Vatican Radio HIndi

अंतर्राष्ट्रीय कैथोलिक बाल ब्यूरो के सदस्यों से संत पापा ने मुलाकात की

In Church on April 12, 2014 at 2:19 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 12 अप्रैल 2014 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने 11 अप्रैल को वाटिकन स्थित क्लेमेंटीन सभागार में अंतर्राष्ट्रीय कैथोलिक बाल ब्यूरो (वीआईसीए) के सदस्यों से मुलाकात कर, यौन शोसन के अपराधी पुरोहितों द्वारा की गयी क्षति के लिए क्षमा माँगी।
संत पापा ने कहा, ″मैं व्यक्तिगत रूप से उन पुरोहितों के अपराध के लिए माफी माँगता हूँ जिन्होंने बच्चों के यौन शोषण द्वारा उन्हें गहन क्षति पहुँचायी है। कलीसिया इस क्षति के प्रति सचेत है। यह व्यक्तिगत एवं नैतिक क्षति है जो कलीसिया द्वारा करार दिया गया है। इस समस्या के समाधान हेतु उठाये गये कदम से हम पीछे नहीं हटेंगे क्योंकि बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए।″
मालूम हो कि बीआईसीए एक ग़ैरसरकारी काथलिक संगठन है जो विश्व व्यापी स्तर पर बच्चों के अधिकार एवं प्रतिष्ठा हेतु कार्यशील है।
संत पापा ने माता-पिता के कर्तव्यों पर भी प्रकाश डालते हुए उन्हें कहा, कि ″माता-पिता अपने बच्चों के नैतिक एवं धार्मिक शिक्षा के लिए उत्तरदायी हैं तथा वे उनके लिए सभी प्रकार के ‘शैक्षणिक प्रयोग’ का बहिष्कार कर सकते हैं।″
संत पापा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे का परिवार में अपने पिता-माता के साथ विकसित होने का पूरा हक है जो बच्चों के विकास हेतु उचित वातावरण एवं भावनात्मक परिपक्वता प्रदान कर सकते हैं।
संत पापा ने आह्वान किया कि आधुनिकता के नाम पर बच्चों एवं युवाओं के साथ ‘शैक्षणिक प्रयोग’ न किया जाए जो उन्हें भ्रष्ट विचारों के लिए मजबूर करता है।
संत पापा ने बी आई सी ए के सदस्यों से आग्रह किया कि वे बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु सच्चे मानवविज्ञान प्रशिक्षण को प्रोत्साहन दें जिससे बच्चों एवं युवाओं को सम्प्रेषण माध्यमों द्वारा आधुनिक संस्कृति की चुनौतियों से संघर्ष कर, मानव की सच्ची गरिमा को अपनाने में मदद मिल सके।

Usha Tirkey

येसु का पवित्र क्रूस

In Church on April 12, 2014 at 2:18 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार 12 अप्रैल, 2014 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 12 अप्रैल को को 9 भाषाओं में ट्वीट संदेश प्रेषित कर येसु के प्रेम से सराबोर होने का उपाय बतलाया।
उन्होंने इतालवी भाषा में लिखा, ” प्रभु की कृपा प्राप्त करने के लिए येसु के पवित्र क्रूस के नीचे उपस्थित होना कितना अच्छा है जिससे कि हम उनके प्रेम से सराबोर हो जायें।”
संत पापा फ्राँसिस के ट्वीट संदेश को इतालवी भाषा के अलावा अंग्रेजी, स्पेनिश, पॉलिश, जर्मन, पुर्तगाली, लैटिन तथा अरबी भाषाओं में भी प्रेषित किया गया।
वाटिकन रेडियो में हिन्दी सहित करीब 35 अन्य भाषाओं में भी संत पापा के ट्वीट का अनुवाद कर प्रसारित किया गया।

Usha Tirkey

कांदिविदी Invia articolo

चिकित्सा सेवा में व्यापक देखभाल की आवश्यकता

In Church on April 12, 2014 at 2:18 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 12 अप्रैल 2014 (वीआर सेदोक): वाटिकन स्थित क्लेमेन्टीन सभागार में 12 अप्रैल को संत पापा फ्राँसिस ने इटालियन कैंसर चिकित्सा विज्ञान सम्मेलन में भाग ले रहे सदस्यों से मुलाकात की।
ला सपीयेंसा विश्वविद्यालय एवं संत अन्ड्रू अस्पताल के तत्वाधान में इताली कैंसर चिकित्सा का सम्मेलन आयोजित किया गया था।
संत पापा ने उनसे कहा, ″वैज्ञानिक अनुसंधान ने कई बीमारियों की चिकित्सा एवं रोक-थाम की संभवनाओं को बढ़ा दिया है। इस कार्य से संलग्न बेहतर मूल्यों के प्रति समर्पित, आप विश्वभर के रोगियों की आशाओं एवं अपेक्षाओं को पूरा करते हैं।″
संत पापा ने सचेत करते हुए कहा, ″किन्तु रोगियों के पूर्ण स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए मानव की मर्यादा को न भूले कि वह ईश्वर का प्रतिरूप है। व्यक्ति आत्मा एवं शरीर का संगम है। इन दोनों तत्वों की अलग पहचान की जा सकती है किन्तु इन्हें एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है क्योंकि दोनों तत्वों के एक होने से ही पूर्ण व्यक्ति बनता है अतः शारीरिक पीड़ा न केवल शरीर किन्तु उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व को प्रभावित करती है। इस प्रकार, चिकित्सा सेवा में व्यापक देखभाल की आवश्यकता है जो रोगी तथा उसके परिवार वालों की मनोवैज्ञानिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक रूप से मदद कर सके।
भाईचारे का व्यवहार, रोगी को मानव जीवन की सच्ची सुन्दरता को पहचानने और अपनी कमजोरियों को जानने में मदद करता है जिसके द्वारा व्यक्ति, मानव प्रतिष्ठा एवं जीवन के अर्थ को हर परिस्थिति में पहचानने के लिए सक्षम हो जाता है।
संत पापा ने ख्रीस्त के दुःखभोग की याद दिलाते हुए कहा कि कल से पवित्र सप्ताह की शुरूआत हो रही है जिसकी चरम सीमा है येसु का दुःखभोग, मृत्यु एवं पुनरूत्थान जिसमें हम पाते हैं कि मानव पीड़ा, ईश्वर के प्यार में, येसु द्वारा हर लिया गया है। अपने दैनिक जीवन के कार्यों में क्रूसित ख्रीस्त एवं उनके क्रूस के नीचे दुखों की माता मरिया को निहारें। वे समस्त मानव जाति की माता हैं। वे हमेशा अपने बच्चों के करीब रहतीं, विशेषकर, बीमार बच्चों के नज़दीक।

Usha Tirkey

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 63 other followers

%d bloggers like this: