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बेसलान को सन्त पापा ने भेजा पत्र

In Uncategorized on September 1, 2014 at 1:41 pm

वाटिकन सिटी, 01 सितम्बर सन् 2014 (आन्सा): रूस के ओसेत्सिया नगर स्थित बेसलान में चेचेन के विद्रोहियों दवारा मारे गये स्कूली बच्चों एवं शिक्षकों के नरसंहार की दसवीं बरसी पर सन्त पापा फ्राँसिस ने गहन दुःख व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों को एक पत्र प्रेषित किया है।

इटली के ब्रेश्या से प्रकाशित एक दैनिक के अनुसार सन्त पापा का शोक पत्र बेसलान के लोगों को इताली काथलिक पुरोहित फादर पाओलो दे कार्ली द्वारा अर्पित किया जायेगा।

उत्तरी रूस के ओसेत्सिया नगर के बेसलान स्थित स्कूल पर सन् 2004 की पहली सितम्बर को चेचेन के इस्लामी विद्रोहियों ने हमला कर शिक्षकों सहित 1,200 छात्रों को बन्धक बना लिया था। तीन सितम्बर तक स्कूली बच्चे चेचेनी इस्लामी विद्रोहियों के अधीन बन्धक बने रहे तथा बाहर उनके माता पिता एवं परिजन आतुरता से उनके बाहर निकलने की राह देखते रहे थे।

03 सितम्बर 2004 को रूसी सेना के विशिष्ट सैन्य बल के हस्तक्षेप में बन्धकों एवं विद्रोहियों में 331 की हत्या हो गई थी जबकि 700 लोग घायल हो गये थे।

फादर पाओलो दे कार्ली ने इन वर्षों में इटली के त्रेन्तो स्थित अपनी पल्ली में बेसलान नरसंहार से प्रभावित 63 पीड़ितों को आतिथेय प्रदान किया है इसीलिये पत्र अर्पित करने हेतु सन्त पापा ने उनका चयन किया है। सन्त पापा ने इस सन्दर्भ में फादर दे कार्ली से टेलेफोन पर बातचीत की थी।

Juliet Genevive Christopher

निरुत्साहित ख्रीस्तीयों से मिलना विषादपूर्ण

In Uncategorized on September 1, 2014 at 1:41 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 1 सितम्बर 2014 (वीआर सेदोक)꞉ संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 31 अगस्त को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में उपस्थित भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा,
अति प्रिय भाइयो एवं बहनो,
सुप्रभात,
संत मती रचित रविवारीय सुसमाचार पाठ में आज हम उस महत्वपूर्ण बिंदु पर पहुँचते हैं जहाँ येसु खुद के मसीह एवं ईश्वर के पुत्र होने पर पेत्रुस एवं अन्य 11 शिष्यों के विश्वास को परखने के बाद स्पष्ट रूप से प्रकट करना आरम्भ करते हैं कि उन्हें येरूसालेम जाना, दुःख भोगकर मर जाना तथा तीसरे दिन जी उठना होगा।″ (मती.16꞉21)

यह एक महत्वपूर्ण समय था जिसमें येसु के विचार एवं शिष्यों के विचार में स्पष्ट अंतर दिखाई पड़ता है। पेत्रुस तो इतना आवेश में आ जाता है कि येसु को भी फटकार लगाने से नहीं चूकता, क्योंकि उसके अनुसार, मसीह की मृत्यु इतनी शर्मनाक नहीं हो सकती। इसके प्रत्युत्तर में येसु उसे जोर से फटकारते तथा उसे सही रास्ते पर लाते हैं क्योंकि पेत्रुस का विचार ईश्वर के अनुसार नहीं था। पेत्रुस को यह एहसास नहीं हुआ था कि वह शैतान के प्रलोभन में पड़कर बोल रहा था।″

संत पापा ने जोर देते हुए कहा, ″इस रविवारीय धर्मविधिक पाठ में प्रेरित संत पौलुस रोम के ख्रीस्तीयों को लिखते हैं और बतलाते हैं कि ″आप इस संसार के अनुकूल न बनें, बल्कि सब कुछ नयी दृष्टि से देखें और अपना स्वभाव बदल लें। इस प्रकार आप जान जायेंगे कि ईश्वर क्या चाहता है और उसकी दृष्टि में क्या भला, सुग्राह्य तथा सर्वोत्तम है।″ (रोम.12,2)

