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रोपीय संघ के अध्यक्ष संत पापा फ्राँसिस से मिले

In Church on October 31, 2014 at 2:09 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार 31 अक्तूबर, 2014 (सेदोक,वीआर) यूरोपीय संसद के अध्यक्ष मार्टिन शुलत्ज ने बृहस्पतिवार 30 अक्तूबर को वाटिकन के प्रेरितिक प्रासाद में संत पापा फ्राँसिस से मुलाक़ात की।
यूरोपीय संसद के अध्यक्ष की यह मुलाक़ात एक निजी भेंट थी पर अगले महीने स्ट्रसबर्ग में दोनों नेताओं की मुलाक़ात के मद्देनज़र यह बहुत महत्वपूर्ण थी।
मालूम हो कि संत पापा नवम्बर माह में यूरोपीय संघ की संयुक्त सभा को संबोधित करेंगे। पिछले वर्ष यूरोपीय संघ के अध्यक्ष संत पापा जोन पौल द्वितीय की यूरोपीय संसद में सन् 1988 ईस्वी के संबोधित करने 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर वाटिकन आये थे और संत पापा फ्राँसिस से भी मुलाक़ात की थी।
उसी मुलाक़ात में अध्यक्ष महोदय ने एक पुस्तक भेंट की थी और उसके सम्पादकीय में लिखा था कि उन्हें प्रसन्नता होगी यदि उन्हें संत पापा फ्राँसिस की दूरदर्शिता, सहयोग और आशा से पूर्ण शब्द सुनने का अवसर प्राप्त हो।
विदित हो कि उसी मुलाक़ात में यूरोपीय संघ के अध्यक्ष मार्टिन ने संत पापा को यूरोपीय पार्लियामेंट को संबोधित करने का आमंत्रण दिया था।
संत पापा फ्राँसिस 25 नवम्बर को यूरोपीय संघ की आम सभा को संबोधित करेंगे और इसके तुरन्त बाद वे कौंसिल को भी संबोधित करेंगे।
विदित हो संत पापा के साथ अपनी पहली मुलाक़ात में यूरोपीय संसद के अध्यक्ष मार्टिन इस बात की इच्छा व्यक्त की थी कि भूमध्यसागर क्षेत्र के आप्रावासियों की सुरक्षा, गरीबी उन्मुलन, समाज से बहिष्कृत किये जाने तथा युवाओं की स्थिति सुधारने जैसे मुद्दों के लिये संयुक्त रूप से कदम उठायेंगे।
संत पापा फ्राँसिस से मुलाक़ात के बारे में जानकारी देते हुए अध्यक्ष महोदय ने कहा कि यूरोपीय संसद के लिये यह एक अद्वितीय पल होगा।
उन्होंने बताया कि संत पापा के साथ उन्हें वर्त्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के बारे में चर्चा की।

Justin Tirkey

प्रेम के अभाव में नियमपालन अपूर्ण

In Church on October 31, 2014 at 2:08 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार 31 अक्तूबर, 2014 (सेदोक,वी.आर) संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 31 अक्तूबर को वाटिकन स्थित सान्ता मार्था अतिथिनिवास के प्रार्थनालय में यूखरिस्तीय बलिदान अर्पित करते हुए अपनी प्रवचन में जो ज्ञान प्रेम से प्रेरित होकर विवेकपूर्ण निर्णय तथा पूर्णता की बढ़ता है वहीं पवित्रता, मुक्ति और येसु मसीह को प्राप्त करता है।
संत पापा ने कहा कि यही वह रास्ता है जिसे येसु मसीह हम सबको बतलाना चाहते हैं जो फरीसियों या वकीलों के ठीक विपरीत है। और यही है नियम का सही अर्थ। ऐसा करने ने व्यक्ति ईश्वर तक पहुँचता है और नियम मात्र पर आसक्त नहीं रह जाता है।
जो व्यक्ति सिर्फ़ नियम पर अपना ध्यान केन्द्रित करता है स्वार्थी बनता, घमंड करता और अंधकार में भटक जाता है।
संत पापा ने कहा कि प्रेम नियम मात्र पर भरोसा नहीं करता पर आशा का दरवाज़ा खोल देता है। कुछ ऐसे ख्रीस्तीय हैं जो नियम के प्रति वफ़ादार रहते और न्याय और प्रेम का तिरस्कार करते। ऐसे लोग प्रेम और न्याय से दूर भटक जाते हैं क्योंकि नियम प्रेम है नियम के अक्षर नहीं।
संत पापा ने कहा कि प्रेरित संत पौल फिलीप्पियों को लिखे अपने पत्र में कहते हैं कि हमें चाहिये कि हम अपनी ईमानदारी और निष्ठा से विवेकपूर्ण निर्णय करें और नियम का पालन सप्रेम करें।
संत पापा ने कहा कि इसी पथ को दिखलाने के लिये येसु मनुष्य बने ताकि हमें बचायें और उनको बचायें जो ज़रूरतमंद हैं।
ईश्वर चाहते हैं कि ढोंगी नहीं पर येसु के समान सप्रेम लोगों के लिये कार्य करें और उनके हित के लिये दुःख उठायें जैसा कि उन्होंने किया।

Justin Tirkey

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संस्कृतिकरण के प्रेरितिक पक्षों पर चिन्तन

In Church on October 31, 2014 at 2:06 pm

चेन्नई, शुक्रवार 31 अक्तूब, 2014 (उकान) मद्रास मैलापूर के महाधर्माध्यक्ष जोर्ज अन्तोनसामी ने भारतीय ईशशास्त्रियों से आग्रह कि या है कि वे भारतीय ख्रीस्तीय समुदाय के लिये संस्कृतिकरण की प्रेरितिक पक्षों पर चिन्तन करें और विचार दें।

महाधर्माध्यक्ष जोर्ज ने उक्त बात उस समय कहीं जब उन्होंने चेन्नई स्थित ध्यानाश्रम में इंडिया थियोलोजिकल असोसिएशन में की सभा का उद्घाटन किया।

भारतीय ईशशास्त्रियों की सभा ने नयी ईशशास्त्र की संस्कृति विषय पर विचार-विमर्श किया।
सभा के अध्यक्ष फादर अन्तोनी कलियथ ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज ज़रूरत है एक ऐसी नयी ईशशास्त्र की जो स्थानीय कलीसिया के साथ-साथ सार्वभौमिक कलीसिया की सेवा करे।

सभा में भाग लेनेवाले प्रतिनिधियों ने इस बात पर बल दिया कि थियोलॉजी के लिये ज़रूरी है संदर्भ।

सभा में उपस्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रोफेसर ए. मार्क्स ने सभा में संदर्भ का विश्लेषण किया। जेस्विट फादर रूदी हेरेदिया ने इस क्षेत्र में धर्म के महत्व और आम आदमी की भूमिका की चर्चा की।

इस सभा में कई अन्य ईशशास्त्रियों के अलावा लेखक और कार्यकर्ता सुश्री बामा, श्री सुन्दराजन, डॉक्टर कोचुरानी तथा डॉ. एस बासुमात्री भी उपस्थित थीं।

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