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Archive for the ‘Uncategorized’ Category

युद्ध न तो एक आवश्यकता है, और न ही यह अपरिहार्य है, सन्त पापा फ्राँसिस

In Uncategorized on September 8, 2014 at 1:38 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 08 सितम्बर सन् 2014 (सेदोक): सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा है कि प्रार्थना एवं वार्ता शांति स्थापना के लिये अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा युद्ध न तो आवश्यक है और न ही यह अपरिहार्य ही है।

बैलजियम के आन्टवेर्प नगर में सन्त इजिदियो काथलिक लोकधर्मी समुदाय के तत्वाधान में आयोजित 28 वें अन्तरराष्ट्रीय शांति सम्मेलन को प्रेषित सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने सतत् प्रार्थना एवं वार्ताओं द्वारा संघर्षों की समाप्ति एवं शांति की स्थापना का आह्वान किया।

प्रथम विश्व युद्ध की 100 वीं बरसी की स्मृति में, रविवार 07 सितम्बर से मंगलवार 09 सितम्बर तक आन्टवेर्प में जारी 28 वें अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन का विषय हैः “शांति ही भविष्य है”। विश्व में व्याप्त विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि एक साथ प्रार्थना एवं विचारों के आदान प्रदान हेतु इस सम्मेलन में उपस्थित हुए हैं।

शांति सम्मेलन के प्रतिभागियों को प्रेषित सन्देश में सन्त पापा ने प्रथम विश्व युद्ध के अन्धकारपूर्ण इतिहास का स्मरण दिलाया और कहाः “100 वीं बरसी हमें यह शिक्षा देती है कि अन्याय की समाप्ति तथा राजनैतिक समस्याओं एवं सामाजिक मतभेदों को हल करने के लिये युद्ध सन्तोषजनक समाधान कभी नहीं हो सकता।”

उन्होंने कहा कि आन्टवेर्प में जारी अन्तरधार्मिक शांति सम्मेलन प्रार्थना एवं निष्कपट वार्ताओं द्वारा शांति निर्माण में महान योगदान दे सकता है। उन्होंने कहाः “यह आशा की जाती है कि प्रार्थना एवं सम्वाद के ये दिन इस बात का स्मरण दिलाने हेतु सशक्त अस्त्र सिद्ध होंगे कि प्रार्थना द्वारा लोगों के बीच शांति एवं समझदारी कायम की जा सकती तथा युद्ध की सनक को पराजित किया जा सकता है।”

सन्त पापा फ्राँसिस ने इस बात पर बल दिया कि “युद्ध कभी भी एक आवश्यकता नहीं हो सकती और न ही यह अपरिहार्य है।”

सन्त पापा ने कहा, “शांति ईश्वर के लक्ष्य की प्राप्ति का सुदृढ़ चिन्ह है तथा ईश्वर केवल धार्मिक नेताओं को ही नहीं बल्कि सभी शुभचिन्तक स्त्री-पुरुषों को आमंत्रित करते हैं कि वे हर जाति, वर्ग, धर्म एवं नस्ल के मनुष्यों के बीच सम्मान भाव को जगाकर शांति के निर्माता बनें।”

Juliet Genevive Christopher

यूक्रेन एवं लेसोथो में शांति की अपील

In Uncategorized on September 8, 2014 at 1:37 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 08 सितम्बर सन् 2014 (सेदोक): सन्त पापा फ्राँसिस ने यूक्रेन एवं अफ्रीकी देश लेसोथो में शांति की अपील की है।