वास्तव में, हम ख्रीस्तीय धर्मानुयायी संसार में समाज एवं संस्कृति की वास्तविकता में पूर्ण रूप से संघटित होकर जीते हैं और यह आवश्यक भी है किन्तु यह हमारे लिए भौतिकवादी बनने की जोखिम पैदा करता है। एक ऐसा जोखिम जो नमक को फीका कर सकता है, उदाहरणार्थ, प्रभु एवं
पवित्र आत्मा द्वारा प्राप्त कृपा को ख्रीस्तीय खो बैठते हैं। इसके विपरीत, जब ख्रीस्तीय धर्मानुयायी सुसमाचार की शक्ति से संचालित होते हैं तो उनके न्याय करने के मानदंड, मूल्यों के निर्धारण, रूचि, विचार की दिशाएँ, प्रेरणा के स्रोत तथा जीवन के मक़सदों में परिवर्तन आता है। (पौल षष्ठम, एवनजेली नूनतियांदी- 19)
संत पापा ने कहा, ″निरुत्साहित ख्रीस्तीयों से मिलना विषादपूर्ण है वे उन्नत प्रतीत होते हैं किन्तु यह अस्पष्ट है कि वे ख्रीस्तीय हैं अथवा दुनियावी, उसी प्रकार जिस प्रकार पानी से मिश्रित दाखरस से मालूम ही नहीं होता कि वह पानी है या दाखरस। यह जानकर दुःख होता है कि ख्रीस्तीय पृथ्वी के नमक नहीं रह जाते हैं। हम जानते हैं कि जब नमक अपना स्वाद खो देता है तो वह बेकार हो जाता है। नमक अपना स्वाद खो देता है क्योंकि उनमें सांसारिकता घर कर जाती है जो भौतिक है इसलिए, यह आवश्यक है कि सुसमाचार से प्रेरित होकर नवीनीकरण को जारी रखा जाए।
संत पापा ने कहा कि इस बात को किस प्रकार व्यावहारिक बनाया जा सकता है? उन्होंने कहा, प्रतिदिन सुसमाचार का पाठ एवं उस पर मनन-चिंतन करने के द्वारा, जिससे कि ईश वचन हमारे जीवन में उपस्थिति रहे। संत पापा ने याद दिलाते हुए कहा कि अपने साथ सुसमाचार की एक प्रति रखना तथा हर दिन उसका पाठ करना न भूलें।

पर्यटन पंचाग में महान काथलिक घटना

In Uncategorized on September 1, 2014 at 1:40 pm

गोवा, 01 सितम्बर सन् 2014 (ऊका समाचार): गोवा के पर्यटन पंचाग में काथलिक धर्म की महान घटना, सन्त फ्राँसिस ज़ेवियर के अवशेषों के सार्वजनिक प्रदर्शन से सम्बन्धित समारोहों को भी शामिल किया गया है।

श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ स्पेन के महान सन्त फ्राँसिस ज़ेवियर के अवशेषों का सार्वजनिक प्रदर्शन दस साल में एक बार आयोजित किया जाता है। इस दौरान सम्पूर्ण भारत एवं विदेशों से भी तीर्थयात्री गोवा के प्राचीन महागिरजाघर में प्रतिष्ठित सन्त के अवशेषों के दर्शन करते हैं।

पर्यटन और संस्कृति सम्बन्धी केन्द्रीय मंत्री श्रीपद नाईक ने रविवार को कहा कि गोवा में सन्त फ्राँसिस ज़ेवियर के अवशेषों की प्रदर्शनी इस वर्ष की एक भव्य धार्मिक घटना है जिसे गोवा के पर्यटन पंचागं में स्थान दिया जायेगा।

राज्यपाल मृदुला सिन्हा के शपथ ग्रहण के मौके पर बोलते हुए नाइक ने यह भी कहा कि पर्यटन मंत्रालय काथलिक सन्त से सम्बन्धित इस भव्य घटना के आयोजन एवं संचालन के लिये आंशिक आर्थिक सहायता भी प्रदान करेगा जिसमें हज़ारों विदेशियों सहित कम से कम पचास लाख तीर्थयात्रियों के आने का अनुमान है।

केन्द्रीय मंत्री नाईक ने कहा कि यदि गोवा सरकार को इस भव्य धार्मिक घटना के आयोजन के लिये और किसी प्रकार की मदद चाहिये तो उसका प्रबन्ध भी केन्द्र करेगा।

काथलिक सन्त फ्राँसिस ज़ेवियर के अवशेषों का सार्वजनिक प्रदर्शन गोवा के प्राचीनतम महागिरजाघर में 22 नवम्बर सन् 2014 से 04 जनवरी सन् 2015 तक जारी रहेगा।

Juliet Genevive Christopher

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