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पुनरुत्पादक चिकित्सा पर चौथा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों से संत पापा की मुलाकात

In Church on April 28, 2018 at 11:58 am

वाटिकन सिटी, शनिवार, 28 अप्रैल 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 28 अप्रैल को वाटिकन स्थित पौल षष्ठम सभागार में पुनरुत्पादक चिकित्सा पर चौथा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के 700 प्रतिभागियों से मुलाकात की।

सम्मेलन का आयोजन संस्कृति हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के तत्वधान में वाटिकन में किया गया था।

संत पापा ने प्रतिभागियों को सम्बोधित कर कहा, “मैं अलग-अलग संस्कृतियों, समाजों और धर्मों के लोगों को बीमारों की देखभाल करने हेतु चिंतन एवं प्रतिबद्धता के लिए  एक साथ देखकर खुश हूँ, मानव व्यक्ति के प्रति सहानुभूति हमें सचमुच एक साथ लाता है। मानव की पीड़ा हमें चुनौती देती है कि हम व्यक्तियों एवं संस्थाओं के बीच पारस्परिक विचार-विमर्श के नये माध्यमों की खोज करें तथा आपस के घेरे को तोड़कर एवं एक साथ काम करने के द्वारा रोगियों की देखभाल सुनिश्चित करें।”

संत पापा ने इस परियोजना को अपना योगदान देने वाले सभी समितियों के प्रति अपना आभार प्रकट किया।

उन्होंने सम्मेलन के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस सम्मेलन का कार्य संक्षेप में चार क्रियाओं में विभक्त है, रोकथाम, मरम्मत, देखभाल एवं भविष्य के लिए तैयार करना।

संत पापा ने रोकथाम की क्रिया पर अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जो जीवन शैली हम अपनाते एवं जिस संस्कृति को बढ़ावा देते हैं उसमें यदि हम ध्यान दें तो कई बड़ी बुराईयों पर रोक लगाया जा सकता है।

रोकथाम का अर्थ है मानव प्राणी एवं पर्यावरण जहां हम निवास करते हैं उसके प्रति दूरदृष्टि रखना। इसका मतलब है संतुलन की संस्कृति को लक्ष्य बनाना जिसके महत्वपूर्ण साधन हैं, शिक्षा, शारीरिक कार्य, मिताहार तथा पर्यावरण की रक्षा, स्वास्थ्य कोड के प्रति सम्मान, समय पर एवं सटीक निदान, तथा कई अन्य उपाय स्वास्थ्य की कम जोखिमों के साथ बेहतर रूप से जीने में मदद कर सकते हैं।

संत पापा ने कहा कि यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम बच्चों एवं युवों के बारे सोचते हैं जो आधुनिक संस्कृतियों में परिवर्तन से जुड़ी बीमारियों के कारण लगातार खतरे में हैं। हमें धुम्रपान, नशीली पदार्थों के सेवन एवं हवा, पानी एवं मिट्टी में मिश्रित विषाक्त पदार्थों के दुष्प्रभाव पर चिंतन करने की आवश्यकता है। ट्यूमर एवं कई अन्य बीमारियों को बचपन में निवारक उपाय अपना कर दूर किया जा सकता है, फिर भी इसके लिए लगातार वैश्विक पहल की आवश्यकता है जिसके लिए सभी को प्रतिबद्ध होना चाहिए। निवारण की संस्कृति को हर तरफ प्रोत्साहन देने हेतु स्वास्थ्य देखभाल में पहला कदम होना चाहिए।