रविवार को, रोम में सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में तीर्थयात्रियों के साथ देवदूत प्रार्थना के पाठ के उपरान्त सन्त पापा ने कहाः “विगत कुछ दिनों से संघर्ष विराम हेतु ठोस कदम उठाये जाने के बावजूद पूर्वी यूक्रेन से आनेवाली ख़बरें चिन्ताजनक हैं। मेरी आशा है कि संकट के इन क्षणों में जनता का पूरा ख्याल रखा जायेगा तथा उन्हें दैनिक जीवन की आवश्यक सामग्रियों सहित हर प्रकार से राहत प्रदान की जायेगी। साथ ही मेरी मंगलकामना है कि स्थायी शांति की दिशा में प्रयास किये जायेंगे। हम प्रार्थना करें ताकि वार्ताओं का जो सिलसिला आरम्भ हुआ है वह जारी रहे तथा आशान्वित फल उत्पन्न करे। शांति की रानी मरियम से हम इस मनोरथ के लिये प्रार्थना करें।”

लेसोथो के धर्माध्यक्षों की अपील को दुहराते हुए सन्त पापा ने दक्षिण अफ्रीका से घिरे लेसोथो देश में भी शांति के लिये सब लोगों से प्रार्थना का आग्रह किया। उन्होंने कहाः “हिंसा के समस्त कृत्यों की निन्दा कर मैं आप सबसे प्रार्थना का निवेदन करता हूँ ताकि लेसोथो राज्य में पुनः न्याय पर आधारित शांति एवं भाईचारे की स्थापना हो सके।”

ग़ौरतलब है कि इस वर्ष जून माह में लेसोथे के प्रधान मंत्री थॉमस थबाने ने लेसोथो के राजा लेत्सी तृतीय को अपने पक्ष में कर संसद को बरख़ास्त करा दिया था। बताया जाता है कि उप प्रधानमंत्री मेटसिंग के नेतृत्व में विपक्षी पार्टी संसद में प्रधान मंत्री के विरुद्ध विश्वास मत पास कर उन्हें अपदस्थ करने का षड़यंत्र रच रही थी। इसके बाद से देश की राजनीति में सेना का हस्तक्षेप शुरु हो गया है, अराजकता फैल गई है तथा विभिन्न राजनैतिक दलों के बीच तनाव सघन हो गये हैं।

Juliet Genevive Christopher

28 सितम्बर को परिवार पर धर्मध्यक्षीय धर्मसभा के लिये प्रार्थना दिवस

In Uncategorized on September 8, 2014 at 1:36 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 08 सितम्बर सन् 2014 (सेदोक): सन्त पापा फ्रांसिस ने परिवार पर धर्माध्यक्षीय धर्मसभा की सफलता के लिये सभी से प्रार्थनाओं का निवेदन किया है।

इस उद्देश्य से सन्त पापा ने रविवार 28 सितम्बर को प्रार्थना दिवस भी घोषित किया है।

वाटिकन में 05 से 19 अक्तूबर तक धर्माध्यक्षों की विशिष्ट धर्मसभा की तीसरी आम सभा आयोजित की गई है जिसका विषय हैः “सुसमाचार उदघोषणा के सन्दर्भ में परिवार पर प्रेरितिक चुनौतियाँ”।

सन्त पापा फ्राँसिस के साथ मिलकर विश्व धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के धर्माध्यक्षों ने विश्व की समस्त स्थानीय कलीसियाओं, पल्ली समुदायों, धर्मसमाजी एवं धर्मसंघी समुदायों तथा समस्त काथलिक लोकधर्मी संगठनों एवं विश्वासियों से आग्रह किया है कि धर्माध्यक्षीय धर्मसभा से पूर्व वे इसकी सफलता के लिये प्रार्थना करें। विशेष रूप से, ख्रीस्तयागों में भाग लेने तथा परिवारों में रोज़री विनती का पाठ करने का परामर्श दिया गया है।

परिवारों के लिये प्रार्थना का आग्रह कर धर्माध्यक्षों ने विगत वर्ष 29 दिसम्बर को मनाये गये पवित्र परिवार महापर्व के उपलक्ष्य में सन्त पापा फ्रांसिस द्वारा रची गई प्रार्थना के पाठ का भी परामर्श दिया है। इस प्रार्थना में सन्त पापा ने प्रभु ईश्वर से आर्त याचना की है कि हमारे परिवार “सहभागिता के स्थल” बनें जहाँ कभी भी हिंसा, संकीर्णता एवं विभाजन का अनुभव न किया जाये।

