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भारत के चार हज़ार लोग वाटिकन में

In Church on November 22, 2014 at 4:22 pm

कोची, शनिवार, 22 नवम्बर 2014 (ऊकान)꞉ केरल के समाज सुधारक धन्य फादर चावरा एलियस कुरियाकोस तथा सेक्रेट हार्ट ऑफ जिसेस धर्मसमाज की धर्मी महिला धन्य यूफ्रासिया की, वाटिकन में, संत पापा फ्राँसिस द्वारा संत घोषणा के प्रत्यक्षदर्शी बनने हेतु भारत से, करीब चार हज़ार लोगों के वाटिकन आने का अनुमान किया जा रहा है।

सिरो मलाबार कलीसिया के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल जोर्ज अलेनचेरी ने कहा, ″भारत की प्रथम महिला संत सिस्टर अल्फोंसा की संत घोषणा के छः वर्षों बाद दो महात्माओं को संत घोषित किया जा रहा है।″ ये दोनों ही संत सिरो मलाबार कलीसिया के सदस्य हैं।

कार्मेलाइटर्स ऑफ मेरी इमाकुलेट धर्म समाज के जनसंपर्क अधिकारी फादर रोबिन कन्नानचिरा ने ऊका समाचार से कहा, ″हमारा अनुमान हैं कि भारत से करीब चार हज़ार लोग वाटिकन आ रहे हैं तथा यूरोप में कार्यरत सैकड़ों पुरोहित एवं धर्मबहनें भी इस समारोह में भाग लेंगे।″

उन्होंने कहा कि सामाजिक विचारकों एवं इतिहासकारों के अनुसार धन्य चावरा 19 वीं सदी में केरल के एक अग्रणी समाज सुधारक थे जहाँ जाति प्रथा, भेदभाव और व्यापक अंधविश्वास जैसी सामाजिक बुराइयाँ घर कर गयी थीं।

कार्मेलाइटर्स ऑफ मेरी इमाकुलेट धर्म समाज की परमाधिकारिणी सिस्टर कोलाथ ने कहा, ″धन्य सिस्टर यूफ्रासिया धर्मसमाज की उन बहनों में से थीं जिन्होंने धर्ममसाज की शुरूआत कीं तथा वे एक मिस्टिक थी याने रहस्यमय तरीके से दिव्य दर्शन प्राप्त करती थी।
उनके जीवन काल में लोग उनसे सलाह लेने आते थे तथा उनके जीवन से प्रेरणा प्राप्त करते थे।

Usha Tirkey

कलीसिया में 6 नये संत

In Church on November 22, 2014 at 4:21 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 22 नवम्बर 2014 (वीआर सेदोक)꞉ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में, संत पापा फ्राँसिस रविवार 23 नवम्बर को ख्रीस्त राजा महापर्व के अवसर पर, 6 नये संतों की घोषणा करेंगे।

समारोही ख्रीस्तयाग रोम समयानुसार 10.30 बजे आरम्भ होगा।

उन छः संतों के नाम इस प्रकार हैं- 1.जोवान्नी अंतोनियो फरिना 2. कुरियाकोस एलियस चावरा 3. लुदविगो दा कसोरिया 4.निकोला दा लोंगाबारडी 5.यूफ्रासिया एलवतिंगल और 6.अमातो रोंकोली।
संत पापा फ्राँसिस वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में उन्हें संत घोषित कर उनके आदर्श जीवन को हमारे सम्मुख प्रस्तुत करेंगे।

भारत के केरल राज्य से संत कुरियाकोस एलियस चावरा तथा संत यूफ्रासिया एलवतिंगल सिरो मलाबार कलीसिया के सदस्य हैं।

Usha Tirkey

प्रेरिताई ख्रीस्तीयों का कर्तव्य

In Church on November 22, 2014 at 4:20 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 22 नवम्बर 2014 (वीआर सेदोक)꞉ संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 22 नवम्बर को वाटिकन स्थित पौल षष्टम सभागार में मिशनरी के सहयोग हेतु राष्ट्रीय कार्यालय द्वारा आयोजित इटली के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन तथा परमधर्मपीठीय मिशन सोसाईटी के संयुक्त सम्मेलन के सदस्यों से मुलाकात की।

इटली के चौथे राष्ट्रीय मिशनरी सम्मेलन की विषयवस्तु है, ″उठो निन्हवे जाओ।″
संत पापा ने उन्हें सम्बोधित कर कहा कि सम्मेलन की विषय वस्तु प्रभु द्वारा नबी जोना को निन्हवे प्रेषित किये जाने पर आधारित है। नबी जोना उस बड़े शहर निन्हवे जाने से घबराने के कारण, आरम्भ में ईश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया किन्तु बाद में वह गया और निन्हवे के लोगों ने मन-परिवर्तन किया। संत पापा ने कहा कि मिशनरियों की बुलाहट सभी पीढ़ियों में हुई है।

संत पापा ने अपने प्रेरितिक प्रबोधन इवन्जेली गौदियुम की याद दिलाते हुए कहा कि उसमें कलीसिया से बाहर आने की बात पर जोर दी गयी है। जो व्यक्ति मुलाकात करने से नहीं डरता वही बाहर आ सकता है तथा सुसमाचार के आनन्द को बांट सकता है।

संत पापा ने इटली के चौथे राष्ट्रीय मिशनरी सम्मेलन को उनके मिशनरी मनोभाव के लिए उन्हें धन्यवाद दिया तथा उस मनोभाव को बनाये रखने का प्रोत्साहन दिया। उन्होंने कहा कि प्रेरिताई ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों का कर्तव्य है।

संत पापा ने इटली उन पुरोहितों तथा लोकधर्मियों की सराहना की जो दुनिया के विभिन्न देशों में मिशनरी बन कर गरीबों एवं असहाय लोगों की सेवा द्वार, कलीसिया के निर्माण का कार्य कर रहे हैं। यह कलीसिया के लिए एक बड़ा उपहार है। सुसमाचार द्वारा दुनिया को बदलने की आशा न खोयें। हम यह याद रखें कि कई लोग हमारी दया तथा सहानुभूति की आस में हैं।

संत पापा ने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे मिशनरी मनोभाव में बढ़े, अपने समर्पण दृढ़ बने रहें।
उन्होंने कहा कि बाहर जाने का अर्थ ग़रीबों के प्रति उदासीनता, युद्ध, हिंसा, वयोवृद्धों का परित्याग, जरूरतमंदों की अनदेखी तथा बच्चों से अपने को अलग रखना नहीं है। बाहर निकलने का अर्थ है शांति का वाहक बनना। उस शांति को बांटना जिसे हमें प्रभु रोज प्रदान करते हैं। एक मिशनरी कभी शांति नहीं खोता है, ऐसे समय में भी जब उसे कठिनाईयों एवं अत्याचारों का सामना करना पड़े।

संत पापा ने उन्हें मिशन के उत्साह में बढ़ने तथा ख्रीस्त के प्रेम एवं करुणा का साक्ष्य देने की शुभकामनाएँ अर्पित की।

Usha Tirkey

कांदिविदी Invia articolo

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