संत पापा ने कहा कि प्रकृति एवं मानव स्वास्थ्य को बेहतर रूप से समझने के लिए विज्ञान एक प्रभावशाली उपकरण है। इसने कई नई संभवनाओं को खोल दिया है तथा परिष्कृत प्रौद्योगिकियों को प्रदान किया है जो न केवल जीवित अंगों की भीतरी संरचना की जाँच करने में मदद करते हैं बल्कि हमारे डीएनए में संशोधन लाने की संभावना भी प्रदान करते हैं। जिसके लिए मानवता एवं पर्यावरण जहाँ हम रहते हैं उसके प्रति नैतिक जिम्मेदारी पर अधिक ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है। कलीसिया पीड़ित भाई बहनों की देखभाल हेतु हर प्रकार के अनुसंधान की सराहना करती है किन्तु वह उस मौलिक सिद्धांत के प्रति सचेत है कि हर प्रकार की तकनीकी सम्भवनाएं नैतिक रूप से स्वीकार्य नहीं हैं क्योंकि अन्य सभी मानवीय क्रियाओं की तरह अंतःकरण की सीमाओं का सम्मान किया जाना आवश्यक है। संत पापा पौल षष्ठम का हवाला देते हुए संत पापा ने कहा कि विकास का सच्चा माध्यम वह है जो हर मानव एवं सम्पूर्ण व्यक्ति की अच्छाई की ओर अग्रसर करता है।

संत पापा ने कहा कि यदि हम भविष्य के लिए तैयारी करना चाहते हैं एवं हर व्यक्ति के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं तो हमें संवेदनशीलता में बढ़ने की आवश्यकता है। मानव परिवार के हर व्यक्ति पर ध्यान देने की जरूरत है, खासकर, जो सामाजिक एवं मानसिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं जो उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा सिद्ध हो सकता है एवं जिन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाता है।

संत पापा ने सम्मेलन के प्रतिभागियों को सलाह दी कि वे एक खुला अंतर- अनुशासनात्मक दृष्टिकोण अपनाएँ जो कई विशेषज्ञों और संस्थानों को संलग्न करे, जिससे ज्ञान का पारस्परिक विनिमय हो सके। उन्होंने दूसरी सलाह दी कि वे पीड़ित भाई बहनों के लिए ठोस कदम उठायें।


(Usha Tirkey)

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कानूनी लड़ाई के बीच में बीमार ब्रिटिश बच्चे की मृत्यु

In Church on April 28, 2018 at 11:57 am

लंदन, शनिवार 28 अप्रैल 2018 (अनसा) : ब्रिटिश बीमार बच्चा अल्फी इवांस जिसके माता-पिता ने उसके इलाज पर कानूनी लड़ाई हेतु संत पापा फ्राँसिस से समर्थन प्राप्त किया था,की मृत्यु आज शनिवार प्रातः को हुई। अल्फी इवांस 23 महीने का था।

बच्चे के माता पिता केट जेम्स और थोमस इवांस ने सोसल मीडिया से कहा कि अल्फी की मौत से वे बहुत दुखी हैं। डॉक्टरों द्वारा जीवन समर्थन हटा दिये जाने के पाँच दिन बाद उनके प्यारे अल्फी इस दुनिया से विदा लिये।

लिवरपूल शहर में अल्फी की देखभाल करने वाले डॉक्टरों ने कहा आगे का उपचार व्यर्थ था और उसे शांति पूर्वक मरने अनुमति दी जानी चाहिए। लेकिन उसके माता-पिता ने न्यायाधीशों को मनाने के लिए महीनों तक  कानूनी लड़ाई लड़ी कि उन्हें वाटिकन के बच्चों के अस्पताल में ले जाने की अनुमति मिले जहाँ उसे जीवन समर्थन पर रखा जा सके। इस अभियान में मातापिता को संत पापा और ख्रीस्तीय समुदायों का समर्थन प्राप्त था और इस मामले पर अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने में मदद मिली।

सोमवार को अदालत ने डॉक्टरों के पक्ष में फैसला लिया और सोमवार को अस्पताल ने अल्फी के जीवन समर्थन को वापस ले लिया।


(Margaret Sumita Minj)

विश्व ख्रीस्तीय मंच से संत पापा फ्राँसिस : ‘मैं आपके साथ सम्मिलित हूँ’