Juliet Genevive Christopher

अफ्रीका में ख्रीस्तीय-विरोधी हिंसा की समाप्ति हेतु वार्ता आवश्यक

In Uncategorized on September 8, 2014 at 1:36 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 08 सितम्बर सन् 2014 (सेदोक): अफ्रीका के देशों में ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों के विरुद्ध हिंसा की समाप्ति हेतु सन्त पापा फ्राँसिस ने वार्ताओं को नितान्त आवश्यक बताया है।

अफ्रीकी देश कैमरून से अपनी पंचवर्षीय पारम्परिक मुलाकात के लिये रोम पधारे काथलिक धर्माध्यक्षों के समूह को शनिवार को दिये सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि अफ्रीका महाद्वीप में ख्रीस्तीयों के विरुद्ध हिंसा को समाप्त करने के लिये ज़रूरी है मुसलमान बन्धुओं के साथ मिलकर वार्ताएँ करना तथा जीवन के महत्व को प्रकाशित करना।

कैमरून की एक करोड़ 70 लाख की कुल आबादी में 26 प्रतिशत काथलिक धर्मानुयायी हैं।

नाईजिरिया एवं चाद के सीमावर्ती कैमरून में भी विगत कुछ समय से बोको-हरम इस्लामी चरमपंथी दल ख्रीस्तीयों को निशाना बनाता रहा है। विगत सप्ताह ही कैमरून की सेना ने आगाह किया था कि बोको हरम दल कैमरून में अपनी जड़े जमाने की कोशिश कर रहा है। उसने कैमरून के सीमावर्ती नगर बाँकी में प्रवेश भी कर लिया था किन्तु सेना के हस्तक्षेप के बाद उसे कैमरून से जाना पड़ा।

कैमरून के धर्माध्यक्षों को अर्पित अपने सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने अन्तरधार्मिक सम्वाद को प्रोत्साहन दिया। कैमरून के कई काथलिक धर्मप्रान्तों में मुसलमानों की अर्थपूर्ण उपस्थिति की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए उन्होंने कहाः “शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के लिये अनिवार्य है आपसी विश्वास की भावना में मुसलमान भाइयों के साथ सम्वाद करना तथा हिंसा को समाप्त करना जिसके शिकार प्रायः ख्रीस्तीय धर्मानुयायी बनाये जाते हैं।”

कैमरून के परिवारों की मदद करने का भी सन्त पापा ने धर्माध्यक्षों से अनुरोध किया जो निर्धनता, विस्थापन एवं असुरक्षा के कारण कमज़ोर हैं तथा टूटने की कगार पर खड़े हैं। इन परिवारों को आर्थिक मदद प्रदान करने के साथ साथ आध्यत्मिक मार्गदर्शन देने का भी सन्त पापा ने धर्माध्यक्षों को परामर्श दिया।

Juliet Genevive Christopher

भाइयों का सुधार हमारा फर्ज़

In Uncategorized on September 8, 2014 at 1:35 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 8 सितम्बर 2014 (वीआर सेदोक)꞉ संत पापा फ्राँसिस ने रविवार, 7 सितम्बर को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में उपस्थित भक्त समुदाय के साथ, देवदूत प्रार्थना का प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा,
अति प्रिय भाइयो एवं बहनो,
सुप्रभात,

