Vatican Radio HIndi

Archive for 2018|Yearly archive page

भारतीय दलितों ने हिंदू कट्टरपंथियों के श्रेष्ठ विचारधाराओं को चुनौती दी

In Church on January 11, 2018 at 2:59 pm

नई दिल्ली, बुधवार 10 जनवरी 2018 (उकान) : भारतीय दलितों ने कट्टर हिंदू समूहों के श्रेष्ठ विचारधाराओं को चुनौती दी है। जिन्होंने 1 जनवरी को 19वीं सदी में उनके ऊपरी जाति के सरदारों के खिलाफ विजय का जश्न मनाते वक्त हुए हमले को हिंदू कट्टरवाद को जिम्मेदार ठहराया है।

जनवरी के शुरू में पश्चिम महाराष्ट्र राज्य के कई हिस्सों में दलितों और उच्च जाति के मराठों के बीच हिंसक झड़पों की एक श्रृंखलाबद्ध सूचना मिली।

एक जनवरी को स्थानीय शासकों और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेनाओं के बीच 1818 की लड़ाई की शताब्दी का जश्न मनाते समय दलित लोगों पर हमले हुए जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई और सौ से भी अधिक घायल हो गये।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भगवा ध्वज वाले कट्टर हिंदू समूहों ने दलितों पर पत्थराव किया और उन्हें जवाबी कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया।

इस संघर्ष में, बसों और पुलिस के वाहनों के साथ-साथ निजी वाहनों सहित 30 से अधिक वाहनों को आग लगा दी गई या क्षतिग्रस्त हो गई। 28 वर्षीय राहुल फतगाले को पत्थर लगने की वजह मौत हो गई।

काथलिक नेता जोसेफ डायस ने कहा,”यह एक बहुत खतरनाक प्रवृत्ति है क्योंकि हम 1947 की ओर पीछे लौट रहे हैं जब जाति और पंथ ने देश को विभाजित किया था।” यह चौंकाने वाली बात है कि 100 साल जो पहले हुआ था वह अभी भी संघर्ष का कारण बना है।″

पत्रकार साकिब सलीम ने एक टिप्पणी में कहा कि दलित लोगों को भारत के पूर्व ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों के समर्थकों के रूप में देखा गया और इसी कारण हिंसा शुरु हुई।

भारतीय धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के दलित और अदिवासियों के लिए बने कार्यालय के सचिव फादर जेड. देवसहाय राज ने कहा कि हमला वर्षों-पुरानी धारणा के कारण हुई जिसके अनुसार दलितों को ऊपरी जाति के हिंदुओं का दास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऊपरी जाति के हिंदू समूह यह स्वीकार नहीं कर सकते कि दलित लोग अपने अधिकारों की मांग करें।

(Margaret Sumita Minj)

Advertisements

अमेजन के आदिवासियों को संत पापा का इन्जार है

In Church on January 11, 2018 at 2:53 pm

वाटिकन रेडियो, बुधवार 10 जनवरी 2018 (वीआर) : संत पापा फ्राँसिस की आगामी यात्रा पेरू के पुवेर्टो माल्दोनाडो शहर में बेशक अमेज़न के आदिवासियों को मंच और आवाज प्रदान करेगी।

पान अमेज़न चर्च नेटवर्क – रिपम द्वारा प्रकाशित एक साक्षात्कार में पुवेर्टो माल्दोनाडो के प्रेरितिक प्रशासक फादर मानुएल येसुस रोमेरो ने कहा कि अमेज़न के आदिवासियों को अपने अधिकारों को ज्ञात कराने की आवश्यकता है क्योंकि वे अपने पूर्वजों की भूमि से बेदखल किये जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “अमेज़न के स्थानीय लोग खतरे में हैं। उनके क्षेत्र में तेजी से घुसपैठ किया जा रहा है, उनकी जगह-जमीन दिनोंदिन छोटी होती जा रही है और कई शताब्दियों से जीवित रखने वाले उनके जीविका के साधनों को नष्ट किया जा रहा है। नदियों में मछली पकड़ना, शिकार, पेड़ और जंगल आदि बहुत ज्यादा खतरे में हैं इसलिए उनका जीवन भी खतरे में हैं।”