In Church on April 28, 2018 at 11:55 am

वाटिकन सिटी, शनिवार 28 अप्रैल 2018 ( रेई ) :  :संत पापा फ्राँसिस ने कोलंबिया में हो रहे विश्व ख्रीस्तीय मंच में भाग लेने हेतु आये विभिन्न ख्रीस्तीय समुदायों के प्रतिनिधियों के नाम संदेश में कहा कि वे उनके साथ हैं।

संत पापा फ्राँसिस ने कोलंबिया के बोगोटा में विश्व ख्रीस्तीय मंच की सभा के प्रतिभागियों का अभिवादन किया। ख्रीस्तीय एकता हेतु गठित परमधर्मपीठीय सम्मेलन की ओर से सभा में भाग ले रहे  फादर जॉन उस्मा गोमेज ने संत पापा के संदेश का 25 अप्रैल को पढ़ सुनाया. 24 से 27 अप्रैल तक पांच दिवसीय सभा की विषय वस्तु है, “पारस्परिक प्रेम जारी रखें” (इब्रानियों 13: 1)

संत पापा ने कहा कि वे प्रतिभागियों के साथ हैं। वे घटना को विभिन्न ख्रीस्तीय समुदायों के प्रतिनिधियों को एकता के बारे में येसु की प्रार्थना को पूरा करने के लिए भाइयों और बहनों के साथ मिलकर जुड़ने की संभावना के रूप में मान्यता प्राप्त अवसर के रूप में देखते हैं। संत पापा ने कहा कि वे प्रार्थना करते हैं कि उन्हें व्यक्तिगत तथा कलीसियाई “अनुभवों और विश्वासों”को स्वतंत्र और एक दूसरे का सम्मान करते हुए साझा करने और एकजुट होने का अवसर मिले।

उन्होंने कहा, “मानवता को इस एकजुटता की बहुत जरूरत है, जो आदर, सम्मान, पारस्परिक क्षमा और हर स्थिति में मानव गरिमा की वास्तविक रक्षा को प्रोत्साहित करता है।”


(Margaret Sumita Minj)

ईश्वर और अपने पड़ोसी से प्यार करें

In Church on April 28, 2018 at 11:53 am

वाटिकन सिटी, शनिवार 28 अप्रैल 2018 ( रेई ) : ख्रीस्तीय किसी सिद्धांत पर नहीं पर ईश्वर के पुत्र प्रभु येसु ख्रीस्त के पद चिन्हों और उनकी शिक्षा पर चलते हैं। काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 28 अप्रैल को ट्वीट प्रेषितकर सभी ख्रीस्तीयों को येसु मसीह के पदचिन्हों पर चलने की प्रेरणा दी।

संदेश में उन्होंने लिखा,“ प्रभु येसु हमारे लिए अपना प्राण देकर अपने प्यार को प्रकट किया हैं, ताकि हम भी ईश्वर और अपने पड़ोसी से प्यार कर सकें।”

संत योहन के सुसमाचार में हम पाते हैं जहाँ येसु अपने शिष्यों को नई आज्ञा देते हुए कहते हैं,“ मैं तुम लोगों को एक नई आज्ञा देता हूँ-तुम एक दूसरे को प्यार करो जिस प्रकार मैंने तुम लोगों को प्यार किया, उसी प्रकार तुम भी एक दूसरे को प्यार करो। (अध्याय 13,पद 34)


(Margaret Sumita Minj)

कोरियाई काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा शिखर सम्मेलन का स्वागत

In Church on April 28, 2018 at 11:52 am

कोरिया, शनिवार, 28 अप्रैल 2018 (एशियान्यूज़) ˸ कोरिया के दो नेताओं ने अपने देश के 80 मिलियन लोगों तथा समस्त विश्व के सामने समारोह पूर्वक घोषित किया कि कोरियाई प्रायद्वीप में फिर कभी युद्ध नहीं होगा। ‘अब एक नया इतिहास शुरू हो रहा है, शांति का युग।’ उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया में दाखिल होने के बाद गेस्ट बुक में ये शब्द लिखे।”

