत करना है क्योंकि इसी से लोग सत्य की ओर अग्रसर होंगे तथा बुराई का बहिष्कार करने का सम्बल प्राप्त करेंगे।

न्होंने कहा कि कलीसिया की ज़िम्मेदारी है कि वह अन्तःकरणों को शिक्षित करे तथा समाज से झूठे वादों, धन की पूजा एवं बुराई के नकाब को हटाये।

क्यूबा के विषय में पूछे जाने पर सन्त पापा ने कहा, “इस यात्रा से सहयोग और संवाद का नया रास्ता खुला है जिसपर धैर्यपूर्वक आगे बढ़ते रहना अनिवार्य है।”

सन्त पापा ने कहा कि यह स्पष्ट हो गया है मार्क्सवादी विचारधारा वास्तविकता का जवाब देने में समर्थ नहीं रही है इसलिये धैर्य के साथ नवीन आदर्शों की खोज अनिवार्य है।

सन्त पापा चाहते हैं ख्रीस्तीय धर्म का पुनर्जागरण

In Church, Journey on March 15, 2012 at 6:47 am

Imageजूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

हवाना, 14 मार्च सन् 2012 (रायटर): क्यूबा के काथलिक धर्माधिपति, कार्डिनल आयमे ओरतेगा ने कहा है कि सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें क्यूबा में ख्रीस्तीय धर्म का पुनर्जागरण चाहते हैं।

26 से 28 मार्च तक क्यूबा में सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें की आगामी प्रेरितिक यात्रा पर, मंगलवार को, राष्ट्रीय टेलेविज़न पर क्यूबा की जनता को आलोकित करते हुए कार्डिनल ओरतेगा ने कहा कि सन्त पापा क्यूबा के लोगों को उनके विश्वास में सुदृढ़ करना चाहते हैं।

क्यूबा की संरक्षिका एल कोब्रे की मरियम के तीर्थ के विषय में उन्होंने कहा कि इस तीर्थस्थल के प्रति लोगों में महान अभिरुचि है तथा अपनी यात्रा के समय सन्त पापा इसी तीर्थ से देश को अपना सन्देश देंगे।

उन्होंने कहा, “सन्त पापा उन देशों में विश्वास को पुनः जगाना चाहते हैं जिन्होंने ख्रीस्तीय धर्म के आरम्भिक काल में इसका आलिंगन किया था और अब जहाँ नवीन सुसमाचार प्रचार की आवश्यकता है।” Read the rest of this entry »

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