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संत पापा पौल षष्टम की धन्य घोषणा

In Church on October 18, 2014 at 2:29 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 18 अकटूबर 2014 (वीआर सेदोक)꞉ विश्व धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के समापन पर रविवार 19 अक्टूबर को, संत पापा फ्राँसिस समारोही पावन ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा पौल षष्टम की धन्य घोषणा करेंगे।

वाटिकन सूत्रों के अनुसार पावन ख्रीस्तयाग संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रोम समयानुसार पूर्वाहन 10.30 बजे होगा।
यूखरिस्त के दौरान संत पापा फ्राँसिस उस परिधान को धारण करेंगे जो संत पापा पौल षष्टम को उनकी 80 वीं जयन्ती पर भेंट किया था तथा उनके द्वारा प्रयुक्त कलश का उपयोग करेंगे।

समारोही ख्रीस्तयाग के दौरान पवित्र अवशेष भी अर्पित किये जाएंगे इनमें 28 नवम्बर 1970 ई. को मनीला में संत पापा पर किये गये आक्रमण के क्षण की रक्त बूँदें शामिल हैं।

Usha Tirkey

सुसमाचार से लज्जा नहीं

In Church on October 18, 2014 at 2:28 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 18 अक्तूबर 2014 (वीआर सेदोक)꞉ वाटिकन में ‘परिवार’ विषय पर विश्व धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के अंतिम चरण में सभा की रिर्पोट प्रस्तुत करने, उसका अध्ययन एवं अनुमोदन कर अंतिम रूप देने के पूर्व धर्माध्यक्षों ने पावन ख्रीस्तयाग में भाग लिया।

शनिवार 18 अक्तूबर को प्रातः 9 बजे सम्पन्न इस पावन ख्रीस्तयाग के मुख्य अनुष्ठाता वियेतनाम के महाधर्माध्यक्ष पौल बुई वान डॉक ने प्रवचन देते हुए कहा, ″ मुझे सुसमाचार से लज्जा नहीं। यह ईश्वर का सामर्थ्य है, जो प्रत्येक विश्वासी के लिए-पहले यहूदी और फिर यूनानी के लिए-मुक्ति का स्रोत है।″ (रोम.1꞉16)

उन्होंने कहा कि संत पौलुस सुसमाचार के लिए लज्जित नहीं थे क्योंकि यह क्रूसित ख्रीस्त का प्रचार करता है।
महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि ईश्वर की महिमा क्रूसित ख्रीस्त में प्रकट हुई। जिन्होंने उन पर विश्वास नहीं किया वे नष्ट हो गये किन्तु यहूदी तथा यूनानी जो बुलाये गये हैं उनके लिए ख्रीस्त ईश्वर की शक्ति एवं प्रज्ञा है क्योंकि ईश्वर मनुष्यों की बुद्धिमता से कहीं बढ़कर है।

उन्होंने कहा कि यहाँ समस्या विश्वास की है कि हम उन पर विश्वास करते हैं या नहीं? यदि हम सुसमाचार पर विश्वास करते हैं तो उससे हमें मुक्ति मिलती है।
महाधर्माध्यक्ष पौल ने कहा कि ख्रीस्त हमारी आशा हैं वे हमारे एक मात्र मुक्तिदाता हैं जिन्होंने क्रूसित होकर दुःख भोगा किन्तु हमारे न्याय के लिए पुनः जी उठे और वे हमारे साथ रहते हैं।

उन्होंने कहा कि परिवारिक जीवन में लोगों की एकमात्र आशा ख्रीस्त हैं। ईश्वर जो प्रेमी, दयालु और क्षमाशील हैं उन्होंने अपने को ख्रीस्त द्वारा प्रकट किया है। महाधर्माध्यक्ष पौल प्रश्न करते हुए कहा कि क्या हम ख्रीस्त में सचमुच विश्वास करते हैं?

