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बेरोज़गार युवाओं, आप्रवासियों एवं शरणार्थियों के प्रति एकात्मता का आह्वान

In Church on May 24, 2018 at 1:57 pm


वाटिकन सिटी, गुरुवार, 24 मई 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): लेको दी बेरगामो नामक इताली दैनिक से बातचीत में सन्त पापा फ्राँसिस ने बेरोज़गार युवाओं तथा शरणार्थियों एवं आप्रवासियों के प्रति एकात्मता का आह्वान किया है।

सन्त जॉन 23 वें की जन्मभूमि बेरगामों में तीर्थयात्रा पर बातचीत करते हुए उक्त दैनिक को दी एक भेंटवार्ता में सन्त पापा फ्राँसिस ने युवाओं की बेरोज़गारी को एक अति गम्भीर समस्या निरूपित किया। उन्होंने कहा, “युवाओं की बेरोज़गारी एक सामाजिक पाप है तथा समाज इसके लिये ज़िम्मेदार है।”

सन्त पापा ने कहा कि बेरोज़गारी तथा युवाओं से संलग्न अन्य समस्याओं के समाधान हेतु सन्त पापा जॉन 23 वें के प्रति अभिमुख होने की आवश्यकता है जिन्होंने सदैव युवाओं की प्रेरिताई पर बल दिया, विशेष रूप से, विश्व युद्ध के दौरान कई सैनिकों की मदद की और फिर इटली के प्रथम छात्रावास में तीन वर्षों तक सेवाएँ अर्पित कीं। सन्त पापा फ्राँसिस ने बताया कि सन्त पापा जॉन 23 वें ने अपने अख़बार पर लिखा था, “युवाओं के प्रति मेरा स्नेह सदैव बना रहेगा जिस प्रकार माँ का प्रेम अपनी सन्तान के लिये सदा बना रहता है।”

वर्तमान विश्व में व्याप्त शरणार्थियों एवं आप्रवासियों की समस्या पर सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, “कई देश अपनी दीवारों को ऊँचा कर रहे हैं ताकि कोई अन्दर न आ पाये किन्तु यह केवल उनके भय का प्रतीक है। लोग शरण देने से कतरा रहे हैं, घबरा रहे हैं क्योंकि वे दूसरों की पीड़ा को देखना नहीं चाहते।”

सन्त पापा ने कहा, “विश्व में शरणार्थियों एवं आप्रवासियों की समस्या बहुत जटिल है और कई देश दीवारों को उठा रहे हैं क्योंकि उन्हें भय हैं कि अजनबियों का आना उनके आरामदायक जीवन को अस्त-व्यस्त कर सकता है। वे उन वस्तुओं की रक्षा करना चाहते हैं जिन्हें अन्यों में साझा किया जाना चहिये। वे दीवार उठाकर अपने हृदयों को बन्द कर रहे हैं, कब्र की तरह उन्हें सील कर रहे हैं।”

सन्त पापा ने कहा, “यहाँ केवल उदारता अथवा एकात्मता का प्रश्न नहीं है बल्कि एक नई संस्कृति, एक नई मानसिकता के निर्माण की आवशयकता है ताकि लोग समझ सकें कि हम सब एक ही मानवपरिवार और एक ही मानव समुदाय के सदस्य हैं।”


(Juliet Genevive Christopher)

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नवें परिवार विश्व सम्मेलन हेतु दण्डमोचन की सन्त पापा ने की घोषणा

In Church on May 24, 2018 at 1:55 pm

वाटिकन सिटी, गुरुवार, 24 मई 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन स्थित परमधर्मपीठीय प्रायश्चित्त सम्बन्धी प्रेरितिक कार्यालय ने बुधवार को एक आज्ञप्ति प्रकाशित कर सूचित किया कि 21-26 अगस्त तक आयरलैण्ड के डबलिन शहर में आयोजित परिवारों के नवें विश्व सम्मेलन में, व्यक्तिगत रूप से, टेलीविजन या रेडियो के माध्यम से या आध्यात्मिक भागीदारी के माध्यम से भाग लेनेवाले पूर्ण दण्डमोचन प्राप्त करने में सक्षम होंगे।

आज्ञप्ति में कहा गया कि सन्त पापा फ्राँसिस इस सम्मावना की प्रस्तावना कर रहे हैं ताकि जो लोग इस सम्मेलन में शरीक होने की मंशा रखते हैं वे आध्यात्मिक रूप से इसके लिये स्वतः को तैयार कर सकें।

दण्डमोचन किस प्रकार प्राप्त किया जाये इस विषय में कहा गया कि जो लोग विश्व परिवार सम्मेलन में शारीरिक रूप से उपस्थित होकर भक्तिभाव से इसके समारोहों में भाग लेंगे उन्हें दण्डमोचन मिलेगा। बशर्ते कि वे पश्चाताप कर अपने पापों की क्षमा के लिये पुनर्मिलन संस्कार ग्रहण करें, ख्रीस्तयाग में शामिल होकर पवित्र यूखारिस्त ग्रहण करें तथा, पाप को दूर रख, शुद्ध हृदय से कलीसिया के परमाध्यक्ष सन्त पापा के मनोरथों के लिये प्रार्थना करें।

