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Archive for the ‘Peace & Justice’ Category

संत पापा की आगामी मेक्सिको यात्रा के लिए आधिकारिक संगीत का लोकार्पण

In Church, Peace & Justice on March 16, 2012 at 7:20 am

जोसेफ कमल बाड़ा

मेक्सिको सिटी 15 मार्च 2012 (सीएनए) संत पापा बेनेदिक्त 16 वें 23 से 25 मार्च तक मेक्सिको की प्रेरितिक यात्रा करेंगे। मेक्सिको धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने उनकी यात्रा को देखते हुए आधिकारिक संगीत का लोकार्पण किया है।

11 मार्च को जारी संदेश में आयोजको ने यह आशा व्यक्त की है कि यह संगीत परिवारों, पड़ोसियों और लोगों को भाईचारा, सह्दयता और बंधुत्व की भावना में एकताबद्ध करने का संदर्भ बिन्दु होगा।

‘Mensajero de Paz’ अर्थात् ‘शांति के संदेशवाहक’ शीर्षक से तैयार गीत में मेक्सिको के अनेक लोकप्रिय और विख्यात गायकों ने अपनी आवाज दी है जो संत पापा बेनेदिक्त 16 वें का हार्दिक स्वागत करने के लिए मेक्सिको की जनता के साथ संयुक्त होना चाहते हैं।

संगीत की रचना कारलोस लारा ने की है तथा अनेक विख्यात गायकों ने इसमें अपना योगदान दिया है।
मेक्सिको धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अनुसार उक्त संगीत के शब्द लोगों को उत्साहित करेंगे ताकि शांति, विश्वास और आशा के लिए वे अपने दिल को खोलें।

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येरूसालेम तक ग्लोबल मार्च में भारत भी शामिल

In Church, Peace & Justice on March 14, 2012 at 10:50 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

नई दिल्ली, 13 मार्च सन् 2012 (ऊका): फिलीस्तीनियों के प्रति एकात्मता व्यक्त करते हुए भारत भी अन्य                         दक्षिण एशियाई देशों के साथ येरूसालेम तक की विश्वव्यापी तीर्थयात्रा में शामिल हो गया है।

“येरूसालेम तक ग्लोबल मार्च” शीर्षक से आयोजित तीर्थयात्रा का उदघाटन, भारतीय सांसद रामविलास पासवान द्वारा, नौ मार्च को नई दिल्ली में किया गया था। पासवान ने संसद में फिलीस्तीनियों के मुद्दे को उठाने का आश्वासन दिया है।

54 तीर्थयात्रियों के प्रतिनिधिमण्डल का अभिवादन सांसद मणि शंकर अय्यर तथा नई दिल्ली स्थित फिलीस्तीनी राजदूतावास के वरिष्ठ अधिकारी ज़ुहैर हमदल्लाह ने भी किया।

“येरूसालेम तक ग्लोबल मार्च” की भारतीय राष्ट्रीय समिति ने एक वकतव्य जारी कर कहा, ” सत्याग्रहों की परम्परा को जारी रख, हम अहिंसा का पालन करते हुए समर्पण के साथ फिलीस्तीन को स्वतंत्र करने हेतु संघर्षरत हैं।”

10 मार्च को भारतीय प्रतिनिधिमणडल पाकिस्तान पहुँचा जहाँ इण्डोनेशिया एवं मलेशिया के प्रतिनिधि भी इस मार्च में शामिल हुए।

मिस्र, लेबनान, सिरिया एवं जॉडन को पार करते हुए 30 मार्च को एशियाई प्रतिनिधि जैरूसालेम पहुँचेंगे।

ग़ौरतलब है कि 30 मार्च फिलीस्तीनी दिवस रूप में मनाया जाता है। इसी दिन सन् 1967 ई. को इसराएल ने फिलीस्तीनियों के शान्ति प्रदर्शन पर हमला कर दिया था जिसमें छः प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी तथा 96 घायल हो गये थे।

अमेरिकी काँग्रेस और फिल्म हस्तियों ने पास्टर के रिहाई की अपील की

In Peace & Justice on March 3, 2012 at 10:01 pm

जस्टिन तिर्की,ये.