27 अप्रैल 2018 को उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच शिखर वार्ता हुई। इसमें उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और दक्षिण कोरिया के नेता मून जे इन ने हिस्सा लिया। दोनों देशों ने कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने का संकल्प लिया।.ीं होगा और शांति का एक नया युग  उठायें ैं जो उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा है एवं जिन्हें चिकित्सा :।

दोपहर की बातचीत के अंत में, दोनों नेताओं ने “पानमुनजोम घोषणा” पर हस्ताक्षर किए। इसके अनुसार, दोनों कोरियाई प्रायद्वीप परमाणुकरण और सैन्य तनाव को कम करने हेतु सहयोग करने के लिए चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बहुपक्षीय वार्ता शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

इस तरह अब दोनों देश “शत्रुतापूर्ण कृत्यों” को समाप्त कर देंगे, पश्चिमी सागर में कासोंग शहर की सीमा पर संयुक्त संचार कार्यालय “शांति का क्षेत्र” स्थापित किया जाएगा तथा वे “मानवतावादी समस्याओं को हल करने के लिए रेड क्रॉस के साथ बातचीत के लिए खुलेंगे।”

शुक्रवार को किम एवं मून ने कई घंटों तक साथ में व्यतीत किया तथा करीब 30 मिनट तक व्यक्तिगत बातचीत की। उन्होंने कोरियाई युद्ध में बिछुड़े परिवरों को पुनः एक साथ लाने तथा आर्थिक सहयोग शुरू करने पर सहमति जतायी।

कोरिया के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने शिखर सम्मेलन का स्वागत किया है। एक वक्तव्य में धर्माध्यक्षों ने शिखर सम्मेलन के पहले कहा था कि यह एक मूल्यवान समय है जिसे ईश्वर ने कोरिया के लोगों को उनकी प्रार्थनाओं के उत्तर में प्रदान किया है। कई महिनों से दक्षिण कोरिया की कलीसिया हर शाम शांति हेतु प्रार्थना कर रही थी। धर्माध्यक्षों ने कहा कि यह इस धरती पर एक चमत्कार है।

पिछला साल शिखर सम्मेलन असम्भव प्रतीत हो रहा था जब अमरीका एवं उत्तर कोरिया ने एक दूसरे पर परमाणु खतरे की धमकी दे रहे थे।


(Usha Tirkey)

विश्व ख्रीस्तीय मंच को ख्रीस्तीय एकता हेतु गठित परमधर्मपीठीय सम्मेलन के सचिव का संदेश

In Church on April 28, 2018 at 11:51 am

बगोटा, शनिवार 28 अप्रैल 2018 (रेई) : कोलंबिया में विश्व ख्रीस्तीय मंच के प्रतिभागियों को ख्रीस्तीय एकता हेतु गठित परमधर्मपीठीय सम्मेलन के सचिव धर्माध्यक्ष ब्राएन फार्रेल ने अपने संबोधन में ख्रीस्तीय एकता को बढ़ावा देने के लिए 6 इच्छाओं को व्यक्त किया।

‘एक साझा विश्वास’

कोलंबिया के बागोटा में 24 से 27 अप्रैल तक हुए तीसरे विश्व ख्रीस्तीय मंच के पांच दिवसीय सम्मेलन में धर्माध्यक्ष ब्राएन फार्रेल ने कहा, “हमें एक-दूसरे को वास्तव में जानने के लिए संपर्क और संवाद की ज़रूरत है जिससे कि हम एक-दूसरे पर भरोसा कर सकें, एक दूसरे से सीखें और साथ मिलकर काम करें और एसा करने से आपसी मतभेद और आपसी संघर्ष भी कम होगा।”