उन लोगों के लिये भी दण्डमोचन की घोषणा की गई है जो शारीरिक रूप से डबलिन सम्मेलन में उपस्थित नहीं हो पायेंगे। कहा गया कि पुनर्मिलन संस्कार और यूखारिस्त ग्रहण कर, “हे पिता हमारे”  तथा प्रेरितों के धर्मसार की प्रार्थना का पाठ कर  परिवार सम्मेलन के धर्मविधिक समारोहों में आध्यत्मिक रूप से शामिल हुआ जा सकता है। इस अवसर पर रेडियो अथवा टेलेविज़न के माध्यम से सन्त पापा के प्रवचनों को सुनकर, अपने मनोरथों के लिये प्रार्थना की जा सकती है।

परमधर्मपीठीय प्रायश्चित्त सम्बन्धी प्रेरितिक कार्यालय की आज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि सन्त पापा फ्राँसिस विश्व परिवार सम्मेलन के अवसर पर दण्डमोचन तथा इन अनुग्रहों को देने मंशा इसलिये रखते हैं ताकि “विश्वासी सच्चे दिल से पश्चाताप कर उदारता से प्रेरित होवें तथा येसु मरियम और योसफ के पवित्र परिवार से उदाहरण लेकर परिवार की पवित्रता के प्रति स्वतः को समर्पित रख सकें।”


(Juliet Genevive Christopher)

24 मई को सन्त पापा फ्राँसिस ने किया ट्वीट

In Church on May 24, 2018 at 1:52 pm

वाटिकन सिटी, गुरुवार, 24 मई 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने सम्पूर्ण विश्व के ख्रीस्तानुयायियों से चीन के काथलिकों के लिये प्रार्थना की अपील की है।

गुरुवार 24 मई को एक ट्वीट सन्देश प्रकाशित कर सन्त पापा फ्राँसिस ने लिखाः “आज धन्य कुंवारी मरियम शेशान के पर्व के दिन हम चीन के काथलिक भाई बहनों के साथ अपनी प्रार्थनाओं को संयुक्त करें।”

संघर्षों के दौरान नागरिकों की सुरक्षा का आह्वान

In Church on May 24, 2018 at 1:51 pm

वाटिकन सिटी, गुरुवार, 24 मई 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन ने सशस्त्र संघर्षों के दौरान पीड़ितों को आवश्यक सेवाएं प्रदान करनेवाले अस्पतालों, स्कूलों तथा चिकित्सा और लोकोपकारी कार्यकर्त्ताओं के खिलाफ हमलों एवं अत्याचारों की कड़ी निन्दा कर कहा कि “ऐसे अपराधों के लिए दंड न देने की प्रवृत्ति को समाप्त किया जाना चाहिये।”

न्यू यॉर्क में मंगलवार 22 मई को संयुक्त राष्ट्र संघ में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक तथा वाटिकन के वरिष्ठ महाधर्माध्यक्ष बेरनादीतो आऊज़ा ने सशस्त्र संघर्षों के दौरान नागरिकों की रक्षा पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र संघीय सुरक्षा समिति की बैठक में उक्त बात कही।

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव अन्तोनियो गूतेरेस की रिपोर्ट का हवाला देकर महाधर्माध्यक्ष आऊज़ा ने कहा कि विश्व के दो करोड़ से अधिक लोग युद्धग्रस्त स्थितियों में फँसें हैं तथा कम से कम 14 लाख से अधिक बच्चे अकाल एवं भुखमरी की मार सह रहे हैं।

उन्होंने सीरिया में जारी अत्याचारों की भर्त्सना की तथा नाइजीरिया के बोर्नो राज्य के गांवों, दक्षिण सूडान और यमन में व्याप्त अकाल एवं खाद्य असुरक्षा की ओर इशारा करते हुए कहा, “पीड़ा निवारण का वर्तमान स्तर वास्तव में भयावह है।”

उन्होंने कहा कि सन्त पापा फ्राँसिस के अनुसार, यह पूर्णतः अस्वीकार्य है कि कई बच्चों सहित इतने अधिक निरस्त्र एवं निर्बाध व्यक्तियों को संघर्ष की कीमत चुकानी पड़ती है।

महाधर्माध्यक्ष ने सचेत किया कि अस्पतालों, स्कूलों एवं लोकोपकारी कार्यकर्त्ताओं के विरुद्ध किसी भी प्रकार का आक्रमण समस्त पीढ़ियों से उनके जीने तथा चिकित्सा एवं शिक्षा पाने के अधिकार छीन लेता है। महाधर्माध्यक्ष आऊज़ा ने युद्ध की स्थिति में अथवा संघर्ष के दौरान हाल में चिकित्सा केन्द्रों पर सरकारी सुरक्षा बलों एवं विद्रोही दलों द्वारा किये गये हमलों की कड़ी निन्दा की।

इस बात पर बल देते हुए कि सशस्त्र युद्धों को समाप्त करना नागरिकों की रक्षा का सर्वेत्त्म उपाय है महाधर्माध्यक्ष आऊज़ा ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय का आह्वान किया कि वह संघर्षों के मूल कारणों को सम्बोधित करे।


(Juliet Genevive Christopher)

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