वाशिंगटन, 3 मार्च, 2012 (सीएनए) अमेरिकन काँग्रेस और  देश के अनेक प्रसिद्ध हस्तियों ने ख्रीस्तीय विश्वास के त्याग से इंकार कर देने के लिये मौत की सजा प्राप्त इरानी पास्टर युसेफ़ नदारखानी की मुक्ति के प्रयास तेज़ कर दिये हैं।

1 मार्च को अमेरिका के ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेनटेटिवस’ ने पूर्ण बहुमत से एक प्रस्ताव पास कर पास्टर युसेफ नदारखानी को स्वधर्मत्याग के आरोप में ‘अनवरत यातना देने, जेल में रखने और सजा सुनाने’ के लिये ईरानी सरकार की कड़ी आलोचना की।

प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि ईरानी सरकार नदारखानी और उसके साथ जितने लोग भी धार्मिक विश्वास के लिये जेल में बंद लोगों को निर्दोष क़रार दे और तुरन्त बिना शर्त के रिहा कर दे।

अमेरिकी काँग्रेस के निम्न सदन में लाये गये प्रस्ताव पर अपने विचार रखते हुए जोसेफ पिट्स ने कहा, “ईरान का संविधान स्वयं ही संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकारों की घोषणा और नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के अंतरराष्ट्रीय अधिनियम की तरह धार्मिक स्वतंत्रता को मान्यता देता है। ईरान ने दोनों अंतरराष्ट्रीय अधिनियमों पर हस्ताक्षर कर अपनी स्वीकृति दी। Read the rest of this entry »

काथलिक मछुओं के विरोध की सरकार ने की उपेक्षा

In Peace & Justice on February 16, 2012 at 9:00 am
  • जूलयट जेनेविव क्रिस्टफ़र

श्री लंका, कोलोम्बो, 15 फरवरी सन् 2012 (एशिया न्यूज़): श्री लंका में तेल की बढ़ती क़ीमतों के विरुद्ध बन्दरगाहों तथा कोलोम्बो से लेकर मन्नार तथा नेगोम्बो शहरों में श्री लंका के मछुओं ने विरोध प्रदर्शन कर मार्गों को अवरुद्ध किया। बताया जाता है कि विभिन्न शहरों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों में 50,000 से अधिक श्री लंका के मछुए शामिल हैं।

विरोध का कारण तेलों की बढ़ती क़ीमत है। 12 फरवरी से प्रभावी क़ीमतों के अनुसार डीज़ल में 37 प्रतिशत की वृद्धि हुई, मिट्टी का तेल 49.5 प्रतिशत बढ़ा तथा गैसोलीन की क़ीमत में नौ प्रतिशत की वृद्धि आई।

एशिया न्यूज़ से कुछ मछुओं ने कहा, “हमें राहत सहायता नहीं चाहिये और न ही हम किसी प्रकार की सब्सिडी की मांग कर रहे हैं, हम केवल मानवीय, वैध एवं धारणीय क़ीमतों की मांग कर रहे हैं।” उनके अनुसार यदि सरकार ने उनकी मांग को पूरा नहीं किया तो लघु उद्योग जैसे मच्छीमारी ख़त्म हो जायेगी।

14 फरवरी से विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं किन्तु सरकार अब तक इसकी उपेक्षा करती रही है।

श्री लंका के ख्रीस्तीय नेताओं ने सरकार से आग्रह किया है कि वह मछुओं की अपीलों पर ध्यान दे। कोलोम्बो के काथलिक महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल मेलकम रणजीत ने मछुओं का पक्ष लेते हुए मत्स्य उद्योग मंत्री सेनारत्न से बातचीत भी की है। किन्तु मंत्री ने कहा है कि सरकार सहायता देने लिये तैयार है किन्तु क़ीमतों को कम करना नामुमकिन है।

सरकार की दलील है कि कच्चे तेल की क़ीमतों में बढ़ौती के कारण डीज़ल, मिट्टी के तेल आदि के भाव बढ़े हैं।

 श्री लंका टेलेविज़न और रेडियो पर मंत्री सेनारत्न ने उन काथलिक पुरोहितों एवं ग़ैरसरकारी संगठनों को भी फटकार बताई जो विरोध प्रदर्शनों को समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बढ़ती क़ीमतों पर कोई समझौता नहीं हो सकता।

 

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बलात्कार की शिकार धर्मबहन के प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट का स्थगन आदेश

In Peace & Justice on February 16, 2012 at 8:57 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफ़र

नई दिल्ली, 15 फरवरी सन् 2012 (ऊका): भारत की सर्वोच्च अदालत ने बलात्कार की शिकार एक काथलिक धर्मबहन के प्रकरण पर स्थगन आदेश दे दिया है। उड़ीसा की एक निचली अदालत के न्यायाधीश द्वारा परीक्षण के दौरान, तथ्यों की ग़लत व्याख्या की शिकायत कर, धर्मबहन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज़ की थी।

धर्मबहन के वकीलों में से एक, काथलिक पुरोहित फादर दिबाकर पारिच्छा ने सन्तोष व्यक्त करते हुए कहा, “यह एक बहुत ही सकारात्मक विकास है क्योंकि इससे पीड़ित धर्मबहन को अपने विचार व्यक्त करने का अवसर मिलेगा।”

न्यायमूर्ति आल्तामास कबीर तथा न्यायमूर्ति एस.एस निज्जर की खण्डपीठ ने राज्य सरकार एवं अन्यों से धर्मबहन की दलील के जवाब का उत्तर देने को कहा तथा मामले में आगे की सुनवाई को 22 मार्च तक मुल्तवी कर दिया है।

सन् 2008 में, उड़ीसा में, हुई ख्रीस्तीय विरोधी हिंसा के दौरान, धर्मबहन से सड़क पर अर्द्ध नग्न अवस्था में परेड कराई गई थी तथा उनका बलात्कार किया गया था।

फादर दिबाकर पारिच्छा ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट की शरण जाना पड़ा क्योंकि उड़ीसा के उच्च न्यायालय ने, उप संभागीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार दास से पूछताछ करने हेतु पीड़िता द्वारा की गई अपील को ठुकरा दिया था।

दास ने बलात्कार के आरोपियों की पहचान हेतु जाँचपड़ताल की थी। धर्मबहन ने सन्तोष नायक को आरोपी के रूप में पहचाना था किन्तु दास ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि नायक ने किसी भी प्रकार की ज़्यादती नहीं की।

उड़ीसा के उच्च न्यायालय ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया था कि वह कटक की एक अदालत में इस मामले को उठाये जहाँ प्रकरण पर सुनवाई हो रही थी।

कटक – भुवनेश्वर महाधर्मप्रान्त ने भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर सन्तोष जताते हुए कहा है कि यह न्याय के हित में है।

 

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पत्रकार दम्पत्ति की हत्या पर रोष

In Peace & Justice on February 15, 2012 at 10:57 pm

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफ़र

ढाका, 14 फरवरी सन् 2012 (ऊका): बांगलादेश की राजधानी ढाका में 12 फरवरी को सैकड़ों पत्रकारों ने एक पत्रकार दम्पत्ति की हत्या पर रोष प्रकट कर प्रदर्शन निकाला तथा न्याय की मांग की।

11 फरवरी को, ढाका में, पत्रकार सागर सरवर तथा उनकी पत्नी पत्रकार मेहरून रूनी की, झुरा भोंक कर हत्या कर दी गई थी। दोनों शव उनके घर से बरामद किये गये                         थे।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार को एक दिन का समय दिया और कहा कि यदि शाम तक पत्रकार दम्पत्ति के हत्यारों का पता न लगा तो वे गृहमंत्री के इस्तीफे पर दबाव डालेंगे।

बंगला निजी टेलेविज़न चैनल “मासरंगा” के सम्पादक सरवर तथा उनकी पत्नी, ए.टी.एन. बंगला टी.वी. चैनल की पत्रकार रूनी की हत्या ने देश को सदमा पहुँचाया है।

घटना स्थल पर पहुँची गृहमंत्री सहारा ख़ातून ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने जाँचकर्त्ताओं को आदेश दिया है कि वे 48 घण्टों के भीतर हत्यारों को गिरफ्तार करें।

12 फरवरी को प्रर्दशन के दौरान बंगलादेश पत्रकार संगठन के महासचिव अब्दुल जलील भुईयान ने कहा, “हमें आपके शब्दों पर भरोसा है किन्तु यदि आप अपना वादा पूरा करने में असफल रहीं तो हम आपके इस्तीफे की मांग करने सड़कों पर उतर आयेंगे।”

पुलिस ने कहा है कि जाँच पड़ताल जारी है।

ढाका की स्थानीय मानवाधिकार समिति “ओधिकार” के अनुसार सन् 2001 से 2011 तक बंगलादेश में कम से कम 20 पत्रकारों की हत्या की जा चुकी है।