इस रविवार का सुसमाचार पाठ संत मती रचित सुसमाचार के 18 वें अध्याय से लिया गया है जो विश्वासी समुदाय में भाइयों के सुधार की शिक्षा देता है। इस शिक्षा के अनुसार, यदि कोई ख्रीस्तय धर्मानुयायी ग़लती करता है तो हमें उसके सुधार का प्रयास करना चाहिए।″
संत पापा ने कहा, ″येसु सिखलाते हैं कि यदि एक ख्रीस्तीय भाई हमारे विरूद्ध अपराध करता है, हमें कष्ट पहुँचाता है, तो हमें उसके साथ रहम से पेश आना चाहिए। सर्वप्रथम, व्यक्तिगत रूप से मिलकर उसे अवगत कराना चाहिए कि उसने अनुचित बात या काम किया है। पर यदि वह सुनने से इन्कार करता है, तो येसु एक दूसरा उपाय अपनाने की सलाह देते हैं जिसके तहत हम अपने साथ दो या तीन लोगों को लेकर उसे समझाएँ, तिसपर भी यदि वह आपके परामर्श को अस्वीकार करता है, तो इस बात को समुदाय में रखें और यदि वह समुदाय की भी नहीं सुनता तो उसे एहसास दिलाएँ कि उसने भाई-बहनों के प्रति अपराध कर समुदाय से अपने को अलग कर लिया है।″

संत पापा ने कहा कि यह पहल दर्शाती है कि अगर समुदाय में किसी से ग़लती हो जाए तो हमारा फर्ज़ है कि ग़लती में सुधार लाने में हम उनका साथ दें, प्रभु हम से यही चाहते हैं जिससे कि हम अपने भाइयों को न खो दें। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह आवश्यक नहीं है कि हम उनकी गलतियों को फैलाएँ या समुदाय के अन्य लोगों के साथ मिलकर उस पर बहस करें। यह पहला चीज है जिसका हमें बहिष्कार करना चाहिए। हमें जाकर उसे अकेले में समझाना चाहिए।।
संत पापा ने कहा, ″जिन्होंने हमारे विरूद्ध अपराध किया है उनके प्रति कोमलता, विवेकी, विनम्रता और सावधानी की भावना नहीं अपनाना, उसके लिए निराशा का कारण हो सकता है और इस कारण हम अपने भाई की मृत्यु के कारण बन सकते हैं क्योंकि शब्द में व्यक्ति को मार डालने की शक्ति है। जब किसी की बुरी आलोचना की जाए तो यह व्यक्ति के सम्मान को नष्ट करता है।

संत पापा ने कहा कि उपरोक्त बात का हमें ध्यान रहे किन्तु दूसरी बात भी ध्यान देने योग्य है कि हमारी बातों से उसके चरित्र में अनावश्यक कलंक न लगे। उसे आपस में ही सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए और अगर अवश्य हो तो समुदाय का सहारा लिया जाना चाहिए। किन्तु उसका उद्देश्य व्यक्ति को उसकी गलतियों का एहसास दिलाना कि उसने उस बात के द्वारा न केवल एक व्यक्ति को किन्तु समुदाय के सभी लोगों को कष्ट दिया है।

हमें गुस्से से बचना चाहिए क्योंकि यह हमें हानि पहुँचाता है, व्यक्ति के अपमान और उसपर आक्रमण करने के लिए प्रेरित करता है। एक ख्रीस्तीय के चेहरे को आक्रामक देखना अत्यन्त दुखद और खराब है।

संत पापा ने कहा कि दूसरों का अपमान करना ख्रीस्तीयता नहीं है। वास्तव में, ईश्वर के सम्मुख हम सब के सब पापी हैं तथा हमें उन से क्षमा पाने की आवश्यकता है इसलिए येसु हमें न्याय नहीं करने की सीख देते हैं।

