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ख्रीस्त में अपने जीवन का निर्माण करें

In Church on September 21, 2014 at 2:51 pm

तिराना, रविवार, 21 सितम्बर 2014 (वीआर सेदोक)꞉ तिराना स्थित मदर तेरेसा प्राँगण में समारोही पावन ख्रीस्तयाग के पश्चात् 21 सितम्बर को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया।

देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं का अभिवादन किया।
उन्होंने कहा, ″मैं यहाँ उपस्थित आप सभी का अभिवादन करता हूँ विशेषकर, युवाओं का। मैं उनसे आग्रह करता हूँ कि वे येसु ख्रीस्त में अपने जीवन का निर्माण करें क्योंकि जो ख्रीस्त में जीवन निर्माण करता वह चट्टान पर अपने जीवन का निर्माण करता है।″

उन्होंने कहा कि येसु हमें पूरी तरह जानते हैं, हमारी गलतियाँ उन से छिपी नहीं है। जब हम पाप करते हैं तो वे हमें सज़ा नहीं देते बल्कि क्षमा प्रदान करते हुए कहते हैं जाओ और कभी पाप नहीं करना।

संत पापा ने युवाओं से कहा, ″प्रिय युवाओ, आप अल्बानिया की नयी पीढ़ी हैं, सुसमाचार की शक्ति एवं शहीदों के उदाहरणों द्वारा आप धन रूपी मूर्ति पूजा को ‘नहीं’ कहना जानते हैं। आप व्यक्तिवाद की गलत स्वतंत्रता का भी इन्कार करना जानते हैं।
आप बुरी अदतों एवं हिंसा का से दूर रहना जानते हैं आप यह भी जानते हैं कि मुलाकात की संस्कृति एवं एकजुटता को किस प्रकार ‘हाँ’ कहा जाता है। यह अत्यन्त सुन्दर है जिसको सच्चाई और भलाई से अलग नहीं किया जा सकता। आप उत्साहपूर्ण जीवन को ‘हाँ’ कहें तथा हर छोटी बात में ईमानदार रहे। इस प्रकार आप आदर्श अल्बानिया और आदर्श विश्व का निर्माण कर पायेंगे।

संत पापा ने कहा हम माता मरिया की ओर दृष्टि लगायें। मैं अल्बानिया की पूरी कलीसिया तथा सभी लोगों को उनके चरणों सिर्पुद करता हूँ। माता मरिया आपको ईश्वर के साथ आशा की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता करें।

Usha Tirkey

ख्रीस्त से मुलाकात द्वारा मानव जीवन का अर्थ प्रकट करें

In Church on September 21, 2014 at 2:51 pm

वाटिकन सिटी, रविवार, 21 सितम्बर 2014 (वीआर सेदोक)꞉ संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 21 सितम्बर को अल्बानिया के मदर तेरेसा प्राँगण में, वहाँ के लाखों श्रद्धालुओं के साथ पावन ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

उन्होंने प्रवचन में संत लूकस रचित सुसमाचार पाठ पर चिंतन किया जहाँ येसु ने 12 प्रेरितों की तरह 72 शिष्यों का चुनाव कर उन्हें विभिन्न गाँवों में सुसमाचार प्रचार हेतु भेजा था।
संत पापा ने कहा कि येसु इस संसार में ईश्वर का प्यार लेकर आये थे तथा वे उसे सभी लोगों में बाटना चाहते हैं। इस योजना को साकार करने हेतु उन्होंने शिष्यों के एक समुदाय का निर्माण किया तथा उन्हें सुसमाचार प्रचार हेतु प्रशिक्षित किया और विभिन्न गाँवों में भेजा। ख्रीस्त के मिशन में जिस प्रकार शिष्यों ने लोगों को, शांति का अभिवादन दिया उसी प्रकार आज मैं भी आप सभी को शांति का अभिदान देता हूँ।

72 शिष्यों के मिशन के फलस्वरूप ख्रीस्तीय समुदाय को हम, सभी युगों में एक मिशनरी रूप में ही पाते हैं। पुनर्जीवित एवं जीवन्त ख्रीस्त ने न केवल बारहों को भेजा किन्तु समस्त कलीसिया को भेजते हैं जिससे कि हम लोगों के बीच जाकर बपतिस्मा प्रदान करें तथा सुसमाचार का प्रचार करें। येसु का शांति संदेश जिसे उनके शिष्यों ने सदियों से आगे बढ़ाया है, किन्तु कई बार उसे लोगों द्वारा अस्वीकृति का भी सामना करना पड़ा है। उन्होंने अपना द्वार बंद कर दिया। संत पापा ने कहा कि कुछ वर्षों पूर्व इस देश का द्वार भी बंद था। लोगों को ईश्वर तथा धर्म पालन की स्वतंत्रता नहीं थी।

संत पापा ने इतिहास की याद करते हुए कहा कि काथलिक, ऑथोडोक्स और मुसलमानों को धर्म के कारण अत्याचार सहना पड़ा, कितने धर्माध्यक्षों, पुरोहितों तथा लोकधर्मियों को अपने विश्वास के कारण शहीद होना पड़ा अतः अल्बानिया एक शहीद स्थल है।
आज अल्बानिया का द्वार खुल चुका है तथा ईश प्रजा के सभी सदस्यों के लिए मिशन को नया प्राण मिला है।

संत पापा ने कहा कि सभी सदस्यों को चाहिए कि वे सुसमाचार प्रचार हेतु समर्पण के आह्वान को सुने तथा अपना उदार साक्ष्य प्रस्तुत करें। समाज में न्याय बनाये रखने एवं मानव जीवन के स्तर को ऊपर उठाये रखने हेतु सभी के साथ एकजुट होकर कार्य करने का उन्होंने परामर्श दिया।

संत पापा ने कहा, ″आज मैं आप सभी के पास आशा को बढ़ावा देने आया हूँ तथा नयी पीढ़ी को यह निमंत्रण देने कि वे ईश वचन द्वारा अपने को पोषित कर लें एवं ख्रीस्त के लिए अपने हृदय के द्वार खोलें जिसके लिए सुसमाचार हमें रास्ता दिखलाता है। आपका विश्वास हर्षित एवं उज्जवल होना चाहिए। ख्रीस्त के साथ मुलाकात द्वारा आप मानव जीवन के अर्थ एवं महत्व को प्रकट कर सकें।

अल्बानियाई कलीसिया को सुसमाचार के प्रति विश्वस्त बने रहने के लिए संत पापा ने हार्दिक धन्यवाद दिया।

Usha Tirkey

सामाजिक एवं आर्थिक विकास की प्रथम शर्त, मानव अधिकार की कद्र

In Church on September 21, 2014 at 2:50 pm

तिराना, रविवार, 21 सितम्बर 2014 (वीआर सेदोक)꞉ अल्बानिया में अपनी प्रेरितिक यात्रा के प्रथम पड़ाव तिराना स्थित राष्ट्रपति भवन में रविवार 21 सितम्बर को संत पापा फ्राँसिस ने अल्बानिया के राष्ट्रपति बुजार निशानी एवं अन्य सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की।
संत पापा ने अल्बानिया में उनके निमंत्रण हेतु उन्हें धन्यवाद दिया तथा राष्ट्र की आजादी के खातिर उनके बलिदान की सराहना की।
उन्होंने कहा, अल्बानिया को पुनः स्थापित होने में एक चौथाई सदी की अवधि पार करनी पड़ी किन्तु उसका पुरस्कार उन्हें स्वतंत्रता के रूप में मिला। इस अनुभव ने अल्बानियाई समाज में भौतिक एवं आध्यात्मिक पुनःनिर्माण द्वारा लोगों को उत्साह और उमंग से भर दिया है तथा दुनिया के अन्य देशों के साथ सहयोग करने का प्रोत्साहन दिया है। स्वतंत्रता की इस खोज ने भविष्य को आशा और विश्वास से देखने तथा देशों के साथ मित्रता बनाने में मदद दी है।
संत पापा ने कहा कि सामाजिक एवं आर्थिक विकास की प्रथम शर्त है मानव अधिकार की कद्र जिसके तहत व्यक्ति को धर्म मानने एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा, ″जब मानव व्यक्ति की प्रतिष्ठा का सम्मान किया जाए, उसके अधिकारों को स्वीकृति एवं सुनिश्चिता प्रदान की जाए तथा उनकी रचनात्मकता तथा क्षमताओं को विकसित होने दिया जाए तब मानव व्यक्तित्व भले कार्यों में प्रस्फुटित होता जो आगे चलकर सार्वजनिक हित में बदल जाता है।″
संत पापा ने अल्बानियावासियों के विभिन्न धर्मानुयायियों एवं संस्कृतियों के बीच विद्यमान आपसी समझदारी एवं एकतापूर्ण भावना की सराहना की।
उन्होंने अल्बानिया के अधिकारियों का अह्वान करते हुए कहा कि जब कभी हिंसा की स्थिति उत्पन्न हो जाये वे ईश्वर के सैनिक बने। कोई भी धर्म मानव प्रतिष्ठा का विरोधाभास न बने विशेषकर जीने और धर्म मानने की स्वतंत्रता के विरूद्ध।

Usha Tirkey

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