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संत पापा ने न्याय और शांति का अर्थ समझाया

In Peace & Justice on February 14, 2012 at 7:51 am

वाटिकन सिटी, 14 जनवरी, 2012 (ज़ेनित) संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने कहा है, “न्याय केवल मानव समझौता नहीं और न ही शांति युद्ध की अनुपस्थिति है।”

संत पापा ने उक्त बातें उस समय कहीं जब उन्होंने वाटिकन सिटी में परंपरागत रूप से आयोजित एक समारोह नागरिक सुरक्षा अधिकारियों को नये वर्ष की शुभकामनायें दीं।

संत पापा ने कहा, “रोम जैसे शहर में जहाँ विश्वभर से पर्यटक और तीर्थयात्री लगातार आते रहते हैं, सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखना एक साधारण कार्यमात्र नहीं है। संत पीटर का प्रांगण ख्रीस्तीयता का केन्द्र है और विश्व भर के काथलिक चाहते हैं कि जीवन में कम से कम एक बार रोम का दौरा करें और प्रेरित संत पीटर की कब्र के दर्शन कर प्रार्थना चढ़ायें। रोम में ईसाइयों के धर्मगुरु का होना और दुनिया भर के लोगों का यहाँ आना निश्चिय ही रोमवासियों और इटली के लिये कोई समस्या नहीं है, ठीक इसके विपरीत यह एक गर्व की बात और समृद्धि का श्रोत है।”

संत पापा ने कहा, “मेरे शांति संदेश में मैंने युवा को न्याय और शांति के बारे में शिक्षित करने के बारे में कहा है। इन दोनों शब्दों ‘न्याय और शांति’ का प्रयोग आज सब लोग करते हैं पर कई बार इसका प्रयोग उचित रूप से नहीं किया जाता है।”

संत पापा ने कहा, “‘न्याय’ सिर्फ़ मानव समझौता नहीं है। जब तथाकथित न्याय का मापदंड उपयोगिता, मुनाफ़ा और धन संपति बन जाते हैं तब मानव मूल्य और मर्यादा मानव के पौ तले कुचल दिये जाते हैं। न्याय एक ऐसा गुण है जो मानव इच्छा का मार्गदर्शक है जो हमें इस बात की प्रेरणा देता है कि हम दूसरे को वह चीज़ प्रदान करें जो उसको उसकी अस्तित्व और कार्यों के आधार पर देय है।”

“इसी प्रकार शांति युद्ध की अनुपस्थिति नहीं मात्र नहीं है या झगड़ों को समाप्त करने के मानव प्रयास का परिणाम मात्रन नहीं पर पर इससे बढ़कर यह ईश्वरीय वरदान है जिसे विश्वास के साथ ग्रहण किया जाना चाहिये जिसकी परिपूर्णता येसु मसीह में है। सच्ची शांति पाने के लिये प्रत्येक व्यक्ति सहानुभूति, भाईचारा, सहयोग और सेवा का अनवरत योगदान दे।”

संत पापा ने कहा, “एक पुलिस का दायित्व है कि वह सदा न्याय और शांति का सच्चा प्रचारक बने।” Read the rest of this entry »

सुप्रीम कोर्ट बलात्कार पीड़िता नन के मामले की जाँच करेगी

In Peace & Justice on February 12, 2012 at 9:42 am
  • जस्टिन तिर्की,ये.स.

भुवनेश्वर, उड़ीसा, 11 फरवरी, 2012(कैथन्यूज़) सन् 2008 में उड़ीसा में हुए ईसाइविरोधी हिंसा के दौरान सामुहिक बलात्कार की पीड़िता कैथोलिक नन के निवेदन पर अब सुप्रीम कोर्ट निचले कोर्ट के न्यायधीश के द्वारा तथ्यों की ‘ग़लत प्रस्तुति’ का ‘क्रॉस एक्ज़ामिनेशन’ करेगी।न्यायधीश अल्तमस कबीर और चलामेश्वर की अध्यक्षता वाली शाखा ने अगली सुनवाई 13 फरवरी, 2012   निर्धारित की है।

कैथोलिक नन के एक वकील मनस रंजन सिंह ने बतलाया कि उन्हें सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति के लिये एक विशेष आवेदन देना पड़ा ताकि वह उड़ीसा उच्च न्यायालय के उस निर्णय को चुनौती दे जिसमें कोर्ट ने सबडिविज़नल जूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार दास के ‘क्रॉस जाँच’ को ख़ारिज़ कर दिया था।