भाई बहनों का सुधार उनके प्रति प्यार एवं एकता की भावना से उत्पन्न होना चाहिए जो ख्रीस्तीय समुदाय में प्रबल है। यह आपसी सेवा है जिसे हमें एक-दूसरे को प्रेम से देना चाहिए। भाई का सुधार एक सेवा है और यह सम्भव है और प्रभावकारी भी। ऐसी स्थिति में जब हम सभी पापी हैं तथा प्रभु से क्षमा किये जाने की आस में हैं। यही अंतः प्रेरणा हमें उनकी गलतियों को महसूस कराता है, साथ ही अपनी गलतियों की भी याद आती है और न केवल एक बार किन्तु बार-बार।

यही कारण है कि पवित्र यूखरिस्त की शुरूआत में हमें याद दिलाया जाता है कि हम प्रभु के सम्मुख पापी हैं शब्दों एवं चिन्हों का प्रयोग करते हुए हम उदार भाव से अपने पापों के लिए पश्चाताप करते हैं और कहते हैं, प्रभु मुझ पर दया कर क्योंकि मैं पापी हूँ, न कि प्रभु मेरे बगल वाले पर दया कर। पवित्र आत्मा हमें प्रेरित करते तथा ईश वचन के प्रकाश में हमारी गलतियों का एहसास दिलाते हैं। येसु संत एवं पापी सभी को एक साथ अपने जीवन की परिस्थितियों में ही अपने भोज पर बुलाते हैं। युखरिस्त के महाभोज में भाग लेने वालों के लिए दो उत्तम बातें हैं- यह भाव रखना कि हम सभी पापी है तथा ईश्वर हमें क्षमा प्रदान करते हैं एवं दूसरा, पावन यूखरिस्त में भाग लेने के पूर्व हमें भाइयों के सुधार का सदा ख्याल रखना।

इसके लिए हम धन्य कुँवारी मरियम जिनका कल हम जन्म दिवस मनायेंगे उनकी मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना करें।
इतना कह कर संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना समाप्त कर उन्होंने देश-विदेश से एकत्रित सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन किया तथा उन्हें संम्बोधित कर कहा, ″इन दिनों पूर्वी यूक्रेन के संघर्षरत क्षेत्रों में युद्ध विराम हेतु प्रयास जारी है। मैं आशा करता हूँ कि वे जनता के बीच राहत पहुँचा सकें तथा स्थायी शांति के लिए अपना योगदान दे सकें। हम प्रार्थना करें कि वार्ता की जो पहल की गयी है वह आशा का फल उत्पन्न करते रहे। माता मरिया शाँति की महारानी हमारे लिए प्रार्थना कर।

संत पापा ने लेसोथो के धर्माध्यक्ष के साथ शांति स्थापना के लिए अपील करते हुए कहा, ″मैं सभी हिंसात्मक कार्यों की निंदा करता हूँ और प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि उनके देश में शांति, न्याय और भाईचारा हो।

संत पापा ने सूचना देते हुए कहा कि इस रविवार इटली के 30 रेडक्रोस स्वयं सेवकों ने ईराक के एरबिल के निकट दोहुक के लिए प्रस्थान किया है। जहाँ वे ईराक के हजारों विस्थापितों की मदद करेंगे। मैं उनकी इस उदारता की सराहना करता हूँ तथा उन सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान करता हूँ।

अंत में संत पापा ने सभी से प्रार्थना का आग्रह करते हुए शुभ रविवार की मंगल कामनाएँ अर्पित की।

Usha Tirkey

ईशमाता मरियम का जन्म दिवस

In Uncategorized on September 8, 2014 at 1:34 pm

वाटिकन सिटी, 08 सितम्बर सन् 2014:

सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया आठ सितम्बर को ईश माता मरियम का जन्म दिवस मनाती है। सन्त अन्ना तथा सन्त योआखिम, धन्य कुँवारी मरियम के, माता पिता थे। प्रेरितिक परम्परानुसार मरियम का जन्म जैरूसालेम स्थित सन्त अन्ना के गिरजाघर के परिसर में हुआ था। एक समय मरियम का माता अन्ना यहीं रहा करती थीं।

आरम्भिक कलीसिया के धर्मतत्ववैज्ञानिक एवं पुरातन कलीसियाई आचार्य सन्त इरेनियुस ने मरियम को “हमारी मुक्ति का कारण” बताया है तथा उनके जन्म का विवरण देते हुए उन्हें “हमारी मुक्ति के उषाकाल” की संज्ञा प्रदान की है। आठ सितम्बर को कलीसिया उसी विशिष्ट जन्म का महोत्सव मनाती है, उस जन्म का जो सम्पूर्ण विश्व में आनन्द लेकर आया।

काथलिक एवं एंग्लिकन कलीसियाओं में यह पर्व आठ सितम्बर को मनाया जाता है। काथलिक एवं एंग्लिकन कलीसियाओं के अलावा पूर्वी रीति की कलीसियाएँ भी मरियम के जन्मदिन को ईश माता मरियम के जन्म दिवस रूप में मनाती है।

कई अन्य पर्वों की तरह ही मरियम का जन्म दिवस महापर्व पूर्व से हम तक आया जहाँ वह छठवीं शताब्दी से ही मनाया जाता रहा था। सिरियाई सन्त पापा सरजियो प्रथम ने, सातवीं शताब्दी में, इस महापर्व का शुभारम्भ रोम में किया। धन्य कुँवारी मरियम के जन्म दिवस हेतु सन्त क्रिज़ोस्तम द्वारा रचित धर्मविधिक प्रार्थना, मरियम की इस प्रकार वन्दना करती हैः “हे ईशमाता! आपके जन्म ने सम्पूर्ण विश्व को आनन्द का सन्देश दिया क्योंकि आपसे ही न्याय के सूर्य, ख्रीस्त हमारे प्रभु, का उदय हुआ। अभिशाप से मुक्त कर उन्होंने हमें विपुल आशीष प्रदान की, मृत्यु को परास्त कर उन्होंने हमें अनन्त जीवन प्रदान किया।”

काथलिक धर्मबहन सि. एलीज़ाबेथ एन क्लिफर्ड के शब्दों मेः “मरियम जिन्हें हम “ईश माता” शीर्षक से सम्बोधित करते हैं, कलीसिया की आदिरूप एवं आदर्श हैं। वे नये जैरूसालेम की परिपूर्णता हैं, तथापि, वे हममें से एक हैं। वे हमारे पहले जा चुकी हैं, वे हमारी मुक्ति का प्रथम फल हैं। हमारे लिये वे ईश योजना में सहयोग देनेवाली सर्वोत्तम आदर्श हैं, उन्हीं का हम अनुसरण करें।

चिन्तनः “मैं प्रभु की दासी हूँ तेरा वचन मुझमें पूरा हो”, आज्ञाकारिता भरे मरियम के इन शब्दों पर हम चिन्तन करें।

Juliet Genevive Christopher

पेरेस एवं हसन के साथ मुलाकात में शांति एवं वार्ता रहा प्रमुख विषय

In Uncategorized on September 5, 2014 at 2:23 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार 05 सितम्बर सन् 2014 (सेदोक): इसराएल के पूर्व राष्ट्रपति शिमोन पेरेस तथा जॉर्डन के राजकुमार अल-हसन-बिन तलाल ने गुरुवार को, वाटिकन में, सन्त पापा फ्राँसिस से बारी-बारी मुलाकात की। वाटिकन प्रेस के प्रवक्ता फादर फेदरीको लोमबारदी ने बताया कि इन मुलाकातों के दौरान लोगों के बीच शांति हेतु वार्ताओं के महत्व को प्रकाशित किया गया।

गुरुवार की मुलाकातों के उपरान्त एक संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से फादर लोमबारदी ने कहा कि इसराएल के पूर्व राष्ट्रपति पेरेस ने सन्त पापा फ्राँसिस को अपनी पहलों से परिचित कराया जिसका लक्ष्य फिलीस्तीनी एवं इसराएली लोगों के बीच वार्ताओं एवं खेलों का आयोजन कर एक दूसरे के प्रति समझदारी उत्पन्न करना है।

उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त, शिमोन पेरेस ने इस बात की ओर ध्यान आकर्षित कराया कि इस युग में लोगों के बीच झगड़ों का आधार राष्ट्रवाद नहीं अपितु धर्म है। धर्म के नाम पर हिंसा और विनाश जारी है इसलिये धर्म का सही अर्थ स्पष्ट किया जाना अनिवार्य है अर्थात् धर्म के यथार्थ, धर्म के अस्तित्व एवं धर्म के लक्ष्य पर लोगों को आलोकित किया जाना अनिवार्य है। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु शिमोन पेरेस ने संयुक्त राष्ट्र संघ के सदृश् “धर्मों के संयुक्त राष्ट्र संघ” का प्रस्ताव रखा।

फादर लोमबारदी ने बताया कि श्री पेरेस के साथ सन्त पापा की बातचीत लगभग 45 मिनटों तक चली। सन्त पापा ने पेरेस की बातों पर ग़ौर किया तथा कहा कि लोगों के बीच पुनर्मिलन एवं शांति की स्थापना हेतु किसी भी पहल को काथलिक कलीसिया एवं परमधर्मपीठ अपना समर्थन देने के लिये कृतसंकल्प है।

जॉर्डन के राजकुमार हसन के साथ सन्त पापा की बातचीत पर फादर लोमबारदी ने बताया कि राजकुमार ने जॉर्डन के अन्तर-धार्मिक न्यास एवं अन्तर-सांस्कृतिक अनुसन्धान केन्द्र के कार्यों पर सन्त पापा को आलोकित किया। राजकुमार हसन द्वारा स्थापित न्यास अन्तरधार्मिक वार्ता एवं शांति की स्थापना को समर्पित है जो युद्ध एवं हिंसा से परिपूर्ण वर्तमान जगत में मानव प्रतिष्ठा एवं धर्मों के महत्व को प्रकाशित करने हेतु एक अति महत्वपूर्ण पहल है।

Juliet Genevive Christopher

प्यार की संहिता

In Uncategorized on September 5, 2014 at 2:23 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 5 सितम्बर 2014 (वीआर सेदोक)꞉ वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मार्था के प्रार्थनालय में संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 5 सितम्बर को पावन ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में प्यार की संहिता हेतु उदार बनने की सलाह दी।

संत पापा ने प्रवचन में कहा कि सुसमाचार एक संदेश है इसलिए कलीसिया में परिवर्तन से न डरें।
उन्होंने कहा कि सुसमाचार नवीन है अतः पुरानी विनाशशील संरचनाओं को दूर करें। उन्होंने कहा कि ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों को कई छोटे-छोटे नियमों का गुलाम नहीं बनना चाहिए किन्तु प्यार के नये नियम के लिए हृदय को खुला रखना चाहिए।

संत पापा ने प्रवचन में येसु द्वारा फ़रीसियों के उस प्रश्न के उत्तर पर चिंतन किया जिसे येसु के शिष्यों द्वारा यहूदी समाज की पुरानी परम्परा का पालन नहीं करने पर उन्होंने किया था।
संत पापा ने कहा, सदूकी अपने सवाल द्वारा येसु को उलझन में डालना चाहते थे किन्तु येसु ने उनकी बातों को समझते हुए स्वयं उनके सम्मुख नयी आज्ञा को रख दिया।

संत पापा ने कहा, ″सुसमाचार आनन्द एवं शुभ समाचार है न कि नियम। जबकि खुद को सहिंता के ज्ञानी समझने वाले उसी नियमों के गुलाम थे, इसीलिए तो संत पौलुस कहते हैं कि हम नियमों की कैद में रखे गये थे।
संत पापा ने याद दिलाया कि ये नियम मूसा द्वारा इस्राइली लोगों को दिये गये थे किन्तु कालांतर में नियम के पंडितों द्वारा कई छोटे-छोटे नियम जोड़ दिये गये जो नियमों के भार ने उन्हें कैद में बंद कर दिया, यही कारण था कि वे स्वतंत्र होना चाहते थे।