कार्यक्रम के अनुसार संत पापा फ्राँसिस पेरू के पुवेर्टो माल्दोनाडो शहर में 19 जनवरी को पधारेंगे। अमेजन के विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि संत पापा से मुलाकात करेंगें और अपनी समस्याओं को सामने पेश करेंगे। वे संत पापा के आशा और उत्साहवर्धक संदेश सुनेंगे।

पेरु धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने संत पापा द्वारा पुवेर्टो माल्दोनाडो शहर का दौरा करने का कारण बताया कि दक्षिण-पूर्व शहर अवैध खनन, बाल श्रम और मानव तस्करी आदि से संघर्ष कर रहा है।

संत पापा द्वारा इन क्षेत्रों की यात्रा की इच्छा भी शहर के पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता से प्रेरित है, दक्षिणी अमेज़न जंगलों का संरक्षण एक प्रमुख मुद्दा है।

अमेज़ॅन वर्षावन में लगभग 60% पेरू के क्षेत्र शामिल हैं, जो ताजे पानी का एक बड़ा भंडार प्रदान करता है।

पेरु की प्रेरितिक यात्रा संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने 1985 और 1988 में की थी संत पापा फ्राँसिस पेरु की यात्रा के बाद चीले की प्रेरितिक यात्रा के लिए प्रस्थान करेंगे।

(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस का जनवरी और फरवरी महीने का कार्यक्रम

In Church on January 11, 2018 at 2:50 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 10 जनवरी 2018 (वीआर, रेई) : संत पापा फ्राँसिस की धर्मविधि समारोहों की व्यवस्था करने वाली समिति के अध्यक्ष मोन्सिन्योर ग्वीदो मरिनी ने सोमवार को संत पापा के जनवरी और फरवरी के कार्यक्रम को प्रकाशित किया। संत पापा फ्राँसिस 15 से 22 जनवरी 2018 तक चीले और पेरू की प्रेरितिक दौरा कर रहे हैं। प्रेरितिक यात्रा के बाद रोम में ख्रीस्तीय एकता वर्धक प्रार्थना सप्ताह और फरवरी में चालिसा की शुरुआत की धर्मविधियाँ संत पापा की मुख्य समारोह होंगे।

जनवरी और फरवरी के कार्यक्रम इस प्रकार हैं

गुरुवार 25 जनवरी, संत पौलुस के हृदयपरिवर्तन का समारोह एवं ख्रीस्तीय एकता के लिए प्रार्थना का 51वाँ सप्ताह। संत पापा फ्राँसिस संत पौलुस महागिरजाधर में संध्या प्रार्थना की अगुवाई करेंगे।

28 जनवरी, सामान्य 4था रविवार

संत मरिया मेजर महागिरजाघर में “सालुस पोपोली रोमानी” के प्रतीक के अनुवाद के पर्व दिवस पर संत पापा पवित्र मिस्सा का अनुष्ठान करेंगे।

शुक्रवार 2 फरवरी, मंदिर में प्रभु के समर्पण का पर्व एवं समर्पित जीवन का 22वां विश्व दिवस

संत पापा संत पेत्रुस महागिरजाघर में धर्मसंघियों और समर्पित लोगों के साथ पवित्र ख्रीस्तयाग समारोह की अध्यक्षता करेंगे।

14 फरवरी, राख बुधवार

संत पापा फ्राँसिस संत अन्सेलम गिरजाघर से जुलूस करते हुए संत सबीना गिरजाघर  आयेंगे। वहाँ राख की आशीष, पवित्र मिस्सा और राख वितरण धर्मविधि का अनुष्ठान करेंगे।।

18 फरवरी चालिसे का 1ला रविवार

संत पापा परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय के सभी कर्मचारियों के साथ आध्यात्मिक साधना के लिए अरिच्चा प्रस्थान करेंगे।

23 फरवरी शुक्रवार आध्यात्मिक साधना समाप्त कर संत पापा अपने सहयोगियों के साथ वाटिकन वापस लौटेंगे।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस का जनवरी और फरवरी महीने का कार्यक्रम

In Church on January 11, 2018 at 2:45 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 10 जनवरी 2018 (वीआर, रेई) : संत पापा फ्राँसिस की धर्मविधि समारोहों की व्यवस्था करने वाली समिति के अध्यक्ष मोन्सिन्योर ग्वीदो मरिनी ने सोमवार को संत पापा के जनवरी और फरवरी के कार्यक्रम को प्रकाशित किया। संत पापा फ्राँसिस 15 से 22 जनवरी 2018 तक चीले और पेरू की प्रेरितिक दौरा कर रहे हैं। प्रेरितिक यात्रा के बाद रोम में ख्रीस्तीय एकता वर्धक प्रार्थना सप्ताह और फरवरी में चालिसा की शुरुआत की धर्मविधियाँ संत पापा की मुख्य समारोह होंगे।

जनवरी और फरवरी के कार्यक्रम इस प्रकार हैं

गुरुवार 25 जनवरी, संत पौलुस के हृदयपरिवर्तन का समारोह एवं ख्रीस्तीय एकता के लिए प्रार्थना का 51वाँ सप्ताह। संत पापा फ्राँसिस संत पौलुस महागिरजाधर में संध्या प्रार्थना की अगुवाई करेंगे।

28 जनवरी, सामान्य 4था रविवार

संत मरिया मेजर महागिरजाघर में “सालुस पोपोली रोमानी” के प्रतीक के अनुवाद के पर्व दिवस पर संत पापा पवित्र मिस्सा का अनुष्ठान करेंगे।

शुक्रवार 2 फरवरी, मंदिर में प्रभु के समर्पण का पर्व एवं समर्पित जीवन का 22वां विश्व दिवस

संत पापा संत पेत्रुस महागिरजाघर में धर्मसंघियों और समर्पित लोगों के साथ पवित्र ख्रीस्तयाग समारोह की अध्यक्षता करेंगे।

14 फरवरी, राख बुधवार

संत पापा फ्राँसिस संत अन्सेलम गिरजाघर से जुलूस करते हुए संत सबीना गिरजाघर  आयेंगे। वहाँ राख की आशीष, पवित्र मिस्सा और राख वितरण धर्मविधि का अनुष्ठान करेंगे।।

18 फरवरी चालिसे का 1ला रविवार

संत पापा परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय के सभी कर्मचारियों के साथ आध्यात्मिक साधना के लिए अरिच्चा प्रस्थान करेंगे।

23 फरवरी शुक्रवार आध्यात्मिक साधना समाप्त कर संत पापा अपने सहयोगियों के साथ वाटिकन वापस लौटेंगे।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा द्वारा गरीब, बेघर, शरणार्थियों और कैदियों को सर्कस देखने हेतु आमंत्रण

In Church on January 11, 2018 at 2:41 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 10 जनवरी 2018 ( रेई) : वाटिकन प्रेस विज्ञप्ति अनुसार परमधर्मपीठीय उदार कार्य संबंधी कार्यालय के माध्यम से संत पापा ने गरीब, बेघर, शरणार्थियों, और कैदियों को सर्कस देखने के लिए आमंत्रित किया है।

बृहस्तपतिवार 11 जनवरी 2018 को रोम स्थित जिली सक्सा रुब्रा में 2100 लोग इस सर्कस को देख सकेंगे। मेद्रूनो सर्कस के मालिक फब्रिजियो ग्रांदी और कासार्तेल्ली परिवार ने संत पापा के गरीब लोगों के लिए आयोजित सर्कस को ‘एकजुटता सर्कस’ का नाम दिया है।