विदित हो कि प्रशांत कुमार दास ने बलात्कार के अभियुक्त की पहचान के लिये ‘टीआई परेड’ कराया और नन ने संतोष पटनायक की पहचान की थी। पर दास ने ‘ग़लती और बुरे इरादे से’ यह रिपोर्ट बनाया था कि कथित अभियुक्त ने नन को थप्पड़ मारा और उसके साथ बुरा सलुक किया था पर अधिनियमों का कोई खुला उल्लंघन नहीं किया।

मनस रंजन सिंह ने कहा कि जुडिशियल मजिस्ट्रेट का ऐसा करना “तथ्यों की ग़लत प्रस्तुति” है।

नन के वकील सिंह ने कहा कि उन्होंने इसी कार्य के लिये ट्रायल कोर्ट से अपील की थी पर उनके निवेदन को इस आधार पर अस्वीकार कर दिया गया था कि यह मामला सरकार के द्वारा दायर किया गया था और शिकायतकर्ता ने इसकी माँग नहीं की थी।

उधर सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के स्थायी वकील को भी 13 तारीख़ को होने वाली सुनवाई में उपस्थित रहने की सूचना भेजी है।

भुवनेश्वर में कार्यरत समाजिक कार्यकर्ता सिस्टर जस्टिन सेनापति ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का स्वागत किया है क्योंकि इसके पूर्व राज्य सरकार हाई कोर्ट में मामले को दर्ज़ करने से भी कतरा रही थी।

उन्होंने यह भी कहा कि न्याय साम्प्रदायिक हिंसा से पीड़ित लोगों के लिये एक सपना बन गया है।

विदित हो सन् 2008 में हुए साम्प्रदायिक हिंसा के दौरान 25 अगस्त को कंधमाल में नन पर हमला किया गया, बलात्कार किया गया और कंधमाल की सड़कों में अर्द्धनग्न घुमाया गया था।

http://www.radiovaticana.org/in1/index.asp

‘सेन्टर फोर चाइल्ड प्रोटेक्शन’ नामक इंटरनेट पोर्टल जारी

In Peace & Justice on February 10, 2012 at 11:20 pm

रोम 10 फरवरी 2012 (वी आर वर्ल्ड) रोम के ग्रेगोरियन विश्वविदयालय में बाल यौन दुराचार की समस्या के समाधान की दिशा में चंगाई और नवीनीकरण की ओर शीर्षक के तहत 6 से 9 फरवरी तक आयोजित सेमिनार का समापन गुरूवार को हुआ जिसके अंत में सेन्टर फोर चाइल्ट प्रोटेक्शन नामक एक इंटरनेट पोर्टल को जारी किया गया। चर्च में बच्चों की सुरक्षा से संबंधित सभी जानकारियाँ और शिक्षण इस वेबसाइट में अंग्रेजी, स्पानी, इताली और जर्मन में भाषाओं में उपलब्ध रहेंगी।

सम्मेलन में विश्व के 100 देशों से भी अधिक देशों में कार्य़रत धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के प्रतिनिधि तथा गुरूकुल प्राचार्या और विभिन्न धर्मसमाजों के प्रमुखों ने भाग लिया।

बाल यौन दुराचार की समस्याओं की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए ब्रिटेन में नेशनल काथलिक सेफगार्डिंग कमीशन के उपाध्यक्ष धर्माध्यक्ष देकलान लांग ने कहा- हम महसूस करते हैं कि यह समस्या पूरी कलीसिया की समस्या है। एक प्रकार की गंभीरता है और यह जागरूकता कि बाल यौन दुराचार के व्रण न केवल इसके शिकार होनेवाले को लेकिन परिवारों, पल्लियों और व्यापक समुदाय को घायल करते हैं।

सेन्टर फोर चाइल्ट प्रोटेक्शन नाम से जारी किया गया बहुभाषी इंटरनेट वेबसाइट जर्मनी के म्यूनिख और फ्रेंइसिंग में आधारित है इसका लक्ष्य सब धर्माध्यक्षों, पुरोहितों और मेषपालीय सेवा देनेवाले नेताओं की सहायता करना है ताकि वे दुराचार की समस्या के लिए वैश्विक अभिगम अपना सकें जो न केवल कलीसियाई परिधि में लेकिन व्यापक समुदाय के लिए हो।

विभिन्न धर्मप्रांतो और अन्य दानदाताओं द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे धन से यह केन्द्र अगले तीन वर्षों के लिए चलाया जायेगा। इस केन्द्र का काम जर्मनी के यूनिवर्सिटी ओफ क्लिनिक ओफ उलम तथा परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के विशेषज्ञों के समर्थन और सहयोग से चलाया जायेगा।

http://www.radiovaticana.org/in1/Articolo.asp?c=562151

यौन दुराचार मामलों में सत्य की खोज करना नैतिक और कानूनी दायित्व

In Peace & Justice on February 10, 2012 at 7:32 am

जोसेफ कमल बाड़ा

रोम 9 फरवरी 2012 (वीआर वर्ल्ड) बाल यौन दुराचार को रोकने संबंधी मामले पर रोम में आयोजित 4 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों के लिए सुसमाचार प्रसार संबंधी परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के अध्यक्ष कार्डिनल मनोनीत फेरनान्दो फिलोनी ने बुधवार संध्या रोम स्थित चर्च ओफ द होली अपोश्ल में ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

6 से 9 फरवरी तक सम्पन्न इस सम्मेलन का आयोजन परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन विश्वविद्यालय के द्वारा किया गया।

बच्चों की सुरक्षा संबंधी केन्द्र की स्थापना करने के साथ ही इस सम्मेलन का समापन गुरूवार को हुआ जो सम्पूर्ण विश्व के धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों को मूल्यवान संसाधन उपलब्ध करायेगा।

बुधवार के सत्रों में विचार विमर्श का केन्द्र बिन्दु रहा कि यह कलीसियाई नेताओं का नैतिक और कानूनी कर्तव्य है कि यौन दुराचार के सब मामलों का प्रत्युत्तर दें।

विश्वास संबंधी परमधर्मपीठीय समिति में न्याय प्रसार से संबंधित धर्मसंघ के अधिकारी महाधर्माध्यक्ष चार्ल्स सिकलुना ने कहा कि बाल यौन दुराचार को रोकने के लिए कोई भी रणनीति कारगर नहीं हो सकती है यदि समर्पण और जिम्मेदारी निर्धारित नहीं हो।

उन्होंने कहा कि सत्य के लिए प्रेम को न्याय के प्रति प्रेम में तथा इसके परिणामस्वरूप मानव समाज में संबंधों में सच्चाई की स्थापना के लिए समर्पण में व्यक्त किया जाना जरूरी है।

उन्होंने बल देते हुए कहा कि सम्मेलन के प्रतिभागियों ने विश्व के विभिन्न भागों से आये लोगों द्वारा प्रस्तुत भाषणों में सुना कि यह कितना महत्वपूर्ण है कि वे मौन की घातक संस्कृति का सामना करें जो अब भी कुछ स्थानों में कायम है। हमें जरूरत है कि आगे बढ़ें और इसकी निन्दा करें क्योंकि यह सत्य और न्याय का शत्रु है।

यौन दुराचार के पीडितों को न्याय और क्षतिपूर्ति दिलाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि स्थानीय कलीसिया देश के नागरिक कानून के साथ पूरी तरह सहयोग करें तथा चर्च के दिशानिर्देशों को भी निकटता से देखें।

उन्होंने पोप जोन पौल द्वितीय के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा कि पुरोहिताई या धर्मसमाजी जीवन में उनके लिए कोई भी स्थान नहीं है जो युवाओं को हानि पहुँचायें।

मान्यवर सिकलुना ने बल दिया कि संघर्ष के केन्द्र में प्रशिक्षण है जो कि बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता और समर्पण की नयी संस्कृति की रचना करे। न केवल गुरूकुल छात्रों, पुरोहितों और लोकधर्मियों का प्रशिक्षण लेकिन धर्माध्यक्षों का भी ताकि चर्च के सब नेताओं की भी बेहतर जिम्मेदारी सुनिश्चित हो।

उन्होंने कहा कि धर्माध्यक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उम्मीदवार का चयन करते समय सजग रहने की जरूरत है तथा धर्माध्यक्षों की जिम्मेदारी से संबंधित पहले से विद्यमान दिशानिर्देशों का उपयोग किया जाये।

http://www.radiovaticana.org/in1/index.asp

 

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