उन्होंने कहा यदि हम विश्वास करते हैं तो हम उनके प्रेम की शिक्षा को भी स्वीकार करते हैं।
ईश्वर सर्वशक्तिमान हैं किन्तु वे नष्ट नहीं करते, वे जीवन देते हैं, उसी शक्ति से उन्होंने ख्रीस्त को कलवारी पर्वत पर महिमान्वित किया तथा उन्हें पुनजीवित किया।

उन्होंने कहा कि क्या हम ईश्वर की शक्ति पर विश्वास करते हैं या संसार की शक्ति पर, जो जीवन, प्यार तथा मानव परिवार को नष्ट कर देती है। हम जीवन को प्यार करें क्योंकि यह आनन्द एवं खुशी का स्रोत है।

Usha Tirkey

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विश्व खाद्य दिवस पर संत पापा का संदेश

In Church on October 18, 2014 at 2:28 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 18 अक्तूबर 2014 (वीआर अंग्रेजी)꞉ ″विश्वव्यापी भूखमरी की समस्या पर जीत पाने हेतु हमें अपनी विकास पद्धतियों और वैश्विक व्यापार नियमों में परिवर्तन लाना होगा तथा केवल लाभ पर दृष्टि लगाने का अंत करना होगा।″ यह बात संत पापा फ्राँसिस ने 16 अक्तूबर को, विश्व खाद्य दिवस पर अपने संदेश में कही।

संयुक्त राष्ट्रसंघ के खाद्य एवं कृषि संगठन के अध्यक्ष जोसे ग्रासियानो दा सिलवा को प्रेषित संदेश में संत पापा ने अपने प्रेरितिक पत्र ‘एवन्जेली गौदियुम’ की बातों को दोहराते हुए कहा, ″विश्व में खाद्य पदार्थ की एक बड़ी मात्रा नष्ट की जाती है तथा लाभ पाने की होड़ पर उसका मूल्य बढ़ा दिया जाता है।″ उन्होंने कहा कि हमें यह ख्याल रखने की आवश्यकता है कि जो कोई भूख एवं कुपोषण के शिकार हैं वे भी मानव हैं तथा उनकी मानव प्रतिष्ठा किसी भी आर्थिक गिनती से बढ़कर हैं।

विश्व खाद्य दिवस की विषयवस्तु, ″पारिवारिक खेती″ पर ग़ौर करते हुए संत पापा ने कहा कि यह बिलकुल सटीक है क्योंकि यह ग्रामीण परिवारों की पहचान एवं उनकी मदद के प्रति हमारी भूमिका की याद दिलाती है। उन्होंने दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिवारों को प्रोत्साहन देने का हमारा प्रयास वास्तविक आवश्यकता को पूरा करने में असमर्थ है जिसे हमें चुनौती देने की आवश्यकता है।

संत पापा ने खाद्य सुरक्षा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मुद्दा दुनिया की आबादी के कमज़ोर वर्ग पर बुरा प्रभाव डालता है जो सदा हिंसक संघर्षों के शिकार होते हैं।

संत पापा ने कहा कि भाई-बहनों के प्रति हमारा स्नेह एवं सहानुभूति सृष्टि की रक्षा हेतु हमें प्रेरित करे जो न केवल ब्रहमाण्ड के भविष्य के लिए आवश्यक है किन्तु मानव परिवार को सौंपे जाने के कारण हम पर उसकी जिम्मेदारी भी है।
संत पापा ने कहा कि भूखमरी पर जीत पाने हेतु यह काफी नहीं है कि भूखे लोगों को आवश्यक साधन उपलब्ध करा दिया जाए बल्कि मदद देने के प्रतिमान तथा विकास पद्धतियों में परिवर्तन करना होगा। उत्पादन तथा व्यापार के नियम तथा कृषी संबंधी सामानों के व्यापार के अंतरराष्ट्रीय नियमों में बदलाव लाना होगा।

संत पापा ने कहा कि कार्य, उसके उद्देश्य, आर्थिक गतिविधि, खाद्य उत्पादन एवं पर्यावरण सुरक्षा आदि के प्रति हमारे दृष्टिकोण में बदलाव लाना होगा क्योंकि यथार्थ भविष्य में शांति निर्माण का यही एकमात्र रास्ता है।

Usha Tirkey

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