एक आमदर्शन समारोह के दौरान,संत पापा फ्राँसिस ने सर्कस के लोगों को इस प्रकार से संबोधित किया था: “जो लोग सर्कस में प्रदर्शन करते हैं, वे सुंदरता के निर्माता हैं, और आत्मा के लिए यह अच्छा है। हमें इस सुन्दरता की बहुत ही आवश्यकता है।″ सर्कस के कलाकार अपने आप को जोखिम में डालकर दूसरों को खुशी देते हैं और अपनी कला द्वारा जीवन को सुन्दर बनाते हैं। यह हमारे गरीब भाइयों के जीवन की कठोरता को दूर करने के लिए भी एक प्रोत्साहन बन सकता है उनके लिए यह एक तोहफा है।

सर्कस का आनंद उठाने के साथ-साथ वहाँ उनके लिए एक एम्बुलेंस और वाटिकन के मोबाइल क्लिनिक में  स्वयंसेवक डॉक्टरों और नर्सों द्वारा प्रदान की जाने वाली एक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा की भी  व्यवस्था होगी।

सर्कस के अंत में, जरुरतमंद लोगों के लिए खाने का पैकेट दिया जाएगा।


(Margaret Sumita Minj)

पवित्र यूखरिस्त में “मंगल गान” तथा “कोल्लेत्ता” पर संत पापा की धर्मशिक्षा

In Church on January 11, 2018 at 2:33 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 10 जनवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर वाटिकन स्थित पौल षष्ठम सभागार में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को “पवित्र यूखरिस्त में महिमा गान एवं पुरोहित की अगुवाई में सामूहिक प्रार्थना”पर अपनी धर्मशिक्षा माला को आगे बढ़ाते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

पवित्र यूखरिस्त में धर्मशिक्षा की शृंखला में हमने पश्चाताप की धर्मविधि को देखा है जो हमें अपने आप को देखने एवं ईश्वर के सामने सच्चे रूप में प्रस्तुत होने में मदद देता है, पापी होने का एहसास तथा क्षमा किये जाने की आशा प्रदान करता है।

निश्चय ही, मानव की दयनीय स्थिति एवं दिव्य करूणा के बीच मुलाकात के द्वारा महिमागान में आभार का भाव उत्पन्न होता है। जो एक प्रचीन एवं सम्मानित गान है जिसके द्वारा कलीसिया पवित्र आत्मा में एक होकर ईश्वर की महिमा करती एवं निवेदन अर्पित करती है। महिमागान का आरम्भिक हिस्सा देवदूतों द्वारा गाया गया गीत है जिसको उन्होंने येसु के जन्म के समय बेथलेहम में गाया था। यह स्वर्ग और पृथ्वी के बीच आलिंगन की आनन्दमय घोषणा है। यह गान हमें प्रार्थना में एक होने में मदद देता है।

“ऊँचे स्वर्ग में ईश्वर की महिमा धरती पर भले लोगों को शांति।”

महिमागान के बाद अथवा जब यह नहीं होता तब पश्चाताप की धर्मविधि के तुरन्त बाद, प्रार्थना एक खास रूप लेता है जिसे “कोल्लेत्ता” कहा जाता है। इसके द्वारा समारोह की विशेषता प्रकट की जाती है अर्थात यह पूजन पद्धति वर्ष के दिन एवं काल के आधार पर होता है।

प्रार्थना हेतु निमंत्रण के द्वारा पुरोहित विश्वासियों का आह्वान करता है कि वे उनके साथ एक होकर मौन प्रार्थना करें ताकि ईश्वर की उपस्थिति का एहसास कर सकें तथा प्रत्येक अपने हृदय में व्यक्तिगत निवेदन को प्रकट करें जिसके लिए वह पवित्र यूखरिस्त में सहभागी होना चाहता है।