संत पापा ने कहा कि उसी गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए पिता ईश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को संसार में भेजा।
संत पापा ने उपस्थित विश्वासियों से कहा, ″आप में से कई यह प्रश्न कर सकते हैं कि क्या ख्रीस्तीयों के लिए कोई नियम नहीं हैं? संत पापा ने कहा निश्चय ही नियम हैं क्योंकि येसु ने कहा है कि मैं नियम को नष्ट करने नहीं किन्तु पूरा करने आया हूँ। पर्वत पर दिए गये प्रभु येसु के आशीर्वचन इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। येसु ने जो सहिंता दी वह प्यार की संहिता है जो हमें स्वतंत्र होने की कृपा प्रदान करती है। आनन्द एवं स्वतंत्रता की संहिता और यही सुसमाचार का संदेश है।

Usha Tirkey

कांदिविदी Invia articolo  

प्रार्थना की अपील

In Uncategorized on September 5, 2014 at 2:22 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 5 सितम्बर 2014 (वीआर सेदोक)꞉ संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 5 सितम्बर को ट्वीट संदेश प्रेषित कर ईराक के लिए प्रार्थना करने की अपील की।

उन्होंने नौ भाषाओं संदेश प्रेषित करते हुए लिखा, ″मैं प्रत्येक दिन उन सभी लोगों के लिए अपनी प्रार्थनाएँ अर्पित करता हूँ जो ईराक में दुख झेल रहे हैं। कृपया आप भी मेरे साथ शामिल हों।″

संत पापा के ट्वीट संदेश को इताली भाषा के अलावा लैटिन, अँग्रेज़ी, स्पानी, पुर्तगाली, फ्रेंच, जर्मन एवं अरबी भाषाओं में प्रेषित किया।

Usha Tirkey

संत पापा ने ‘स्कोलस ऑक्यूरेन्टस’ को सम्बोधित किया

In Uncategorized on September 5, 2014 at 2:21 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 5 सितम्बर 2014 (वीआर अंग्रेजी)꞉ संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 4 सितम्बर को, आर्जेंटीना द्वारा संचालित ‘स्कोलस ऑक्यूरेन्टस’ संगठन की अंतरराष्ट्रीय परियोजना के निर्देशकों की विश्व स्तरीय सभा को सम्बोधित किया।

‘स्कोलस ऑक्यूरेन्टस’ संगठन एक अंतरराष्ट्रीय परियोजना है जो स्कूलों एवं शिक्षा नेटवर्क द्वारा विभिन्न संस्कृतियों तथा धर्मानुयायियों को एक दूसरे से जोड़ती है।
‘स्कोलस’ रोम के ऑलम्पिक स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय शांति हेतु विगत सप्ताह खेले गये मैच के प्रमुख प्रायोजन थे।

संत पापा ने मुलाकात में स्कोलास के निदेर्शकों को उनके सफल प्रयास के लिए बधाईयाँ दी तथा अंतरधार्मिक सम्वाद एवं विभिन्न संस्कृतियों के बीच आदान प्रदान को प्रोत्साहित कर भ्रातृत्व के सेतु बनने हेतु उनकी पहल की सराहना की।

ग़ौरतलब है कि ″स्कोलास″ संगठन शिक्षा के विकास तथा विभिन्न समुदायों में एकता की स्थापना के उद्देश्य से गठित किया गया था जिसमें संत पापा फ्राँसिस ने भी परमधर्माध्यक्ष नियुक्त होने के पूर्व अहम भूमिका निभाई है।

Usha Tirkey

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