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48 वें विश्व शांति दिवस का संदेश

In Church on August 21, 2014 at 1:42 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 21 अगस्त 2014 (वीआर सेदोक)꞉ वाटिकन ने 21 अगस्त को 48 वें विश्व शांति दिवस की विषयवस्तु प्रकाशित कर दी।


48 वें विश्व शांति दिवस की विषयवस्तु है, ″दास कोई नहीं किन्तु सभी एक-दूसरे के भाई बहन″
हालांकि बहुत सारे लोगों की धारणा है कि दास प्रथा बीती बात है, किन्तु यह प्रथा आज भी जारी है।


पिछले साल विश्व शांति दिवस का शीर्षक था भ्रातृत्व, शांति का आधार एवं मार्ग।″
ईश्वर की संतान होने के नाते भाई-बहन के रूप में सभी एक ही प्रतिष्ठा के सहभागी हैं।
48 वें विश्व शांति दिवस हेतु संदेश में कहा गया है कि दास प्रथा मौलिक बिरादरी पर प्रहार करती है साथ ही शांति पर भी। शांति का राज तभी स्थापित हो सकता है जब प्रत्येक व्यक्ति अन्य व्यक्ति को भाई या बहन के रूप में समान प्रतिष्ठा की दृष्टि से देख सके।
विश्व में आज कई निकृष्ट प्रकार की दास प्रथा विद्यमान है जैसे- मानव तस्करी, विस्थापितों एवं वेश्याओं का व्यापार, शोषण, बंधुआ मज़दूरी तथा बच्चों एवं महिलाओं को बंधक बनाया जाना आदि।
लज्जा की बात ये है कि संसार में कई निजी एवं दलों के लोग इस प्रथा का लाभ उठाते हैं। वे खुद के नीच काम के लिए विश्व में चल रहे संघर्षों, आर्थिक संकट एवं बुराईयों द्वारा फायदा उठाते हैं।
दास प्रथा वर्तमान समाज के शरीर पर एक भयंकर खुला घाव है, ख्रीस्त के शरीर पर एक अत्यन्त पीड़ा दायक घाव।
संत पापा ने अपने संदेश में दास प्रथा को खत्म करने के कारगर उपाय के रूप में बतलाया है कि प्रत्येक व्यक्ति की अनुल्लंघनीय मानव प्रतिष्ठा को पहचाना जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि मजबूत भ्रातृत्व शक्ति द्वारा मानव प्रतिष्ठा को स्वीकार किया जा सकता है।


भ्रातृत्व किसी भी प्रकार की असमानता का बहिष्कार करती यह मांग करती है कि हम एक दूसरे के साथ सामीप्य एवं उदारता का बर्ताव करें।
इस प्रकार सभी स्वतंत्रता एवं सहभागिता का एहसास कर सकें।
संत पापा ने अपने संदेश में बल दिया है कि उनका उद्देश्य है ऐसी सभ्यता की स्थापना करना जहाँ लोगों के बीच किसी प्रकार का भेदभाव न हो तथा सभी को समान प्रतिष्ठा प्राप्त हो। इस उद्देश्य की प्राप्ति संप्रेषण, शिक्षा तथा संस्कृति के प्रति समर्पण की मांग करता है जिसे एक नवीकृत समाज का निर्माण हो सके तथा स्वतंत्रता, न्याय और शांति स्थापित हो सके।


विश्व शांति दिवस की स्थापना संत पापा पौल 6 वें द्वारा हुई थी तब से यह प्रत्येक साल 1 जनवरी को मनाया जाता है। संत पापा का यह संदेश सभी विदेश मंत्रियों को प्रेषित कर दिया गया है।

Usha Tirkey

संत पापा ने नाजरेथ ओपेरा के प्रतिनिधियों से मुलाकात की

In Church on August 21, 2014 at 1:39 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 21 अगस्त 2014 (वीआर सेदोक)꞉ वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास दोमुस संता मार्था में 20 अगस्त को संत पापा फ्राँसिस ने कार्डिनल जॉन लुइस तौरान तथा नाजरेथ ओपेरा के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उन्हें प्रोत्साहन दिया।
उन्होंने संदेश में कहा, ″मैं आपके इतिहास की प्रमुख बातों को उजागर करना चाहता हूँ जो महत्वपूर्ण हैं तथा जिनसे मैं प्रभावित हूँ।


संत पापा ने कहा, ″आपका कार्य है येसु की खोज मानव के मार्ग रूप में करना। यह एक ऐसा मार्ग है जो अन्य सभी मार्गों से भिन्न है। येसु ने कहा था, ″मैं मार्ग हूँ।″ (यो.14꞉6)
संत पापा ने कहा कि यह मार्ग कहाँ ले जाता है? उन्होंने स्वयं उत्तर देते हुए कहा कि यह पिता के पास ले जाता है। ईश्वर से मिलने, उनसे मित्रता स्थापित करने तथा उनके अति करीब आने हेतु मनुष्यों के लिए येसु एक खुले मार्ग हैं।


उन्होंने कहा, ″हम तब पूर्ण हो जायेंगे जब हम पूरी तरह पिता के पुत्र-पुत्रियाँ बन जायेंगे जिसके लिए येसु ने क्रूस पर अपना बलिदान अर्पित कर दिया।″
इसका दूसरा पक्ष ये है कि जब कोई व्यक्ति येसु की पहचान एक मार्ग के रूप में कर लेता है तब उसका जीवन आनन्द से भर जाता है।
संत पापा ने कहा कि यह आनन्द हमारे अंतःस्थल में आरोपित कर दिया गया है जिसे कोई नहीं हटा सकता।
उन्होंने कहा कि येसु के शिष्य होने का आनन्द साक्ष्य देने के मिशन में है जिसे आप बुद्धिमत्ता, विनम्रता एवं सहज भाव से पूरा कर रहे हैं। मैं आपको धन्यवाद देता हूँ तथा आपके कार्यों को आगे बढ़ाने हेतु प्रोत्साहन देता हूँ।

Usha Tirkey

प्रभु से प्रार्थना

In Church on August 21, 2014 at 1:38 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 21 अगस्त 2014 (वीआर सेदोक)꞉ संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 21 अगस्त को 9 भाषाओं में ट्वीट संदेश प्रेषित किया उन्होंने संदेश में कृपा हेतु ईश्वर से प्रार्थना करने का आहवान किया।
उन्होंने संदेश में लिखा, ″हम कृपा के लिए प्रभु से प्रार्थना करें जिससे कि हमारा हृदय स्वतंत्र तथा उनकी ज्योति से प्रकाशित हो और हम ईश्वर के पुत्र-पुत्रियों की तरह आनन्द मना सकें।″
संत पापा के ट्वीट संदेश को इताली भाषा के अलावा लैटिन, अँग्रेज़ी, स्पानी, पुर्तगाली, फ्रेंच, जर्मन एवं अरबी भाषाओं में प्रेषित किया।

Usha Tirkey

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