संत पापा ने कहा कि मौन का अर्थ शब्दों को रोकने तक सीमित नहीं है बल्कि अपने हृदय में दूसरों के शब्दों को सुनने के लिए अपने को तत्पर करना और सबसे बढ़कर पवित्र आत्मा की आवाज को सुनना।

धर्मविधि में पवित्र मौन अपने स्वभाव के अनुसार पश्चाताप एवं प्रार्थना हेतु आह्वान के बाद रखी जाती है। यह हमें एकचित होने में मदद देता है। धर्मग्रंथ पाठ एवं उपदेश के उपरांत भी थोड़ी देर के लिए चिंतन का समय रखा जाता है। उसी तरह पवित्र परमप्रसाद के बाद भी धन्यवाद एवं निवेदन की आंतरिक प्रार्थना की जाती है। इस प्रकार आरम्भिक प्रार्थना के पूर्व मौन हमें एकाग्रित होने तथा यहाँ उपस्थित होने के मकसद की याद करने में मदद देता है।

संत पापा ने मौन प्रार्थना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यहाँ हमारी आत्मा को मौन होकर सुनने तथा प्रभु के लिए खोलने का महत्व है। हो सकता है कि हम कठिन परिश्रम कर रहे हों, आनन्द अथवा दुःख की घड़ी से होकर गुजर रहे हों हम उसे प्रभु को सुनाना चाहते हैं, उनकी मदद मांगना, उनसे अर्जी करना कि वे हमारे करीब रहें। हमारे परिवार के सदस्य जो बीमार हैं अथवा कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। उन्हें हम कलीसिया एवं दुनिया के भाग्य के साथ प्रभु को समर्पित करना चाहते हैं। जिसके लिए हमें पुरोहित के सामूहिक प्रार्थना हेतु अह्वान के पूर्व छोटे मौन की आवश्यकता है। पुरोहित ऊँची आवाज में सभी विश्वासियों के नाम पर प्रभु से प्रार्थना करते हैं। संत पापा ने सभी याजकों को सलाह दी कि वे मौन के समय का पालन करें जिसकी हम अनजाने में उपेक्षा कर देने की जोखिम उठाते हैं।

पुरोहित उस प्रार्थना को खुली बाहों के साथ उच्चरित करता है, यह एक ऐसे व्यक्ति का भाव है जो प्रार्थना कर रहा है तथा आरम्भिक ख्रीस्तीयों से चली आ रही है। जैसा कि रोम के काटाकोम्ब के भित्तिचित्रों में प्रकट होता है जिसको उन्होंने क्रूस पर खुली बाहों के साथ ख्रीस्त का अनुसरण करने के लिए करते थे। क्रूस पर हम पुरोहित को देखते हैं जो ईश्वर को बलिदान अर्पित करता, उनकी स्तुति करता जो पुत्र का आज्ञापालन है।

संत पापा ने कहा कि रोमन रीति में प्रार्थना संक्षिप्त होती किन्तु बहुत अर्थपूर्ण होती है। ख्रीस्तयाग के बाद भी पाठ पर चिंतन हमें मदद करता है कि हम किस तरह ईश्वर की ओर लौट सकते हैं, उनसे क्या मांग सकते हैं, और किस तरह के शब्दों का प्रयोग कर सकते हैं। धर्मविधि हमारे लिए प्रार्थना का एक सच्चा स्कूल बने।

इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और विश्व के विभिन्न देशों से आये सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन किया, खासकर, नार्वे, न्यूजीलैंड एवं अमरीका के तीर्थयात्रियों को। तत्पश्चात उन्होंने गुरूकुल छात्रों एवं विश्व विद्यालयों के विद्यार्थियों का अभिवादन किया तथा उनके एवं उनके परिवार वालों पर प्रभु येसु ख्रीस्त के आनन्द एवं शांति की कामना की।

अंत में उन्होंने सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Usha Tirkey)

%d bloggers like this: