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कलीसिया में एकता स्थापित करना प्रत्येक ख्रीस्तीय का दायित्व, सन्त पापा फ्राँसिस

In Church on October 24, 2014 at 2:38 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 24 अक्टूबर सन् 2014 (सेदोक): सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा है कि कलीसिया में एकता स्थापित करना प्रत्येक ख्रीस्तीय का दायित्व है।

शुक्रवार, 24 अक्टूबर को, वाटिकन स्थित सन्त मर्था प्रेरितिक आवास के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पण के अवसर पर प्रवचन करते हुए सन्त पापा ने फिलिप्पियों को लिखे सन्त पौल के पत्र के उस पाठ पर चिन्तन किया जिसमें सन्त पौल शिष्यों से कहते हैं: “मैं, बन्दी, पौलुस आपसे अनुरोध करता हूँ कि आप कलीसिया में एकता का निर्माण करें।”

सन्त पापा ने कहा, “जब किसी मन्दिर का निर्माण करना होता है तब उसके लिये उपयुक्त जगह खोजी जाती है। बाईबिल धर्मग्रन्थ के अनुसार सर्वप्रथम, नींव के पत्थर, कोने के पत्थर को खोजना आवश्यक होता है। कलीसिया की एकता का पत्थर अथवा कलीसिया के कोने का पत्थर हैं येसु ख्रीस्त तथा कलीसिया की एकता का कोने का पत्थर है अन्तिम भोजन कक्ष में की गई प्रभु येसु की प्रार्थना, “पिता, ताकि हम सब एक हो जायें”।

सन्त पापा ने कहा, “येसु ख्रीस्त रूपी नींव के बिना कलीसिया में एकता सम्भव नहीं, वे ही एकता की नींव एवं हमारी सुरक्षा हैं। यही पत्थर कलीसिया की एकता एवं उसकी शक्ति है जिसके निर्माण का प्रत्येक ख्रीस्तीय को सतत् प्रयास करना चाहिये।”

सन्त पापा ने कहा कि परस्पर प्रेम द्वारा एकता का निर्माण किया जा सकता है तथा एकता को बरकरार रखा जा सकता है जिसके लिये विनम्रता, मृदुलता तथा विशाल हृदय की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि हालांकि ऐसा प्रतीत होता है कि विनम्रता, मृदुलता एवं उदार हृदय के गुणों का कोई महत्व नहीं है क्योंकि इनसे व्यक्ति दुर्बल माना जाता है किन्तु इस मन्दिर अर्थात् कलीसिया में हम जितने विनम्र बनते हैं उतने ही हम सशक्त पत्थर बनकर उभरते हैं।

Juliet Genevive Christopher

ग़रीबी दूर करने के लिए असमानता को दूर करना आवश्यक

In Church on October 24, 2014 at 2:37 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार 24 अक्तूबर 2014 (वीआर अंग्रजी)꞉ ″यदि विश्व समुदाय लोगों के बीच निहायत ग़रीबी को दूर करना चाहता है तो इसके लिए वह उनके बीच व्याप्त समस्याओं में एक ही समाधान को लागू न करे। मात्र व्यक्ति की दैनिक उपयोगिता का स्तर बढ़ाने का सवाल नहीं है किन्तु दीर्घकालिक समय में लोगों के बीच विद्यमान असमानता को दूर करना है।″ यह बात परमधर्मपीठ की ओर से संयुक्त राष्ट्रसंघ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष वेर्नारदितो औज़ा ने कही।

निहायत ग़रीबी के निराकरण मुद्दे पर, न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्रसंघ के सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए उन्होंने 23 अक्तूबर को कहा, ″राष्ट्रों को चाहिए कि वे सभी समस्याओं का एक ही समाधान लागू करने के बजाय, प्रमाण पर आधारित सिद्धांतों तथा अत्यन्त गरीबी के निराकरण के अन्य उपायों को विकसित करें।″

उन्होंने ग़ौर किया कि बढ़ती आर्थिक असमानता एक बड़ी आबादी को दरकिनार कर रही है तथा उसे पीछे छोड़ रही है क्योंकि विकास के अवसरों का लाभ उठा पाने के कारण धनी लोग और धनी हो जाते हैं जबकि निर्धनों की स्थिति और बिगड़ती जाती है।

महाधर्माध्यक्ष वेर्नारदितो औज़ा ने कहा कि रिर्पोट के अनुसार विश्व के कई हिस्सों में अधिकत्तर महिलाएँ एवं बच्चे ग़रीबी के शिकार होते हैं। बहुधा देखा जाता है कि पुरूष एवं महिला, बालक एवं बालिका के बीच मौलिक सेवाओं तथा शिक्षा आदि के क्षेत्रों में अंतर किया जाता है।

महाधर्माध्यक्ष ने आशा व्यक्त की कि निहायत ग़रीबी के निराकरण हेतु विश्व समुदाय को व्यावहारिक नीतियों से प्रेरित होगा। ऐसी नीतियों को अपनाया जाना चाहिए जिसमें लोगों को शामिल किया जाए। उनकी कठिनाईयों के प्रति संवेदनशील रहकर केवल योगेयता को मापा नहीं जाए तथा उनका बहिष्कार न किया जाए।

Usha Tirkey

संत पापा ने ‘ऑरियान्ताले लूमेन’के तीर्थयात्रा दल को सम्बोधित किया

In Church on October 24, 2014 at 2:37 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 24 अक्तूबर 2014 (वीआर सेदोक)꞉ वाटिकन स्थित क्लेमेंटीन सभागार में संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 24 अक्तूबर को ‘ऑरियान्ताले लूमेन’ के तत्वाधान में आयोजित ख्रीस्तीय एकतावर्धक तीर्थयात्रा के एक दल से मुलाकात की।

इन्हें सम्बोधित कर संत पापा ने कहा, ″सभी ख्रीस्तीय तीर्थयात्रा एक यात्रा है न केवल भौगोलिक किन्तु उससे भी बढ़कर आंतरिक नवीनीकरण की यात्रा। यह ख्रीस्त हमारे प्रभु की ओर अधिक से अधिक नजदीक जाने की यात्रा है जो विश्वास उत्पन्न करती तथा उसे पूर्णता तक पहुँचा देती है।″

संत पापा ने कहा कि ये आयाम अत्यन्त आवश्यक है जो मेल-मिलाप के रास्ते पर आगे ले चलता तथा सभी विश्वासियों को ख्रीस्त में एक कर देता है। उन्होंने कहा कि सच्ची ख्रीस्तीय एकता वर्द्धक वार्ता मन-परिवर्तन के लिए प्रेरित करता तथा ख्रीस्त एवं उनकी इच्छा के प्रति निष्ठा की मांग करती है।

संत पापा ने तीर्थयात्रियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने संत पापा जॉन पौल द्वितीय एवं संत पापा जॉन 23 वें की संत घोषणा हेतु अनुदान किया जो काथलिक कलीसिया और ऑथोडोक्स कलीसिया के बीच गहन संबंध को प्रोत्साहन प्रदान करता है।

संत पापा ने तीर्थयात्रियों को पनार में उनकी अगली यात्रा हेतु शुभकामनाएँ अर्पित की जहाँ वे कुस्तुनतुनिया के ऑथोडोक्स प्राधिधर्माध्यक्ष बार्थोलोमियो प्रथम से मुलाकात करेंगे।

ज्ञात हो कि रोम के धर्माध्यक्ष संत पापा फ्राँसिस तथा कुस्तुतुनिया के ग्रीक ऑथोडोक्स प्राधिधर्माध्यक्ष बारथोलोमियो प्रथम के बीच मुलाकात के दौरान, परमधर्मपीठ एवं पूर्वी रीति की कलीसिया के बीच एक संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किये जायेंगे तथा दोनों के बीच प्रेम और सच्चाई की भावना में संबंधों को और अधिक मज़बूत किया जाएगा।

संत पापा ने सभी तीर्थयात्रियों को शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

Usha Tirkey

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