ख्रीस्तीयता की नई अभिव्यक्ति

धर्माध्यक्ष ब्राएन फार्रेल ने अपनी 6 इच्छाओं को व्यक्त किया जिसमें पहला है कि परंपरागत कलीसियायें ख्रीस्तीय धर्म के नए अभिव्यक्तियों जैसे पेंटेकोस्टल और करिश्माई कलीसिया का सम्मान करते हैं और उन्हें गंभीरता से लेते हैं। इन नए विश्वासों का अनुभव परंपरा से आ रहे “कानूनों और परंपराओं” साथ ही “नैतिक मानकों के बारे हमारे साहस की कमी” को चुनौती देता है।

ख्रीस्तीय धर्म के इन नए अभिव्यक्तियों को संबोधित करते हुए धर्माध्यक्ष फार्रेल ने उन्हें “पवित्रशास्त्र और इसके प्रभाव” के आलोचनात्मक समझ से बचने हेतु “अपने ईशशास्त्र के आधार को गहन” करने के लिए आमंत्रित किया।

धर्म परिवर्तन

धर्माध्यक्ष फार्रेल ने कहा कि बपतिस्मा संस्कार द्वारा हम ख्रीस्तीय समुदाय के सदस्य बनते हैं। हमारी एकता के आधार येसु ख्रीस्त में बपतिस्मा है। बपतिस्मा के माध्यम से, “पानी और त्रित्वमय ईश्वर में विश्वास के सूत्र द्वारा ख्रीस्तीय समुदाय के साथ सामंजस्य में प्रवेश करते हैं।” अतः उन्होंने ख्रीस्तीय समुदाय को सभी प्रकार के धर्मांतरण से बचने के लिए आमंत्रित किया।

ख्रीस्तीय एकता का समय

धर्माध्यक्ष फार्रेल ने आशा व्यक्त की कि वे ख्रीस्तीय समुदाय जो ” ख्रीस्तीय एकता वर्धक आंदोलन के प्रति शंकालु हैं, वे यह पहचान सकते हैं कि ख्रीस्तीय समुदाय का आधार सुसमाचार है और यह पवित्र आत्मा से प्रेरित है।” उन्होंने आग्रह किया कि कलीसिया की संरचनाओं पर आधारित चर्चाओं को सुसमाचार में विश्वास को साझा करने में बदल दिया जाए।

सामान्य अनुभव

अंत में उन्होंने यह इच्छा व्यक्त की कि उन सभी बाधाओं को दूर किया जाए जिससे कि बाइबल अध्ययन, प्रार्थना और मिशन को सामान्य और सामूहिक रूप से किया जा सके।

हम ईश्वरीय कृपा को साझा करते हैं

धर्माध्यक्ष फार्रेल ने अपने संबोधन को समाप्त करते हुए कहा कि विश्व ख्रीस्तीय मंच यदि सभी ख्रीस्तीय समुदाय मतभेदों को जोर देने के बजाय दोस्ती और एकजुटता के नए युग की शर्तों को बनाता है तभी हम राष्ट्रों के लिए सुसमाचार प्रचार हेतु ईश्वर के आदेश को पूरा कर सकते हैं।”


(Margaret Sumita Minj)

गुमला में आदिवासियों द्वारा रैली का आयोजन

In Church on April 28, 2018 at 11:50 am

नई दिल्ली, शनिवार, 28 अप्रैल 2018 (ऊकान)˸ झारखंड राज्य के गुमला शहर में हजारों आदिवासियों ने एक रैली में भाग लेकर अपने पारंपरिक धर्मों की मान्यता की मांग की।

24 अप्रैल को लगभग 10,000 लोगों की रैली ने हिंदू भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा संचालित राज्य की सरकार पर दबाव डाला, जो आदिवासियों को हिंदु मानता है और सरना धर्मों को आधिकारिक दर्जा देने से इंकार करता है।

आदिवासियों के लिए काम कर रहे कलीसिया के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि रैली विभिन्न समूहों और धर्मों के आदिवासी लोगों को एक साथ लाने में सफल रही।

गुमला धर्मप्रांत के विकर जेनेरल फादर सिप्रियन कुल्लू ने कहा कि सरकार एक राजनीतिक खेल के तहत सरना धर्म मानने वालों को हिन्दूओं की गिनती में रखती है।

उन्होंने रेली के बारे ऊका समाचार से कहा, “यह निश्चय ही एक सकारात्मक कदम है क्योंकि इस क्षेत्र में यह पहली बार था कि सभी धर्मों के आदिवासी एक मंच पर आए हैं और अपने अधिकारों की मांग की।”

फादर ने कहा कि सत्ताधारी सरकार और हिंदू समूह, राज्य के आदिवासी लोगों को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए विभाजित रखने और उनके अधिकारों की मांग पर जोर देने के प्रयासों को कमजोर करने के लिए काम कर रहे हैं।

उनके अनुसार “विशाल रैली की सफलता ने साबित कर दिया है कि लोगों ने ‘फूट डालो और शासन करो की नीति’ की राजनीति के पीछे के एजेंडे को समझ लिया है।

आधिकारिक तौर पर, आदिवासियों की संख्या झारखंड के 33 मिलियन लोगों का केवल 26 प्रतिशत है।

कलीसियाई नेता बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मध्य-पूर्वी राज्यों में सरना धर्मों की मान्यता के लिए मांग का समर्थन कर रहे हैं।

नेताओं ने कहा कि सदियों पुरानी धर्म की आधिकारिक मान्यता आदिवासी लोगों को अपने पारंपरिक प्रथाओं को स्थापित करने और उनकी मूल पहचान बहाल करने में मदद करेगी। लेकिन हिन्दू समुदाय भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के अपने लक्ष्य में जनजातीय लोगों के पहचान को ध्वस्त करने का काम कर रहा है।

सरकार ने आदिवासी भूमि अधिकारों की रक्षा करने वाले कानून में बदलाव लाने की कोशिश की थी किन्तु कलीसियाई समूहों द्वारा समर्थित बड़े पैमाने पर विरोध ने सरकार को इसे वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया।

सरकार ने कहा था कि भूमि अधिग्रहण आदिवासियों के लिए नौकरियां और विकास लाएगा किन्तु कलीसिया ने उसका विरोध किया क्योंकि आलोचकों का कहना था कि कानूनी संशोधन का उद्देश्य बड़ी कंपनियों के लिए जमीन उपलब्ध कराना था।

नई दिल्ली में इंडियन सोशल इंस्टीट्यूट में जनजातीय अध्ययन विभाग के प्रमुख फादर विन्सेंट एकका ने कहा कि सरकारी नीतियों का उद्देश्य है आदिवासी लोगों की पहचान और संसाधनों को खत्म करना।

फादर ने कहा, “सरकार जनजातीय पहचान और अस्तित्व को खत्म करना चाहती है, लेकिन सरकार चलाने वाले लोग यह भी जानते हैं कि उन्हें अगले साल चुनाव का सामना करना पड़ेगा। वोट जीतने के लिए धर्म और जातीयता का उपयोग करना उनकी रणनीति है।”

झारखंड में 1.4 मिलियन ईसाई लगभग पूरी तरह से आदिवासी समुदाय से आते हैं लेकिन 8.5 मिलियन आदिवासी भी राज्य की आधिकारिक गिनती में अल्पसंख्यक हैं।

2014 में बीजेपी शासन के तहत राज्य ने हिंदू कट्टरपंथियों की ईसाई विरोधी गतिविधियों को देखा है। कई दलित और जनजातीय नेताओं का आरोप है कि उनके समुदायों को हिंसा से धमकी दी जाती है ताकि उन्हें ईसाई बनने से मना किया जा सके।


(Usha Tirkey)

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